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एक विजयी के समान दोड़ना

दौड़ जिस में हमें दौड़ना है, धीरज से दौड़ें।

शिष्यता का दैनिक वीडियो

प्रार्थना विश्वासी को प्रेरीत करती है

यदि आप के पास संसार पर प्रभाव डालने का दर्शन है, तो आप उसे कैसे पूरा करेगे? शायद आज अगुवेपन और मैनेजमेंट के कोर्स, ये सलाह देगे कि इस क्रिया में सबसे पहला कदम होगा बुद्धिमान और समर्पित लोगों का समूह खोज निकले और अपना दर्शन उन में उंडेलना शुरू करे. शायद हम सबसे बुद्धिमान और सबसे चतुर लोगों को खोजने लगे. शायद हम उन लोगों को खोजने के लिए लीडरशिप के महान इनस्टीट्युट में या सबसे सफल कॉपरेशन में जाए.

खैर, कुछ भी हो हम यीशु को ऐसा कुछ भी करते हुए नही पाते हैं. उसने सुमुन्दर किनारे जाकर गरीब और अनपढ़ मछुवारों को बुलाया. संसार को बदलने के बारे में मछुवारों को क्या मालूम था? या चुंगी लेनेवाले को चोट खाए लोगों से संपर्क करने के बारे में क्या पता था? यीशु ने इस असाधारण काम के लिए साधारण लोगों को क्यों चुना? उसने ऐसे असामान्य काम के लिए असामान्य स्त्री और पुरुषों को क्यों चुना?

संसार में प्रचार करने का काम अब तक किसी भी लोगों के समूह को दिया गया सबसे महत्वपूर्ण काम था, और देखीए उसे ने किन्हें चुना. संदेह करनेवाले, इनकार करनेवाले, ऐसे स्त्री और पुरुष जो उसके इस पृथ्वी के सबसे मुश्किल समय में उसके आसपास कही पाए नही गएं, ऐसे पल में जब वो संसार के पापों के लिए मर रहा था. तो, उसने उन्हें क्यों चुना और वो इतने सफल क्यों हुएं? पहले समूह को यीशु ने जो दिया अगर वो उसे पूरा नही कर पाते तो मसिहियत वही पर खत्म हो सकती थी.

लेकिन इसका विपरीत भी सच है. परमेश्वर के मार्ग संसार के मार्गो से अलग हैं. यीशु ने इस पृथ्वी पर अब तक के सबसे बड़े क्रांतिकारी चलन को जन्म दिया. पहली शताब्दी में जो हुआ उसके कारण आज भी लाखों लोग उस पर विशवास करते हैं और उसे अपना जीवन देते हैं. उसने डरपोक लोगों को लिया और उन्हें साहसी दानव बना दिया. काम करने की उसकी योजना हमारे चर्च के बोर्डरूम से बहुत अलग है. उसकी योजना राह देखने की थी. राह देखना? बिलकुल सही, राह देखना. उन्हें सामर्थ से भरने के लिए पिता की प्रतिज्ञा की राह देखनी थी.

यीशु ने अपने चेलों से कहा था, “जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ पाओगे, और तुम सारे यरूशलेम में, और सारे यहूदिया में, और सारे सामरिया में, और पृथ्वी की छोर तक मेरे गवाह होगें”(प्रेरित १:८). उन अनपढ़ स्त्री और पुरुषों को जो सामर्थ दी गई थी उसके बारे में ग्रीक भाषा में बहुत ही स्पष्ट बताया गया है. वचन के इस भाग में “ड्यूनॉमस” शब्द का उपयोग किया गया है, जिससे हमें “डायनामाइट” शब्द मिलता है. इन प्रारंभिक चेलों को विस्फोटक सामर्थ दी गई थी जिसके कारण वो रोमी शासन को बदल पाएं.

लेकिन वचन के इस भाग में शायद सबसे रोचक शब्द उपयोग किया गया वो है “शहीद.” ये ग्रीक शब्द है जिसका अंग्रेजी में अनुवाद “गवाह” के रूप में हुआ है. स्ट्रांग्स की डिशनरी “शहीद” की परिभाषा “गवाह” के रूप में देती है (वास्तव में [न्यायिक रूप में] या उपमा के रूप में [तुलनात्मक रूप में]) व्यवहारिक रूप में, “एक शहीद.” ये आत्मिक विस्फोटक सामर्थ प्रभु की राह देखनेवाले उन लोगों को दी गई थी, इस ने सबसे डरपोक लोगों को मसीह के लिए सबसे साहसी लोग बना दिया – यहां तक की मृत्यु तक. और बहुत से लोग जिन्होंने ये वचन सुना था वो सुसमाचार प्रचार के कारण ही मारे गएं.

इसलिए प्रार्थना बहुत ही महत्वपूर्ण है. प्रार्थना परमेश्वर के साथ करीबी संबंध बनाना है. और जब हम प्रभु से गहरी संगति में मिलते है तब उसका सिद्ध प्रेम सारा डर निकाल देता है. मनुष्य हमारे साथ क्या कर सकते है इसका कोई डर नही होगा, क्योंकि हमारे पास “शहीद” होने के लिए “ड्यूनॉमस” है. जब यीशु ने संसार बदलने के लिए लोगों का एक समूह चुन लिया, उसने साधारण, नम्र, पवित्र, प्रार्थना करनेवाले स्त्री और पुरुषों को चुन लिया, और उनके द्वारा उसने संसार को हिला दिया. डज़न भर विद्यवान जो परमेश्वर के साथ निकटता के बारे में कुछ नही जानते उनसे बहुत बढकर परमेश्वर, प्रार्थना करनेवाले एक साधारण व्यक्ति के द्वारा कर सकता है. ये सिद्धांत संसार के बोर्डरूम में शायद बहुत अच्छा दिखाए न देता हो, लेकिन निश्चय ही ये यरूशलेम के उपरी कमरे में सही रूप में काम किया. राह देखे, प्रार्थना करे, और देखे की क्या होता है.

प्रेरितों १:१-८

1हे थिओफिलुस! मैंने अपनी पहली पुस्‍तक में उन सब बातों का वर्णन किया, जिन्‍हें येशु आरंभ से उस दिन तक करते और सिखाते रहे 2जिस दिन वह स्‍वर्ग में उठा लिये गये। उस से पहले येशु ने प्रेरितों को, जिन्‍हें उन्‍होंने स्‍वयं चुना था, पवित्र आत्‍मा द्वारा आदेश दिया। 3येशु ने अपने दु:ख-भोग के बाद उन प्रेरितों के संमुख बहुत-से प्रमाण प्रस्‍तुत किए कि वह जीवित हैं। वह चालीस दिन तक उन्‍हें दिखाई देते रहे और उनसे परमेश्‍वर के राज्‍य के विषय में बात करते रहे। 4येशु ने प्रेरितों के साथ भोजन करते समय उन्‍हें आज्ञा दी कि वे यरूशलेम नगर नहीं छोड़ें, बल्‍कि पिता ने जो प्रतिज्ञा की है, उसकी प्रतीक्षा करते रहें। उन्‍होंने कहा, “मैंने तुम लोगों को उस प्रतिज्ञा के विषय में बता दिया है। 5योहन ने तो जल से बपतिस्‍मा दिया था, परन्‍तु थोड़े ही दिनों बाद तुम्‍हें पवित्र आत्‍मा से बपतिस्‍मा दिया जायेगा।”

6जब प्रेरित येशु के साथ एकत्र थे, तब उन्‍होंने यह प्रश्‍न किया, “प्रभु! क्‍या आप इस समय इस्राएलियों का राज्‍य पुन: स्‍थापित करेंगे?” 7येशु ने उत्तर दिया, “पिता ने जो काल और निश्‍चित समय अपने निजी अधिकार में रखे हैं, उन्‍हें जानना तुम्‍हारा काम नहीं है। 8किन्‍तु पवित्र आत्‍मा तुम पर उतरेगा और तुम्‍हें सामर्थ्य प्रदान करेगा और तुम यरूशलेम में, समस्‍त यहूदा और सामरी प्रदेशों में तथा पृथ्‍वी के अन्‍तिम छोर तक मेरे साक्षी हो

Book of the Month

Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe.  For all other books…

सेमी टिपित सेवकाई के विषय में

एसटीएम लगभग 50 वर्षों से दुनिया भर में प्रेरणा और सहायता प्रदान कर रहा है। सैमी टिपित  इसके संस्थापक और अध्यक्ष है, वह एक विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता, शिक्षक और सुसमाचार के प्रचारक हैं जो 80 से अधिक देशों में लोगों की सेवा करने और उनकी सहायता करने का अनुभव रखते हैं। सैमी ऐसी सामग्री प्रदान करते  है जो लोगों को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुद्दों से निपटने में मदद करती है। वह विशेष रूप से दुनिया भर के अन्य देशों के लिए सामग्री सुलभ बनाने के बारे में भावुक है। सैमी ने डेबरा “टेक्स” टिपित  से शादी की है, और उनके दो बच्चे और पांच नाती पोते हैं। सैमी टिपित सेवकाई पंजीकृत 501c3 गैर-लाभकारी संगठन है।

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