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प्रार्थना और बेदारी : व्यक्तिगत प्रार्थना
बेदारी और प्रार्थना के दूसरे दिन में आपका स्वागत है
आज मैं बेदारी में प्रार्थना की भूमिका और सुसमाचार में प्रार्थना की भूमिका के बारे में बात करना चाहता हूं | हम कल देख चुके हैं कि बेदारी और सुसमाचार आपस में जुड़े हुए हैं और बेदारी वह कार्य है जो परमेश्वर हमारे हृदय में करता है और सुसमाचार वह कार्य है जो वह हमारे जीवन के द्वारा करता है | इस प्रकार जब हम बेदारी से पूर्ण हो जाते हैं तो अपने हृदय को परमेश्वर के हृदय के अनुसार बांटना शुरु कर देते हैं | अब यहां पर एक कारण है और वह कारण यह है की प्रार्थना बेदारी और सुसमाचार प्रचार के साथ जुड़ी हुई है | आइए मैं आपको परिभाषा देता हूं जिससे आपको इसे समझने में सहायता मिलेगी |
सबसे पहले प्रार्थना परमेश्वर के साथ नजदीकी संबंध है, यह दो ह्रदयों की आपस में बातचीत है, यह परमेश्वर और मनुष्य का हृदय है | अब आप क्या सोचते हैं कि इन दोनों में से हमें किस पर ध्यान देना आवश्यक है?
मनुष्य का हृदय जो कि छोटा और पापमय और धोखा देने वाला है जबकि परमेश्वर का हृदय अद्भुत है |
निसंदेह – यह परमेश्वर का हृदय है और इसीलिए प्रार्थना हमें परमेश्वर की उपस्थिति में ले आती है ताकि हम उसके हृदय को जान लें कि वह क्या चाहता है | अब यह वो अवस्था होती है जिसमें हमारे हृदय में बेदारी आ जाती है जब हमारा हृदय परमेश्वर के हृदय के अनुसार होता है | कल हम देख चुके हैं कि परमेश्वर का हृदय प्रेमी हृदय है और वह लोगों से प्रेम करता है |
यह जानना बहुत ही रोचक है कि यदि आप बेदारी इतिहास को पढें तो आप देखेंगे कि यह समय कटनी का सबसे महान समय था ———- जब लोग मसीह के पास आए | और लोग तब मसीह के पास आए जब आत्मिक बेदारी आई और आत्मिक बेदारी तब आती है जबपूर्ण हृदय से प्रार्थना होती है |
हमेशा कुछ लोगों का एक छोटा सा समूह हो रहा है : और जैसे ही उन लोगों ने प्रार्थना शुरू की और परमेश्वर को तलाश किया और परमेश्वर ने कार्य किया सब लोगों के जीवन बदल गए और पूरे समाज और कई देश मसीह के लिए जीत लिए गए |
असल में अमेरिका में हमारे पास आत्मिक बेदारियों का एक महान इतिहास है | हमारे पास और भी कई देशों की साक्षीयां हैं जहां पर परमेश्वर ने महान कार्य किए मैंने स्वयं अपने जीवन में परमेश्वर द्वारा एक देश परिवर्तित होते हुए देखा है मैंने रोमानिया को बदलते देखा है |
यह सब 1970 में हुआ जब ओलिवियो नामक एक पासटर था | मसीही लोगों को सताया जा रहा था उन्होंने अपने विश्वास के लिए बहुत कष्ट उठाए यह | अंधकार और मुश्किलों से पूर्ण समय था | पर पास्टर ओलिवियो ने लोगों को बताना शुरू किया “मैं तुम्हें प्रार्थना करने की चुनौती देता हूं” और उसने उन्हें अलग रीति से प्रार्थना करना सिखाया उसने कहा कि “प्रार्थना करो कि 1 दिन हम इस महान देश के खेल स्टेडियम में खड़े होकर सुसमाचार प्रचार करेंगे “ |
लोगों ने कहा कि पास्टर यह असंभव है ……. यह कभी नहीं हो सकता…….. क्यों ………हम तो सताए जा रहे हैं, हमारी नौकरियां जा रही हैं …. हमें जेल में डाला जा रहा है | कुछ लोग तो अपने विश्वास के कारण मारे भी जा चुके हैं | इसलिए पास्टर यह कैसे हो सकता है?”
उसने कहा “ मनुष्य के लिए यह संभव है पर परमेश्वर के लिए सब कार्य संभव है ! आप सिर्फ प्रार्थना करो !”
लोगों ने प्रार्थनाएं की और परमेश्वर ने कार्य किया और कार्य भी बड़ी सामर्थी रीति से किया | मैं शेष कहानी कभी फिर बताऊंगा पर मैं यही कहना चाहता हूं कि उस प्रयास से पूरा देश बदल गया और पूरे देश में स्वतंत्रता आ गई क्योंकि एक आदमी ने प्रार्थना की और लोगों को प्रार्थना करना सिखाया | एक बात और वह कलीसिया पूरे यूरोप में सुसमाचार प्रचार कलीसिया में सबसे बड़ी बैप्टिस्ट कलीसिया है |
उन्होंने प्रार्थना की और परमेश्वर ने बेदारी भेजी | उन्होंने एक बड़ी कटनी होते हुए देखी और बहुत से लोग मसीह के पास आ गए | प्रार्थना हमेशा बेदारी से पहले होती है और बेदारी के समय फसल की बड़ी कटनी होती है |
इसलिए मैं आपको उत्साहित करता हूं कि आप परमेश्वर के समक्ष प्रार्थना करें कि वह आपके कार्य जीवन और परिवार में कार्य करें | वह आपके गांव और कलीसिया में भी कार्य करें जब आप प्रार्थना करेंगे तो परमेश्वर आपको आशीष देगा और महान कार्य करेगा |
मत्ती २३:२३-२६
23“ढोंगी शास्त्रियो और फरीसियो! धिक्कार है तुम्हें! तुम पुदीने, सौंफ और जीरे का दशमांश तो देते हो, किन्तु धर्म-व्यवस्था की मुख्य बातों − न्याय, करुणा और विश्वास की उपेक्षा करते हो। तुम्हारे लिए उचित तो यह था कि तुम इन्हें करते रहते और उन को भी नहीं छोड़ते! 24अन्धे पथ-प्रदर्शको! तुम मच्छर को तो छान देते हो, किन्तु ऊंट को निगल जाते हो।
25“ढोंगी शास्त्रियो और फरीसियो! धिक्कार है तुम्हें! तुम कटोरे और थाली को बाहर से तो माँजते हो, किन्तु भीतर वे लूट-खसौट और असंयम से भरे हुए हैं।26अन्धे फरीसी! पहले भीतर से कटोरे को साफ कर, जिस से वह बाहर से भी साफ हो जाए।
Book of the Month
Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe. For all other books…
सेमी टिपित सेवकाई के विषय में
एसटीएम लगभग 50 वर्षों से दुनिया भर में प्रेरणा और सहायता प्रदान कर रहा है। सैमी टिपित इसके संस्थापक और अध्यक्ष है, वह एक विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता, शिक्षक और सुसमाचार के प्रचारक हैं जो 80 से अधिक देशों में लोगों की सेवा करने और उनकी सहायता करने का अनुभव रखते हैं। सैमी ऐसी सामग्री प्रदान करते है जो लोगों को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुद्दों से निपटने में मदद करती है। वह विशेष रूप से दुनिया भर के अन्य देशों के लिए सामग्री सुलभ बनाने के बारे में भावुक है। सैमी ने डेबरा “टेक्स” टिपित से शादी की है, और उनके दो बच्चे और पांच नाती पोते हैं। सैमी टिपित सेवकाई पंजीकृत 501c3 गैर-लाभकारी संगठन है।
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