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एकता में प्रार्थना करना परमेश्वर की महिमा को लाता है
यह सन्देश मैंने उस समय लिखा जब मैं मिस्र के कायरो की यात्रा पर निकलने की तैयारी कर रहा था। प्रार्थना में मेरे हृदय की एक वेदना निरन्तर बनी रही। मैं मिस्र में परमेश्वर की महिमा को देखना चाहता हूँ। मैंने इस के लिए प्रार्थना की है। मैं प्रभु के सामने गिड़गिड़ाया हूँ कि वह हमें उसकी महिमा को देखने दे। मैंने प्रार्थना की कि हम केवल आत्माओं की एक बड़ी कटनी; परमेश्वर के लोगों में क्राँति और सुसमाचार के सन्देश को सुनने वाली बड़ी भीड़ से बढ़कर कुछ देख सकें।
यीशु के प्रार्थना जीवन का अध्ययन हमें दिखाता है कि उसकी कितनी इच्छा थी कि उसकी महिमा मनुष्यों पर प्रकट हो। युहन्ना अपनी पुस्तक के 17वें अध्याय में मसीह के प्रार्थना जीवन को गहराई के साथ प्रकट करता है। एक पद में यीशु प्रार्थना करता है, “पिता, समय पूरा हूआ। अपने पुत्र की महिमा कर कि तेरा पुत्र भी तेरी महिमा करे।” उसकी प्रार्थना के आरम्भ से ही जो उद्देश्य था वह था परमेश्वर की महिमा। आगे की प्रार्थना में भी उसने परमेश्वर की महिमा को प्रकट करना चाहा। चार और पाँच पद में वह कहता है, “मैंने उस कार्य को पूरा करने के द्वारा जो तू ने मुझे सौंपा था, पृथ्वी पर तेरी महिमा की है और अब, हे पिता, तू अपने साथ मेरी महिमा उस महिमा से कर जो जगत के होने से पहले, मेरी तेरे साथ थी।”
परन्तु यीशु इस बात को स्पष्ट करता है कि विश्वासियों की एकता और परमेश्वर की महिमा के प्रकट होने में एक सीधा सम्बन्ध है। एकता के परस्पर सम्बन्ध का महत्व और परमेश्वर की महिमा का सबसे अच्छा विवरण शायद 22 और 23 पद में ही मिलता है। यीशु ने प्रार्थना की, “और वह महिमा जो तू ने मुझे दी, मैं ने उन्हें दी है कि वे वैसे ही एक हों जैसे की हम एक हैं। मैं उन में और तू मुझ में कि वे सिद्ध होकर एक हो जाएँ, और जगत जाने कि तू ही ने मुझे भेजा, और जैसा तू ने मुझ से प्रेम रखा, वैसा ही मैंने उन से प्रेम रखा।”
पिन्तेकुस्त के दिन परमेश्वर ने अपने आत्मा को उण्डेला और इसका परिणाम यह निकला कि कलीसिया का जन्म हुआ, हज़ारों लोगों ने परमेश्वर के राज्य में जन्म लिया और मसीह के अनुयायीयों के जीवनों में एक नया सूर्य उदय हुआ। परन्तु इस बात पर ध्यान देना आवश्यक है कि परमेश्वर के आत्मा के उण्डेले जाने से तुरन्त पहले यीशु के शिष्य “एक मन होकर प्रार्थना” कर रहे थे और इसके कुछ ही समय बाद परमेश्वर की महिमा उन के मध्य उतर आई।
हम पाते हैं कि यह एकता प्रेरितों के काम 4 अध्याय तक बनी रहती है और वह परमेश्वर की महिमा के प्रकटीकरण को देखते रहते हैं। आत्मा की एकता परमेश्वर की महिमा के प्रकट होने का एक आधार है। हमें परमेश्वर की महिमा के लिए प्रार्थना करना आवश्वक है परन्तु हमें यह भी याद रखना चाहिए कि एक आत्मा, एक हृदय और एक मन होकर प्रार्थना करने में बहुत शक्ति है।
कलीसिया के झगड़े कलीसिया में से परमेश्वर की महिमा के प्रकटीकरण को चुरा लेते हैं। कलीसिया के अधिकारियों के झगड़े परमेश्वर के आत्मा के उण्डेले जाने में एक बाधा हैं। जातिवाद ने परमेश्वर के लोगों को उसकी महिमा का अनुभव करने से रोक रखा है। हमने प्रार्थना में एकता से पहले अलग-अलग शिक्षा की बाधाएँ खड़ी कर रखी हैं और इसने हमें निष्क्रिय कर दिया है।
परमेश्वर हमें अपनी महिमा दिखाना चाहता है। यदि ऐसा न होता तो यीशु ने इसके लिए प्रार्थना न की होती। परन्तु उसने प्रार्थना की और परमेश्वर निश्चय ही हम पर अपनी महिमा को प्रकट करना चाहता है। परन्तु ऐसे आदर की एक कीमत होती है और वह कीमत यह है कि हमें अपनी स्वार्थी इच्छाओं, विचारों, और महत्वकाँक्षाओं को त्यागना आवश्यक है। हमें कुछ देने के लिए भी तैयार होना चाहिए। हमें मिलकर एकता में उसके मुख को खोजना चाहिए। हमें परमेश्वर की महिमा के लिए उसके सामने पुकारना आवश्यक है। जब उसकी महिमा प्रकट होगी तो और किसी बात का महत्व नहीं होगा। अरे हाँ, हमारे साथ एकता में एक मन होकर प्रार्थना कीजिए कि हम कायरो में परमेश्वर की महिमा को देखें।
यूहन्ना 17 :20-23
20मैं केवल इन्हीं के लिये बिनती नहीं करता, परन्तु उन के लिये भी जो इन के वचन के द्वारा मुझ पर विश्वास करेंगे, कि वे सब एक हों। 21जैसा तू हे पिता मुझ में हैं, और मैं तुझ में हूं, वैसे ही वे भी हम में हों, इसलिये कि जगत प्रतीति करे, कि तू ही ने मुझे भेजा। 22और वह महिमा जो तू ने मुझे दी, मैं ने उन्हें दी है कि वे वैसे ही एक हों जैसे की हम एक हैं। 23मैं उन में और तू मुझ में कि वे सिद्ध होकर एक हो जाएं, और जगत जाने कि तू ही ने मुझे भेजा, और जैसा तू ने मुझ से प्रेम रखा, वैसा ही उन से प्रेम रखा।
Book of the Month
Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe. For all other books…
सेमी टिपित सेवकाई के विषय में
एसटीएम लगभग 50 वर्षों से दुनिया भर में प्रेरणा और सहायता प्रदान कर रहा है। सैमी टिपित इसके संस्थापक और अध्यक्ष है, वह एक विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता, शिक्षक और सुसमाचार के प्रचारक हैं जो 80 से अधिक देशों में लोगों की सेवा करने और उनकी सहायता करने का अनुभव रखते हैं। सैमी ऐसी सामग्री प्रदान करते है जो लोगों को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुद्दों से निपटने में मदद करती है। वह विशेष रूप से दुनिया भर के अन्य देशों के लिए सामग्री सुलभ बनाने के बारे में भावुक है। सैमी ने डेबरा “टेक्स” टिपित से शादी की है, और उनके दो बच्चे और पांच नाती पोते हैं। सैमी टिपित सेवकाई पंजीकृत 501c3 गैर-लाभकारी संगठन है।
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