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परमेश्वर की पवित्रता के प्रतिउत्तर में प्रार्थना
प्रार्थना की जो विधी यीशु ने अपने शिष्यों को सिखाई वह आज हम कम ही देखते हैं। उसने उन्हें सिखाया कि पहले परमेश्वर को और फिर उसके राज्य को ढूँढे और फिर अपनी आवश्यकताएँ उसके पास लाएँ। अधिकतर लोग इसके बिलकुल विपरीत विधी से प्रार्थना करते हैं। हम परमेश्वर से कहते हैं कि वह हमारी आवश्यकताओं को पूरा करे। फिर हम दूसरों के लिए प्रार्थना करते हैं और इसके बाद यदि हमारे पास कोई समय बचता है तो तब हम उसे धन्यवाद देते और उस पर ध्यान लगाते हैं। परन्तु जो प्रार्थना यीशु ने सिखाई वह भिन्न थी।
उसने सिखाया कि पहले हम परमेश्वर के मुख को खोजें और फिर हम दूसरों के लिए प्रार्थना करें और अन्त में अपनी आवश्यकताओं को उसके पास लाएँ। यीशु ने हमे सिखाया कि सबसे पहले हम अपनी सबसे मूलभूत आवश्यकताओं को परमेश्वर के सामने लाएँ जैसे कि हमारी प्रतिदिन की रोटी। फिर उसने सिखाया कि हम अपनी गहनतम आवश्यकताओं को उसके पास लाएँ और जीवन में हमारी गहनतम आवश्यकता क्या है?
क्षमा। मनुष्य के हृदय की इससे गहरी आवश्यकता और कोई नहीं है। इसीलिए यीशु ने अपने शिष्यों को इस प्रकार से प्रार्थना करना सिखाया, “हमारे अपराध हमें क्षमा कर जैसे कि हम भी अपने अपराधियों को क्षमा करते हैं” (मत्ती 6:12)। हमें दूसरों को क्षमा करने और क्षमा पाने की आवश्यकता है। यह दोनो बातें आपस में गुंथी हूई हैं।
प्रार्थना वास्तव में परमेश्वर के स्वभाव और चरित्र को हमारा प्रतिउत्तर है, और परमेश्वर का स्वभाव क्या है? वह पवित्र है। वह पूर्णतः शुद्ध है। उसमें कोई धब्बा नहीं है। वह पूर्णतः सिद्ध है। उसकी अपनी एक श्रेणी है। वह बाकी सारी सृष्टि से अलग है क्योंकि वह सृष्टिकर्ता है। इसलिए जब हम परमेश्वर को इस रीति से देखते हैं तो केवल तभी हम स्वयं को और अपने जीवन में क्षमा पाने और क्षमा करने की गहरी आवश्यकता को देख पाते हैं।
परमेश्वर के महान पुरूष और स्त्रियों के जीवनों का अध्ययन कीजिए। उन सब ने परमेश्वर को उसकी पवित्रता में जाना। उनके जीवनों में परमेश्वर की जो शक्ति थी वह उनके हृदयों में परमेश्वर की पवित्रता की मीठी सुगन्ध का फल था। इससे पहले कि मूसा चिह्न, अचम्भे और चमत्कार देखता उसे अपने पाँव के जूते उतारने पड़े क्योंकि वह पवित्र भूमि पर खड़ा था। उस भूमि के पवित्र होने का कारण यह था कि वहाँ परमेश्वर उपस्थित था।
इससे पहले कि यहोशू विजयी हुआ, परमेश्वर ने उसके दिल और दिमाग को अपनी पवित्रता के प्रति खोला। युगों-युगों से यही कहानी रही है। पुरुष और स्त्रियाँ परमेश्वर से मिलते और फिर वह पहले जैसे नहीं रह जाते। यशायाह ने स्वर्गदूतों को यह पुकारते सुना, “पवित्र, पवित्र, पवित्र है सेनाओं का यहोवा: सारी सृष्टि उसकी महिमा से परिपूर्ण है (यशायाह 6:3)। वह इसके अलावा और कुछ कह ही नहीं पाया, “मुझ पर हाय! क्योंकि मैं नाश हुआ; क्योंकि मैं तो अशुद्ध होठों वाला मनुष्य हूँ और मैं अशुद्ध होठों वाले लोगों के मध्य में रहता हूँ: क्योंकि मेरी आँखों ने राजा, सेनाओं के यहोवा को देख लिया है (पद 5)।”
हम खोखले अंगीकार के समय में जी रहे हैं क्योंकि हमारी दृष्टि एक पवित्र परमेश्वर से हट गई है। जब हम उसे उसकी पवित्रता में देखते हैं तो हम भी यशायाह, पौलुस, मूसा और परमेश्वर के अन्य पुरुष और स्त्रियों के संग मिलकर यही पुकारेंगे, “हे परमेश्वर, मुझे मेरे पापों और अपराधों के लिए क्षमा कीजिए। मुझ पर दया कीजिए। मैं बिलकुल भी आप के समान नहीं हूँ।” ऐसा अंगीकार हमारे हृदयों की गहनतम आवश्यकता है और केवल यीशु ही इस आवश्यकता को पूरा कर सकता है।
यहेजकेल 20;40;42
40क्योंकि प्रभु यहोवा की यह वाणी है कि इस्राएल का सारा घराना अपने देश में मेरे पवित्र पर्वत पर, इस्राएल के ऊंचे पर्वत पर, सब का सब मेरी उपासना करेगा; वही मैं उन से प्रसन्न हूंगा, और वहीं मैं तुम्हारी उठाई हुई भेंटें और चढ़ाई हुई उत्तम उत्तम वस्तुएं, और तुमहारी सब पवित्र की हुई वस्तुएं तुम से लिया करूंगा।
41जब मैं तुम्हें देश देश के लोगों में से अलग करूं और उन देशों से जिन में तुम तितर-बितर हुए हो, इकट्ठा करूं, तब तुम को सुखदायक सुगन्ध जान कर ग्रहण करूंगा, और अन्य जातियों के साम्हने तुम्हारे द्वारा पवित्र ठहराया जाऊंगा। 42और जब मैं तुम्हें इस्राएल के देश में पहुंचाऊं, जिसके देने की शपथ मैं ने तुम्हारे पूर्वजों से खाई थी, तब तुम जान लोगे कि मैं यहोवा हूँ।
Book of the Month
Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe. For all other books…
सेमी टिपित सेवकाई के विषय में
एसटीएम लगभग 50 वर्षों से दुनिया भर में प्रेरणा और सहायता प्रदान कर रहा है। सैमी टिपित इसके संस्थापक और अध्यक्ष है, वह एक विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता, शिक्षक और सुसमाचार के प्रचारक हैं जो 80 से अधिक देशों में लोगों की सेवा करने और उनकी सहायता करने का अनुभव रखते हैं। सैमी ऐसी सामग्री प्रदान करते है जो लोगों को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुद्दों से निपटने में मदद करती है। वह विशेष रूप से दुनिया भर के अन्य देशों के लिए सामग्री सुलभ बनाने के बारे में भावुक है। सैमी ने डेबरा “टेक्स” टिपित से शादी की है, और उनके दो बच्चे और पांच नाती पोते हैं। सैमी टिपित सेवकाई पंजीकृत 501c3 गैर-लाभकारी संगठन है।
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