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प्रार्थना जो राष्ट्रों पर प्रभाव डालती है
दुनिया ने अभी तक देखा ही नहीं है कि प्रार्थना योद्धा पुरूष और स्त्रियों के द्वारा परमेश्वर क्या-क्या कर सकता है और क्या-क्या करेगा। मुझे पूरा विश्वास है कि हमारे संसार में जो महान परिवर्तन आए हैं वे उन प्रार्थना योद्धाओं की प्रार्थनाओं से ही आए हैं। प्रार्थना, प्रार्थना करने वालों और जिन के लिए प्रार्थना की जाती है, दोनों को बदलती है। इसमें हमारी सभी विषम परिस्थितियों को बदलने की शक्ति है और यह मानवीय इतिहास को भी बदलने की शक्ति रखती है। यह उन सब परमाणू हथियारों से भी अधिक शक्तिशाली है जो मानवीय सरकारों के पास हैं और यह दुनिया की सारी सेनाओं से भी अधिक ताकतवर है।
प्रार्थना स्वर्ग में सबसे ऊँचे स्थान तक और पृथ्वी पर सबसे छोटे पापी तक पहुँच सकती है। यह परमेश्वर के हृदय को छूती है और मनुष्य की आत्माओं को बदलती है। यह परमेश्वर के सिहाँसन तक पहुँचती है राजाओं के महलों में प्रवेश कर सकती है। प्रार्थना परमेश्वर की ओर से उसके बच्चों के लिए और उसके लोगों की ओर से खोए हुए और मर रहे संसार के लिए एक उपहार है। संसार को बदलने का प्रार्थना से अच्छा कोई और तरीका नहीं है। यह परमेश्वर का वह गुप्त शस्त्र है जो उसने अपने लोगों के हृदयों में छिपा रखा है। बाइबल में, प्रार्थना के माध्यम से हुए कई अद्भुत कार्यों का वर्णन है। प्रार्थना युद्धों को रोकती है, वर्षा ले आती है, सूखा पैदा कर सकती है, बिमारों को चंगा करती है, जागृति ले आती है, कलीसिया में सुसमाचार प्रचार की प्यास उत्पन्न करती है, राष्ट्रों पर प्रभाव डालती है और मुर्दों को जीवित करती है। प्रार्थना उन लोगों के शक्ति का एक महान स्रोत है जो उद्धारकर्ता को जानते और उससे प्रेम करते हैं।
रोमानिया में साम्यवाद के काले दिनों में वहाँ के प्रार्थना करने वाले दीन पुरूष और स्त्रियों की प्रार्थनाओं से मेरा जीवन बदल गया और सेवा का सिद्धाँत जड़ तक हिल गया। मसीह के पीछे चलने वाले उन प्रिय लोगों में से बहुत कम के पास ही बाइबल थी। वहाँ कोई मसीही पुस्तकों की दुकानें, मसीही रेडियो कार्यक्रम, कोई मसीही टैलीविज़न कार्यक्रम या इंटरनैट के माध्यम से वचन का प्रतिदिन मनन नहीं थीं। सरकार अक्सर बाइबलों को ज़ब्त कर लेती थी और मसीही अगुवों को जेल में डाल दिया जाता था। विश्वासियों को अपने रोज़गारों से हाथ धोना पड़ता था। उस देश में आत्मिक अन्धकार छाया हुआ था। यह बुरे से भी बुरा समय था।
परन्तु, एक चीज़ थी जो सरकार लोगों से नहीं छीन सकती थी और वह थी प्रार्थना की शक्ति। मैंने स्वयं रोमानिया में परमेश्वर के लोगों को प्रार्थना के द्वारा अन्धकार में डूबे एक राष्ट्र को ज्योति में लाते देखा। यह बीसवीं सदी के महान चमत्कारों में से एक था। मैं ऐसे विश्वासियों के विषय में जानता हूँ जिन्होंने उस राष्ट्र के परिवर्तन के लिए परमेश्वर के सामने बीस से भी अधिक वर्षों तक प्रार्थना की। ऐसा लगता था कि उस राष्ट्र का बदलना असम्भव था। यह बिलकुल असम्भव था परन्तु वहाँ के विश्वासियों के पास एक महान आशा थी और वह आशा यह थी कि उनका परमेश्वर ऐसा परमेश्वर था जो असम्भव को सम्भव करने में माहिर था। वह प्रार्थना करते रहे और हार नहीं मानी।
एक रोमानी पासबान ने अपनी कलीसिया को एक अनोखे तरीके से प्रार्थना करना सिखाया। उसने कहा, “परमेश्वर से कहें कि वह देश के बड़े स्टेडियमों में प्रचार के लिए द्वार खोले। प्रार्थना करो कि एक दिन हम रेडियो और टैलीविज़न पर प्रचार कर सकें और समाचार पत्रों में उसके नाम की घोषणा करें।”
बहुत लोग उस भक्त पासबान की शिक्षा से अवाक रह गए। उन्होंने कहा, “पासबान, आप जानते हैं कि हम ऐसा नहीं कर सकते। हमारे साथ तो पृथ्वी की धूल जैसा व्यव्हार किया जाता है और हमारे अपने ही देश में हमारे पास कोई अधिकार नहीं हैं। जैसा आप बोल रहें हैं ऐसा होना असम्भव है।”
परन्तु वह प्रिय सन्त जन उन्हें यह स्मरण दिलाता था, “मनुष्यों से तो यह असम्भव है परन्तु परमेश्वर से सब कुछ सम्भव है।”
कलीसिया प्रार्थना करती रही, करती रही और निरन्तर प्रार्थना करती रही और परमेश्वर ने सभी की कलपना से भी बढ़कर कार्य किया। उस देश के दुष्ट तानाशाह निकोल सिआओसेस्को का तख़्ता पलट दिया गया और दिसम्बर 1989 के दौरान देश में एक क्राँति फूट पड़ी। देश के हर बड़े शहर की मुख्य सड़कों पर हज़ारों लोग इक्कट्ठे होकर यह नारे लगा रहे थे, “एक्सिस्टे डुम्नेज़ेऊ! एक्सिस्टे डुम्नेज़ेऊ!”, जिसका अर्थ था, “परमेश्वर है! परमेश्वर है!” क्राँति का मुख्य गीत मसीह के दूसरे आगमन से सम्बन्धित था। देश के इतिहास में यह एक अद्भुत क्षण था। यह वह क्षण था जिसमें परमेश्वर के लोगों की दशकों की प्रार्थनाओं ने परमेश्वर के सिहाँसन कक्ष को भर दिया था। स्वर्ग की खिड़कियाँ खुल गईं थीं और परमेश्वर ने अपने लोगों पर अपनी आशीष को उण्डेल दिया था और रोमानिया में स्वतन्त्रता का बिगुल बज उठा था।
आज राष्ट्र अशान्ति, युद्ध और सूखे से जूझ रहे हैं। हमें ऐसे पुरूष और स्त्रियों की अत्यन्त आवश्यकता है जो तब तक प्रार्थना करते रहें जब तक परमेश्वर का प्रताप राष्ट्रों पर न उतर आए। बाइबल कहती है, “जब सुलेमान प्रार्थना कर हटा तो आकाश से आग उतरी और होमबलि और बलियों को जला दिया और यहोवा के तेज ने मन्दिर को भर दिया” (2 इतिहास 7:1)। सुलेमान ने केवल प्रार्थना को आरम्भ नहीं किया परन्तु प्रार्थना को पूरा भी किया और फिर परमेश्वर का तेज उतर आया। आज प्रार्थना के ऐसे पुरुष और स्त्रियाँ कहाँ हैं जो तब तक परमेश्वर की खोज करें “जब तक राष्ट्रों पर परमेश्वर का प्रताप उतर न आए?” प्रार्थना राष्ट्रों को बदल देती है। यदि आप उद्धारकर्ता को जानते हैं तो आप प्रार्थना के आदर में सम्मिलित हो सकते हैं। आप राष्ट्रों पर प्रभाव डाल सकते हैं।
2 इतिहास 7:1-3
1जब सुलैमान यह प्रार्थना कर चुका, तब स्वर्ग से आग ने गिर कर होमबलियों तथा और बलियों को भस्म किया, और यहोवा का तेज भवन में भर गया। 2और याजक यहोवा के भवन में प्रवेश न कर सके, क्योंकि यहोवा का तेज यहोवा के भवन में भर गया था। 3और जब आग गिरी और यहोवा का तेज भवन पर छा गया, तब सब इस्राएली देखते रहे, और फर्श पर झुक कर अपना अपना मुंह भूमि की ओर किए हुए दण्डवत किया, और यों कह कर यहोवा का धन्यवाद किया कि, वह भला है, उसकी करुणा सदा की है।
Book of the Month
Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe. For all other books…
सेमी टिपित सेवकाई के विषय में
एसटीएम लगभग 50 वर्षों से दुनिया भर में प्रेरणा और सहायता प्रदान कर रहा है। सैमी टिपित इसके संस्थापक और अध्यक्ष है, वह एक विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता, शिक्षक और सुसमाचार के प्रचारक हैं जो 80 से अधिक देशों में लोगों की सेवा करने और उनकी सहायता करने का अनुभव रखते हैं। सैमी ऐसी सामग्री प्रदान करते है जो लोगों को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुद्दों से निपटने में मदद करती है। वह विशेष रूप से दुनिया भर के अन्य देशों के लिए सामग्री सुलभ बनाने के बारे में भावुक है। सैमी ने डेबरा “टेक्स” टिपित से शादी की है, और उनके दो बच्चे और पांच नाती पोते हैं। सैमी टिपित सेवकाई पंजीकृत 501c3 गैर-लाभकारी संगठन है।
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