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टूटे सम्बन्धों को पुनः जोड़ना
हम एक टूटे सम्बन्धों से भरे संसार में रहते है, राष्ट्र राष्ट्रों के विरूद्ध लड़ाई कर रहे है एक जाति समूह दूसरे जाति समूह से घृणा करता है। गिरोह अपने-अपने इलाकों की रक्षा करते है। पति और पत्नियाँ एक दूसरे को तलाक दे रहे हैं टूटे सम्बन्ध उस पीढ़ी का एक साधारण चिह्न हैं जिन्होंने मसीह को त्याग दिया है। मुझसे प्रायः यह पूछा जाता है कि यदि प्रभु इतना भला है तो इस संसार में इतनी बुरी बातें क्यों हो रही हैं। इस प्रश्न का एक साधारण सा उत्तर हैं परमेश्वर हमें चयन करने का अवसर देता है। उन्होंने हमें रोबोट की तरह नहीं बनाया है उन्होंने हममें से प्रत्येक को ‘एक जीवित आत्मा‘ बनाया है जब हम उनके प्रति अनाज्ञाकारिता का चयन कर अपनी इच्छा पर चलते हैं, तब हम अपनी स्वतंत्रता और विद्रोह की उपज काटते हैं। उस उपज में प्रायः टूटे सम्बन्ध सम्मिलित होते हैं चाहे वे परिवारों, समाज, राष्ट् या संसार के धर्म।
इसका विपरीत भी सच है जब हम परमेश्वर की आज्ञा मानने और मसीह के पीछे चलने का चयन करते हैं तब हम उन टूटे हुए सम्बन्धों को सुधारना आरम्भ कर देते हैं। हम परमेश्वर को प्रेम और अपने मित्र से घृणा एक साथ नहीं कर सकते। यह असम्भव है परमेश्वर के प्रेम में रोपित एक हृदय और जीवन कभी कड़वाहट का फल नहीं देंगे। जहां कहीं भी घृणा है उससे हमें यह ज्ञात हो सकता है कि वहां परमेश्वर का प्रेम अनुपस्थित है। हमारे जीवनों में कभी ऐसा समय होगा जब सब लोग हमारे साथ अनिष्ट ही करेंगे। मसीह के पीछे चलने वाला होकर हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि हम उस अनिष्ट का प्रत्युत्तर क्या देंगे जो हमारे ऊपर मढ़ दिया गया है। हमारे जीवनों की विजय का रहस्य मसीह के क्रूस में है। मानव इतिहास में इससे बड़ा उदाहरण कोई नहीं है कि किसी व्यक्ति के साथ इतना अनिष्ट किया गया हो। हम सबने पाप और गलत कार्य किए हैं। किन्तु उन्होंने कभी पाप नहीं किया। वह हर प्रकार से सही थे। उन्होंने पूर्णतः परमेश्वर की आज्ञा का पालन किया। उन्होंने इस प्रकार प्रेम किया जैसा कभी किसी ने न किया हो। उन्होंने जीवन इस प्रकार जिया जैसा इसे जिया जाना चाहिए। फिर भी उन्हें एक पुराने खुरदरे क्रूस पर चढा दिया गया। उनपर थूका गया, उनका उपहास किया गया, मारा गया और क्रूस पर चढ़ा दिया। यह सब होनें पर भी उन्होंने कहा “पिता इन्हें माफ कर क्योंकि ये नहीं जानते कि ये क्या करते हैं।” (लूका 23:24।)
यीशु ने जो क्रूस पर किया वह अनुग्रह का सार है। उन्होंने समस्त मानवजाति पर अनुग्रह किया जब हम उनके अनुग्रह के योग्य भी न थे। जब उनके साथ अनिष्ट हुआ, उन्होंने प्रेम किया। सत्य रूप में यह “अद्भुत अनुग्रह” ही था जो क्रूस से प्रवाहित हुआ था जब हम क्रूस की ओर आते हैं तब हम उसी अनुग्रह को अनुभव करते हैं। हमारे पास वह दिव्य योग्यता होती है जिसमें हम उनसे प्रेम करते हैं जिन्होंने हमारा अनिष्ट किया है। हम ऊपर मसीह तक तथा नीचे अपने हृदयों तक पहुंच सकते हैं। जब हम क्रूस के नीचे होते हैं तब जिन्होंने हमारा अनिष्ट ही किया हो उन्हें क्षमा करने तथा प्रेम करने के लिए हम परमेश्वर का अनुग्रह प्राप्त कर सकते हैं। यदि हमनें भी किसी का अनिष्ट किया हो तो हमें भी क्रूस के समक्ष आने पर क्षमा प्राप्त हो जाती हैं। यीशु हमें क्षमा करेंगे और पूर्ण पश्चाताप की ओर ले जाएंगे। क्रूस पर मसीह हमारे पाप की जड़ “स्वयं” से निपटते हैं। वहां हम प्रेरित पौलूस के साथ कहते हैं, “मैं मसीह के साथ क्रूस पर चढ़ा दिया गया हूँ।” हम अपने पुराने स्वभाव के प्रति मर जाते हैं जब मह क्रूस के समक्ष झुकते हैं तो विनम्रता हमारे जीवनों की मुख्य विशेषता बन जाती है क्योंकि यह हमारे जीवनों में व्याप्त हो जाती है।
लूका 23 :32-43
32वे और दो मनुष्यों को भी जो कुकर्मी थे उसके साथ घात करने को ले चले॥ 33जब वे उस जगह जिसे खोपड़ी कहते हैं पहुंचे, तो उन्होंने वहां उसे और उन कुकिर्मयों को भी एक को दाहिनी और और दूसरे को बाईं और क्रूसों पर चढ़ाया। 34तब यीशु ने कहा; हे पिता, इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये नहीं जानते कि क्या कर रहें हैं और उन्होंने चिट्ठियां डालकर उसके कपड़े बांट लिए। 35लोग खड़े खड़े देख रहे थे, और सरदार भी ठट्ठा कर करके कहते थे, कि इस ने औरों को बचाया, यदि यह परमेश्वर का मसीह है, और उसका चुना हुआ है, तो अपने आप को बचा ले। 36सिपाही भी पास आकर और सिरका देकर उसका ठट्ठा करके कहते थे। 37यदि तू यहूदियों का राजा है, तो अपने आप को बचा। 38और उसके ऊपर एक पत्र भी लगा था, कि यह यहूदियों का राजा है। 39जो कुकर्मी लटकाए गए थे, उन में से एक ने उस की निन्दा करके कहा; क्या तू मसीह नहीं तो फिर अपने आप को और हमें बचा। 40इस पर दूसरे ने उसे डांटकर कहा, क्या तू परमेश्वर से भी नहीं डरता? तू भी तो वही दण्ड पा रहा है। 41और हम तो न्यायानुसार दण्ड पा रहे हैं, क्योंकि हम अपने कामों का ठीक फल पा रहे हैं; पर इस ने कोई अनुचित काम नहीं किया। 42तब उस ने कहा; हे यीशु, जब तू अपने राज्य में आए, तो मेरी सुधि लेना। 43उस ने उस से कहा, मैं तुझ से सच कहता हूं; कि आज ही तू मेरे साथ स्वर्गलोक में होगा॥
Book of the Month
Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe. For all other books…
सेमी टिपित सेवकाई के विषय में
एसटीएम लगभग 50 वर्षों से दुनिया भर में प्रेरणा और सहायता प्रदान कर रहा है। सैमी टिपित इसके संस्थापक और अध्यक्ष है, वह एक विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता, शिक्षक और सुसमाचार के प्रचारक हैं जो 80 से अधिक देशों में लोगों की सेवा करने और उनकी सहायता करने का अनुभव रखते हैं। सैमी ऐसी सामग्री प्रदान करते है जो लोगों को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुद्दों से निपटने में मदद करती है। वह विशेष रूप से दुनिया भर के अन्य देशों के लिए सामग्री सुलभ बनाने के बारे में भावुक है। सैमी ने डेबरा “टेक्स” टिपित से शादी की है, और उनके दो बच्चे और पांच नाती पोते हैं। सैमी टिपित सेवकाई पंजीकृत 501c3 गैर-लाभकारी संगठन है।
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