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मूसा: विश्वास के अभिवावक
यह अक्सर ऐसा होता है कि भगवान का व्यक्ति महानता प्राप्त करता है क्योंकि उसके विश्वास में अभिवावक थे । मूसा के साथ ऐसा ही था, जिसे हर समय महान व्यक्ति माना जाता है। तौ भी वह कभी भी वह नहीं बन सका जो वह प्रार्थना और भले अभिवावक के विश्वास के बिना था। बाइबल कहती है, “विश्वास ही से मूसा के माता पिता ने उस को, उत्पन्न होने के बाद तीन महीने तक छिपा रखा; क्योंकि उन्होंने देखा, कि बालक सुन्दर है, और वे राजा की आज्ञा से न डरे।” (इब्रानियों 11:23)।
यह दृश्य दुखद और भयानक था। मूसा की माँ की गर्भावस्था के समय, फिरौन ने सभी नवजात इब्रानी नर की मृत्यु का आदेश दिया था। पूरे मिस्र में, इब्रानी अभिभावक का रोना स्वर्ग की ओर चिल्लाया। शिशुओं का निर्दयतापूर्वक वध किया गया। लेकिन मूसा के माता-पिता के अभिभावक भयभीत नहीं थे । इसके बजाय उन्होंने तीन महीने के लिए शिशु को छिपा दिया, फिर उसे पेपर्स की भनि टोकरी में चारकोल से छुपा दिया । उन्होंने मगरमच्छों से भरी हुई नील नदी में बालक को छोड़ दिया । बाकी इतिहास है। मूसा बढ़ा होकर इब्रानी इतिहास में सबसे महान आगू बन गया । वह इस्राएल की संतान को बंधुओं से मुक्ति दिलाने के लिए परमेश्वर का आदमी जन बन गया । तौ भी परमेश्वर द्वारा मूसा का उपयोग करने प रध्यान देते हुए, उसके अभिभावक के विश्वास को अक्सर अनदेखा किया जाता है।
बहुत हद तक मूसा ने अपने अभिभावक के विश्वास के कारण महानता हासिल की। उन्होंने “परमेश्वर पर विश्वास किया ।” उनका विश्वास मूसा की नियति की ओर पहला कदम था। मूसा के अभिभावक के विश्वास में कई विशेषताएं हैं। सबसे पहले, उन्होंने उसके जीवन के लिए परमेश्वर की योजना को देखा। उन्होंने अपनी परिस्थितियों को देखने से इनकार कर दिया। इसके बजाय, बाइबल कहती है, उन्होंने “देखा कि वह कोई साधारण बालक नहीं था।” उस में कुछ खास था, और वे इसे जानते थे। उन्होंने अपने आसपास की दुनिया को उसे नष्ट करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके बजाय, वे विश्वास में खड़े थे, यह मानते हुए कि परमेश्वर के पास उनके बेटे के जीवन के लिए योजना है। उन्होंने विश्वास से देखा।
हमें दृश्य वस्तुओं को देख कर नहीं चलना चाहिए। मसीह के अनुयायियों के रूप में हमें समझना चाहिए कि हम विश्वास द्वारा चलते और जीवित रहते हैं। विश्वास हमें उन चीजों को देखने की अनुमति देता है जो दूसरे नहीं देख सकते हैं। हम अपने बच्चों के लिए परमेश्वर की योजना देखते हैं, और हम उनके लिए प्रार्थना में खड़े हो सकते हैं – ठीक उसी तरह जैसे मूसा के अभिभावक विश्वास से खड़े थे। विश्वास हमें परिस्थितियों से परे देखने में सक्षम बनाता है – और हमारे बच्चों के लिए परमेश्वर के ह्रदय में।
लेकिन मूसा के अभिभावक ने भी उनकी भयावह परिस्थितियों के भय के आगे झुकने से इनकार कर दिया। बाइबल कहती है, “वे राजा के निर्णय से नहीं डरते थे।” हम एक ऐसी पीढ़ी में रहते हैं जहाँ हमारे बच्चे गंभीर परिस्थितियों का सामना करते हैं। उनके जीवन पर मीडिया का नकारात्मक प्रभाव अविश्वसनीय है। नशा बड़े पैमाने पर हैं। किशोर गर्भधारण आसमान छू रहे हैं। एचआईवी / एड्स वायरस युवाओं को घात कर रहा है, जिस प्रकार फिरौन के सैनिक इब्रानी बालकों को घात कर रहे थे। लेकिन मसीही अभिभावकों को भयभीत नहीं होना चाहिए। हम स्वर्ग में देख सकते हैं और अपने बच्चों के लिए परमेश्वर की योजना को देख सकते हैं। हमें परिस्थितियों से डरकर नहीं, बल्कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर पर विश्वास करके जीना चाहिए।
मेरी पत्नी और मैंने अपने दोनों बच्चों को परमेश्वर को समर्पित कर दिया, जबकि वे गर्भ में थे। वे दोनों कम उम्र में ही मसीह को जान गए थे। दोनों ठेठ युवा विद्रोह से गुज़रे। कई बार, मैं और मेरी पत्नी अपने बच्चों के पापों पर रोते थे । लेकिन हमने देखा है कि परमेश्वर वफादार हैं। हमारे अंदर प्रेशर की आत्मा दुनिया की सभी ताकतों से अधिक है जो हमारे बच्चों को उन चीजों में ढालने की कोशिश करती हैं जो उन्हें नष्ट कर देंगी । मैंने यह एक बात सीखी है: अभिभावक को भयभीत होकर नहीं जीना चाहिए | वे विश्वास के जीवित रह सकते हैं, और परमेश्वर वही करेगा जो उसने वादा किया है। उसने यह हमारे बच्चों में किया है, और वह तुम्हारा वादा भी पूरा करेगा।
अंत में, मूसा के अभिभावक ने विश्वास से कार्य किया । कई लोगों की गलत धारणा है कि विश्वास निष्क्रिय है। हमें सिर्फ परमेश्वर पर भरोसा करना है और हमें कुछ और नहीं करना है। मुझे लगता है कि यह पवित्रशास्त्र के विपरीत है। जब हम इब्रियों 11 (विश्वास के महान हॉल) को पढ़ते हैं, तो हम उन पुरुषों और महिलाओं को देखते हैं जो पूरी तरह से विश्वास से जीते थे। तौ भी उन्होंने कार्य किया। विश्वास कार्य करता है। विश्वास और कार्यों के मध्य कोई संघर्ष नहीं है। वास्तव में बाइबल कहती है, “वैसे ही विश्वास भी, यदि कर्म सहित न हो तो अपने स्वभाव में मरा हुआ है।” (याकूब 2:17)।
मूसा के माता-पिता ने अंगूठा दिखते हुए यह नहीं कहा, “परमेस्वर, हम आप पर भरोसा कर रहे हैं।” हमारे बालक को बचाओ। ”नहीं! उन्होंने छोटी सी टोकरी बनाई और उसे चारकोल से ढक दिया। उन्होंने परमेश्वर की देख रेख में उस टोकरी को और अपने बालक को छोड़ दिया । उन्होंने अपना भाग किया, और परमेश्वर ने अपना किया। परमेश्वर का भाग चमत्कारी था। उनके भाग में कड़ी मेहनत थी। उन्होंने एक जोखिम उठाया और अपने बालक को परमेश्वर के भरोसे छोड़ दिया । परमेश्वर ने उस बच्चे को लिया और उसे शाही बना दिया । उन्होंने उसे नदी में डाल दिया। परमेश्वर ने उसे फिरौन के महल में रखा। उन्होंने पुकारा । परमेश्वर ने उत्तर दिया।
मुझे विश्वास है कि जब हम स्वर्ग में पहुंचेंगे तो बहुत आश्चर्य होगा। मुझे विश्वास है कि उन आश्चर्य में से एक यह होगा कि परमेश्वर, प्रार्थना करने वाले माता-पिता द्वारा कितने महान पुरुषों और महिलाओं का पालन-पोषण किया गया। परमेश्वर के पुरुष या स्त्री का निर्माण अक्सर माँ द्वारा निजी स्थानों में की गई प्रार्थना के कारण होता है । परमेश्वर की पवित्र महिला द्वारा अतीत में की गई प्रार्थना के कारण, परमेश्वर के कई पुरुष आज उस स्थान पर हैं ।
इब्रानियों 11:23-28
23 23 विश्वास ही से मूसा के माता पिता ने उस को, उत्पन्न होने के बाद तीन महीने तक छिपा रखा; क्योंकि उन्होंने देखा, कि बालक सुन्दर है, और वे राजा की आज्ञा से न डरे। 24 विश्वास ही से मूसा ने सयाना होकर फिरौन की बेटी का पुत्र कहलाने से इन्कार किया। 25 इसलिये कि उसे पाप में थोड़े दिन के सुख भोगने से परमेश्वर के लोगों के साथ दुख भोगना और उत्तम लगा। 26 और मसीह के कारण निन्दित होने को मिसर के भण्डार से बड़ा धन समझा: क्योंकि उस की आंखे फल पाने की ओर लगी थीं। 27 विश्वास ही से राजा के क्रोध से न डर कर उस ने मिसर को छोड़ दिया, क्योंकि वह अनदेखे को मानों देखता हुआ दृढ़ रहा 28 विश्वास ही से उस ने फसह और लोहू छिड़कने की विधि मानी, कि पहिलौठों का नाश करने वाला इस्त्राएलियों पर हाथ न डाले।
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सेमी टिपित सेवकाई के विषय में
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