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यहोवा: परमेश्वर, हमारा प्रभु

अफ्रीका जाने का यह मेरा पहला मौका था। महाद्वीप मेरे लिए एक महान रहस्य था, और मेरी यात्रा एक नया रोमांच थी। जब मैंने दक्षिण अफ्रीका के लिए प्रस्थान किया, तो मुझे नहीं पता था कि मैं परमेश्वर को यहोवा अपने प्रभु के रूप ममें जान लूँगा । मैं हर शाम केपटाउन में प्रचार कर रहा था। बाद में, मैं अपने होटल के पास प्रार्थना में समय बिताता था, जो समुद्र के पास था। मैं कुछ चट्टानों पर बैठ जाता और लहरों को उनके विरुद्ध टकराते देखता। मैं परमेश्वर की सामर्थ और महिमा पर अविचलित था।

परमेश्वर के साथ उन क्षणों के दौरान, मैंने उसके स्वभाव और चरित्र पर मनन किया । मैंने इस तथ्य पर विचार किया कि वह है, वह था, और वह हमेशा रहेगा। प्रार्थना के समय का वर्णन करना कठिन है। मेरे पास कुछ महान, अलौकिक अनुभव नहीं है। मुझे न तो दर्शन दिखाई दिए और न ही आवाजें सुनाई दीं। मैं वहीं अकेला बैठ गया। मेरी आत्मा की गहराई में, मेरे पास शाश्वत परमेश्वर की उपस्थिति का गहरा बोध था। मुझे पता था कि मुझे पता है कि वह मेरे पास उपस्थित था – और वह हमेशा रहेगा।

जब केपटाउन में सप्ताह समाप्त हुआ, मुझे पता था कि मैं परमेश्वर के साथ एक नई शुरुआत से शहर छोड़ रहा हूं। मेरे ह्रदय में परमेश्वर ने कुछ खास नहीं किया था। मुझे सिर्फ इतना पता था कि मैं उससे मिला था। नवीनीकरण की शांत भावना ने मेरी आत्मा को भर दिया। मुझे पता था कि वह प्रभु था और मेरे पूरे जीवन का प्रभु होना चाहिए । एक सुसमाचारक मित्र और उपदेशक, माइक गिलक्रिस्ट, देश भर के पास्टरों के साथ बेदारी पर एक सम्मेलन का नेतृत्व कर रहे थे। उन्होंने मुझे सभाओं में उनकी सहायता करने के लिए कहा।

जैसे ही मैं एक दोपहर बोलने के लिए खड़ा हुआ, कुछ बहुत ही खास हुआ। जैसे ही मैंने अपना संदेश बंद किया, पास्टरों का समूह खड़ा हो गया और परमेश्वर का भजन और आराधना करने लगा। जैसे ही उनकी महिमा परमेश्वर के सिंहासन तक पहुंची, पवित्र आत्मा धीरता से समूह पर गिर गया। परमेश्वर की उपस्थिति में पास्टर पिघल गए। कुछ मुंह के बल गिर गए और अपने पापों को स्वीकार करने लगे । कुछ अन्य अगुओं के पास गए और कई बार क्षमा मांगी कि उन्होंने प्रभु में अपने भाइयों को अपसन्न किया । तो भी अन्य लोग बस परमेश्वर की उपस्थिति में खौफ में खड़े थे। लंबे समय के बाद, आगू ने सभा को समाप्त करने का  प्रयास किया, लेकिन ऐसा करने में असमर्थ था।

वे पास्टर पवित्र परमेश्वर से मिले थे, और वे पहले जैसे नहीं रहे । मुझे पता था कि केपटाउन में की गयी प्रार्थना का सीधा संबंध उस पास्टर सम्मेलन में हुआ था। जब हम परमश्वर को अनन्त परमेश्वर के रूप में जानते हैं, तो हम उससे पवित्र परमेश्वर के रूप में भी मिलते हैं। अनन्त परमेश्वर पवित्र परमेश्वर है। जब हम उसे उसकी सामर्थ में जानते हैं, तो हमें यह भी पता चलेगा कि वह नैतिक चरित्र का परमेश्वर है। वह पवित्र – पूर्ण पवित्रता है।

उत्पत्ति की पुस्तक स्पष्ट रूप से परमेश्वर की प्रकृति के दोनों पहलुओं को प्रकट करती है। एलोहिम वह पहला नाम है जिसे बाइबल परमेश्वर के लिए उपयोग करती है। यह हमें व्यक्त करता है कि परमेश्वर सृष्टिकर्ता है। परमेश्वर के लिए उपयोग किया जाने वाला दूसरा नाम यहोवा है। यह हमें दिखाता है कि सृष्टि की रचना करने वाला परमेश्वर, पवित्र परमेश्वर है। हम उत्पत्ति 2: 4 में यहोवा नाम का उपयोग देखना शुरू करते हैं, जो कहता है, “आकाश और पृथ्वी की उत्पत्ति का वृत्तान्त यह है कि जब वे उत्पन्न हुए अर्थात जिस दिन यहोवा परमेश्वर ने पृथ्वी और आकाश को बनाया” इस अंश में परमेश्वर का शब्द इब्रानी शब्द एलोहिम है। लेकिन प्रभु शब्द इब्रानी शब्द यहोवा से आया है। इस प्रकार, आकाश और पृथ्वी को बनाने वाला परमेश्वर ही प्रभु है। वह शाश्वत है। वह पवित्र है।

हम उत्पत्ति 2: 4 के बाद परमेश्वर के लिए उपयोग होने वाले शीर्षक यहोवा को देखते हैं। उत्पत्ति का दूसरा अध्याय परमेश्वर द्वारा मनुष्य के निर्माण की बात करता है। यह लगातार यहोवा नाम का उपयोग करता है। बाइबल स्पष्ट रूप से हमें बताती है कि हमें बनाने वाला परमेश्वर (एलोहिम) भी प्रभु (यहोवा) हैं, जो परम पवित्र हैं।

आदम और हवाह बाग़ में “यहोवा एलोहिम” (प्रभु परमेश्वर) से मिले। उन्हें बनाने वाले परमेश्वर ने भी उन्हें अपने नैतिक अधिकार के अधीन रखा। जब हम परमेश्वर की उपस्थिति में आते हैं, तो हम भी यहोवा एलोहिम से मिलेंगे। आज कई लोग परमेश्वर को शक्तिशाली परमेश्वर के रूप में जानना चाहते हैं, लेकिन उसे पवित्र परमेश्वर के रूप में जानने की कोई इच्छा नहीं है। उसके नैतिक अधिकार के अधीन आए बिना, उसे सामर्थ में मिलना असंभव । क्योंकि एलोहिम यहोवा है।

बेदारी तब आती है जब हम परमेश्वर को अंदरूनी रूप से एलोहिम के रूप में जानते हैं। जब ऐसा होता है, तो हम अपने जीवन पर यहोवा का निशान छोड़ देंगे। हम उसे न सिर्फ अपने सृष्टिकर्ता के रूप में जानेगे, बल्कि उसे हमारे प्रभु के रूप में भी जानेगे । एलोहिम यहोवा है। उसे पूर्ण रूप से जानें और आपका जीवन कभी भी पहले जैसा नहीं रहेगा ।

उत्पति  2:1-9

1 यों आकाश और पृथ्वी और उनकी सारी सेना का बनाना समाप्त हो गया। 2 और परमेश्वर ने अपना काम जिसे वह करता था सातवें दिन समाप्त किया। और उसने अपने किए हुए सारे काम से सातवें दिन विश्राम किया। 3 और परमेश्वर ने सातवें दिन को आशीष दी और पवित्र ठहराया; क्योंकि उस में उसने अपनी सृष्टि की रचना के सारे काम से विश्राम लिया। 4 आकाश और पृथ्वी की उत्पत्ति का वृत्तान्त यह है कि जब वे उत्पन्न हुए अर्थात जिस दिन यहोवा परमेश्वर ने पृथ्वी और आकाश को बनाया: 5 तब मैदान का कोई पौधा भूमि पर न था, और न मैदान का कोई छोटा पेड़ उगा था, क्योंकि यहोवा परमेश्वर ने पृथ्वी पर जल नहीं बरसाया था, और भूमि पर खेती करने के लिये मनुष्य भी नहीं था; 6 तौभी कोहरा पृथ्वी से उठता था जिस से सारी भूमि सिंच जाती थी 7 और यहोवा परमेश्वर ने आदम को भूमि की मिट्टी से रचा और उसके नथनों में जीवन का श्वास फूंक दिया; और आदम जीवता प्राणी बन गया।
8 और यहोवा परमेश्वर ने पूर्व की ओर अदन देश में एक वाटिका लगाई; और वहां आदम को जिसे उसने रचा था, रख दिया। 9 और यहोवा परमेश्वर ने भूमि से सब भांति के वृक्ष, जो देखने में मनोहर और जिनके फल खाने में अच्छे हैं उगाए, और वाटिका के बीच में जीवन के वृक्ष को और भले या बुरे के ज्ञान के वृक्ष को भी लगाया।

Book of the Month

Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe.  For all other books…

सेमी टिपित सेवकाई के विषय में

एसटीएम लगभग 50 वर्षों से दुनिया भर में प्रेरणा और सहायता प्रदान कर रहा है। सैमी टिपित  इसके संस्थापक और अध्यक्ष है, वह एक विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता, शिक्षक और सुसमाचार के प्रचारक हैं जो 80 से अधिक देशों में लोगों की सेवा करने और उनकी सहायता करने का अनुभव रखते हैं। सैमी ऐसी सामग्री प्रदान करते  है जो लोगों को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुद्दों से निपटने में मदद करती है। वह विशेष रूप से दुनिया भर के अन्य देशों के लिए सामग्री सुलभ बनाने के बारे में भावुक है। सैमी ने डेबरा “टेक्स” टिपित  से शादी की है, और उनके दो बच्चे और पांच नाती पोते हैं। सैमी टिपित सेवकाई पंजीकृत 501c3 गैर-लाभकारी संगठन है।

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