शिष्यता का दैनिक वीडियो
आत्मिक युद्द
मती ६:१३, इफ़ ६:११, रोम ८:३७
सैमी : अपने पिछले कुछ सेशन में हम प्रार्थना के दो बहुत ही गंभीर मुद्दों के ऊपर बात कर रहे थे। और वह थे क्षमा पाना और दूसरों को क्षमा करना। और अब मैं हमारे दोस्त मेरा डेव बटस के साथ हूं। डेव मैं आपकी बहुत ही प्रशंसा करता हूं।
डेव : धन्यवाद
सैमी: मैं उस समय की सराहना करता हूं, जो हमने एक साथ समय व्यतीत किए हैं। जो प्रार्थनाएं हम दोनों ने की है। और उन बातों में से मैं एक बात जानता हूं, कि जब आप प्रार्थना करते हैं तो आप आत्मिक संसार अथवा आत्मिक लड़ाई में चले जाते हैं।
डेव : यह सही बात है
सैमी: वास्तव में जब यीशु ने अपने शिष्यों को प्रार्थना करना सिखाया, तो उसने बताया कि यह सब ऐसे ही होगा। क्योंकि क्षमा में से गुजरने के पश्चात, इसके साथ मैं सोचता हूं कि आत्मिक युद्द में जाने से पहले अच्छा होगा, कि आपक्षमा नाम की वस्तु को नीचे रखें
डेव: यह सही बात है बिल्कुल
सैमी: पर वह वहां गया और उसने कहा कि हमें परीक्षा में न डाल। परंतु बुराई से बचा , अथवा दुष्ट से । इसीलिए यहां पर आत्मिक युद्ध नाम की एक वस्तु है । और उसने परीक्षा करने वाले और परीक्षा का सामना किया। आए हम उस के विषय में बात करते हैं, आत्मिक युद्ध क्या भूमिका निभाता है? कैसे एक मसीही विश्वासी अथवा परमेश्वर के साथ चलने वाला नया मनुष्य अथवा प्रार्थना करना सीखने वाला व्यक्ति इसमें से कैसे गुजरता है? इस आत्मिक युद्ध के साथ प्रार्थना में वह क्या करते हैं?
डेव: जरूर जब हम आत्मिक युद्ध की बात करते हैं, तो जहां पर तो खतरे हैं। एक है कि इसको अनदेखा कर देना और यह एक नाटक करना कि जैसे यह है ही नहीं। और दूसरा है इसके ऊपर ध्यान केंद्रित करना।
सैमी : ठीक
डेव: जब भी कोई छींकता है , तो हम दुष्ट आत्मा निकालने की कोशिश करते हैं । हमें सतर्क रहने की आवश्यकता है कि हम इस ओर ना जाएं । मैं विश्वास करता हूं कि किसी भी वस्तु को देखने का सबसे अच्छा तरीका है। जो यीशु ने अपनाया । जिसे हम यीशु की परीक्षा कहते हैं, यह हमारे लिए नमूना है कि यीशु भी शैतान द्वारा परीक्षा में गया और हम आप हम इस बात को समझ लेंगे, यदि यीशु परमेश्वर का पुत्र शैतान द्वारा परीक्षा में डाला गया तो हम भी परीक्षा में पड़ेंगे।
सैमी: बिल्कुल ठीक
डेव: जिस रीति से यीशु ने इसका सामना किया, यह बहुत ही अनिवार्य है। यीशु ने चिन्नो और चमत्कारों के द्वारा उत्तर नहीं डीअ। जबकि उसने बहुत चमत्कार किए। जब उसका व्यक्तिगत रुप में आत्मिक युद्ध हुआ तो उसने परमेश्वर के वचन के द्वारा इस को लड़ा।
सैमी: यह तो महान बात है
डेव: जब भी शैतान यीशु के सामने आया और उसे उसने उसके मुख्य कार्य से भटकाना चाहा और उससे कोई और कार्य करवाना चाहा और यही परीक्षा है, यीशु का उत्तर परमेश्वर का वचन ही था।
सैमी : वाह
डेव: उसने अपनी तलवार जोके परमेश्वर का वचन था ली, और शत्रु की परीक्षा का यह कहकर सामना किया, कि मैं तेरी बात नहीं सुनूंगा। परंतु मेरा ध्यान उस की और है, जो परमेश्वर ने कहा है। अथवा यह परमेश्वर का वचन था जो उसके विजय की कुंजी बन गया। और मैं कहूंगा कि यह बात हमारे लिए भी सत्य है , यदि हम पवित्रता और विजय में चलना चाहते हैं, तो हमें परमेश्वर के वचन को जानने की आवश्यकता है। और इसका यह अर्थ नहीं कि हम सब कुछ याद कर लेंगे।
सैमी : ठीक
डेव: इसका सीधा सा अर्थ है कि हम वह लोग हैं जो परमेश्वर के वचन से प्रेम करते हैं। क्योंकि हम उन स्थानों को देखते हैं जहां परमेश्वर की इच्छा बहुत ही स्पष्ट शब्दों में बताई गई है।
सैमी: हां बिल्कुल मैं शायद यह भी कहूं, कि आपने शुरुआत में कहा था, कि जब मैं यीशु की ओर आता हूं, जैसे कि आप अंतिम बात कर रहे थे, कि कैसे हम भी अंत तक जा सकते हैं । जब यीशु ने परमेश्वर के वचन का इस्तेमाल किया, तो शैतान फिर वापस आया और वह परमेश्वर का वचन लेकर आया, परंतु यीशु उसे सही रीति से इस्तेमाल करने के प्रसंग में ही रहा।
डेव: हां यह ठीक है
सैमी : उसने कहा, वचन के विषय में तुम्हें वास्तव में यह जानने की आवश्यकता है। इसलिए हमारे पास परमेश्वर का वचन सही रीती से होना चाहिए। मुझे क्षमा करें, मैं आपकी बात के बीच में बोलने लग गया। आगे चलते रहें । आप सही बात कर रहे थे।
डेव: नहीं नहीं, बिल्कुल नहीं। ठीक है। मैं सोचता हूं कि कई बार मसीही लोग भी परीक्षा के बारे में अपने आप को पराजित कर लेते हैं। इस बात की सच्चाई यह है कि यीशु की परीक्षा भी हुई थी।
स्पष्ट रीति से जहां तीन बातों का हम देखते हैं। परमेश्वर के वचन में कोई भी कारण नहीं मिलता है कि हम इस बात के ऊपर विश्वास करें कि उसकी परीक्षा नहीं हुई। परीक्षाएं येशु के संसारिक जीवन के दौरान पूरे समय में आती रही। उसने उन परीक्षाओं का सामना किया। और वह पूरी तरह से विजई रहा। इसलिए हमारे लिए यह बात आवश्यक है कि हम समझे कि परीक्षा अपने आप में पाप नहीं है। यह तो उसका प्रत्युत्तर है कि हम कैसे प्रति उत्तर देते हैं । कई बार मसीही लोग अपने आप को पराजित कर लेते हैं क्योंकि उन की परीक्षा हुई और उसके पश्चात शैतान सच में जीत जाता है । जो के मजाक की तरह ही है। वह झूठा है। और यही यीशु ने कहा। और इसलिए वह हमसे पाप करता है और फिर वह हमें दोषी महसूस करवाता है। क्योंकि उसने हमसे पाप करवाने की कोशिश की। वह हमारे साथ खेलता है । और इसलिए हमें यीशु जैसे लोग बनना चाहिए जो इस बात को समझो कि हम परमेश्वर का वचन पकड़ कर रखे । हम पाप में ना गिरने के लिए समर्पित हों। और जब हम ऐसा करते हैं तो हम यह बात कर चुके हैं कि कैसे हम अपने पापों का अंगीकार कर सकते हैं । परंतु यह बात याद रखेंगे, यह एक युद्ध है जो हर समय चलता रहता है और यह वास्तविक युद्ध है और हम सच में इस बात को जानते हैं कि यीशु के द्वारा हम विजयी से बढ़कर हैं । और वह हमारे भीतर रहने के लिए आया है। और हम विजय में चल सकते हैं। परंतु इस बात को जान लेना कि हम विजय में चल सकते हैं, इसका अर्थ यह नहीं है कि हम युद्ध में नहीं हैं।
सैमी : ठीक है
डेव: सेमी एक बात जिसने मेरी सहायता की है और वर्षों से यह मुझे लिए सहायता देती रही है । यह है परमेश्वर के शस्त्रों को पहनना। मुझे इस बात के विषय में पूरी तरह से पता है कि मेरी युद्ध के विषय में हमारी सबसे बड़ी समस्या यह है कि हमने कभी इसके विषय में सोचा ही नहीं। हम सुबह उठते हैं, और इस बात के प्रति बिल्कुल भी सावधान नहीं होते। वास्तविकता में हम आत्मिक युद्ध में जाने लगे हैं।
इफ़सियों ६ में पोलुस बहुत ही स्पष्ट रीति से बताता है कि हम कैसे युद्ध के समय में जीते हैं। एक युद्ध है जो हर वक़्त चलता रहता है, और यदि हम इस विजय में चलना चाहते हैं, तो हमारे पास वह सब कुछ होना चाहिए जो परमेश्वर के पास हमारे लिए है। यह एक बहुत ही साधारण सी वस्तु है, जो परमेश्वर हमें देता है । और वह आत्मिक युद्ध के हथियारों में एक बहुत दिलचस्प बात यह है कि यहाँ पर यह आज्ञा बहुत स्पष्ट है।
परमेश्वर के सारे शास्त्रों को पहन लो। और वह इस बात को प्रार्थना के विषय में कहता है। और अब मैं विश्वास करता हूं कि हमारी जीवन शैली के साथ परमेश्वर के शस्त्रों का बहुत बड़ा सबंध है। परंतु यह प्रार्थना के विषय में ही है । हर सुबह के समय मैं एक साधारण सी बात कहता हूं, प्रभु आज मैं आपके हथियार पहन लेता हूं। और यह कोई जादुई फार्मूला नहीं है। इस तरह से कहने के लिए सही शब्द नहीं है। कई बार मैं सभी शास्त्रों के विषय में बोलता हूं, प्रभु आज मैं मुक्ति का टोप, धार्मिकता की झिलम पहनता हूं। मैं सच्चाई से कमर को कस लेता हूं । शांति के जूते डाल देता हूं। मैं विश्वास की ढाल को और तेरे वचन की तलवार को लेता हूं। और पहले मैं इन हथियारों को सिर्फ एक ही रीती से देखता था। परंतु सब से अनिवार्य बात यह है कि यह मसीह को पहन लेना है। क्योंकि आप देखते हैं कि सारे हथियारों में इनका सबंध पूरी तरह से मसीह के साथ है।
सैमी : हां
डेव : शास्त्रों का हर एक हिस्सा कार्य करता है और यह सब उसी के हैं। और सिर्फ वही है जिसने शैतान के ऊपर क्रुस पर विजय पाई है। और वह अब हमारे भीतर वास करने के लिए आया है। और इसी तरह से यह प्रभावशाली प्रार्थना करना जरूरी शब्दों का सही इस्तेमाल करना नहीं है। यह तो यीशु के ऊपर केंद्रित होना है । और यह उसे पहने हुए होना है। और यह तो आत्मिक शास्त्रों को पहन लेना है, जो कि यीशु मसीह है। और फिर विजय में चलना है।
सैमी: आप जानते हैं यह बहुत ही अद्भुत है और फिर हम उसी बात पर आते हैं।
डेव : क्या यह सब नहीं है? यह सब यीशु के विषय में है।
सैमी : हम इस बात पर फिर से आते हैं कि हम कैसे यीशु की ओर देखते हैं। और हमें कैसे उसके पास आने की आवश्यकता है । यीशु ही इसका स्रोत है। और वही सब कुछ आपको पता है, मैं सोचता हूं कि यदि हम शारीरिक युद्ध में होते तो बिना किसी तैयारी किए, बिना शास्त्रों को पहने हुए, हम युद्ध में जाने के विषय में सोचते भी नहीं। हम बाहर जाते हैं और हमें आत्मिक युद्ध के विषय में भी यही करना चाहिए। और इस भाग में एक और बात जो मेरे मन में आती है, और मैं उस बात के विषय में बात करना चाहता हूं, जिसमें यीशु ने कहा, हमें परीक्षा में ना ला। और वह कहता है हमें परीक्षा में ना ला। हमें पवित्र आत्मा की अगुवाई की आवश्यकता है। और यही यीशु की सिखाई हुई प्रार्थना के अंत में है। और इस लिए हमें यह काम करने की आवश्यकता है कि हम उस स्थान पर आ जाएं, जहां पर हम कहें, हे प्रभु मैं तब तक इस स्थान से नहीं जाना चाहता, जब तक मैं नहीं जान लेता कि आप मेरी अगुवाई कर रहे हैं। और यदि हम जानते हैं कि परमेश्वर हमें चला रहा है, तो हम जानते हैं कि वह हमें वहां ले जाएगा । और वह हमें अपना अनुग्रह देगा जिसके द्वारा हम विजई बन सकें। और जो चित्र बाइबिल में बनाया गया है, वह एक भेड़ और चरवाहे का है। जिस में भेड़ कहती है, प्रभु मैं खतरनाक पहाड़ी के ऊपर हूं मुझे तीखी चट्टान की ओर ना ले जा।
डेव: यह ठीक है
सैमी : और हम हैं। हम एक अंधेरे और खतरनाक संसार में हैं। हमें परमेश्वर की अगवाई की आवश्यकता है। और एक बात जो कि मैं आप सब को कहना चाहूंगा। और वह हमारी प्रार्थना के समय में है। और मूसा ने कहा, प्रभु मैं तब तक जहां से नहीं जाऊंगा, जब तक आप मेरे साथ नहीं जाते हैं। जब तक मैं यह नहीं जान लेता कि क्या आप हमारे साथ है? लोग मुझे पूछते हैं, आपकी प्रार्थना का समय कितना लंबा होना चाहिए? आपको तब तक प्रार्थना करनी चाहिए जब तक आप यह नहीं जान लेते कि जब आप बाहर निकलते हैं तो परमेश्वर आपको चला रहा है, प्रार्थना इतनी लंबी होनी चाहिए ।
और मैं आपको उत्साहित करना चाहता हूं कि आप परमेश्वर से कहें , कि मैं आप मेरी अगुवाई करें । वचन को लें और इसे अपने हृदय में छिपा लें। इसके ऊपर मनन करें और इन वचनों को अपने मन के भीतर छिपा कर रखें। ताकि आप शत्रुओं का सामना कर सके। और परमेश्वर के शास्त्रों को पहन ले। तब परमेश्वर आपकी, अपनी आत्मा के द्वारा अगुवाई करेगा और जब आप प्रार्थना के समय से बाहर आएंगे तो आप इस बात को जान लेंगे कि हम यीशु के द्वारा विजयी से बढ़कर है।
इफिसियों 6 :14-20
14सो सत्य से अपनी कमर कसकर, और धार्मीकता की झिलम पहिन कर।
15और पांवों में मेल के सुसमाचार की तैयारी के जूते पहिन कर।
16और उन सब के साथ विश्वास की ढाल लेकर स्थिर रहो जिस से तुम उस दुष्ट के सब जलते हुए तीरों को बुझा सको।
17और उद्धार का टोप, और आत्मा की तलवार जो परमेश्वर का वचन है, ले लो।
18और हर समय और हर प्रकार से आत्मा में प्रार्थना, और बिनती करते रहो, और इसी लिये जागते रहो, कि सब पवित्र लोगों के लिये लगातार बिनती किया करो।
19और मेरे लिये भी, कि मुझे बोलने के समय ऐसा प्रबल वचन दिया जाए, कि मैं हियाव से सुसमाचार का भेद बता सकूं जिस के लिये मैं जंजीर से जकड़ा हुआ राजदूत हूं।
20और यह भी कि मैं उस के विषय में जैसा मुझे चाहिए हियाव से बोलूं॥
Book of the Month
Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe. For all other books…
सेमी टिपित सेवकाई के विषय में
एसटीएम लगभग 50 वर्षों से दुनिया भर में प्रेरणा और सहायता प्रदान कर रहा है। सैमी टिपित इसके संस्थापक और अध्यक्ष है, वह एक विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता, शिक्षक और सुसमाचार के प्रचारक हैं जो 80 से अधिक देशों में लोगों की सेवा करने और उनकी सहायता करने का अनुभव रखते हैं। सैमी ऐसी सामग्री प्रदान करते है जो लोगों को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुद्दों से निपटने में मदद करती है। वह विशेष रूप से दुनिया भर के अन्य देशों के लिए सामग्री सुलभ बनाने के बारे में भावुक है। सैमी ने डेबरा “टेक्स” टिपित से शादी की है, और उनके दो बच्चे और पांच नाती पोते हैं। सैमी टिपित सेवकाई पंजीकृत 501c3 गैर-लाभकारी संगठन है।
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