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एक विजयी के समान दोड़ना

दौड़ जिस में हमें दौड़ना है, धीरज से दौड़ें।

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प्रार्थना का उद्देश

जब मै प्रार्थना के अपने सबसे महान पल के बारे मे सोचता हूँ, जरूरी नही कि मै उस पल के बारे मे सोचूं जहां प्रभु ने मुझे असाधारण उत्तर दिए. प्रार्थना के सबसे महान पल तब आए जब मै साधारण रूप मे और शांति से प्रभु से मिला. वो समय उस परमेश्वर के साथ नजदीकी का पल था जिसने मुझे बनाया और मुझे उद्धार दिया. ये शान्ति के ऐसे पल थे जब मैंने केवल इस पर मनन किया कि वो कौन है और उसने क्या किया है.

प्रार्थना का एक महान पल तब आया जब मै केप-टाऊन, दक्षिण अफ्रीका मे था, जब मै चट्टान पर बैठकर सागर की तरफ कई घंटों तक देखता रहा और एक शब्द भी नही कहा. मै परमेश्वर की महानता की श्रध्दा मे बैठा था. एक बार तब हुआ जब मै नया विश्वासी था, जब हर सुबह मै प्रभु वचन याद करता था, और परमेश्वर के प्रेम की महानता के बारे मे चकित हो जाता था. एक और समय था जब मेरे डॉक्टर ने मुझे दो हफ्तों तक नही बोलने के लिए कहा था. मेरी पत्नी और मै ग्रैंड कैनयोन गए और वह एक हफ्ता बिताया, “स्थिर होकर ये जाना कि वो ही परमेश्वर है.”

वो पल सच मे बहुत ही विशेष थे, और मै अभी भी उसकी उपस्थिति की खुशबु सूंघ सकता हूँ. उन मीटिंग्स के कई साल बाद भी वो मेरे साथ ही बनी हैं. ये पल मेरे लिए इतने बहुमूल्य है क्योंकि वो प्रार्थाना के स्वभाव और उद्देश का सार बताते हैं. सच मे प्रार्थना क्या है, इस बारे मे बहुत से लोग गलत-धारण या उथला दृष्टिकोण रखते हैं. बहुत से विश्वासी परमेश्वर को किसी “सैनटा क्लाज” के रूप मे देखते है. वो परमेश्वर के पास केवल कुछ मांगने के लिए ही जाते हैं, उसे जानने के लिए कभी नही जाते हैं. मुझे गलत न समझे. हम जो मांगते या सोचते है, परमेश्वर हमें उसे बहुत बढ़कर देगा. वो बहुत ही उदार परमेश्वर है, जो अपनी सन्तान को भेंट देता है.

परमेश्वर हमारा पिता है. वो चाहता है कि हम उसे बहुत ही नजदीकी से जाने. वो हमारे साथ संगती करना चाहता है. जब हम इसे समझते हैं, तब हम प्रार्थना का स्वभाव और उद्देश समझने लगते हैं. तब प्रार्थना बहुत ही अर्थपूर्ण होती है. ये हमारी भावनात्मक इच्छा को उससे आत्मिक नज़दीकी मे बदलता है.

एक जवान शास्त्री ने यीशु से पूछा कि सबसे महान आज्ञा क्या है. यीशु ने कहा, “अपने प्रभु परमेश्वर से अपने पूरे हृदय और पुरे प्राण से और पूरे मन से प्रेम रखना” (मत्ती २२:३६). परमेश्वर ने हमे बनाया और हमें उद्धार दिया ताकि हम उससे प्यार करे. फिर भी, हम जिसे नही जानते हैं, उससे प्यार नही कर सकते. किसी व्यक्ति को जानने के लिए, हमें उन के साथ समय बिताना होगा. प्रार्थना यही है. हमारे साथ उत्तम समय बिताने का यही प्रभु का तरीका है.

यदि मै आप से पुछू, “क्या आप सच मे परमेश्वर से प्यार करते है?” मै निश्चित ही जानता हूँ कि आप कहेगे, “जी हाँ,  मै परमेश्वर से प्यार करता हूँ.” लेकिन आपका जवाब क्या होगा, यदि मै आप से पुछु, “क्या आप उसके साथ उत्तम समय बिता रहें हैं? क्या आपका उसके साथ नजदीकी का सम्बंध है?” मै अपनी पत्नी और बच्चों से प्यार करता हूँ. उसके कारण, उनके साथ बिताने के लिए कुछ समय अलग रखता हूँ. जब आप किसी से सच्चा प्यार करेगे, तो आप उसके लिए समय निकालेगे. आप उनके साथ रहना चाहेगे, केवल उन से कुछ पाने के लिए नही. जब आप प्रार्थना का सही उद्देश जानेगे और उसका अनुकरण करेगे, आनेवाले कई सालों तक उसकी खुशबु आपके साथ बनी रहेगी.

मत्ती २२:३४-४०

34जब फरीसियों ने यह सुना कि येशु ने सदूकियों का मुँह बन्‍द कर दिया है, तब वे इकट्ठे हो गये 35और उन में से एक व्‍यवस्‍था के आचार्य ने येशु की परीक्षा लेने के लिए उन से पूछा, 36“गुरुवर! व्‍यवस्‍था-ग्रन्‍थ में सब से बड़ी आज्ञा कौन-सी है?” 37येशु ने उस से कहा, “ ‘अपने प्रभु परमेश्‍वर को अपने सम्‍पूर्ण हृदय, सम्‍पूर्ण प्राण और सम्‍पूर्ण बुद्धि से प्रेम करो।’ 38यह सब से बड़ी और पहली आज्ञा है। 39दूसरी आज्ञा इसी के सदृश है : ‘अपने पड़ोसी को अपने समान प्रेम करो।’40इन्‍हीं दो आज्ञाओं पर समस्‍त व्‍यवस्‍था और नबियों की शिक्षा अवलम्‍बित है।”

Book of the Month

Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe.  For all other books…

सेमी टिपित सेवकाई के विषय में

एसटीएम लगभग 50 वर्षों से दुनिया भर में प्रेरणा और सहायता प्रदान कर रहा है। सैमी टिपित  इसके संस्थापक और अध्यक्ष है, वह एक विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता, शिक्षक और सुसमाचार के प्रचारक हैं जो 80 से अधिक देशों में लोगों की सेवा करने और उनकी सहायता करने का अनुभव रखते हैं। सैमी ऐसी सामग्री प्रदान करते  है जो लोगों को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुद्दों से निपटने में मदद करती है। वह विशेष रूप से दुनिया भर के अन्य देशों के लिए सामग्री सुलभ बनाने के बारे में भावुक है। सैमी ने डेबरा “टेक्स” टिपित  से शादी की है, और उनके दो बच्चे और पांच नाती पोते हैं। सैमी टिपित सेवकाई पंजीकृत 501c3 गैर-लाभकारी संगठन है।

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