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एक विजयी के समान दोड़ना

दौड़ जिस में हमें दौड़ना है, धीरज से दौड़ें।

शिष्यता का दैनिक वीडियो

परमेश्वर प्रयोजन करता है ।

 लुका २४:४५

सैमी  टिप्त :  मैं सीखने के स्तर के पहले  हिस्से में आपका स्वागत करता हूं।  अब वह लोग जो प्रभु यीशु के पीछे चलते थे उन लोगों को चेले कहा जाता था।  और  सीखने वाले कहा जाता था।  उन्हें छात्र भी कहा जाता था।  वह सीख रहे थे।  और अब हम जो सीख रहे हैं वह ना सिर्फ यीशु के विषय में है परंतु  यीशु को सीख रहे हैं। हम उसके जैसे बनना चाहते हैं।

हमारे पास उसका स्वभाव होना चाहिए,  हमारे पास उसका चरित्र चाहिए।  हम यीशु जैसे बनने के विषय में सीखने जा रहे हैं।    जो बात यीशु के विषय में सबसे महत्वपूर्ण थी वह था उसका प्रार्थना का जीवन।  इसीलिए हम सीखने वाले पहले स्तर और सेक्शन में यह सब इंटरव्यू लेने जा रहे हैं।  और मैं कुछ इंटरव्यूज डेव बटस  के साथ लेने जा रहा हूं, मैं अमेरिका राष्ट्र की प्रार्थना कमेटी के चेयरमैन हैं।

हम प्रार्थना के विषय में बात करने जा रहे हैं।  एक काम जो के जिलों के जीवन में हुआ जब उन्होंने यीशु के पीछे चलना शुरु किया,  वह था उन्होंने उसे चमत्कार करते हुए देखा,  उन्होंने देखा कि वह बीमारों को चंगा करता है।  उन्होंने देखा कि वह पानी से दाखरस बना देता है।  उन्होंने देखा कि वह मुर्दे  जिला देता है।  उन्होंने  उसे विचित्र कार्य करते हुए देखा।  पर उन्होंने  उसे यह कभी नहीं कहा, “  प्रभु हमें सिखाते हम पानी से दाखरस बना सकें ,  हमें सिखाते हम बीमार चंगे कर सकें,  हमें सिखाते हम मुर्दे जिला सकें”  परंतु उन्होंने कहा, “प्रभु हमें प्रार्थना करना सिखा”
हम जानते हैं कि प्रार्थना ही है जो वह करता है उसका वह भेद  है।  इसीलिए पहले सेक्स भी मैं क्या करना चाहता हूं कि मैं प्रार्थना के विषय में परिचय देना चाहता हूं कि वह कितना ही महत्वपूर्ण है।    वास्तव   उन्होंने उसे मात्र यही नहीं कहा,  कि  वह  प्रार्थना करना सिखाए, परंतु यीशु के स्वर्ग उठाए जाने से पहले उसने उनसे कहा कि वह यरुशलम में ठहरे रहे।  उस ने उन्हें एक प्रार्थना  सभा में रख दिया।

यह नए चेले, पहली सदी के चेले,  पहली बात जो  उन्होंने सीखी,  जब वह  उन्हें छोड़ कर  गया कि वह प्रभु का इंतजार करें।  सबसे महान बात जो आप सीखेंगे जो मैं सोचता हूं कि यीशु के पीछे चलने के विषय में है कि आप अपने मसीही जीवन को अपनी सामर्थ के द्वारा जी नहीं सकते हैं।  यह आपकी सामर्थ के द्वारा नहीं है।  यह  आप की शक्ति के  द्वारा नहीं है।  अथवा आप कितने महान हैं इसके द्वारा भी नहीं है। परंतु यह इस बात के विषय में है कि परमेश्वर क्या कर सकता है इसीलिए आपको प्रभु का इंतजार करना सीखना होगा।

अब मैंने पाया है कि लोग प्रार्थना करने में संघर्ष क्यों करते हैं क्योंकि वह पूरी तरह से यह नहीं समझते हैं कि प्रार्थना क्या है।  बहुत सी बातें हैं,  कुछ लोग सोचते हैं, “ मैं अपना समय नष्ट कर रहा हूं”  मैं आपको पहले ही कहना चाहता हूं कि आप अपना समय नष्ट नहीं कर रहे हैं।  जब आप परमेश्वर के साथ अकेले होते हैं तो परमेश्वर आपकी सोच से भी बढ़कर कर सकता है।  इसीलिए आप समय नष्ट नहीं कर रहे हैं।

एक और बात जो लोग सोचते हैं, “ मैं कुछ भी नहीं कर रहा हूं।  मुझे कुछ करना चाहिए।”  हां बहुत सारी बातें हैं जो हम मसीही होने के कारण कर सकते हैं।  परंतु मैं आपको अभी बताना चाहता हूं कि यीशु ने अपने चेलों को सबसे बड़ी चुनौती क्या दी।   वह वह चाहता है कि वह पूरे संसार में जाएं और राष्ट्रों को चेला बनाएं।  अब यह लोग तो बहुत ही आम और साधारण लोग थे।

वह कर  लेने वाले थे,  वह मछुआरे थे,  एक शक करने वाला था,  वह यीशु का इनकार करने वाले थे।  मेरा अर्थ है कि वह कोई महान लोग नहीं थे।  वह आम लोग थे जिनके बीच हमारी तरह ही गलतियां हैं।  परंतु यीशु ने उन्हें सबसे महान कार्य के लिए भेज दिया।   परंतु उसने उनसे कहा, “ तुम यरुशलम में तब तक इंतजार करना जब तक तुम ऊपर से सामर्थ नहीं पाते हो”
इसीलिए सीखने के स्तर में हम आपकी मदद करना चाहते हैं कि आप प्रार्थना के जीवन का निर्माण कर सकें।  परमेश्वर के साथ अकेले में समय व्यतीत करना और जब परमेश्वर से मिलते हैं और परमेश्वर आपके साथ मिले।  और और आप उनसे सीखे और वह आपको अपने विषय में सिखाए।  जबमैं नया-नया मसीह में आया था तो एकदम जो मेरे साथ हुआ मैंने एक जगह है ढूँढी  और मैंने परमेश्वर से बात करना शुरू किया। परमेश्वर ने मेरे जीवन में कार्य करना शुरू कर दिया और वह मुझे सिखाने लग गया और मैं बाइबल के वचन को याद करता था।  मैं परमेश्वर से बात करता था और वह मेरे साथ बात करता था। और मेरे तीन और मित्र भी थे और हम चारो जन मिला करते थे राजधानी की इमारत के सामने।  उसके  आगे छोटी सी पहाड़ी थी और हम हर सुबह वहां प्रार्थना किया करते थे।  हम सुबह सुबह वहां जाते थे और प्रभु से मिला करते थे।  और यह बहुत ही अच्छे पल थे और उन्होंने मेरे जीवन में एक रीति को तैयार किया। जब मैं चर्च  का पास्टर बना to मैंने कुछ आदमियों को सिखाना शुरू किया के वर्क कैसे परमेश्वर के साथ चल सकते हैं और सबसे पहली बार जो मैंने उन्हें सिखाई थी वह थी कि वह परमेश्वर के साथ अकेले कैसे समय व्यतीत कर सकते हैं और आप मैं यह कहता हूं कि मैं धार्मिक होने की बात नहीं कर रहा हूं या किसी धार्मिक रीति से प्रार्थना करने की बात नहीं कर रहा मैं जो बात कर रहा हूं वह यह है कि आपके पास एक समय हो जहां पर आप परमेश्वर का सामना कर सके।
इसलिए मैंने उन्हें यीशु की प्रार्थना के सिद्धांतों के विषय में सिखाना शुरू किया,  कि यीशु ने अपने चेलों को कैसे प्रार्थना करना सिखाया और हम भी इन्ही से शुरू करने वाले हैं.  हम प्रार्थना करना सीखेंगे,  कि  प्रार्थना किया है और इस कार्य का निर्माण कैसे किया जा सकता है।  मैं जानता हूं कि हम में से ऐसे बहुत सारे लोग है  जो इस अभियान में है,  शायद आपने कभी लोगों के लिए प्रार्थना नहीं की है,  और उन्होंने बहुत अकेले में प्रार्थना की है और शायद सबसे ज्यादा जो प्रार्थना उन्होंने  की है,  वह यह है कि प्रभु इस खाने  को आशीष दे!  परंतु उन्होंने  प्रार्थना के विषय में सीखना शुरु किया और जो कुछ उन्होंने प्रार्थना के विषय में सीखा तो उससे कुछ हुआ।

उन्होंने दूसरों के साथ मसीह के विषय में बांटना शुरु किया।  और वह दूसरों को मसीह में लाना शुरू हो गए । और इसके विषय में हम दूसरे स्तर के ऊपर बात करेंगे।  जब आप प्रार्थना को सीख जाते हैं और हम आने वाले 13 सप्ताह तक इसके विषय में बात करेंगे,  कि परमेश्वर क्या है और उसके साथ अकेले में समय व्यतीत करने का क्या अर्थ है और हम आपकी सहायता करेंगे कि आप परमेश्वर के साथ अकेले समय व्यतीत कर सकें । परंतु जब आप यह करते हैं तो एक और स्तर भी है जहां पर हम जाएंगे और वह है,  यीशु के विषय में दूसरों के साथ बाँटना।
हम इसे सिखाने वाले का स्तर कहते हैं और हम आशा करते हैं कि ना सिर्फ प्रार्थना करना सीखेंगे परंतु आप मशीह को दूसरों के साथ भी बाँटेंगे। और फिर इन  पुरुषों के साथ कुछ हुआ और एक और काम जो मेरी पत्नी ने किया वह कुछ बहनों की अगुवाई इसी समय के दौरान कर रही थी और वह आगे बड़ने लग गये  और ना सिर्फ उन्होंने दूसरों को मसीह के लिए जीता है परंतु वह चेले  बनाने लग गए और हमारी कलीसिया में बढ़ोतरी होने शुरू हो गई।  हमारी कलीसिया में बढ़ोतरी का एक धमाका हुआ और इसे हम बढ़ोतरी का स्तर कहते हैं।

अभी ४  स्तर है,  सहयोगी का स्तर और यह सब आदमी और औरतें कलीसिया में अगुवे  बन गए और यह इसीलिए नहीं हुआ कि वह अगुवे बनने की कोशिश कर रहे थे, परंतु क्योंकि वह बढ़ गए और वह मसीह में परिपक्व हो गए और उन्होंने परमेश्वर के साथ अकेले समय व्यतीत करना शुरु कर दिया और यह बढ़ोतरी की नींव बन  गया । चार स्तर हैं और हम इस पहले स्तर पर एक और काम करना चाहते हैं।  हम आपकी सहायता करना चाहते हैं कि आप प्रभु के साथ अकेले में समय व्यतीत कर सकें।
यही पहले स्तर का उद्देश्य है।  हम चाहते हैं कि आप के पास समय हो।  हम यह लिखे हुए प्रभु के प्रतिदिन के वचन आपको देने जा रहे हैं , ताकि आप इन्हें  पढ़ सकें और उसके पश्चात कुछ प्रशन होंगे जिनका आपको  उत्तर देना है और प्रतिदिन एक वीडियो लेखन भी होगा और एक शिक्षा होगी और मैं इस क्रिया में किसी की  इंटरव्यू भी लूंगा।  आपको इसमें से होकर जाना  है।
हम कुछ साधारण प्रश्न पूछने जा रहे हैं यह कठिन प्रशन नहीं होंगे।  यह पास होना अथवा  फेल होना नहीं है।  हम कुछ प्रश्न पूछने जा रहे हैं और यह प्रश्न है,  कि परमेश्वर के वचन के द्वारा परमेश्वर ने आपके ह्रदय के साथ क्या बात की?  जो इस लेखन की शिक्षा में थे उसके द्वारा आपके ह्रदय  में क्या हो रहा है?  और जो कुछ आपके ह्रदय में हैं आप उसका उत्तर दे और अपने झुंड में एक दूसरे के साथ बांटे और एक दूसरे को उत्साहित करें।
यदि आप संघर्ष कर रहे हैं तो आप बताएँ, कि  मैं इस बात के साथ संघर्ष कर रहा हूं । आप एक दूसरे को उत्साहित  करेंगे, और एक दूसरे की सहायता करेंगे। यहीं इसका उद्देश्य है।  यहां पर कोई भी ऐसा आदमी बनना नहीं है जो  बहुत ही चतुर है अथवा धर्मज्ञानी बन गया है,  हम इसके विषय में बात नहीं कर रहे हैं।  हम आपकी सहायता कर रहे हैं कि आप प्रभु के साथ अकेले में समय व्यतीत करें।  और हमने यह देखा है यदि आप लगातार से 3 माह  तक करते रहते हैं तो इसके द्वारा आपकी जीवनशैली बन जाएगी और हम चाहते हैं कि यह आपकी जीवनशैली बन जाए।
पहले चेलों  को मार्ग के चेले कहा जाता था।  वह जीवन के मार्ग का पीछा कर रहे थे।  और उनके जीवन का एक हिस्सा यह था  कि वह ऐसे  लोग थे जो परमेश्वर के साथ प्रार्थना में समय व्यतीत करते थे।  यह हम आपको सिखाना चाहते हैं कि आप यह कैसे कर सकते हैं । हमारे पास 13 सप्ताह हैं और एक और बात यह है कि यह मात्र  13 सप्ताह नहीं है । जब आप इन स्तरों में से होकर गुजरेंगे तो  जहां तक आप जाना चाहते हैं वहां तक आप जा सकते हैं । यदि आप प्रथम स्तर पर ही रुक जाना चाहते हैं तो वह भी ठीक है।  परंतु मैं आशा करता हूं कि आप नहीं रुकेंगे।
मैं आशा करता हूं कि आप इन सभी सत्रों में से होकर गुजरेंगे । यह एक महान आशीष होगी, जब आप बढ़ेंगे तो आप दूसरों को मसीह  के विषय में बताएंगे और दूसरों को मसीह में आते हुए देखेंगे और आप उनकी सहायता करेंगे कि वह कैसे मसीह में बढ़ सकते है।  यह आपके लिए आशीष होगी।  परंतु जैसे आप इसे करेंगे वैसे ही आप मसीह में बढ़ेंगे । और हम आपकी सहायता करेंगे।  हमारे पास जहां पर बहुत सी सामग्री  होगी जो कि आपकी मसीह में बड़ने  में सहायता करेगी।
परमेश्वर आपको  इस्तेमाल करेगा और आप अपने जीवन में फलदायक होंगे।  13 सप्ताह है और इसके चार सेट है यह पूरा वर्ष है।  यदि आप 1 वर्ष परमेश्वर के साथ लगातार समय व्यतीत करने में लगाते हैं तो आप प्रार्थना के व्यक्ति बन जाएंगे।  और मेरे मन में इसके विषय में कोई संदेह नहीं है कि आप बढ़ेंगे,  आपका प्रार्थना का जीवन बढ़ेगा  आप वह बन सकेंगे जो परमेश्वर आपको बनाना चाहता है यही उद्देश्य है।  यही आने वाले 13 सप्ताह का उद्देश्य है।

मत्ती १०:२४-२९

24“न शिष्‍य गुरु से बड़ा होता है और न सेवक अपने स्‍वामी से। 25शिष्‍य के लिए अपने गुरु-जैसा और सेवक के लिए अपने स्‍वामी-जैसा बन जाना ही बहुत है। यदि लोगों ने घर के स्‍वामी को बअलजबूल कहा है, तो वे उसके घर वालों को क्‍या कुछ नहीं कहेंगे?

26“इसलिए उन से नहीं डरो। ऐसा कुछ भी गुप्‍त नहीं है, जो प्रकाश में नहीं लाया जाएगा और ऐसा कुछ भी छिपा हुआ नहीं है, जो प्रकट नहीं किया जाएगा।27जो मैं तुम से अंधेरे में कहता हूँ, उसे तुम उजाले में सुनाओ। जो तुम्‍हें कानों में कहा जाता है, उसे तुम छतों पर से पुकार-पुकार कर कहो।

28“उन से नहीं डरो, जो शरीर को मार डालते हैं, किन्‍तु आत्‍मा को नहीं मार सकते; बल्‍कि उससे डरो, जो शरीर और आत्‍मा, दोनों को नरक में नष्‍ट कर सकता है।

29“क्‍या एक पैसे में दो गौरैयाँ नहीं बिकतीं? फिर भी तुम्‍हारे पिता के जाने बिना उन में से एक भी धरती पर नहीं गिरती।

Book of the Month

Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe.  For all other books…

सेमी टिपित सेवकाई के विषय में

एसटीएम लगभग 50 वर्षों से दुनिया भर में प्रेरणा और सहायता प्रदान कर रहा है। सैमी टिपित  इसके संस्थापक और अध्यक्ष है, वह एक विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता, शिक्षक और सुसमाचार के प्रचारक हैं जो 80 से अधिक देशों में लोगों की सेवा करने और उनकी सहायता करने का अनुभव रखते हैं। सैमी ऐसी सामग्री प्रदान करते  है जो लोगों को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुद्दों से निपटने में मदद करती है। वह विशेष रूप से दुनिया भर के अन्य देशों के लिए सामग्री सुलभ बनाने के बारे में भावुक है। सैमी ने डेबरा “टेक्स” टिपित  से शादी की है, और उनके दो बच्चे और पांच नाती पोते हैं। सैमी टिपित सेवकाई पंजीकृत 501c3 गैर-लाभकारी संगठन है।

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