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प्रार्थना और अधीनता का जीवन
कई साल पहले, मैने Norilsk, Siberia की यात्रा की थी, ताकि उस शहर में प्रचार करू जिसे स्टेलिन के राज्य के दौरान मजदूर गुलामों द्वारा बनाया गया था. उस समय, इस पुराने शहर में उस समय केवल कुछ ही विश्वासी थे. लेकिन फिर भी मैंने सेवा की हुई ये सबसे अदभूत सभाओं में से एक थी.
बुरा वातावरण होने के बावजूद भी, स्थानिक फुटबाल स्टेडियम इतिहास में हम ने सबसे बड़ी सभा की. मेरे संदेश के अंत में सबसे अद्भुत बात हुई. जैसे मैंने लोगों को मसीह के पास आने के लिए न्योता दिया, उन में से ९५% लोगों ने प्रतिउत्तर दिया. मै जो देख रहा था उस पर विश्वास नही कर पाया. जैसे वो मंच तक आने के लिए आगे बढ़ रहे थे, मैंने उन्हें रुकने के लिए कहा. मैंने एक बार फिर उन्हें बताया की यीशु पर विश्वास करना और उस के पीछे चलने का क्या अर्थ है. वो फिर भी आते ही रहे.
सभा खत्म होने के बाद एक जर्नलिस्ट ने मुझे से पूछा, “मिस्टर तीपीट, क्या आप विश्वास करते है कि हमारा शहर शाप में है? बहुत से लोग विश्वास करते है कि हमारा शहर शाप में है क्योंकि लोग इस शहर को बनाते समय जेल के कैंप में ही मर गए. आप क्या सोचते हैं?
आश्चर्य में मेरा प्रतिउत्तर उन के लिए था. मैंने कहा, “नही, मुझे विश्वास नही कि आप का शहर शाप में है, मै विश्वास करता हूँ कि ये आशीष में है.”
उस बहन ने चकित होकर कहा, “लेकिन ये कैसे हो सकता हैं?”
तब मैंने समझाकर बताया, “ये शहर बनाते समय जो लोग मरे वो विश्वासी थे, मै सहमत होता हूँ कि जैसे वो सड़कों की बुनियाद रख रहे थे, उन्होंने प्रार्थना की होगी, “हे परमेश्वर, मै मांगता हूँ कि इस सड़क पर चलनेवाले हर व्यक्ति पर तू अपना उद्धार प्रकट कर.” जैसे वो अपार्टमेंट और ऑफिस की बुनियाद रख रहे थे, मै सहमत हूँ की उन्होंने प्रार्थना की होगी, “मै प्रार्थना करता हूं कि इस अपार्टमेंट में सोनेवाले और ऑफिस में काम करनेवाले हर व्यक्ति पर तू खुद को प्रकट कर.”
फिर मैंने सीधा उस जर्नलिस्ट की आखों में देखकर कहा, “आज वो दिन है जब प्रभू ने उन प्रिय लोगों की प्रार्थनाओं का उत्तर दिया है. इसलिए ये शहर आशीष में है – उन स्त्री और पुरुषों की प्रार्थनाओं की आशीष जो परमेश्वर के लिए पुरे समर्पण में जी रहे थे.
अवश्य ही मै जो कह रहा था उसे उस जर्नलिस्ट के सामने साबित करने के लिए मेरे पास कोई सबूत नही थे. कुछ भी हो, कुछ महीनों बाद मैंने कुछ अद्भुत सत्य सीखें. Moldova के जवान लोगों को एक समूह जो उस सुसमाचार की सभा की तयारी करने के लिए हमारे पहले वहाँ गया था. मैंने ये सिखा कि इन जवान लोगों में से बहुत से लोगों के दादा-दादी को मसीह में उन के विश्वास के कारण उन्हें इन गुलामों के कैंप में भेजा गया था.
क्या ये अद्भुत नही? उन भक्तिपूर्ण लोगों ने अपनी प्रार्थनाओं का उत्तर कभी नही देखा. लेकिन परमेश्वर ने उनके नाती-पोती को खड़ा किया, और उन्होंने परमेश्वर की महिमा देखी और अपने पूर्वजों की प्रार्थनाओं का उत्तर पाया.
परमेश्वर उन स्त्री और पुरुषों को खोज रहा है जिनका दिल पूरी तरह से उसका है. जब उसे ऐसे लोग मिल जाते हैं, वो उन की प्रार्थनाओं का उत्तर देने के लिए आकाश और पृथ्वी को हिला देता है. जिन लोगों का दिल उस के लिए पूरी तरह से समर्पित है, वो उनकी प्रार्थनाओ का उत्तर देने के लिए मनुष्य के इतिहास को बदल देता है. प्रार्थना जिसे समर्पित दिल के साथ जोड़ा गया है वो परमेश्वर के स्त्री और पुरुषों के लिए सामर्थी हथियार है.
परमेश्वर का वचन नही बदला. ये कहता है, “यहोवा की दृष्टि सारी पृथ्वी पर इसलिए फिरती रहती है कि जिनका मन उसकी ओर निष्कपट रहता है, उनकी सहायता में वह अपनी सामर्थ दिखाए” (२ इतिहास १६:९). वो अभी भी अपने लिए पुरे समर्पित दिल खोजता है.
2 ਇਤਹਾਸ 16 :7-9
7उस समय हनानी दर्शी यहूदा के राजा आसा के पास जा कर कहने लगा, तू ने जो अपने परमेश्वर यहोवा पर भरोसा नहीं रखा वरन अराम के राजा ही पर भरोसा रखा है, इस कारण अराम के राजा की सेना तेरे हाथ से बच गई है।
8क्या कूशियों और लूबियों की सेना बड़ी न थी, और क्या उस में बहुत ही रथ, और सवार न थे? तौभी तू ने यहोवा पर भरोसा रखा था, इस कारण उसने उन को तेरे हाथ में कर दिया।
9देख, यहोवा की दृष्टि सारी पृथ्वी पर इसलिये फिरती रहती है कि जिनका मन उसकी ओर निष्कपट रहता है, उनकी सहायता में वह अपना सामर्थ दिखाए। तूने यह काम मूर्खता से किया है, इसलिये अब से तू लड़ाइयों में फंसा रहेगा।
Book of the Month
Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe. For all other books…
सेमी टिपित सेवकाई के विषय में
एसटीएम लगभग 50 वर्षों से दुनिया भर में प्रेरणा और सहायता प्रदान कर रहा है। सैमी टिपित इसके संस्थापक और अध्यक्ष है, वह एक विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता, शिक्षक और सुसमाचार के प्रचारक हैं जो 80 से अधिक देशों में लोगों की सेवा करने और उनकी सहायता करने का अनुभव रखते हैं। सैमी ऐसी सामग्री प्रदान करते है जो लोगों को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुद्दों से निपटने में मदद करती है। वह विशेष रूप से दुनिया भर के अन्य देशों के लिए सामग्री सुलभ बनाने के बारे में भावुक है। सैमी ने डेबरा “टेक्स” टिपित से शादी की है, और उनके दो बच्चे और पांच नाती पोते हैं। सैमी टिपित सेवकाई पंजीकृत 501c3 गैर-लाभकारी संगठन है।
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