शिष्यता का दैनिक वीडियो
माफ करना – परमेश्वर की उपस्थिति खोलना
परमेश्वर मेरे लिए बहुत ही भला है. मैंने देखा है कि उसने बहुत सी प्रार्थनाओं का उत्तर दिया जिसके बारे मे मैं कह सकता हूँ कि वो केवल एक महान रोमांच था. मैंने देखा कि प्रार्थनाओं के उत्तर के रूप में उसने परिवार एक सदस्य और दोस्तों को मसीह के पास लाया. मैंने देखा कि परमेश्वर ने अपने लोगों की प्रार्थनाओं के कारण देशों के द्वार खोले. अगुवों ने परमेश्वर के चेहरे को निहारने के कारण मैंने देशों मे चंगाई की गवाही देखी है. परमेश्वर की उपस्थित मे जाने से बढ़कर जीवन में और बड़ा आनंद कोई नही है.
एक दोपहर जब मै प्रभु के साथ एकांत मे समय बीतने की कोशिश कर रहा था तब मेरा दिल बोझ से भर गया. ऐसा दिखाई दे रहा था कि मेरी प्रार्थनाओं के लिए स्वर्ग बंद हो गया था, और लगभग दो हफ्तों तक ऐसा ही बना रहा. मै दयनीय परिस्थिति मे था. मैं नही सोचता कि इससे भी बुरा कुछ हो सकती है कि पहले परमेश्वर के साथ नजदीकी रखें और फिर उसे खो दे.
जैसे निराशा मे मै प्रभु को पुकार उठा, पवित्र आत्मा धीरे से मेरे दिल से बात करने लगा, “तुम्हें उन्हें माफ करना होगा. तुम अपने दिल मे कडवाहट रखकर मेरे साथ नजदीकी संबंध नही रख सकते हो.”
मै जानता था कि ये सच है, लेकिन मैंने दर्द महसूस किया – इतना टूटापन. प्रभु जिस व्यक्ति के बारे मे मेरे दिल से बात कर रहा था, उसने मेरे साथ ऐसा कुछ किया था जिससे मै टूट गया था. मै नही सोचता था कि मै उन्हें माफ कर पाउँगा. जब तक मुझे पता नही चला कि उन्होंने क्या किया तब तक मै उन्हें प्रिय मित्र ही समझता रहा. मैंने परमेश्वर से पूछा, “मै इस व्यक्ति को कैसे माफ कर सकता हूं? तु जानता है कि उन्होंने मेरे साथ क्या किया है?”
परमेश्वर ने फिर मेरे दिल से कहा, “क्या तुम समझते हो कि तुमने मेरे साथ क्या किया है? तुमने मेरे बेटे कि हत्या की है. रोमी या यहूदियों ने उसे क्रूस पर नही चढाया. वो अपनी मदत के लिए स्वर्गदूतों की दस सेनाओं को बुला सकता था कि उसे क्रूस से नीचे उतारे. तेरे ही पापों ने उसे क्रूस पर चढाया था. तेरे पापों ने उसे मार दिया. और मैंने तुझे माफ किया. जैसे मैंने तुझे माफ किया है, तु इस व्यक्ति को माफ कर सकता है.”
मै बहुत कायल हुआ. मैंने तुरंत ही प्रार्थना की, “पिता, मै इस व्यक्ति को माफ करता हूं.” तुरंत ही उस एकांत जगह पर परमेश्वर की उपस्थिति खोली गई. परमेश्वर ने मुझ से मुलाकात की. मुझ मे उस व्यक्ति को माफ करने की शक्ति नही थी, लेकिन परमेश्वर ने किया. परमेश्वर ने मुझे माफ किया था, और मुझे बस इतना ही करना था कि अपनी आत्मा कि गहराई मे जाना था और विश्वास से वो अनुग्रह निकलना था जो उसने वहाँ रखा था. जब मै परमेश्वर के अनुग्रह और माफी के कुएं की गहराई मे उतरा, तब मैंने जाना “उसका अनुग्रह ही काफी है.” मै उस व्यक्ति को माफ कर पाया.
कडवाहट और किसी को नुकसान नही पहुंचाती है, केवल उसे ही पहुंचाती है जो उसे थामे रहता है. ये वो शान्त रहनेवाला चोर है जो परमेश्वर के साथ हमारी नजदीकी को चुराता है. हम हमारे मन मे कडवाहट छिपकर रखते हुए कभी परमेश्वर के साथ नजदीकी संबंध नही रख सकते है.
इसलिए यीशु ने अपने चेलों को ये प्रार्थना करनी सिखाई, “जैसे हम अपने अपराधियों को माफ करते हैं, वैसे ही हमारे अपराधों को माफ कर” (मत्ती ६:१२). हम परमेश्वर की उपस्थिति को जानते हुए एक ही समय मे कडवे नही हो सकते हैं. हम कडवाहट रखकर प्रार्थना मे सामर्थी नही हो सकते हैं. हमें वही चुनना चाहिए जो हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण है – परमेश्वर की सामर्थ और उपस्थिती या क्रोध और कडवाहट. इस चुनाव का परिणाम ही परमेश्वर के साथ आपकी संगती की गहराई निश्चित करेगी.
मत्ती 18 :23 -35
23इसलिये स्वर्ग का राज्य उ
| Day 51 |
स राजा के समान है, जिस ने अपने दासों से लेखा लेना चाहा।
24जब वह लेखा लेने लगा, तो एक जन उसके साम्हने लाया गया जो दस हजार तोड़े धारता था।
25जब कि चुकाने को उसके पास कुछ न था, तो उसके स्वामी ने कहा, कि यह और इस की पत्नी और लड़के बाले और जो कुछ इस का है सब बेचा जाए, और वह कर्ज चुका दिया जाए।
26इस पर उस दास ने गिरकर उसे प्रणाम किया, और कहा; हे स्वामी, धीरज धर, मैं सब कुछ भर दूंगा। 27तब उस दास के स्वामी ने तरस खाकर उसे छोड़ दिया, और उसका धार क्षमा किया।
28परन्तु जब वह दास बाहर निकला, तो उसके संगी दासों में से एक उस को मिला, जो उसके सौ दीनार धारता था; उस ने उसे पकड़कर उसका गला घोंटा, और कहा; जो कुछ तू धारता है भर दे।
29इस पर उसका संगी दास गिरकर, उस से बिनती करने लगा; कि धीरज धर मैं सब भर दूंगा।
30उस ने न माना, परन्तु जाकर उसे बन्दीगृह में डाल दिया; कि जब तक कर्ज को भर न दे, तब तक वहीं रहे। 31उसके संगी दास यह जो हुआ था देखकर बहुत उदास हुए, और जाकर अपने स्वामी को पूरा हाल बता दिया। 32तब उसके स्वामी ने उस को बुलाकर उस से कहा, हे दुष्ट दास, तू ने जो मुझ से बिनती की, तो मैं ने तो तेरा वह पूरा कर्ज क्षमा किया। 33सो जैसा मैं ने तुझ पर दया की, वैसे ही क्या तुझे भी अपने संगी दास पर दया करना नहीं चाहिए था? 34और उसके स्वामी ने क्रोध में आकर उसे दण्ड देने वालों के हाथ में सौंप दिया, कि जब तक वह सब कर्जा भर न दे, तब तक उन के हाथ में रहे। 35इसी प्रकार यदि तुम में से हर एक अपने भाई को मन से क्षमा न करेगा, तो मेरा पिता जो स्वर्ग में है, तुम से भी वैसा ही करेगा॥
Book of the Month
Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe. For all other books…
सेमी टिपित सेवकाई के विषय में
एसटीएम लगभग 50 वर्षों से दुनिया भर में प्रेरणा और सहायता प्रदान कर रहा है। सैमी टिपित इसके संस्थापक और अध्यक्ष है, वह एक विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता, शिक्षक और सुसमाचार के प्रचारक हैं जो 80 से अधिक देशों में लोगों की सेवा करने और उनकी सहायता करने का अनुभव रखते हैं। सैमी ऐसी सामग्री प्रदान करते है जो लोगों को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुद्दों से निपटने में मदद करती है। वह विशेष रूप से दुनिया भर के अन्य देशों के लिए सामग्री सुलभ बनाने के बारे में भावुक है। सैमी ने डेबरा “टेक्स” टिपित से शादी की है, और उनके दो बच्चे और पांच नाती पोते हैं। सैमी टिपित सेवकाई पंजीकृत 501c3 गैर-लाभकारी संगठन है।
सम्पर्क करें: info@sammytippit.org
सर्वाधिकार सुरक्षित
