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प्रार्थना मे प्रभु की अगुवाई
बहुत साल पहले मै ईस्ट जर्मनी मे अपने दोस्त से मिलने गया था. वो पहाड पर चढनेवाले थे, और वो मुझे अपने देश की सुंदर जगह दिखाना चाहते थे. वो मुझे ऐसे पहाड की चोटी पर ले जाना चाहते थे जहां से अद्भुत नजारा दिख सके. मैंने कहा कि मुझे उनके साथ जाना पसंद आएगा, लेकिन मुझे एक बड़ी समस्या है. मुझे ऊँचाई से डर लगता था.
उन्होंने मुझे शाश्वती दी “कोई समस्या नही, सैमी, ट्रेल बहुत ही सुरक्षित है.”
तो फिर, दो अमरीकी दोस्त और मै, अपने जर्मन दोस्त के साथ ट्रेल पर चढ़ने की कोशिश करने लगे. जब तक ट्रेल पहाड की चोटी से ५० मीटर की दूरी पर थी तब तक सबकुछ बिलकुल सही चल रहा था. फिर हमे खुद को चट्टान पर खिंचना पड़ा और असल मे क्लायमबिंग करनी पड़ी. फिर अचानक, मेरे अंदर कुछ हुआ. मेरे दिल मे डर आ गया. जब ऐसा हुआ, मैंने जान बचाने के लिए चट्टान को मजबूती से पकड़ लिया.
इस बिच, मेरे अमरीकी और जर्मन दोस्त चोटी को और आगे बढते रहें, वो नही जानते थे कि मेरे साथ क्या हुआ है. मै उन्हें पहाड कि चोटी पर ये कहते हुए सुन सकता था, “ओह, देखो कितना सुंदर है! क्या ये खूबसूरत नही है?” फिर मैंने किसी को कहते हुए सुना, “सैमी कहाँ है?” तब उन्होंने नीचे मेरी ओर देखा और मुझे बच्चे जैसे पहाड पर रेंगते हुआ चढते देखा.
वो चिल्लाए, “कम ऑन सैमी ये सुरक्षित है.”
मै केवल इतना ही कह सका, “मै चढ़ नही सकता हूँ.”
मेरे अमरीकी दोस्त शर्मिंदा हुए. मै जिस जगह फंस गया था वो वहाँ आकर मझ से धीरे से कहने लगे, “सैमी, आओ पहाड की चोटी पर चले. जर्मन लोग सोचेगे कि सारे अमरीकी कायर होते है. इसलिए, आओ, अभी चले.” मै अपने दोस्ते से केवल यही कह सका, “मै चल नही सकता.”
अंत मे जर्मन व्यकित नीचे आकर मुझे भरोसा देने लगे कि सब सुरक्षित है, लेकिन मै बार-बार दोहराते रहा, “मै चढ़ नही सकता.” अंत मे उन्होंने निर्णय लिया कि अगर मै नही जा सकता या जाना नही चाहता हूँ तो हम सब को नीचे जाना होगा.
लेकिन मैंने उन से कहा, “आप नही समझ रहें हैं. मै नही चल सकता.” मै उपर नही जा सकता था, और मै नीचे भी नही जा सकता था. मै फंस गया था. फिर बारिश होने लगी. उन्होंने कहा, “अब तुम्हें नीचे जाना होगा, सैमी.”
ये मेरे जीवन का सबसे ज्यादा शर्मिंदा करनेवाला पल था जब उन्होंने उस चट्टान से मेरे हाथ निकले और छोटे बच्चे जैसे मुझे उठाकर नीचे लाए. मैंने उस दिन बहुत से पाठ सीखें. पहला, मैंने डर के बारे मे मनुष्य कि भावना की सामर्थ सीखी. लेकिन मैंने ये भी देखा कि प्रभु कैसे हमारे जीवन मे काम करता है. जब हम जीवन की खतरनाक परीक्षाओं मे से जाते हैं तब सुरक्षा की जगह होती है. वो हमें परीक्षा के समय उन सुरक्षा की जगह पर ले जाएगा.
जब यीशु ने अपने चेलों को प्रार्थना करनी सिखाई, उसने उन्हें प्रार्थना के द्वारा प्रभु की अगुवाई खोजना सिखाया. उसने उन्हें प्रार्थना करने की जानकारी दी, “और हमें परीक्षा मे न ला, परन्तु बुराई से बचा”(मत्ती ६:१३). प्रार्थना के इस सिद्धांत के दों मुख्य भाग है. पहला, प्रार्थना के द्वारा हम परमेश्वर की अगुवाई प्राप्त करते है, और दूसरा है, हम प्रार्थना के द्वारा नर्क की शक्तियों पर जय प्राप्त करते है.
यीशु ने यहाँ इस पहले सिद्धांत में सुंदर चित्र दिखाया कि एक चरवाह अपनी भेड़ की अगुवाई कर रहा है. ये ऐसा है की जैसे भेड़ खतरनाक जंगल के मार्ग पर है और जब तक चरवाह सुरक्षित रूप मे उनकी अगुवाई न करे, वो चोटी पर से गिर सकती है. भेड़ चरवाहे की अगुवाई के लिए निवेदन करती है. संसार उस खतरनाक रास्ते जैसे है, और हम आसानी से परीक्षा की चोटी से गिर सकते हैं. इसलिए हमें प्रभु की अगुवाई के लिए उसे पुकारना होगा. जैसे मुझे उस पहाड के रास्ते मे मदत की जरूरत थी, हमे ये समझना जरूरी है इस संसार के खतरों का सामने करने के लिए हमें परमेश्वर की अगुवाई की जरूरत है.
हमें ये मानना होगा कि उसके बिना, हम भयानक परिस्थिति मे अकेले रह जाते है. हमें उसकी जरूरत है. अगर आप केवल उस पर विश्वास करेगे तो वो जीवन के खतरनाक रास्तों मे आपकी अगुवाई करेगा. आज ही उसे पुकार उठे और उसे अगुवाई करने दे.
निर्गमन 33 :12-23
12और मूसा ने यहोवा से कहा, सुन तू मुझ से कहता है, कि इन लोगों को ले चल; परन्तु यह नहीं बताया कि तू मेरे संग किस को भेजेगा। तौभी तू ने कहा है, कि तेरा नाम मेरे चित्त में बसा है, और तुझ पर मेरे अनुग्रह की दृष्टि है। 13और अब यदि मुझ पर तेरे अनुग्रह की दृष्टि हो, तो मुझे अपनी गति समझा दे, जिस से जब मैं तेरा ज्ञान पाऊं तब तेरे अनुग्रह की दृष्टि मुझ पर बनी रहे। फिर इसकी भी सुधि कर कि यह जाति तेरी प्रजा है। 14यहोवा ने कहा, मैं आप चलूंगा और तुझे विश्राम दूंगा। 15उसने उससे कहा, यदि तू आप न चले, तो हमें यहां से आगे न ले जा। 16यह कैसे जाना जाए कि तेरे अनुग्रह की दृष्टि मुझ पर और अपनी प्रजा पर है? क्या इस से नहीं कि तू हमारे संग संग चले, जिस से मैं और तेरी प्रजा के लोग पृथ्वी भर के सब लोगों से अलग ठहरें? 17यहोवा ने मूसा से कहा, मैं यह काम भी जिसकी चर्चा तू ने की है करूंगा; क्योंकि मेरे अनुग्रह की दृष्टि तुझ पर है, और तेरा नाम मेरे चित्त में बसा है। 18उसने कहा मुझे अपना तेज दिखा दे। 19उसने कहा, मैं तेरे सम्मुख हो कर चलते हुए तुझे अपनी सारी भलाई दिखाऊंगा, और तेरे सम्मुख यहोवा नाम का प्रचार करूंगा, और जिस पर मैं अनुग्रह करना चाहूं उसी पर अनुग्रह करूंगा, और जिस पर दया करना चांहू उसी पर दया करूंगा। 20फिर उसने कहा, तू मेरे मुख का दर्शन नहीं कर सकता; क्योंकि मनुष्य मेरे मुख का दर्शन करके जीवित नहीं रह सकता। 21फिर यहोवा ने कहा, सुन, मेरे पास एक स्थान है, तू उस चट्टान पर खड़ा हो; 22और जब तक मेरा तेज तेरे साम्हने होके चलता रहे तब तक मैं तुझे चट्टान के दरार में रखूंगा, और जब तक मैं तेरे साम्हने हो कर न निकल जाऊं तब तक अपने हाथ से तुझे ढांपे रहूंगा; 23फिर मैं अपना हाथ उठा लूंगा, तब तू मेरी पीठ का तो दर्शन पाएगा, परन्तु मेरे मुख का दर्शन नहीं मिलेगा॥
Book of the Month
Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe. For all other books…
सेमी टिपित सेवकाई के विषय में
एसटीएम लगभग 50 वर्षों से दुनिया भर में प्रेरणा और सहायता प्रदान कर रहा है। सैमी टिपित इसके संस्थापक और अध्यक्ष है, वह एक विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता, शिक्षक और सुसमाचार के प्रचारक हैं जो 80 से अधिक देशों में लोगों की सेवा करने और उनकी सहायता करने का अनुभव रखते हैं। सैमी ऐसी सामग्री प्रदान करते है जो लोगों को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुद्दों से निपटने में मदद करती है। वह विशेष रूप से दुनिया भर के अन्य देशों के लिए सामग्री सुलभ बनाने के बारे में भावुक है। सैमी ने डेबरा “टेक्स” टिपित से शादी की है, और उनके दो बच्चे और पांच नाती पोते हैं। सैमी टिपित सेवकाई पंजीकृत 501c3 गैर-लाभकारी संगठन है।
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