Enter your keyword

एक विजयी के समान दोड़ना

दौड़ जिस में हमें दौड़ना है, धीरज से दौड़ें।

शिष्यता का दैनिक वीडियो

राज्य के अनुसार प्रार्थना

मती ६:९

सैमी : डेव  मुझे आपके साथ बात करने में बहुत ही आशीष मिली है,  और यह बहुत ही आशीष का कारण रहा है कि मैं आपके साथ प्रार्थना के विषय में बात कर पाया हूं।  कि हम कैसे लोगों को प्रार्थना के लिए उत्साहित कर सकते हैं और कैसे हम एक दूसरे के लिए प्रार्थना में उन्हें उत्साहित कर सकते हैं।

डेव बटस : यह वास्तव में बहुत ही आनंद की बात रही है।

सैमी : हां यह वास्तव  में बहुत ही अच्छा था और मैं अपनी बात को आगे करना चाहता हूं।  पिछली बार जब हम बात कर रहे थे तो हम बात कर रहे थे कि हमें आराधना में ध्यान लगाना चाहिए जब यीशु  ने अपने शिष्यों को प्रार्थना करना सिखाया तो उन्होंने द्वार को खोला आकर हम सब से पहले परमेश्वर के ऊपर ध्यान लगाएं, और फिर उसके पश्चात हम संसार की ओर जाए “तेरा राज्य आए, तेरी इच्छा जैसे स्वर्ग में पूरी होती है, पृथ्वी पर भी पूरी हो”

ਡੇਵ: यह सही बात है।

सैमी:आइए हम इस के विषय में बात करते हैं कि इसका क्या अर्थ है, जब उसने अपने शिष्यों को ये सिखाया, “तेरा राज्य आए और तेरी इच्छा पृथ्वी पर पूरी हो”?

डेव: आप जानते हैं कि मैं सच में विश्वास करता हूं कि यह  प्रभु की प्रार्थना का केंद्र है। यह राज्य के लिए प्रार्थना करना   है। यही यीशु का संदेश है और हर स्थान जहां पर वह गया  वहां पर उसने यही संदेश दिया कि स्वर्ग  का राज्य निकट है, परमेश्वर आपके बीच में चल रहा है, राजा जहां पर है, और अंततः यही यीशु के राज्य के विषय में है।  यह इसके विषय में है कि राजू क्या है यह किसी राजनीतिक राज्य के विषय में नहीं है यह किसी दिन किसी स्थान के विषय में नहीं है।  यह यीशु का लोगों के जीवन में अभी जो उसका राज्य  है उसके विषय में है।

किसी दिन यह सभी देशों को ले लेगा।  परंतु अभी यह राज्य  इस पृथ्वी के ऊपर है।  और उसके लिए हमें बुलाया गया है।  यहां आज्ञा दी गई है कि हम राज्य की प्रार्थना करें अक्सर ही हमारी प्रार्थना जो हैं वह उस राज्य और परमेश्वर के शासन की जगह पर किसी और बात के विषय में होती हैं ।  जब लोग पूछना शुरु करते हैं ठीक है आप कैसे प्रार्थना करते हैं कि तेरा राज्य आए,  पृथ्वी पर जैसे स्वर्ग में है।  मेरा प्रश्न है आप क्या सोचते हैं कि स्वर्ग में क्या चल रहा है?  मेरा अर्थ है कि  जो येशु ने सिखाया कि हमें कैसे प्रार्थना करनी चाहिए।

सैमी: ठीक है

डेव: “तेरा राज्य  यहां पर हो जैसे स्वर्ग में हो रहा है।  स्वर्ग में हर जन पिता के साथ सही सबंध में है।  स्वर्ग में कोई भी विरोध नहीं है।  प्रत्येक जन सही रिश्ते में है।  और मेरे लिए एक हिस्सा जब मैं राज्य की प्रार्थना करता हूं,  यह है कि मैं देखूं,  प्रत्येक जान जो इस ग्रह के ऊपर है, वह प्रभु यीशु को मुक्ति दाता के रुप में जान ले।

यह मुझे पिता के साथ वास्तविक रिश्ते में ले जाता है। राज्य की प्रार्थना का सबंध सुसमाचार के राज्य की प्रार्थना के साथ है। परंतु दूसरी  मैं देखता हूं,  जिसकी  प्रकाशित वाक्य में एक झलक जो मैं देखता हूं और दूसरी स्थानों पर मैं देखता हूं,  कि प्रत्येक जन एक ही काम करने में व्यस्त है जिसमें पिता ने उन्हें लगाया हुआ है।  प्रत्येक स्वर्गदूत  के पास एक काम है जिसके ऊपर वह लगा हुआ है और वह सब कुछ पिता के उद्देश्य के अनुसार काम करने में लगे हुए हैं। क्या आप जानते हैं कि यदि मैं एक कलीसिया का पासवान होता और हर पास्वान  वही कार्य करता  जिसके लिए वह बुलाया गया है,  जिसके वरदान उसे दिए गए हैं।  और यदि यह होता तो मैं इसे एक जाग्रति कहता।

सैमी: हाँ

डेव: मैं सफर में ईश्वर का एक अदभुत आंदोलन कहूंगा जो मसीही लोगों के सोए हुए शरीर में जागृति लेकर आता है। अब मैं सभी उस काम में लग जाते हैं जिसके लिए पिता ने उन्हें बुलाया है और इसलिए मैं कहता हूं कि जाग्रति के लिए प्रार्थना एक महत्वपूर्ण बात है और इस बात का अर्थ है, “तेरा राज्य आए तेरी इच्छा अभी जहां पर पूरी हो जाए”।

ਸੈਮੀ: ठीक है आए हम इसे थोड़ा सा तोड़कर पेश करते हैं।  ठीक है।

ਡੇਵ: ਬਿਲਕੁਲ।

सैमी: तो आप जो कह रहे थे उस का प्रथम हिस्सा है कि हम इस बात का यकीन बनाना चाहते हैं कि मैं इसे अच्छी तरह से समझ गया हूं कि आप यह प्रार्थना कर रहे हैं हैं कि लोग जिसमें हर एक व्यक्ति और इंसान आता है,  वह मसीह  के राज्य  और शासन को अपने हृदय में जान लेंगे ।

डेव: बिलकुल

सैमी: इसलिए जो मैं देख रहा हूं अथवा सुन रहा हूं जिन्होंने अपने दिनों को कभी भी खोला है,  उन्होंने मसीह को अनुमति नहीं दी है कि वह उनके जीवन का पूर्ण नियंत्रण ले ले।  और यह आप प्रार्थना कर रहे हैं क्या यह सही है?

डेव:बिल्कुल यह परमेश्वर का पृथ्वी के ग्रह के ऊपर राज्य,  एक व्यक्तिगत रीति से होता है जब यीशु  हमारा मुक्तिदाता और प्रभु बन जाता है।

सैमी: ठीक है दूसरी बार जिसके विषय में आप बात कर रहे हैं कि परमेश्वर उन लोगों के जीवन में कार्य करता है।  जो मसीह  को इस  रीती से जान लेते हैं और उनके जीवन इस रीति से चलते हैं कि वह उन को ले और उन्हें इस्तेमाल करे कि उसकी महिमा उनके जीवन को भर दे और वह संसार के बीच में परमेश्वर के लिए महिमा और स्तुति और आदर का कारण बन जाएं।  क्या यह सही है?

डेव: एक देखने वाले के स्थान पर कि वह मात्र देखता रह जाए और राज्य में थोड़ी सी रुचि ले और यह कहे  “ठीक है,  मैं हैरान  हूं,  कि यह क्या चल रहा है!” हम परमेश्वर के सहभागी बन जाते हैं और जो परमेश्वर इस पृथ्वी पर कर रहा है। हमारे बीच में एक जाग्रति आ जाती है उसके द्वारा हम सभ्यताओं को बदल देते हैं और इसे प्रभावित करते हैं और इसी को जागृति कहते हैं।

सैमी:हाँ

डेव: तो इसलिए जब मैं प्रार्थना करता हूं,  तेरा राज्य आए।  एक व्यवहारिक रीति से इस बात को समझने की आवश्यकता है कि हम किस बात के विषय में बात कर रहे हैं और यह बहुत बड़ी बात है या कुछ ऐसा है जो जीवन को बदलने जा रहा है। लाखों जीवन बदलने जा रहे हैं।  ना सिर्फ वह लोगों के जीवन को बदलने जा रहा है जो यही यीशु  को नहीं जानते हैं।  वरन वह उनके जीवन को भी बदलने जा रहा है जिन्होंने उसे जान लिया है, परंतु अब तक वह सिर्फ देखने वाले थे,  परंतु अब वह सहभागी बनने  जा रहे हैं।

सैमी:या फिर वह बहुत निराश थे।

डेव: बिल्कुल सही।

सैमी: अथवा हम  उससे दूर थे और आप वहां उसके पश्चात  वापस आ रहे हैं एक बात जो राज्य की प्रार्थना के विषय में है,  जब मैंने पहली बार इस अध्याय को पढ़ा  और जब मैंने इसके ऊपर मनन किया, उस समय मैं जर्मनी में रह रहा था । और वहां आ राजा हुआ करते थे अमेरिका में हमारे पास राजाओं का इतिहास नहीं है।

डेव: नहीं

सैमी: परंतु यूरोप में राजा थे,  और मध्य पूर्व में भी राजा थे।  संसार के बहुत से स्थानों में राजा रहा करते थे।

डेव: ठीक है

सैमी: यीशु राजा और उन राजाओं में एक अंतर है वह एक दयालु राजा है।

डेव: सही बात है

सैमी: वह एक प्रेम करने वाला राजा है।  वह हमें उस बात में ले जाता है कि जहां से हम ने शुरु किया था । जब परमेश्वर का राज्य आपके हृदय में आता है। हम अपने आप लोगों से प्रेम करना शुरु कर देते हैं। हम लोगों को ऐसे ही प्रेम करते हैं जैसे हमने पहले कभी नहीं किया था। आइए मैं आपको एक उदाहरण देता हूं, मेरा एक मित्र है जो वो मोटरसाइकिल की दुर्घटना में मारा गया।  वह और उसकी पत्नी यीशु को प्रेम करते थे।

वह बहुत महान होते पर प्रार्थना के बहुत बड़े योद्धा थे। मैं मेरे साथ यात्रा किया करते थे और वह कुछ बच्चों को गोद लेना चाहते थे। अफ्रीका में सड़कों पर अनाथ बच्चों को क्योंकि मैं बच्चों से बहुत प्रेम करते थे। उनका एक दयालु राजा था जो उनके हृदय में रह रहा था और जब वह पति मर गया तो उसकी पत्नी विधवा हो गई।  और वह बहुत ही गरीब विधवा थी,  जिसके पास बहुत पैसा नहीं था।  परंतु उसका हृदय अभी भी उन बच्चों से प्रेम करता था।  वह अभी भी उन बच्चों के लिए प्रार्थना किया करती थी और प्रभु से कहती थी के प्रभु उनको उन सड़कों वाली परिस्थिति से बाहर निकाल दे।

प्रभु ने उसके हृदय से बात की  और उससे कहा,  कि मैं यह तेरे द्वारा करूंगा मैं अपने राज्य को तेरे द्वारा बहाल करूंगा।

उसने एक अनाथ आश्रम शुरू कर दिया। अब वह बच्चे कॉलेज में ग्रेजुएट हो रहे है। जिनके पास खाने को खाना नहीं था कपड़े नहीं थे,  घर नहीं था,  अब उनके पास सब कुछ है। वह स्कूलों में जा रहे हैं और उनमें से कुछ कॉलेज में पढ़ते हैं और यह सब इसलिए हुआ,  क्योंकि उसने प्रार्थना की और परमेश्वर ने उसको  देखा और मैं सोचता हूं कि यह राज्य की प्रार्थना है।  और यह देखना है कि परमेश्वर के हृदय में क्या है,  और हमारा हृदय उसके हृदय के कब्जे में आ जाता है । फिर हम उसके हृदय के अनुसार प्रार्थना करना शुरू कर देते हैं हैं।

डेव: बिल्कुल सही यह  एक मौलिक तरह की प्रार्थना है।  यह  ना सिर्फ हमारी  बाहर वाली परिस्थितियों को बदलती है, परंतु यह हमें भी बदल देती है।  वह औरत जिसके विषय में आप बात कर रहे हैं,  वह विधवा औरत है और उसका उत्तर यह है कि तू यह कर! मैं तुझे कुछ देना चाहता हूं,  जिसके द्वारा मैं अपने  प्रेम को  बच्चों के जीवन में एक वास्तविकता बनाना चाहता हूं।

जब हम प्रार्थना करते हैं,  तेरा राज्य आए। तो ना सिर्फ उसके राज्य को  दूसरों के जीवन में देखते हैं, और शायद हम उन्हें इस ग्रह के दूसरी और रहने वाले लोगों में देखेंगे।  परंतु हम अपने जीवन में भी इसे देखते है।  क्योंकि हमारे जीवन उस राजे के  प्रेम के द्वारा भर  गए हैं,  जो बहुत ही अलग है,  जैसे आपने पहले कहा था कि वह दूसरे राजाओं से भिन्न है और वह हमारे पास यह मांग नहीं करता,  कि हम उस के दास बन जाए।  परंतु वह हमें बुलावा देता है कि हम उसके राज्य में आ जाए और वह हमें एक अद्भुत सोभाग्य प्रदान करता है कि हम इस इतिहास में उसके साथ हो जाए।

सैमी: आप जानते हैं मसीही लोगों की  एक की सबसे बड़ी जो अलोचना हुई है वह यह है कि हम सामाजिक रीति से लोगों के जीवन में शामिल नहीं हुए हैं । परंतु यदि आप महान जागृतियों के इतिहास को देखें तो उस समय जब परमेश्वर का राज्य आया, जब परमेश्वर का आत्मा का चलन हुआ तो वहां पर समाजिक आंदोलन भी शुरू हुए।

डेव: यह सही बात है

सैमी: क्योंकि परमेश्वर यीशु लोगों के हृदय में राज्य करने लग गया और लोगों ने दूसरों की प्रवाह करनी शुरू कर दी।  क्योंकि उनका दिल यह था कि मैं सोचता हूं कि गुलामी को खत्म करने वाली जो लहर थी,  जो वेस्सलि और विल्बरफोर्स के द्वारा आई थी कि उन्होंने लोगों को देखा और उन्होंने सोचा कि हम कैसे इनकी आवश्यकताओं को पूरा कर सकते हैं और कैसे उन्होंने लोगों को स्वतंत्र करा दिया। क्योंकि उन्होंने परमेश्वर के राज्य का अनुभव अपने जीवन में किया और सबसे शक्तिशाली प्रार्थना जो हम कर सकते हैं वह यह है:  परमेश्वर तेरा राज्य आए,  तेरी इच्छा हमारे हृदय में वैसे पूरी हो जाए जैसे स्वर्ग में पूरी होती है। पिता तेरा राज्य आए तेरी इच्छा मेरे हृदय में पूरी हो जाए,  मेरे परिवार में , मेरे पड़ोसी के जीवन में, मेरे शहर में,  मेरे राष्ट्र में भी यह पूरी हो जाए,  जैसे स्वर्ग में पूरी होती है।  और परमेश्वर अद्भुत कार्य करेगा।

25इसलिये मैं तुम से कहता हूं, कि अपने प्राण के लिये यह चिन्ता न करना कि हम क्या खाएंगे? और क्या पीएंगे? और न अपने शरीर के लिये कि क्या पहिनेंगे? क्या प्राण भोजन से, और शरीर वस्त्र से बढ़कर नहीं?

26आकाश के पक्षियों को देखो! वे न बोते हैं, न काटते हैं, और न खत्तों में बटोरते हैं; तौभी तुम्हारा स्वर्गीय पिता उन को खिलाता है; क्या तुम उन से अधिक मूल्य नहीं रखते।

27तुम में कौन है, जो चिन्ता करके अपनी अवस्था में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है

28और वस्त्र के लिये क्यों चिन्ता करते हो? जंगली सोसनों पर ध्यान करो, कि वै कैसे बढ़ते हैं, वे न तो परिश्रम करते हैं, न कातते हैं।

29तौभी मैं तुम से कहता हूं, कि सुलैमान भी, अपने सारे विभव में उन में से किसी के समान वस्त्र पहिने हुए न था।

30इसलिये जब परमेश्वर मैदान की घास को, जो आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा वस्त्र पहिनाता है, तो हे अल्पविश्वासियों, तुम को वह क्योंकर न पहिनाएगा?

31इसलिये तुम चिन्ता करके यह न कहना, कि हम क्या खाएंगे, या क्या पीएंगे, या क्या पहिनेंगे?

32क्योंकि अन्यजाति इन सब वस्तुओं की खोज में रहते हैं, और तुम्हारा स्वर्गीय पिता जानता है, कि तुम्हें ये सब वस्तुएं चाहिए।

33इसलिये पहिले तुम उसे राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी।

Book of the Month

Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe.  For all other books…

सेमी टिपित सेवकाई के विषय में

एसटीएम लगभग 50 वर्षों से दुनिया भर में प्रेरणा और सहायता प्रदान कर रहा है। सैमी टिपित  इसके संस्थापक और अध्यक्ष है, वह एक विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता, शिक्षक और सुसमाचार के प्रचारक हैं जो 80 से अधिक देशों में लोगों की सेवा करने और उनकी सहायता करने का अनुभव रखते हैं। सैमी ऐसी सामग्री प्रदान करते  है जो लोगों को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुद्दों से निपटने में मदद करती है। वह विशेष रूप से दुनिया भर के अन्य देशों के लिए सामग्री सुलभ बनाने के बारे में भावुक है। सैमी ने डेबरा “टेक्स” टिपित  से शादी की है, और उनके दो बच्चे और पांच नाती पोते हैं। सैमी टिपित सेवकाई पंजीकृत 501c3 गैर-लाभकारी संगठन है।

सम्पर्क करें: info@sammytippit.org

सर्वाधिकार सुरक्षित