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प्रार्थना और विश्वास
१९६५ मे यीशु का बिलकुल नया अनुयायी था, और परमेश्वर की भलाई और महानता के लिए मै रोमांचित हो जाता था. उस समय, मै चर्च के जीवन का आदि नही था और बाइबल भी बहुत कम जानता था. मसीही जीवन एक महान रोमांन्च था जिस मे मैने अभी शुरुवात ही की थी. मै जिस विश्वास का अनुभव कर रहा था, उसके स्वभाव के बारे मे अधिक जानकारी न रहते हुए भी मै विश्वास से जीना सीख रहा था.
जब मसीह मेरे जीवन मे आया तब मै लुसियाना यूनिवर्सिटी मे पढ़ रहा था. मैंने तुरंत ही जाना कि प्रभु ने मेरे जीवन पर बुलाहट रखी है कि मै संसार के देशों मे उसके उद्धार की घोषणा करूं. दो रात बाद मैंने अपना जीवन महान लक्ष्य के लिए समर्पित किया. मैंने महसूस किया कि मुझे स्टेट यूनिवर्सिटी छोडकर मसीही स्कुल मे जाकर पढ़ना होगा ताकि मै बाइबल के बारे मे अधिक जानकारी पा सकूं. इसलिए मै उस स्टेट के एक छोटे से बैपटीस्ट कॉलेज मे आ गया.
मसीही स्कुल मे पढते हुए, मै गांव के एक छोटे चर्च मे गया और वहाँ Manley Beasley नाम के प्रचारक को सुना. वो विश्वास के विषय पर सिखा रहें थे. मै अपने विश्वास की कमी के बारे मे इतना कायल हुआ कि मै पूरा संदेश सुनने के लिए रुक नही सका. संदेश के बिच ही मै चर्च से बाहर चला आया. एक पुराने पेड़ के नीचे के पार्किंग लॉट मे, मै परमेश्वर को पुकार उठा, “हे परमेश्वर, मै नही जानता कि वो व्यक्ति किस तरह के विश्वास के बारे मे कह रहा था. लेकिन मै विश्वास का जन बनाना चाहता हूं. मुझे हर चीज़ के लिए तुझ पर विश्वास करना सिखा.”
परमेश्वर के लिए ज्यादा समय नही लगा कि वो मुझे अपने विश्वास की स्कुल मे ले जाएं. स्टेट यूनिवर्सिटी मे पढाई करते हुए मेरे लिए दो स्कॉलरशिप चुकी गई थी. लेकिन मसीही स्कुल में मेरी मदत के लिए कोई नही था. लेकिन मै जानता था कि प्रभु ने मुझे वहाँ बुलाया है. मुझे याद है कि मैंने प्रार्थना कर प्रभु से माँगा कि मुझे दिखा कि मेरी पढाई के लिए मै धन कैसे चुका सकूं. अगले ही दिन मै एडमिनिस्ट्रेशन रूम गया और पूछा कि मेरा बिल कितना है. उस बहन ने मेरी फाइल मे देखा और कहा, “कुछ नही.”
मै चकित हो गया, “ऐसा नही हो सकता है.” मैंने कहा, “आपका कहना क्या है? जरूर कोई न कोई गलती हुई होगी.”
उस प्रिय बहन ने मेरे रेकॉर्डस मे देखा और फिर मुझे ऐसा कुछ बताया जिससे मै और भी चकित हो गया. उसने कहा, “द सैमी टीपीट स्कॉलरशिप फंड ने इस के लिए चुकाया है.”
मैंने पूछा, “क्या सैमी टीपीट स्कॉलरशिप फंड?”
फिर उसने कहा, “यहां किसी का नाम नही है.”
मै उस ऑफिस से बाहर आया और अपने कमरे मे दौडकर गया. मै अपने घुटनों पर गिरकर परमेश्वर की आराधना यहोवा-यिरे के रूप मे करने लगा. परमेश्वर मुझे विश्वास मे चलना और जीना सिखा रहा था. इस अनुभव से और मेरे शुरूवाती मसीही जीवन के ऐसे ही अनुभव के द्वारा ही मैंने विश्वास मे चलना सिखा. यदि मै अपने मसीही जीवन की शुरवात मे विश्वास से जीना नही सिखा होता तो मै विश्वास नही करता कि आज मै जो भी कर रहा हूँ उसे कर पाता.
इब्रानियों का लेखक कहता है, “विश्वास के बिना परमेश्वर को प्रसन्न करना अनहोना है, क्योंकि परमेश्वर के पास आनेवाले को विश्वास करना है कि वो है और वो अपने खोज्नेवालों को प्रतिफल देता है” (इब्रानियो ११:६). जब यीशु ने प्रार्थना के बारे मे कहा, उसने अकसर उसे विश्वास के साथ जोड़ा. यदि हम सच मे प्रभु को प्रसन्न करना चाहते हैं तो हमें प्रार्थना करनी चाहिए… विश्वास मे प्रार्थना. कुछ भी हो वो यहोवा-यिर है.
Matthew : Chapter 21
18) Early in the morning, as Jesus was on his way back to the city, he was hungry. 19) Seeing a fig tree by the road, he went up to it but found nothing on it except leaves. Then he said to it, “May you never bear fruit again!” Immediately the tree withered. 20) When the disciples saw this, they were amazed. “How did the fig tree wither so quickly?” they asked. 21) Jesus replied, “Truly I tell you, if you have faith and do not doubt, not only can you do what was done to the fig tree, but also you can say to this mountain, ‘Go, throw yourself into the sea,’ and it will be done. 22) If you believe, you will receive whatever you ask for in prayer.”
Book of the Month
Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe. For all other books…
सेमी टिपित सेवकाई के विषय में
एसटीएम लगभग 50 वर्षों से दुनिया भर में प्रेरणा और सहायता प्रदान कर रहा है। सैमी टिपित इसके संस्थापक और अध्यक्ष है, वह एक विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता, शिक्षक और सुसमाचार के प्रचारक हैं जो 80 से अधिक देशों में लोगों की सेवा करने और उनकी सहायता करने का अनुभव रखते हैं। सैमी ऐसी सामग्री प्रदान करते है जो लोगों को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुद्दों से निपटने में मदद करती है। वह विशेष रूप से दुनिया भर के अन्य देशों के लिए सामग्री सुलभ बनाने के बारे में भावुक है। सैमी ने डेबरा “टेक्स” टिपित से शादी की है, और उनके दो बच्चे और पांच नाती पोते हैं। सैमी टिपित सेवकाई पंजीकृत 501c3 गैर-लाभकारी संगठन है।
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