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एक विजयी के समान दोड़ना

दौड़ जिस में हमें दौड़ना है, धीरज से दौड़ें।

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विश्वासी में पाप – प्रार्थना में एक बाधा 

जब मसीह मेरे जीवन में आया, तो उसने मुझे स्वयं को नज़दीकी से जानने का उत्साह दिया। मैं अपने मित्रों से प्रातःकाल परमेश्वर के वचन के अध्ययन और उसकी खोज के लिए मिलता था। वे दिन मेरे जीवन में असीमित आनन्द के दिन थे। आज भी उन प्रार्थना सभाओं की सुगन्ध मेरे हृदय में है। हालाँकि उस समय को 35 वर्ष हो चुके हैं ।

मसीह को जानने के कई महिनों के पश्चात मैंने एक मसीही स्कूल में पढने के लिए लूइसीआना के विश्वविद्यालय को छोड़ दिया। मैं परमेश्वर के वचन को जानने और उनके लिए स्वयं को उपयोग होने देने के लिये बहुत इच्छा रखता था। इस स्कूल में परीक्षाओं में नकल करने के विषय में एक नियम था। यदि कोई परीक्षा में नकल करता हुआ पकड़ा गया तो हो सकता है कि उसे स्कूल से निकाल दिया जाए। मसीह को जानने से पहले मैं प्रायः परीक्षाओं में नकल करता था किन्तु जब से मैंने मसीह में नया जीवन पाया है तब से मेरी यह समस्या समाप्त हो गई है।

उस स्कूल में अध्ययन करते हुए मैंने अनेक असाधारण बातों का अनुभव किया। मैंने प्रायः प्रार्थना सभाओं के विशेष अवसरों पर परमेश्वर की उपस्थिति को अनुभव किया है किन्तु एक दिन बायोलोजी की परीक्षा के दिन मैंने बहुत मेहनत की। जब मैं परीक्षा में बैठा तो उसमें एक प्रश्न था जिसका उत्तर मैं याद नहीं कर पा रहा था। मुझे उस प्रश्न का उत्तर पता तो था किन्तु वह मुझे याद नहीं आ रहा था। मेरे एक मित्र ने मेरी इस उलझन को समझ लिया। उसने धीरे से अपनी उत्तर पुस्तिका मेरी ओर कर दी जिससे मैं उसके उत्तर को देख लूँ और उसे देखने के बाद मैं ने उसे जल्दी से लिख लिया। मैंने जो किया उसे मैंने यह कहकर प्रमाणित भी कर दिया कि मैंने बहुत अच्छी तैयारी भी की थी और वास्तव में मुझे उत्तर मालूम भी थे। मैंने सोचा यह कोई बड़ी बात नहीं है।

किन्तु जब मैं अपने प्रार्थना के समय में लौटा तो मैंने परमेश्वर की अनुपस्थिति को अनुभव किया। मेरे प्रार्थना के जीवन का आनन्द और घनिष्ठता कहीं खो चुकी थी। जो मैंने किया था उसे परमेश्वर को बताने में बहुत कठिनाई हो रही थी। मुझे ऐसा प्रतीत हुआ कि परमेश्वर मुझसे यह कह रहे हैं, “यदि तुमने मेरे साथ घनिष्ठता रखनी है तो तुम्हें अपने अध्यापक के सामने यह स्वीकार करना होगा की तुमने परीक्षा में नकल की है।”

मैंने परमेश्वर से यह तर्क-वितर्क किया,“आप समझ नहीं रहे हैं कि यह एक मसीही स्कूल है, यदि मैं यह स्वीकार करता हूँ तो मुझे स्कूल से निकाल दिया जाएगा।” मुझे स्वर्ग, शान्ति और परमेश्वर की उपस्थिति कहीं बहुत दूर प्रतीत हुई। मैं और नहीं रुक पाया मुझे अपने नाम से ज्यादा परमेश्वर की आवश्यकता थी। मैं उसे और जानने के लिए इस स्कूल में अध्ययन करना चाहता था। मैं किसी और वस्तु से ज्यादा अपने पिता से घनिष्ठता रखना चाहता था। मैंने यह निर्णय किया कि जो कुछ मैंने किया है मैं जाकर वह सब अपने अध्यापक के समक्ष स्वीकार कर लूँगा।

उस अध्यापक को सब कुछ बताने के पश्चात, कि हुआ क्या है उसने कहा, “मुझे सब कुछ पता है, मैं ने तुम्हें देख लिया था। किन्तु मैं तुम्हें एक और अवसर दूँगा।” मैं अपने कमरे में आनन्दपूर्वक चला गया। मैं उस उद्धारकर्ता की क्षमा और पवित्रीकरण को समझ गया। जब मैं अपने प्रार्थना के एकान्त स्थान में गया, मैंने पुनः परमेश्वर की असाधारण उपस्थिति को अनुभव किया।

जब मैं उस अनुभव को देखता हूँ, तो मुझे इस बात का अहसास होता है कि मैंने परमेश्वर की घनिष्ठता का मेरी परीक्षा के अच्छे अंकों से सौदा किया। मुझे इस बात का भय है कि यह वही है जो विश्वासियों के हृदयों में होता है एक समय तो उनके परमेश्वर के साथ अच्छे सम्बन्ध थे किन्तु उन्होंने उसे खो दिया। उन्होंने अपने किसी पाप के कुछ समय के आनन्द के साथ अपने परमेश्वर और उद्धारकर्ता का सौदा किया है। परमेश्वर पवित्र है। भजन संहिता 24 में इस प्रकार लिखा है कि यदि हम उनकी उपस्थिति में जाते हैं तो हमें अपने हृदय और हाथ साफ रखने हैं । आप पवित्र परमेश्वर के सामने अपवित्र हाथों से नहीं आ सकते। जब मूसा की भेंट परमेश्वर से हुई तो उसने मूसा को अपने जूते उतारने के लिए कहा। उस पवित्र स्थान में खड़े होने के लिए आपको अपने जीवन से क्या निकालना है? यह कुछ भी हो सकता है। इसे रखना ठीक नहीं है। जो अत्याधिक आनन्द आप किसी और में प्राप्त नहीं करेंगे वह परमेश्वर की घनिष्ठता में है। किन्तु उसकी मांग यह है कि आपको अपने जीवन से वह निकाल देना है जो आपके और उस पवित्र स्थान के मध्य बाधा है।

भजन  24 :1-6

1पृथ्वी और जो कुछ उस में है यहोवा ही का है; जगत और उस में निवास करने वाले भी। 2क्योंकि उसी ने उसकी नींव समुद्रों के ऊपर दृढ़ करके रखी, और महानदों के ऊपर स्थिर किया है॥ 3यहोवा के पर्वत पर कौन चढ़ सकता है? और उसके पवित्र स्थान में कौन खड़ा हो सकता है? 4जिसके काम निर्दोष और हृदय शुद्ध है, जिसने अपने मन को व्यर्थ बात की ओर नहीं लगाया, और न कपट से शपथ खाई है। 5वह यहोवा की ओर से आशीष पाएगा, और अपने उद्धार करने वाले परमेश्वर की ओर से धर्मी ठहरेगा। 6ऐसे ही लोग उसके खोजी हैं, वे तेरे दर्शन के खोजी याकूब वंशी हैं॥

Book of the Month

Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe.  For all other books…

सेमी टिपित सेवकाई के विषय में

एसटीएम लगभग 50 वर्षों से दुनिया भर में प्रेरणा और सहायता प्रदान कर रहा है। सैमी टिपित  इसके संस्थापक और अध्यक्ष है, वह एक विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता, शिक्षक और सुसमाचार के प्रचारक हैं जो 80 से अधिक देशों में लोगों की सेवा करने और उनकी सहायता करने का अनुभव रखते हैं। सैमी ऐसी सामग्री प्रदान करते  है जो लोगों को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुद्दों से निपटने में मदद करती है। वह विशेष रूप से दुनिया भर के अन्य देशों के लिए सामग्री सुलभ बनाने के बारे में भावुक है। सैमी ने डेबरा “टेक्स” टिपित  से शादी की है, और उनके दो बच्चे और पांच नाती पोते हैं। सैमी टिपित सेवकाई पंजीकृत 501c3 गैर-लाभकारी संगठन है।

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