शिष्यता का दैनिक वीडियो
“परमेश्वर को केंद्र बनाकर” प्रार्थना करना
लोग अक्सर बोझिल मन के साथ मेरे पास आते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उनका प्रार्थना जीवन एक रस्म से बढ़कर और कुछ नहीं रह गया है। उन्हें लगता है कि वह परमेश्वर के साथ अपनी घनिष्ठता को खो बैठे हैं अर्थात परमेश्वर के साथ अपनी मीठी संगति और जोश को। उनकी पुकार यह है कि “मैं क्या गलती कर रहा हूँ? मैं प्रार्थना करता हूँ और परमेश्वर से बात करने का प्रयत्न करता हूँ परन्तु लगता है जैसे परमेश्वर बहुत दूर हो गया है।”
इस प्रश्न का कोई सरल उत्तर नहीं है। प्रार्थना के एक दिनचर्या मात्र बनने के कई कारण हो सकते हैं। परन्तु एक बड़ा कारण यह है कि बहुत सारे विश्वासी प्रार्थना के असली अर्थ को भूल गए हैं। प्रार्थना का अर्थ यह नहीं है कि परमेश्वर से कुछ पाने का प्रयत्न करना। प्रार्थना का उद्देश्य है परमेश्वर को और अधिक जानना। यह दो हृदयों की संगति है – परमेश्वर का हृदय और मनुष्य का हृदय। बहुत बार हमारी रूचि परमेश्वर के हृदय से अधिक उसके हाथ में होती है, अर्थात उसके मन को जानने के बजाय उसके हाथ से कुछ पाने में हम अधिक रूचि लेते हैं। बाइबल लगातार प्रार्थना को “परमेश्वर के मुख की खोज करना” कहती है। हममें से अधिकतर लोगों की रूचि हमें समर्पित हृदय से अधिक हमारी ओर बढ़े हाथ में होती है।
बाइबल कहती है, “तुम माँगते हो और पाते नहीं, इसलिये कि बुरी इच्छा से माँगते हो, ताकि अपने भोग विलास में उड़ा दो” (याकूब 4:3)। एक सफल मसीही प्रार्थना में सबसे महत्वपूर्ण चीज़ है प्रार्थना का उद्देश्य। परमेश्वर हमारे हृदयों के उद्देश्यों को देखता है। परमेश्वर वह भी देखता है जो और कोई नहीं देख सकता। वह हमारे हृदयों के गहरे मनोरथों को देखता है। यदि स्वार्थपूर्ण लाभ हमारी प्रेरणा है तो उसके साथ हमारा समय आत्मिक रीति से कमज़ोर होगा। बहुत कम आनन्द होगा और उसकी उपस्थिति और शक्ति का अभाव रहेगा।
दूसरी ओर, जब हम उसे केंद्र बनाकर प्रार्थना करते हैं तो हम उस आनन्द को जानेंगे जो अवर्णनीय है। जब हम उसके हाथ के बजाय उसके मुख की खोज करेंगे तो हम मसीह के साथ घनिष्ठता के आनन्द को फिर से प्राप्त करेंगे। हम उसके साथ संगति का ऐसा अनुभव करेंगे जिस के बारे में हमें पता भी नहीं था।
मैं कभी नहीं भूल सकता जब मैं पहली बार प्रचार के लिए युगाण्डा गया। वहाँ अफ्रीकन रिन्युअल मिनिस्ट्रीज़ के निर्देशक पीटर कासारिवू ने लोगों के साथ मेरा परिचय कराते हुए एक बहुत ही दिलचस्प बात कही। उन्होंने कहा, “भाई सैमी, हमने आपकी आवाज़ टेप के माध्यम से सुनी थी परन्तु आज हमारे लिए बड़े आनन्द की बात है क्योंकि हम आपको आमने-सामने देख रहे हैं।”
पीटर वास्तव में यह कह रहा था, “हम आपको दूर से जानते थे। हमने आपकी आवाज़ और आपके सन्देश सुने हैं। परन्तु आज हम आपके साथ हमारे सम्बन्ध के एक नए दौर में प्रवेश कर रहे हैं। हम आपके साथ अपने हृदय की बातें बाँट सकते हैं और आपके हृदय की बातें सुन सकते हैं। हम अपने सम्बन्ध को और घनिष्ठ बना सकते हैं।”
परमेश्वर हमसे यही चाहता है कि हम उसके मुख को खोजें। वह हमारे साथ एक छिछले सम्बन्ध से बढ़कर कुछ चाहता है। वह अपने हृदय की बातें हमारे साथ बाँटना चाहता है और चाहता है कि हम अपने हृदय की बातें उसके साथ बाँटें। प्रार्थना के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा यही होनी चाहिए। जब ऐसा होता है तो कुछ अद्भुत बातें होने लगती हैं।
जब उसे जानना ही हमारी एकमात्र प्रेरणा होती है तो एक नया आनन्द हमारे प्रार्थना जीवनों में प्रवेश करता है। हम इस घनिष्ठ ज्ञान के साथ प्रार्थना करने लगते हैं कि वह उपस्थित है और अंततः वह हमारे लिए हमारे सोचने और माँगने से बढ़कर करता है। प्रार्थना के पल हमारे दिन के सबसे अद्भुत क्षण बन जाते हैं। इसलिए, अगली बार जब आप प्रार्थना करें तो निश्चित करें कि आपकी प्रेरणा उसको और अधिक जानना हो। उसके मुख की खोज करें और जो होगा उस पर आप हैरान रह जाएँगे।
3तेरा राज्य युग युग का और तेरी प्रभुता सब पीढ़ियों तक बनी रहेगी॥
14यहोवा सब गिरते हुओं को संभालता है, और सब झुके हुओं को सीधा खड़ा करता है। 15सभों की आंखें तेरी ओर लगी रहती हैं, और तू उन को आहार समय पर देता है।
16तू अपनी मुट्ठी खोल कर, सब प्राणियों को आहार से तृप्त करता है।
17यहोवा अपनी सब गति में धर्मी और अपने सब कामों में करूणामय है।
18जितने यहोवा को पुकारते हैं, अर्थात जितने उसको सच्चाई से पुकारते हें; उन सभों के वह निकट रहता है। 19वह अपने डरवैयों की इच्छा पूरी करता है, ओर उनकी दोहाई सुन कर उनका उद्धार करता है।
20यहोवा अपने सब प्रेमियों की तो रक्षा करता, परन्तु सब दुष्टों को सत्यानाश करता है॥ 21मैं यहोवा की स्तुति करूंगा, और सारे प्राणी उसके पवित्र नाम को सदा सर्वदा धन्य कहते रहें॥
Book of the Month
Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe. For all other books…
सेमी टिपित सेवकाई के विषय में
एसटीएम लगभग 50 वर्षों से दुनिया भर में प्रेरणा और सहायता प्रदान कर रहा है। सैमी टिपित इसके संस्थापक और अध्यक्ष है, वह एक विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता, शिक्षक और सुसमाचार के प्रचारक हैं जो 80 से अधिक देशों में लोगों की सेवा करने और उनकी सहायता करने का अनुभव रखते हैं। सैमी ऐसी सामग्री प्रदान करते है जो लोगों को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुद्दों से निपटने में मदद करती है। वह विशेष रूप से दुनिया भर के अन्य देशों के लिए सामग्री सुलभ बनाने के बारे में भावुक है। सैमी ने डेबरा “टेक्स” टिपित से शादी की है, और उनके दो बच्चे और पांच नाती पोते हैं। सैमी टिपित सेवकाई पंजीकृत 501c3 गैर-लाभकारी संगठन है।
सम्पर्क करें: info@sammytippit.org
सर्वाधिकार सुरक्षित
