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एक विजयी के समान दोड़ना

दौड़ जिस में हमें दौड़ना है, धीरज से दौड़ें।

शिष्यता का दैनिक वीडियो

यहोवा शालोम

तब गिदोन ने वहां यहोवा की एक वेदी बनाकर उसका नाम यहोवा शालोम रखा। वह आज के दिन तक अबीएजेरियों के ओप्रा में बनी है। (न्यायियों 6:24)

मैं ब्राजील के दक्षिणी समुद्र तटों में से एक में से एक पर अत्यधिक आनन्दित था । मैं रियो डी जनेरियो के माराकाना में, दुनिया के सबसे बड़े स्टेडियम में सप्ताह के अंत में प्रचार करने वाला था। उसी समय उत्तरी और दक्षिण अमेरिका से 600 से अधिक पास्टर, सुसमाचार प्रचारक, और कलीसिया के कार्यकर्ता, पूरे शहर में 100 से अधिक कलीसियाओं में कार्य कर रहे थे। वे प्रचार कर रहे थे, गवाही दे रहे थे, गा रहे थे और यीशु के नाम की घोषणा कर रहे थे। यह अंतिम शनिवार की तैयारी में था जब गवर्नर, उप-गवर्नर, रियो डी जनेरियो के मेयर और हज़ारों  लोग सुसमाचार सुनने के लिए महान स्टेडियम में एकत्रित होंगे।

मेरी पत्नी, टेक्स और मैं उस अंतिम सभा  की तैयारी में परमेश्वर  के साथ अकेले समय बिताने के लिए उस  समुद्र तट पर आए थे। मेरा दिल उलझन में था। मुझे यह बहुत अपर्याप्त लगा। मैं सैन एंटोनियो, टेक्सास में सिर्फ एक साधारण प्रचारक था। मेरे पास एक बड़ा संगठन या बहुत सारा पैसा नहीं था । मैं एक प्रसिद्ध टीवी पर जाना जाने वाला व्यकित नहीं था। मेरे मन में सवाल आया । क्या होगा अगर कोई स्टेडियम में ना आया ?  क्या होगा अगर हजारों लोग आते हैं, लेकिन कोई भी सुसमाचार का जवाब नहीं देगा? अगर बारिश हो गई तो क्या होगा? जैसे-जैसे मैं अपर्याप्तता की भावनाओं से भरता गया, सवाल आगे बढ़ते गए।

उस शाम मैंने परमेश्वर की दुहाई दी, “मैं यह नहीं कर सकता। मैं सक्षम नहीं हूं, हे परमेश्वर मुझे आपकी आवश्यकता है। ”

उस शांत क्षण में, परमेश्वर ने स्वयं को यहोवा शालोम – परमेश्वर, हमारी शांति के रूप में प्रकट किया। मेरे पास कोई दर्शन या कुछ रहस्यमय अनुभव नहीं है। मेरे पास बस शांति थी – अद्भुत शांति। शांति ने मेरी आत्मा को भर दिया। मुझे पता था कि यहोवा मेरे साथ है। मुझे पता था कि विजय उसके हाथ में है। मुझे चिंता करने की जरूरत नहीं थी । यह बात महत्वपूर्ण नहीं थी कि यह कार्य मेरे लिए बहुत बड़ा था। एक ही बात बताई गई कि परमेश्वर मेरे साथ था।

जब मैं शनिवार को माराकाना में खड़ा हुआ, मैंने एक शांत आत्मविश्वास के साथ प्रचार किया कि परमेश्वर की इच्छा पूरी हो जाएगी। हजारों लोगों ने सुना, और हजारों लोगों ने संदेश का प्रतिउत्तर दिया। यह देखना अद्भुत था कि हजारों लोग यीशु के आगे प्रार्थना कर रहे थे और अपने जीवन उसे समर्पित कर रहे थे । उनकी आवाजें पूरे स्टेडियम में गड़गड़ाहट के साथ गूंज उठीं। वे परमेश्वर से मिले, और इसलिए मैंने उससे, परमेश्वर, उद्धारकर्ता और विजेता के रूप में मुलाकात की। मैं उनसे यहोवा शालोम के रूप में मिला।

जब हम अपनी मुश्किल में होते हैं,यां उस कार्य को करते हैं जो हमारे लिए करना बहुत कठिन है तो परमेश्वर स्वंय को यहोवा शालोम के रूप में प्रकट करते हैं । पहली बार परमेश्वर ने स्वयं को यहोवा शालोम के रूप में गिदोन पर तब प्रकट किया जब प्रभु का दूत गिदोन के पास आया था (न्यायियों 6:24)। गिदोन के पास शांति न होने के कई कारण थे। सबसे पहले, इस्राएल पराजित हो गया था। दूसरा, गिदोन एक छोटे परिवार से था, और वह सबसे छोटा था। फिर भी परमेश्वर अपने लोगों के बीच शक्तिशाली काम करना चाहता था। वह उन्हें विजय में लाना चाहता था, और गिदोन उसका चुना हुआ साधन था। गिदोन पूरी तरह से असमर्थ महसूस कर रहा था।

उस क्षण में, परमेश्वर ने गिदोन के हृदय में शांति बोल दी । “लेकिन यहोवा ने उससे कहा, शांति ! डरो मत । तु मरने वाला नहीं है। ”(न्यायियों 6:23 ) अगले वचन में कहा गया है कि गिदोन ने एक वेदी बनाई और इसे “यहोवा शांति है।” का नाम दिया; बाकी बातें इतिहास है। इसके बाद के दिनों में, परमेश्वर ने गिदोन का जमकर इस्तेमाल किया। गिदोन की तरह, आप एक असंभव पहाड़ के कारण असहाय महसूस कर सकते हैं, जिस पर चढ़ने के लिए आपको बुलाया गया था। आपको अस्वीकार कर दिया जा सकता है क्योंकि आपको एक असहनीय स्थिति में रखा गया है। आप छोटा और कमजोर महसूस कर सकते हैं। आप सोच सकते हैं, मैं ऐसा नहीं कर सकता। आपका मन अशांत हो सकता है।

मुझे आप अनुमति दें ताकि मैं आपको उत्शाहित कर सकूं जिससे आप शांत खड़े होकर जान लें कि वही परमेश्वर है । वह यहोवा शालोम है: परमेश्वर, हमारी शांति। अपने हृदय में एक शांत वेदी बनाएँ और यहोवा शालोम का स्वागत करें। जब आप परमेश्वर  को अपनी शांति के रूप में जानते हैं, तो विजय का अनुसरण होगा। आप उस पहाड़ पर चढ़ेंगे और उन कठिनाइयों को पार करेंगे। यीशु ने कहा, “शांति। शांत रहो। ”वह आज भी यही कहता है।

न्यायियों 6:11-24

11 फिर यहोवा का दूत आकर उस बांजवृझ के तले बैठ गया, जो ओप्रा में अबीएजेरी योआश का था, और उसका पुत्र गिदोन एक दाखरस के कुण्ड में गेहूं इसलिये झाड़ रहा था कि उसे मिद्यानियों से छिपा रखे।12 उसको यहोवा के दूत ने दर्शन देकर कहा, हे शूरवीर सूरमा, यहोवा तेरे संग है।13 गिदोन ने उस से कहा, हे मेरे प्रभु, बिनती सुन, यदि यहोवा हमारे संग होता, तो हम पर यह सब विपत्ति क्यों पड़ती? और जितने आश्चर्यकर्मों का वर्णन हमारे पुरखा यह कहकर करते थे, कि क्या यहोवा हम को मिस्र से छुड़ा नहीं लाया, वे कहां रहे? अब तो यहोवा ने हम को त्याग दिया, और मिद्यानियों के हाथ कर दिया है।14 तब यहोवा ने उस पर दृष्टि करके कहा, अपनी इसी शक्ति पर जा और तू इस्राएलियों को मिद्यानियों के हाथ से छुड़ाएगा; क्या मैं ने तुझे नहीं भेजा?15 उसने कहा, हे मेरे प्रभु, बिनती सुन, मैं इस्राएल को क्योंकर छुड़ाऊ? देख, मेरा कुल मनश्शे में सब से कंगाल है, फिर मैं अपने पिता के घराने में सब से छोटा हूं।16 यहोवा ने उस से कहा, निश्चय मैं तेरे संग रहूंगा; सो तू मिद्यानियों को ऐसा मार लेगा जैसा एक मनुष्य को।17 गिदोन ने उस से कहा, यदि तेरा अनुग्रह मुझ पर हो, तो मुझे इसका कोई चिन्ह दिखा कि तू ही मुझ से बातें कर रहा है।18 जब तक मैं तेरे पास फिर आकर अपनी भेंट निकाल कर तेरे साम्हने न रखूं, तब तक तू यहां से न जा। उसने कहा, मैं तेरे लौटने तक ठहरा रहूंगा।19 तब गिदोन ने जा कर बकरी का एक बच्चा और एक एपा मैदे की अखमीरी रोटियां तैयार कीं; तब मांस को टोकरी में, और जूस को तसले में रखकर बांजवृझ के तले उसके पास ले जा कर दिया।20 परमेश्वर के दूत ने उस से कहा, मांस और अखमीरी रोटियों को ले कर इस चट्टान पर रख दे, और जूस को उण्डेल दे। उसने ऐसा ही किया।21 तब यहोवा के दूत ने अपने हाथ की लाठी को बढ़ाकर मांस और अखमीरी रोटियों को छूआ; और चट्टान से आग निकली जिस से मांस और अखमीरी रोटियां भस्म हो गई; तब यहोवा का दूत उसकी दृष्टि से अन्तरध्यान हो गया।22 जब गिदोन ने जान लिया कि वह यहोवा का दूत था, तब गिदोन कहने लगा, हाय, प्रभु यहोवा! मैं ने तो यहोवा के दूत को साक्षात देखा है।23 यहोवा ने उस से कहा, तुझे शान्ति मिले; मत डर, तू न मरेगा।24 तब गिदोन ने वहां यहोवा की एक वेदी बनाकर उसका नाम यहोवा शालोम रखा। वह आज के दिन तक अबीएजेरियों के ओप्रा में बनी है।।

Book of the Month

Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe.  For all other books…

सेमी टिपित सेवकाई के विषय में

एसटीएम लगभग 50 वर्षों से दुनिया भर में प्रेरणा और सहायता प्रदान कर रहा है। सैमी टिपित  इसके संस्थापक और अध्यक्ष है, वह एक विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता, शिक्षक और सुसमाचार के प्रचारक हैं जो 80 से अधिक देशों में लोगों की सेवा करने और उनकी सहायता करने का अनुभव रखते हैं। सैमी ऐसी सामग्री प्रदान करते  है जो लोगों को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुद्दों से निपटने में मदद करती है। वह विशेष रूप से दुनिया भर के अन्य देशों के लिए सामग्री सुलभ बनाने के बारे में भावुक है। सैमी ने डेबरा “टेक्स” टिपित  से शादी की है, और उनके दो बच्चे और पांच नाती पोते हैं। सैमी टिपित सेवकाई पंजीकृत 501c3 गैर-लाभकारी संगठन है।

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