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स्तुति और आराधना – उसकी उपस्थिति मे प्रवेश करना

ये ६० के दशक मे बिच की बात है. मै एक नया विश्वासी था, और हर आत्मिक बात मुझे गहराई से ताजगी देती थी. मुझे याद है कि मै एक भाई का रेकॉर्ड अलबल सुनता था जो मसीह की मृत्यु और उसका हमारे लिए क्या अर्थ होता है इसके बारे मे गाते थे. मै परमेश्वर के प्रेम से रोमांचित हो जाता था. जिस परमेश्वर ने संसार को बनाया; जिसने तारों को ब्रम्हांड मे लटकाया, ये महान और सामर्थी परमेश्वर मुझ से इतना प्यार करता है कि उसने मेरे पापों के लिए मरने के लिए अपना पुत्र दे दिया. मै इस विचार से ही भावुक हो जता था.

मै इतना ज्यादा रोमांचित हो जाता था कि अपनी डॉरमेट्री रूम से निकलकर, पास ही के तालाब के निकट जाकर प्रार्थना मे समय बिताता था. जैसे मै प्रार्थना करता था, तब परमेश्वर से कुछ चीज़ मांगने के कोई विचार नही थे. मै केवल उसकी स्तुति और आराधना करना चाहता था. उसकी उपस्थिति मेरे दिल को भर देती थी. मै शाम का अधिकतर समय उसकी उपस्थित में आराम करने मे बिताता था. कई दशक बाद, लगभग अभी भी मैं उन पलों की खुशबु सुंध सकता हूँ.

जब हम स्तुति और आराधना के द्वारा उसके साथ अपने नजदीकी समय मे प्रवेश करते हैं तब स्तुति उत्साहजनक होती है. सच मे, मै जिस कॉलेज मे पढता था वहाँ मुझे सबसे बुरा गानेवाले दूसरे व्यक्ति के रूप मे वोट किया गया. मेरे मुंह से निकलनेवाली आवाज़ सुननेवालों के लिए भयानक थी. फिर भी जब मै प्रभु की स्तुति करता था, ये उसके कानों के लिए सुंदर धुन थी. उसकी सन्तान उसकी अराधना का गीत गा रही हैं ये उसे पसंद है.

जब हम अपने प्रार्थना का समय स्तुति और आराधना के द्वारा शुरू करते हैं, तब हम परमेश्वर के साथ निकटता का आनंद खोज निकलते हैं. जब हम उसे “हमारे पिता” के रूप मे खोजना शुरू करते हैं, और वो जो है उसके लिए उसे धन्यवाद देते और उसकी स्तुति करते हैं, कुछ बहुत ही अद्भुत होने लगता है. हमारी प्रार्थना की विधि, विस्फोटक और आत्मा से भरे निवेदन हो जाती है.

शायद इसलिए यीशु ने अपने चेलों को इस तरह प्रार्थना करनी सिखाई. उसने चेलों के साथ परमेश्वर पर ध्यान लगाने के द्वारा प्रार्थना का द्वार खोला. उसने उन्हें प्रार्थना करनी सिखाई, “हे हमारे पिता, तू जो स्वर्ग मे है, तेरा नाम पवित्र माना जाए” (मत्ती ६:९). वो जानता था कि प्रार्थना के गुप्त स्थान मे प्रवेश करने का भेद परमेश्वर की ऊँची स्तुति करने के द्वारा है. इसलिए उसने अपने चेलों को प्रार्थना के समय की शुरुवात स्तुति और आराधना के द्वारा करनी सिखाई.

हम इसी उद्देश के साथ बनाए गए हैं – जिस ने हमें बनाया है, उसे हम जाने, उसे से प्रेम करे और उसकी आराधना करे. प्रार्थना हमे मौका देती है कि हम इसे बहुत ही स्पष्ट और सही तरीके से कर पाएं. परमेश्वर की स्तुति और आराधना करने से बढ़कर और कोई सौभाग्य नही है. जब इस्राएली लोग परमेश्वर की इच्छा मे बने रहते तब ये उनकी विशेषताओं मे से एक थी. जब उन्होंने जागृती का अनुभव किया तब यही हुआ था.

और स्तुति प्रारंभिक चर्च का सबसे बड़ा स्वभावगुण था. बाइबल कहती है, “वे प्रतिदिन एक मन होकर मंदिर मे इकट्ठे होते थे, और घर-घर रोटी तोड़ते हुए आनंद और मन की सिधाई से भोजन किया करते थे, और परमेश्वर की स्तुति करते थे, और सब लोग उनसे प्रसन्न थे, और लोग उद्धार पाते थे, उनको प्रभु प्रतिदिन उनमें मिला देता था”(प्रेरित २:४६-४७). प्रेरित की किताब का चर्च सामर्थी चर्च था क्योंकि वो प्रार्थना करनेवाला चर्च था. लेकिन वो किस तरह की प्रार्थना करनेवाला चर्च था? वो स्तुति करनेवाले लोग थे. ऐसा चर्च प्रभु के दिल को स्पर्श करेगा. और जब प्रभु के दिल को स्पर्श किया जाएगा, सारा स्वर्ग खोल दिया जाएगा. तभी जागृती आती है.

42और वे प्रेरितों से शिक्षा पाने, और संगति रखने में और रोटी तोड़ने में और प्रार्थना करने में लौलीन रहे॥

43और सब लोगों पर भय छा गया, और बहुत से अद्भुत काम और चिन्ह प्रेरितों के द्वारा प्रगट होते थे।

44और वे सब विश्वास करने वाले इकट्ठे रहते थे, और उन की सब वस्तुएं साझे की थीं।

45और वे अपनी अपनी सम्पत्ति और सामान बेच बेचकर जैसी जिस की आवश्यकता होती थी बांट दिया करते थे।

46और वे प्रति दिन एक मन होकर मन्दिर में इकट्ठे होते थे, और घर घर रोटी तोड़ते हुए आनन्द और मन की सीधाई से भोजन किया करते थे।

47और परमेश्वर की स्तुति करते थे, और सब लोग उन से प्रसन्न थे: और जो उद्धार पाते थे, उन को प्रभु प्रति दिन उन में मिला देता था॥

Book of the Month

Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe.  For all other books…

सेमी टिपित सेवकाई के विषय में

एसटीएम लगभग 50 वर्षों से दुनिया भर में प्रेरणा और सहायता प्रदान कर रहा है। सैमी टिपित  इसके संस्थापक और अध्यक्ष है, वह एक विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता, शिक्षक और सुसमाचार के प्रचारक हैं जो 80 से अधिक देशों में लोगों की सेवा करने और उनकी सहायता करने का अनुभव रखते हैं। सैमी ऐसी सामग्री प्रदान करते  है जो लोगों को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुद्दों से निपटने में मदद करती है। वह विशेष रूप से दुनिया भर के अन्य देशों के लिए सामग्री सुलभ बनाने के बारे में भावुक है। सैमी ने डेबरा “टेक्स” टिपित  से शादी की है, और उनके दो बच्चे और पांच नाती पोते हैं। सैमी टिपित सेवकाई पंजीकृत 501c3 गैर-लाभकारी संगठन है।

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