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मूसा : परमेश्वर का घनिष्ठ ज्ञान

जिस रात मुझे मसीह का पता चला, मैं उसे कभी नहीं भूलूंगा। मैंने सोचा, इससे बेहतर कोई और नहीं हो सकता। मैं उस परमेश्वर को जानने आया था जिसने ब्रह्मांड की रचना की थी । मेरे हृदय में पहली बार उसके प्रेम और सामर्थ का अनुभव लेने के लिए मेरा हृदय रोमांचित था। मुझे उससे लगाव हो गया था। जीवन ने एक नया अर्थ ले लिया। मैंने इसे नई आँखों के माध्यम से देखा। फिर भी यह सिर्फ एक शुरुआत थी जो एक अविश्वसनीय यात्रा बन जाएगी जो मुझे एक बेदारी में ले गई, जिसमें मैं एक नरसंहार के बाद, परमेश्वर के प्रेम, अनुग्रह और क्षमा के संदेश के साथ युद्धग्रस्त राष्ट्रों में ला सका । यह परमेश्वर के साथ घनिष्ठता की यात्रा की शुरुआत थी ।

परमेश्वर का एक पुरुष या स्त्री एक क्षण में ही जन्म लेता है, लेकिन उम्र भर परमेश्वर के साथ घनिष्ठता में बढ़ते हुए उसके लिए उपयोगी बनता जाता है । बहुत बार, मसीही लोगों का दृष्टिकोण होता है कि एक बार एक व्यक्ति का जन्म होता है-फिर वह वही बन गया जो उसने बनना था । सच तो यह है, कि यात्रा अभी शुरू हुई है। उद्धार समापन रेखा नहीं है; यह तो शुरुआत का स्थान है। हम परमेश्वर को उद्धार में जानने के लिए आते हैं | यदि हम वह पुरुष या स्त्री बनना चाहते हैं जो वह हमें बनाना चाहता है हमें पवित्रता में बढ़ना चाहिए |

मूसा ने मिद्ध्यान में एक पहाड़ पर परमेश्वर से मुलाकात की। परमेश्वर ने स्वंय को मूसा के सामने प्रकट किया, लेकिन यह परमेश्वर के साथ मूसा के रिश्ते की शुरुआत थी। उसे परमेश्वर को घनिष्ठता से जानने की आवश्यकता थी । मूसा ने उस बड़े दिन परमेश्वर का सामना करने के बाद, अपने नए रिश्ते के बारे में कुछ तार्किक सवाल करना शुरू कर दिया। तीन तरीके थे जिनमें मूसा ने परमेश्वर के साथ घनिष्ठ सम्बन्ध में वृद्धि करना शुरू किया।

सबसे पहले, वह परमेश्वर को सर्वव्यापी होने के रूप में जानता था। परमेश्वर ने मूसा से कहा, “मैं तेरे संग रहूंगा” (निर्गमन 3:12)। मूसा को यह जानने की ज़रूरत थी कि वह जहाँ भी जाएगा, वहाँ कोई नहीं होगा। जब वह फिरौन के सामने खड़ा था और जब वह लाल सागर के सामने खड़ा था, तो परमेश्वर उसके साथ था । वह जंगल में और शहर में उसके साथ रहा। वह उसके साथ पहाड़ पर था और जब वह घाटी में उतरा तो वह उसके साथ रहा।

जब रोमानियाई बेदारी आई, तो लोगों के हृदयों में एक अद्भुत रोष फैल गया। वे नास्तिकता के साथ अपने जीवन को पूर्ण रूप से ब्रेनवाश कर चुके थे। लेकिन एक दिव्य क्षण में, परमेश्वर ने आकर लोगों के सामने स्वंय को प्रकट किया, और देश के दूसरे सबसे बड़े शहर में 200,000 लोग चिल्लाने लगे, “डम्नेजू इस्टे कू नोई !” जिसका अर्थ है, “परमेश्वर हमारे साथ है।”

जब यीशु इस ग्रह पर आया, तो उसे दिए गए नामों में से एक नाम इम्मानुएल था, जिसका अर्थ है, “परमेश्वर हमारे साथ है।” जब परमेश्वर स्वंय को अपने लोगों पर प्रकट करता है, तो वह हमेशा चाहता है कि उन्हें पता चले कि वह उनके साथ रहेगा, कोई बात नहीं चाहे वे कहीं भी जाएं ।

लेकिन परमेश्‍वर ने स्वंय को मूसा के सामने अनंत रूप में भी प्रकट किया। परमेश्वर  हर समय हर स्थान पर है। मूसा ने परमेश्वर से एक तार्किक प्रश्न पूछा, “तुम्हारा नाम क्या है?” यदि वह इस्राएल के बच्चों के पास वापस जाने वाला था, तो उसे उस व्यक्ति का नाम पता होना चाहिए जो उसे भेज रहा है । परमेश्वर के जवाब ने उसके स्वभाव को बताया। उसने कहा, “मैं जो हूं वह हूँ” (निर्गमन 3:14)। उसने ये नहीं कहा, “मैं जो था वह था” या “मैं जो रहूंगा वह रहूंगा।” उस समय मूसा के साथ, परमेश्वर था, “मैं वह हूं जो मैं हूं।” आज भी वह “मैं” हूं है । कल भी वह “मैं ही है”।” वह बूढ़ा नहीं होता है। वह वही है “कल, आज, और हमेशा के लिए।”

अंत में, मूसा ने परमेश्वर को पूर्ण रूप से विश्वासयोग्य के रूप में जाना। परमेश्वर ने मूसा से कहा, “इसराएलियों से कहो, यहोवा, तुम्हारे बाप दादाओं के परमेश्वर – अब्राहम के परमेश्वर, इसहाक के परमेश्वर और याकूब के परमेश्वर – ने मुझे तुम्हारे पास भेजा है।’ यह मेरा नाम सदा के लिए है। वह नाम जिसके द्वारा मुझे पीढ़ी दर पीढ़ी याद किया जाता है ”(निर्गमन 3:15)। परमेश्वर ने अब्राहम, इसहाक और याकूब के साथ जो किया, वह मूसा के साथ करेगा। परमेश्वर उनके पूर्वजों के प्रति अपने वायदों में सच्चा और विश्वासयोग्य था, और वह मूसा के प्रति भी सच्चा होगा ।

मूसा परमेश्वर का जन बन गया, इसलिए नहीं कि वह एक महान व्यक्ति था, बल्कि इसलिए कि उसे एक महान परमेश्वर का पता चल गया था – वह परमेश्वर जो हर जगह, हर समय और पूरी तरह से विश्वासयोग्य है। मूसा का यही परमेश्वर यीशु, मसीह के हर सच्चे अनुयायी का परमेश्वर है। परमेश्वर के जन का निर्माण मनुष्य के साथ शुरू नहीं होता है, लेकिन उ परमेश्वर द्वारा होता है जो उसे रचता है। यह वही स्त्री यां पुरुष होता जिनके प्राण पर परमेश्वर की छाप होती है और वे उसके राज्य में उपयोगी होते हैं । उद्धारकर्ता के साथ घनिष्ठता द्वारा हमारे हृदय पर इस तरह के निशान को ब्रांड कर दिया जाता है।

निर्गमन 3:11-21

11 तब मूसा ने परमेश्वर से कहा, मै कौन हूं जो फिरौन के पास जाऊं, और इस्राएलियोंको मिस्र से निकाल ले आऊं ?12 उस ने कहा, निश्चय मैं तेरे संग रहूंगा; और इस बात का कि तेरा भेजनेवाला मैं हूं, तेरे लिथे यह चिन्ह होगा कि जब तू उन लोगोंको मिस्र से निकाल चुके तब तुम इसी पहाड़ पर परमेश्वर की उपासना करोगे।13 मूसा ने परमेश्वर से कहा, जब मैं इस्राएलियोंके पास जाकर उन से यह कहूं, कि तुम्हारे पितरोंके परमेश्वर ने मुझे तुम्हारे पास भेजा है, तब यदि वे मुझ से पूछें, कि उसका क्या नाम है? तब मैं उनको क्या बताऊं?14 परमेश्वर ने मूसा से कहा, मैं जो हूं सो हूं। फिर उस ने कहा, तू इस्राएलियोंसे यह कहना, कि जिसका नाम मैं हूं है उसी ने मुझे तुम्हारे पास भेजा है।15 फिर परमेश्वर ने मूसा से यह भी कहा, कि तू इस्राएलियोंसे यह कहना, कि तुम्हारे पितरोंका परमेश्वर, अर्यात्‌ इब्राहीम का परमेश्वर, इसहाक का परमेश्वर और याकूब का परमेश्वर, यहोवा उसी ने मुझ को तुम्हारे पास भेजा है। देख सदा तक मेरा नाम यही रहेगा, और पीढ़ी पीढ़ी में मेरा स्मरण इसी से हुआ करेगा।16 इसलिथे अब जाकर इस्राएली पुरनियोंको इकट्ठा कर, और उन से कह, कि तुम्हारे पितर इब्राहीम, इसहाक, और याकूब के परमेश्वर, यहोवा ने मुझे दर्शन देकर यह कहा है, कि मैं ने तुम पर और तुम से जो बर्ताव मिस्र में किया जाता है उस पर भी चित लगाया है;17 और मैं ने ठान लिया है कि तुम को मिस्र के दुखोंमें से निकालकर कनानी, हित्ती, एमोरी, परिज्जी हिब्बी, और यबूसी लोगोंके देश में ले चलूंगा, जो ऐसा देश है कि जिस में दूध और मधु की धारा बहती है।18 तब वे तेरी मानेंगे; और तू इस्राएली पुरनियोंको संग लेकर मिस्र के राजा के पास जाकर उस से योंकहना, कि इब्रियोंके परमेश्वर, यहोवा से हम लोगोंकी भेंट हुई है; इसलिथे अब हम को तीन दिन के मार्ग पर जंगल में जाने दे, कि अपके परमेश्वर यहोवा को बलिदान चढ़ाएं।19 मैं जानता हूं कि मिस्र का राजा तुम को जाने न देगा वरन बड़े बल से दबाए जाने पर भी जाने न देगा।20 इसलिथे मैं हाथ बढ़ाकर उन सब आश्चर्यकर्मोंसे जो मिस्र के बीच करूंगा उस देश को मारूंगा; और उसके पश्चात्‌ वह तुम को जाने देगा।21 तब मैं मिस्रियोंसे अपक्की इस प्रजा पर अनुग्रह करवाऊंगा; और जब तुम निकलोगे तब छूछे हाथ न निकलोगे।

Book of the Month

Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe.  For all other books…

सेमी टिपित सेवकाई के विषय में

एसटीएम लगभग 50 वर्षों से दुनिया भर में प्रेरणा और सहायता प्रदान कर रहा है। सैमी टिपित  इसके संस्थापक और अध्यक्ष है, वह एक विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता, शिक्षक और सुसमाचार के प्रचारक हैं जो 80 से अधिक देशों में लोगों की सेवा करने और उनकी सहायता करने का अनुभव रखते हैं। सैमी ऐसी सामग्री प्रदान करते  है जो लोगों को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुद्दों से निपटने में मदद करती है। वह विशेष रूप से दुनिया भर के अन्य देशों के लिए सामग्री सुलभ बनाने के बारे में भावुक है। सैमी ने डेबरा “टेक्स” टिपित  से शादी की है, और उनके दो बच्चे और पांच नाती पोते हैं। सैमी टिपित सेवकाई पंजीकृत 501c3 गैर-लाभकारी संगठन है।

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