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बेदारी तथा विजयी प्रार्थना
एक महान ब्रिटिश पासबान चाल्स हादोन स्पर्जन ने 140 वर्ष पूर्व इस प्रकार लिखा, “हमारे प्रभु की तरोताज़ा कर देने वाली उपिस्थिति के समय की भोर अन्ततः हमारे देश में हो गई है। हर जगह उत्साहित प्रतिक्रिया और ईमादारी के चिह्न दिखाई दे रहे हैं ।प्रार्थना का आत्मा हमारी कलीसिया में है…उस तेज़ हवा के झोंके का एहसास हो चुका है और सुसमाचार प्रचारकों के उदय पर आग की सी जीभें स्पष्तः उतर चुकी हैं ।”
“प्रार्थना का आत्मा” जिसके विषय में स्पर्जन ने कहा वह सर्वदा से मसीही कलीसिया की जागृति की जड़ रहे हैं। इससे कोई आशय नहीं चाहे आप नए नियम में झांकें या इतिहास में, बेदारी सदैव प्रार्थना के बाद ही आई है। प्रेरितों के काम के पहले अध्याय में ही कलीसिया का जन्म एक प्रार्थना सभा में हुआ था और उसके अगले अध्याय में ही 3000 लोगों का जीवन परिवर्तन हो गया था। प्रेरितों के काम की पुस्तक के आरम्भ से अन्त तक, कलीसिया ने प्रार्थना की और परमेश्वर ने कार्य किया। पहली मिशन गतिविधियों का जन्म भी प्रार्थनाओं से ही हुआ था। समय-समय पर कलीसिया ने असाधारण पग बढ़ाए क्योंकि किसी व्यक्ति या लोगों के समूह ने इसके लिए प्रार्थना की।
विजयी प्रार्थना ही बेदारी के लिए नींव रखती है। पिछले कुछ वर्षों से मैं सुसमाचार बेदारीयों का नज़दीकी से अध्ययन करता आया हूँ और मैंने यह पाया है कि उन सभी का जन्म से प्रार्थना ही हुआ। किसी को किसी कार्य का बोझ होता है तो वह प्रार्थना करना प्रारम्भ कर देता है। वे प्रभु की प्रतीक्षा करते हैं और प्रभु अपने समय पर उनकी प्रार्थनाओं का उत्तर देता है। वे प्रभु से मिलते हैं और परमेश्वर स्वयं को उनके समक्ष प्रकट करता हैं। पहली बार मैंने जिस बेदारी को अनुभव किया वह यह थी कि एक प्रार्थना का आत्मा एक सुसमाचार सभा में व्याप्त हो गया। इसका आरम्भ एक प्रार्थना कर रहे पासबान से हुआ। उन्होंने इसे बन्द नहीं किया। वह निराशाजनक परिस्थितियों में भी निरन्तर प्रार्थना करता रहा। एक दिन परमेश्वर ने उनकी प्रार्थना सुनकर अपने लोगों से भेंट की। जब परमेश्वर आता है तो हर कार्य में हस्तक्षेप होता है जिस सुसमाचार सभा को रविवार को समाप्त होना था उसे एक सप्ताह के लिए और आगे बढ़ाना पड़ा। वहां इतने लोग हो गए कि वह स्थान उन लोगों के लिए छोटा पड़ गया। समाचार मीडिया ने इसकी सूचना इस प्रकार दी, “असाधारण कार्य जो परमेश्वर कर रहा है।” नशे की लत में पड़े लोग बचाए गए और उन्हें इस लत से छुटकारा प्राप्त हुआ। जातिवाद में बने शत्रु भाई बन गए। जब परमेश्वर के लोगों ने प्रार्थना की तब वह उतर आया।
मैं आपको इसका विश्वास दिलवाने का प्रयत्न भी नहीं करूँगा कि मैं इसके प्रत्येक कारण को समझता हूँ कि ऐसा क्यों है। मैं मात्र इतना जानता हूँ कि यह जीवन का एक आत्मिक नियम है। यह सत्य है। परमेश्वर की महिमा के प्रकटीकरण में प्रार्थना और बेदारी सदैव ही सहयोगी हैं। जब परमेश्वर आता है तो उसकी महिमा भी आती है। जब यह होता है तो कलीसिया की आत्मिक तथा संख्यात्मक बढ़ौतरी होती है। बेदारी के बाद ही अनेक आत्माओं की असाधारण कटनी होती है। और प्रार्थनाओं के बाद ही कलीसिया में असाधारण बेदारी आती है। प्रार्थना साधारणत: परमेश्वर से एक घनिष्ठ सम्बन्ध है। जब हम परमेश्वर के साथ घनिष्ठ हो जाते हैं तब हम बेदारी के पथ पर अग्रसर होते हैं। कोई परमेश्वर से घनिष्ठ सम्बन्ध रखे बिना धार्मिकता का मुखौटा नहीं पहन सकता। वास्तविक प्रार्थना से ही वास्तविक पश्चाताप आता है। वास्तविक पश्चाताप ही परमेश्वर के आत्मा को हमारे जीवन में लाता है। जब ऐसा होता है तब ही हम बेदारी के पथ पर अग्रसर हैं।
बेदारी के विषय में अनेक धारणाएँ विद्यमान हैं, किन्तु मैं इतना जानता हूँ कि यह प्रार्थनाओं के पंखों पर ही उतरती है। प्रार्थनाओं के लोग ही अन्त में बेदारी के लोग होंगे। प्रार्थना करें, प्रतीक्षा करें और देखें कि परमेश्वर क्या करेगा।
नहेमायाह 1:1-11
1हकल्याह के पुत्र नहेमायाह के वचन। बीसवें वर्ष के किसलवे नाम महीने में, जब मैं शूशन नाम राजगढ़ में रहता था, 2तब हनानी नाम मेरा एक भाई और यहूदा से आए हुए कई एक पुरुष आए; तब मैं ने उन से उन बचे हुए यहूदियों के विषय जो बन्धुआई से छूट गए थे, और यरूशलेम के विष्य में पूछा। 3उन्होंने मुझ से कहा, जो बचे हुए लोग बन्धुआई से छूटकर उस प्रान्त में रहते हैं, वे बड़ी दुर्दशा में पड़े हैं, और उनकी निन्दा होती है; क्योंकि यरूशलेम की शहरपनाह टूटी हुई, और उसके फाटक जले हुए हैं। 4ये बातें सुनते ही मैं बैठकर रोने लगा और कितने दिन तक विलाप करता; और स्वर्ग के परमेश्वर के सम्मुख उपवास करता और यह कह कर प्रार्थना करता रहा। 5हे स्वर्ग के परमेश्वर यहोवा, हे महान और भययोग्य ईश्वर! तू जो अपने प्रेम रखने वाले और आज्ञा मानने वाले के विष्य अपनी वाचा पालता और उन पर करुणा करता है; 6तू कान लगाए और आंखें खोले रह, कि जो प्रार्थना मैं तेरा दास इस समय तेरे दास इस्राएलियों के लिये दिन रात करता रहता हूँ, उसे तू सुन ले। मैं इस्राएलियों के पापों को जो हम लोगों ने तेरे विरुद्ध किए हैं, मान लेता हूँ। मैं और मेरे पिता के घराने दोनों ने पाप किया है। 7हम ने तेरे साम्हने बहुत बुराई की है, और जो आज्ञाएं, विधियां और नियम तू ने अपने दास मूसा को दिए थे, उन को हम ने नहीं माना। 8उस वचन की सुधि ले, जो तू ने अपने दास मूसा से कहा था, कि यदि तुम लोग विश्वासघात करो, तो मैं तुम को देश देश के लोगों में तितर बितर करूंगा। 9परन्तु यदि तुम मेरी ओर फिरो, और मेरी आज्ञाएं मानो, और उन पर चलो, तो चाहे तुम में से निकाले हुए लोग आकाश की छोर में भी हों, तौभी मैं उन को वहां से इकट्ठा कर के उस स्थान में पहुंचाऊंगा, जिसे मैं ने अपने नाम के निवास के लिये चुन लिया है। 10अब वे तेरे दास और तेरी प्रजा के लोग हैं जिन को तू ने अपनी बड़ी सामर्थ और बलवन्त हाथ के द्वारा छुड़ा लिया है। 11हे प्रभु बिनती यह है, कि तू अपने दास की प्रार्थना पर, और अपने उन दासों की प्रार्थना पर, जो तेरे नाम का भय मानना चाहते हैं, कान लगा, और आज अपने दास का काम सफल कर, और उस पुरुष को उस पर दयालु कर। (मैं तो राजा का पियाऊ था।)
Book of the Month
Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe. For all other books…
सेमी टिपित सेवकाई के विषय में
एसटीएम लगभग 50 वर्षों से दुनिया भर में प्रेरणा और सहायता प्रदान कर रहा है। सैमी टिपित इसके संस्थापक और अध्यक्ष है, वह एक विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता, शिक्षक और सुसमाचार के प्रचारक हैं जो 80 से अधिक देशों में लोगों की सेवा करने और उनकी सहायता करने का अनुभव रखते हैं। सैमी ऐसी सामग्री प्रदान करते है जो लोगों को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुद्दों से निपटने में मदद करती है। वह विशेष रूप से दुनिया भर के अन्य देशों के लिए सामग्री सुलभ बनाने के बारे में भावुक है। सैमी ने डेबरा “टेक्स” टिपित से शादी की है, और उनके दो बच्चे और पांच नाती पोते हैं। सैमी टिपित सेवकाई पंजीकृत 501c3 गैर-लाभकारी संगठन है।
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