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आत्मा में आराधना करना
यदि आप अभी मरना हो, तो क्या आपको विश्वास है कि आपने अपने जीवन के साथ वही किया जो आप करने के लिए बनाए गये थे ? जब मेरा जीवन समाप्त हो जाता है, तो मैं जानना चाहूँगा कि मैंने अपने जीवन के साथ वही किया जिसके लिए परमेश्वर ने मुझे रचा था । यह वास्तव में एक विजयी मसीही जीवन है। ऐसा करने की कुंजी जीवन में आपके उद्देश्य को समझने में निहित है। उद्देश्य हमारी महान उपलब्धियों या हमारे द्वारा कमाई गई संपत्ति या धन से प्रभावित नहीं होते । जब हम स्वर्ग जाएंगे, तो परमेश्वर हमसे हमारी आर्थिक सम्पदा के बारे में नहीं पूछेंगे । वह ये नहीं जानना चाहता है कि हमने कितना प्रभाव, शक्ति या संपत्ति कमाई है । जब हमारा जीवन किसी नतीजे पर पहुंचेगा, तो वे सभी चीजें निरर्थक होंगी।
तो जीवन का वास्तविक उद्देश्य क्या है? परमेश्वर ने हमें उसे जानने, प्रेम करने और उसकी आराधना करने के लिए बनाया है। मेरा मानना है कि हर पुरुष, महिला, लड़का और लड़की के हृदय में एक गहरी, जन्मजात इच्छा है कि वे अपने सृजनहार परमेश्वर की आराधना करें। यही कारण है कि बहुत सारे धर्म है, इसलिए जैसे ही पूर्व साम्यवादी देशों में स्वतंत्रता आई, धर्म तुरंत फलने-फूलने लगा। यद्यपि लोगों को उनके जीवन के बारे में सिखाया गया था कि कोई परमेश्वर नहीं है, लेकिन उनके भीतर कुछ गहरा सच और जीवित परमेश्वर की आराधना करने और उसे जानने के लिए तड़प थी । हम परमेश्वर की आराधना करने की लालसा के साथ रचे गए थे।
यह हमें दूसरे प्रश्न पर ले जाता है कि सच्ची आराधना क्या है? यदि इतने सारे धर्म और विश्वास हैं, तो कौन सा सही है? उन सभी का सही होना असंभव है; वे अक्सर एक-दूसरे का खंडन करते हैं। हिंदू बहुत से देवताओं की पूजा करते हैं, जबकि मुसलमान सिर्फ एक की आराधना करते हैं। यहूदी भी एक परमेश्वर को मानते हैं। फिर भी यहूदी और मुसलमान अक्सर एक दूसरे से लड़ते हैं। कौन सही है? सच्चे आराधक कहां अराधना करते हैं? लगभग 2,000 साल पहले यीशु से यही सवाल पूछा गया था।
एक सामरी स्त्री ने यीशु से सच्चे आराधना स्थल के बारे में पूछा। यीशु ने कुछ ऐसा कहा जिसके कारण इस ग्रह पर रहने वाले हर व्यक्ति को आत्मनिरिक्षण करना चाहिए। उसने कहा, “एक समय आयेगा और आ गया है जब सच्चे आराधक आत्मा और सच्चाई में पिता की आराधना करेंगे, क्योंकि वे वही आराधक है जिनकी पिता को तलाश है” (यूहन्ना 4:23)।
लेकिन आत्मा में अराधना करने का मतलब क्या है? सामरी स्त्री की कहानी से पहले के अध्याय में, यीशु ने इस्राएल में सबसे धर्मी पुरषों में से एक को कहा कि अगर उसे या किसी और को स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करना है, तो उसे आत्मा से जन्म लेना होगा । इससे पहले कि हम आत्मा में आराधना कर सकें, हमें परमेश्वर की आत्मा से पैदा होना होगा । धर्म मनुष्य की अभिव्यक्ति है जो बाहरी संस्कारों के साथ परमेश्वर को खुश करने का प्रयास करता है। लेकिन सच्ची अराधना वह गहन आराधना है, जो मसीह में विश्वास के कारण हृदय से उत्पन होती है और हमारे हमारा आत्मिक जन्म होता है ।
जब मसीह मेरे हृदय में आया, तो मैं सिर्फ धर्म के बाहरी रूप से नहीं गुज़रा। मैंने अपने हृदय की गहराई से उसकी आराधना की । मैं आत्मा में भक्ति करने लगा। मेरे जीवन में सबसे बड़ी खुशी मुझे यीशु मसीह की गहन और घनिष्ठ संगती के समय से मिली । विजयी जीवन उद्धारकर्ता की हृदय से आराधना करने से आता है ।
यदि आप विजय का अनुभव करना चाहते हैं, तो वही करना शुरू करें जो आप करने के लिए बनाए गए थे। एक समय और एक स्थान खोजें – और यीशु की आराधना करें। आप इस बात से चकित होंगे कि जब आप वही कार्य करना शुरू कर देंगे जिसके लिए आप बनाए गये थे तो जीवन के प्रति आपका दृष्टिकोण कितना बदल जाएगा।
यूहन्ना 4:7-24
7 इतने में एक सामरी स्त्री जल भरने को आई: यीशु ने उस से कहा, मुझे पानी पिला।8 क्योंकि उसके चेले तो नगर में भोजन मोल लेने को गए थे।9 उस सामरी स्त्री ने उस से कहा, तू यहूदी होकर मुझ सामरी स्त्री से पानी क्यों मांगता है? (क्योंकि यहूदी सामरियों के साथ किसी प्रकार का व्यवहार नहीं रखते)।10 यीशु ने उत्तर दिया, यदि तू परमेश्वर के वरदान को जानती, और यह भी जानती कि वह कौन है जो तुझ से कहता है; मुझे पानी पिला तो तू उस से मांगती, और वह तुझे जीवन का जल देता।11 स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, तेरे पास जल भरने को तो कुछ है भी नहीं, और कूआं गहिरा है: तो फिर वह जीवन का जल तेरे पास कहां से आया?2 क्या तू हमारे पिता याकूब से बड़ा है, जिस ने हमें यह कूआं दिया; और आप ही अपने सन्तान, और अपने ढोरों समेत उस में से पीया?13 यीशु ने उस को उत्तर दिया, कि जो कोई यह जल पीएगा वह फिर प्यासा होगा।14 परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा।15 स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, वह जल मुझे दे ताकि मैं प्यासी न होऊं और न जल भरने को इतनी दूर आऊं।16 यीशु ने उस से कहा, जा, अपने पति को यहां बुला ला।17 स्त्री ने उत्तर दिया, कि मैं बिना पति की हूं: यीशु ने उस से कहा, तू ठीक कहती है कि मैं बिना पति की हूं।18 क्योंकि तू पांच पति कर चुकी है, और जिस के पास तू अब है वह भी तेरा पति नहीं; यह तू ने सच कहा है।19 स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, मुझे ज्ञात होता है कि तू भविष्यद्वक्ता है।20 हमारे बाप दादों ने इसी पहाड़ पर भजन किया: और तुम कहते हो कि वह जगह जहां भजन करना चाहिए यरूशलेम में है।21 यीशु ने उस से कहा, हे नारी, मेरी बात की प्रतीति कर कि वह समय आता है कि तुम न तो इस पहाड़ पर पिता का भजन करोगे न यरूशलेम में।22 तुम जिसे नहीं जानते, उसका भजन करते हो; और हम जिसे जानते हैं उसका भजन करते हैं; क्योंकि उद्धार यहूदियों में से है।23 परन्तु वह समय आता है, वरन अब भी है जिस में सच्चे भक्त पिता का भजन आत्मा और सच्चाई से करेंगे, क्योंकि पिता अपने लिये ऐसे ही भजन करने वालों को ढूंढ़ता है।24 परमेश्वर आत्मा है, और अवश्य है कि उसके भजन करने वाले आत्मा और सच्चाई से भजन करें।
Book of the Month
Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe. For all other books…
सेमी टिपित सेवकाई के विषय में
एसटीएम लगभग 50 वर्षों से दुनिया भर में प्रेरणा और सहायता प्रदान कर रहा है। सैमी टिपित इसके संस्थापक और अध्यक्ष है, वह एक विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता, शिक्षक और सुसमाचार के प्रचारक हैं जो 80 से अधिक देशों में लोगों की सेवा करने और उनकी सहायता करने का अनुभव रखते हैं। सैमी ऐसी सामग्री प्रदान करते है जो लोगों को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुद्दों से निपटने में मदद करती है। वह विशेष रूप से दुनिया भर के अन्य देशों के लिए सामग्री सुलभ बनाने के बारे में भावुक है। सैमी ने डेबरा “टेक्स” टिपित से शादी की है, और उनके दो बच्चे और पांच नाती पोते हैं। सैमी टिपित सेवकाई पंजीकृत 501c3 गैर-लाभकारी संगठन है।
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