शिष्यता का दैनिक वीडियो
प्रार्थना हमें युध्द के लिए वस्त्र पहनती है
जब मेरी पत्नी सुबह उठती है तो उसनी मनोदशा ऐसी दिखती है जो कहती है, “गुड मॉर्निंग, प्रभु!” सुबह उनका बहुत अच्छा व्यक्ति रहता है. उनका मन और दिल फूल-स्पीड मोड मे काम करता है. फिर भी, जब मै उठता हूं, ये बिलकुल विपरीत होता है. मै अक्सर खुद को सुबह के समय खींचकर बाहर निकलता हूँ, “मेरी मदत कर प्रभु.” अवश्य ही मै सुबह का व्यक्तिव नही रखता हूँ.
फिर भी मै जानता हूँ कि मुझे दिन की शुरुवात परमेश्वर के साथ करनी ही होगी. उसके बिना मै कुछ नही कर सकता हूँ. अगर मै परमेश्वर से बात करने के लिए शाम तक राह देखते रहूँ, तो मै केवल उससे यही कह पाउँगा, “मुझे माफ कर प्रभु. मैंने आज का दिन बर्बाद कर दिया है.” हमें दिन की शुरुवात प्रभु के साथ करनी चाहिए. सुबह मेरे जैसे रहनेवाले लोगों के लिए ये मुश्किल है. मै निश्चय ही उन लोगों पर दया करता जिन्हें सुबह प्रार्थना करना मुश्किल होता है.
मुझे सायनसेस की परेशानी है. परिणाम स्वरूप, जब मै हर सुबह उठता हूं तो बहुत ही धीमा रहता हूं. मेरे शरीर को फूल-स्पीड मे काम करने के लिए थोडा समय लगता है. लेकिन फिर भी मै जानता हूँ कि प्रभु के साथ दिन की शुरुवात करनी कितना जरूरी है. भजनकार कहता है, “ये यहोवा, भोर को मेरी वाणी तुझे सुनाई देगी, मैं भोर को प्रार्थना करके तेरी बाट जोहुँगा” (भजन ५:३). वो जानता था कि परमेश्वर के साथ हमारे चलने में वो शुरू का समय कितना मुश्किल होता है. जब हम प्रार्थना के साथ दिन कि शुरुवात करते है, हम सच मे कहते है, “प्रभु, मुझे तेरी जरूरत है.”
भोर के समय प्रार्थना करना यीशु का तरीका था. बाइबल कहती है, “भोर को, दिन निकलने से बहुत पहले, यीशु उठकर निकला और एक जंगल के स्थान मे गया और वहाँ प्रार्थना करने लगा” (मरकुस १:३५). यदि यीशु, स्वयं परमेश्वर के पुत्र को, अपने पिता के साथ समय बिताने के द्वारा दिन कि शुरुवात करनी थी, तो भी हमें भी इसे कितना ज्यादा करने की जरूरत है?
प्रार्थना की परिभाषा परमेश्वर के साथ नजदीकी के रूप मे की जा सकती है. लेकिन ये उससे भी बहुत बढ़कर है. हम जिस आत्मिक युद्ध का प्रतिदिन समाना करते है ये उसकी तैयारी है. प्रतिदिन हमें तीन तरह के युद्ध करने पड़ते हैं – शरीर से, शैतान से और संसार से. शरीर भीतरी युध्द का स्थान है जिसका हम प्रतिदिन सामना करते हैं. ये हमारा पुराना स्वभाव है. इस शत्रु पर विजय पाने के लिए हमें पवित्र आत्मा से भरना जरूरी है. शैतान दूसरा शत्रु है जिससे हमें लढना होगा. हमारा युध्द लोगों या समूह से नही है, परन्तु “आकाश की प्रधानताओं से है.” हमारे आत्मिक युद्ध का अंतिम शत्रु है “संसार” ये विचार और जीवन की वो प्रणाली है जो परमेश्वर के तरीके के विरुद्ध है. हम प्रतिदिन इन तीनों का सामना करते हैं.
हमें ये समझना होगा कि अगर किसी अच्छे सिपाही को युद्ध मे विजय पानी है तो उसे अच्छे से हथियार पहनने होगे. बाइबल हमे बताती है कि परमेश्वर के सारे हथियार पहन लो. लेकिन आप इसे कैसे करते है? सरल है – प्रार्थना के द्वारा. जब हम सुबह उठते है, हम परमेश्वर को पुकार उठते है. हम उसका चेहरा खोजते है. हम खुद को हथियार पहनाते है उसकी सच्चाई, उसकी धार्मिकता, उसके विश्वास, उसकी शान्ति, और उसके वचन के. तब और केवल तब ही हम हमारे शरीर, शैतान और संसार से निपट सकते हैं.
युद्ध छिड़ा है. शैतान लढ़ रहा है. केवल एक सवाल बना रहता है – क्या हम हथियार पहनकर युद्ध के लिए तैयार हैं? परमेश्वर के सारे हथियार पहन ले.
भजन संहिता 5 : 1-8
1े यहोवा, मेरे वचनों पर कान लगा; मेरे ध्यान करने की ओर मन लगा। 2हे मेरे राजा, हे मेरे परमेश्वर, मेरी दोहाई पर ध्यान दे, क्योंकि मैं तुझी से प्रार्थना करता हूं। 3हे यहोवा, भोर को मेरी वाणी तुझे सुनाई देगी, मैं भोर को प्रार्थना करके तेरी बाट जोहूंगा। 4क्योंकि तू ऐसा ईश्वर नहीं जो दुष्टता से प्रसन्न हो; बुराई तेरे साथ नहीं रह सकती। 5घमंडी तेरे सम्मुख खड़े होने न पांएगे; तुझे सब अनर्थकारियों से घृणा है। 6तू उन को जो झूठ बोलते हैं नाश करेगा; यहोवा तो हत्यारे और छली मनुष्य से घृणा करता है। 7परन्तु मैं तो तेरी अपार करूणा के कारण तेरे भवन में आऊंगा, मैं तेरा भय मानकर तेरे पवित्र मन्दिर की ओर दण्डवत् करूंगा। 8हे यहोवा, मेरे शत्रुओं के कारण अपने धर्म के मार्ग में मेरी अगुवाई कर; मेरे आगे आगे अपने सीधे मार्ग को दिखा।
Book of the Month
Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe. For all other books…
सेमी टिपित सेवकाई के विषय में
एसटीएम लगभग 50 वर्षों से दुनिया भर में प्रेरणा और सहायता प्रदान कर रहा है। सैमी टिपित इसके संस्थापक और अध्यक्ष है, वह एक विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता, शिक्षक और सुसमाचार के प्रचारक हैं जो 80 से अधिक देशों में लोगों की सेवा करने और उनकी सहायता करने का अनुभव रखते हैं। सैमी ऐसी सामग्री प्रदान करते है जो लोगों को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुद्दों से निपटने में मदद करती है। वह विशेष रूप से दुनिया भर के अन्य देशों के लिए सामग्री सुलभ बनाने के बारे में भावुक है। सैमी ने डेबरा “टेक्स” टिपित से शादी की है, और उनके दो बच्चे और पांच नाती पोते हैं। सैमी टिपित सेवकाई पंजीकृत 501c3 गैर-लाभकारी संगठन है।
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