शिष्यता का दैनिक वीडियो
विजयी मसीही प्रार्थना करना क्या है?
बहुत से विश्वासी प्रभावशाली और फलवंत प्रार्थना का जीवन चाहते हैं. लेकिन फिर भी जब परमेश्वर के साथ उनके वार्तालाप की बात आती है, वो खुद को हारा हुआ देखते हैं. अगर चर्च के सामान्य सदस्यों पुछा जाएं कि वो प्रार्थना में कितना समय बिताते हैं. तो उन में से अधिकतर लोग तो जवाब देने के लिए शर्मिन्दा होगे. ये दोष लगाना नही है. सच्चाई का एक वाक्य है. फिर भी परमेश्वर के साथ नज़दिकी बढाने और उसके साथ निरंतर चलने के लिए प्रार्थना ही कूंजी है
विजयी मसीही प्रार्थना क्या है और हम ऐसे मध्यस्थ कैसे हो सकते हैं? इस प्रश्न के तीन भाग हैं – प्रार्थना क्या है, विश्वासी का प्रार्थना करना क्या है, और विजयी प्रार्थना करना क्या है? हमारी प्रार्थना में विजयी होने के लिए हमें ये जानना जरुरी है प्रार्थना क्या है और क्या नही है. प्रार्थना धार्मिक कर्तव्य नही है. ये कोई नाममात्र विधी नही है, ये परमेश्वर को ऐसे खोजना नही है कि मानो वो कोई आकाश मे रहनेवाला सॅन्टा कलॉज़ है.
शुद्ध शब्दों में, प्रार्थना पिता के साथ नज़दिकी बातचित है. ये केवल यही है कि जो उसे जानते हैं वो उसे और उत्तम रुप में जाने. ये उस परमेश्वर के साथ प्रेमी और सुननेवाला संबंध है जिसने हमें बनाया और हमें उद्धार दिया. प्रार्थना के बारे में ऐसी समझ प्रार्थना के बारे में किसी भी व्यक्ति का दृष्टिकोण बदल देगी और उसे विजयी प्रार्थना करने के लिए योग्य बनाएगी. इसके बिना प्रार्थना कडी मेहनत और काम बन जाती है, इसके बजाए कि वो रोमांचक और विजयी हो. अगली बात है कि परमेश्वर हम में से हरएक से क्या चाहता है.
मै क्रान्ति के बीच चला हूं, गीनोसाईड की कोशिश के बाद, जब देश युद्ध के कारण बिखर गए थे, मैने मुलाकात की मेम्बर्स ऑफ पार्लामेन्ट, सुप्रिम कोर्ट के न्यायाधीश, और प्रधानमंत्री से. लेकिन मै आपको सच बता सकता हूं कि उन में से किसी का अनुभव राजाओं के राजा और प्रभुओं के प्रभु की उपस्थिती मे आने के अनुभव से बढकर नही था. जिसने हमें बनाया है उसके साथ नज़दिकी और अर्थपुर्ण बातचित करने से बढकर और कुछ नही है. इस बारे में सोचिए – परमेश्वर जिसने ब्रम्हांड में पृथ्वी को लटकाया है, जिसने तारों को उनकी जगह पर रखा है, यही परमेश्वर हम से बातचित करना चाहता है -दिल से दिल तक, वाह, इसकी तुलना में कुछ नही है.
प्रार्थना दो दिलों के बीच की बातचित है. इसलिए, फिर भी प्रार्थना करना और मसीही प्रार्थना करने में बहुत फर्क होता है. आज बहुत से लोग असली मसीही प्रार्थना के बजाए केवल धार्मिक काम करनेवाली प्रार्थना ही करते हैं. मुस्लमान प्रार्थना करते हैं. यहूदी प्रार्थना करते हैं. हिन्दू प्रार्थना करते हैं. चर्च के सदस्य प्रार्थना करते हैं. तो फिर विश्वासीयों की प्रार्थना और धार्मिक प्रार्थना में क्या फर्क है? धार्मिक प्रार्थना तो परमेश्वर तक पहुंचने की मनुष्य की कोशिश है. जब कि असली मसीही प्रार्थना तो परमेश्वर का वो मार्ग बनाना है जिसके द्वारा हम उसकी उपस्थिती में आकर उससे संगति कर सकते हैं.
परमेश्वर पूरा पवित्र है. ये किसी भी चिज़ या किसी भी व्यक्ति के लिए असंभव है कि वो पूरे पवित्र परमेश्वर की उपस्थिती में आएं. यीशु केवल इसी कारण के लिए २००० साल पहले क्रुस पर मरा था. जब यीशु क्रुस पर मरा, बाइबल कहती है,”कि उस समय मंदिर का परदा उपर से निचे तक दो भागों मे फट गया” (मत्ती २७:५१). वह परदा जिसमे महा-पवित्र स्थान को पवित्र स्थान से अलग किया था. केवल महा-याजक को ही महा-पवित्र स्थान में जाने की अनुमति थी क्योंकि वो परमेश्वर की महान उपस्थिती का स्थान था. एक पापी मनुष्य पवित्र परमेश्वर की उपस्थिती में प्रवेश नही कर सकता था. लेकिन जब यीशु मरा, उसने हमें हमारे पापों से क्षमा उपलब्ध करवाई और उस पर विश्वास करनेवाले हरएक के लिए शुद्धिकरण का प्रयोजन किया.
इसलिए परमेश्वर के अनुग्रह के द्वारा, हम सर्वशक्तिमान परमेश्वर तक पहुंच सकते हैं. इस बारे में सोचिए. आप और मैं, उस लहू के द्वारा जो यीशु ने क्रुस पर बहाया था, हम उस के द्वारा संसार के सृष्टिकर्ता परमेश्वर की उपस्थिती तक पहूंच सकते हैं. ये मसीही प्रार्थना करना है. परमेश्वर के पास आना – हमारे अपने धार्मिकता के कामों के द्वारा नही – लेकिन उसके अनुग्रह के द्वारा. ये प्रार्थना की पूरी विचारधारा ही बदल देता है. ये ज्यादा समय ड्युटी करने में नही है. ये प्रसन्न रहने में है. ये धर्म नही, लेकिन संबंध है. ये हार नही है – ये विजय है – विजयी मसीही प्रार्थना है.
मत्ती २७:४५-५४
45दोपहर से लेकर तीन बजे तक समस्त पृथ्वी पर अँधेरा छाया रहा। 46लगभग तीन बजे येशु ने ऊंचे स्वर से पुकारा, “एली! एली! लेमा सबकतानी?” अर्थात् “हे मेरे परमेश्वर! हे मेरे परमेश्वर! तूने मुझे क्यों त्याग दिया है?”
47यह सुन कर पास खड़े लोगों में से कुछ बोले, “यह नबी एलियाह को पुकार रहा है।” 48उन में से एक तुरन्त दौड़ कर पनसोख्ता ले आया। उसने उसे अम्लरसमें डुबोया और सरकण्डे में लगा कर येशु को पीने को दिया। 49कुछ लोगों ने कहा, “रहने दो! देखें, एलियाह इसे बचाने आते हैं या नहीं।” 50तब येशु ने फिर ऊंचे स्वर से चिल्ला कर अपना प्राण त्याग दिया।
51उसी समय मन्दिर का परदा ऊपर से नीचे तक फट कर दो टुकड़े हो गया। पृथ्वी काँप उठी। चट्टानें फट गयीं। 52कबरें खुल गयीं और बहुत-से मृत सन्तों के शरीर पुनर्जीवित हो गये। 53वे येशु के पुनरुत्थान के बाद कबरों से निकले और पवित्र नगर जा कर बहुतों को दिखाई दिये। 54शतपति और उसके साथ येशु पर पहरा देने वाले सैनिक भूकम्प और इन सब घटनाओं को देख कर अत्यन्त भयभीत हो गये और बोल उठे, “निश्चय ही, यह परमेश्वर का पुत्र था।”
Book of the Month
Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe. For all other books…
सेमी टिपित सेवकाई के विषय में
एसटीएम लगभग 50 वर्षों से दुनिया भर में प्रेरणा और सहायता प्रदान कर रहा है। सैमी टिपित इसके संस्थापक और अध्यक्ष है, वह एक विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता, शिक्षक और सुसमाचार के प्रचारक हैं जो 80 से अधिक देशों में लोगों की सेवा करने और उनकी सहायता करने का अनुभव रखते हैं। सैमी ऐसी सामग्री प्रदान करते है जो लोगों को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुद्दों से निपटने में मदद करती है। वह विशेष रूप से दुनिया भर के अन्य देशों के लिए सामग्री सुलभ बनाने के बारे में भावुक है। सैमी ने डेबरा “टेक्स” टिपित से शादी की है, और उनके दो बच्चे और पांच नाती पोते हैं। सैमी टिपित सेवकाई पंजीकृत 501c3 गैर-लाभकारी संगठन है।
सम्पर्क करें: info@sammytippit.org
सर्वाधिकार सुरक्षित
