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दाऊद : वापसी
जब अपमान को परजित करके विजय की उत्तम सुंगंध आती है । निराशा हमारा शत्रु नहीं होनी चाहिए । यह हमारी मित्रता हो सकती है – यदि हम निर्धारित करते हैं कि हम इससे सीखेंगे। हर कोई हार का अनुभव करता है, लेकिन हानि के पश्चात हर कोई एक बेहतर इंसान नहीं बन पाता। हार आपको एक बेहतर व्यक्ति बना सकती है – या एक कड़वा व्यक्ति ।
मसीही बनने के दो वर्ष पश्चात, मैंने विजय का अनुभव किया। परमेश्वर के प्रेम में मेरा ह्रदय जल रहा था। मैं चाहता था कि हर कोई उसके प्रेम को जाने। यह एक रोमांचकारी समय था। लेकिन दो वर्ष पश्चात, मैंने छोटी सी शुरुआत से आरंभ किया और यह धीरे धीरे कम होता गया । मैंने स्वयं को पाप की शक्ति के सामने मारा हुआ पाया। मैं इतना पराजित हुआ, मुझे लगा कि मैं दोबारा कभी प्रचार नहीं कर पाऊंगा या परमेश्वर मेरा उपयोग नहीं करेगा । तब परमेश्वर ने मुझे संकट में डाल दिया। मुझे एक निर्णय लेना था। मैं अपनी शक्ति से मसीही जीवन जीने का प्रयास कर सकता था। या मैं उस पर भरोसा कर सकता था – और शांति और बेदारी पा सकता था। मैंने बाद का तरीका चुना और पाया कि परमेश्वर का प्रेम और करुणा कितनी महान है। मुझे उस विजय में ले आया, जिसकी मैं कल्पना भी नहीं कर सकता था ।
हार का अनुभव करने के पश्चात दाऊद भी एक बेहतर इंसान बन गया। शाऊल के भय के कारण, उसने तनाव का अनुभव किया और अंत में कुछ बुरे निर्णय लिए। उन निर्णयों के कारण उसका परिवार पतन की ओर चला गया और अमालेकियों ने उस के शहर को नष्ट कर दिया । दाऊद ने गंभीर क्षण का सामना किया । वह क्या करता ? वह कैसी प्रतिक्रिया देता ? ऐसे पल हम सभी के लिए आते हैं। हम बिपता, निराशा और हार का सामना करते हैं। हम उन क्षणों में कैसे प्रतिक्रिया देते हैं, यह महत्वपूर्ण है।
जब दाउद ज़िकलाग लौटा, तो उसने पाया कि उसके और उसके पुरुषों की पत्नियों और बच्चों को अमलाकियों ने बंदी बना लिया था, और उनका शहर जला दिया गया था। दाऊद और उसके लोगों को कुचल दिया गया था। वे तब तक रोते रहे जब तक उनके पास रोने की और शक्ति नहीं बची । उनके ह्रदयों में भारी चोट थी ।
बाइबल कहती है, “और दाऊद ने यहोवा से पूछा, क्या मैं इस दल का पीछा करूं? क्या उसको जा पकडूंगा? उसने उस से कहा, पीछा कर; क्योंकि तू निश्चय उसको पकड़ेगा, और निसन्देह सब कुछ छुड़ा लाएगा;” (1 शमूएल 30: 8)। जब दाऊद इस गंभीर चौराहे पर आया, तो उसने सही कार्य किया। उसने “प्रभु से पूछताछ की।” इससे पहले वह ऐसा करने में असफल रहा था, और इसने उसे गड़बड़ कर दिया था। अब दाऊद जानता था कि उसे प्रभु पर निर्भर रहना होगा। उसने बस इतना ही किया।
परिणाम माहौल के अनुसार थे। “और जो कुछ अमालेकी ले गए थे वह सब दाऊद ने छुड़ाया; और दाऊद ने अपनी दोनों स्त्रियों को भी छुड़ा लिया। वरन उनके क्या छोटे, क्या बड़े,क्या बेटे, क्या बेटियां, क्या लूट का माल, सब कुछ जो अमालेकी ले गए थे, उस में से कोई वस्तु न रही जो उन को न मिली हो; क्योंकि दाऊद सब का सब लौटा लाया।”(वचन 18,19)। यह दाऊद के लिए एक बड़ा सबक था और हमारे लिए भी एक बड़ा सबक है ।
विश्वासी के लिए, असफलता दुनिया का अंत नहीं है। यह विजय के स्कूल में एक प्रोफेसर बन सकता है। परमेश्वर हमें हमारे जीवन में एक गंभीर बिंदु पर लाएगा, और हमें एक मौलिक निर्णय लेना होगा। क्या हम अपने जीवन को अपनी बुद्धि और शक्ति से निर्देशित करने का प्रयास करेंगे – या हम उसकी दिशा के लिए परमेश्वर से जाँच करेंगे? जब हम उससे जाँच करते हैं, तो हम पूण-स्थापन , नवीनीकरण और पुनरुद्धार पाते हैं। वह उन वर्षों को पूण-स्थापन करेगा जिन्हें हमने खो दिया है, जो अवसर छूट गए हैं, और जो हमारा आनंद जब्त हो गया है, उसे वापस ले लेंगे। अनुग्रह, अनुग्रह, अद्भुत अनुग्रह: परमेश्वर का अनुग्रह अनंत है। उसके अनुग्रह से हम एक बार फिर विजय में चल सकते हैं।
मैंने परमेश्वर को मेरे जीवन में अनुग्रह लागू करते देखा है । वह हमारी उम्मीद से अधिक हमें वापस करता है । लेकिन हमें उस पर निर्भर होना चाहिए। उसकी करुणा स्वतंत्र ह्रदयों पर लागू नहीं हो सकती, सिर्फ विनम्र ह्रदयों में : ह्रदय जो परमेश्वर पर निर्भर करते हैं।
1 शमूएल 30:7-19
7 तब दाऊद ने अहीमेलेक के पुत्र एब्यातार याजक से कहा, एपोद को मेरे पास ला। तब एब्यातार एपोद को दाऊद के पास ले आया। 8 और दाऊद ने यहोवा से पूछा, क्या मैं इस दल का पीछा करूं? क्या उसको जा पकडूंगा? उसने उस से कहा, पीछा कर; क्योंकि तू निश्चय उसको पकड़ेगा, और निसन्देह सब कुछ छुड़ा लाएगा; 9 तब दाऊद अपने छ: सौ साथी जनों को ले कर बसोर नाम नाले तक पहुंचा; वहां कुछ लोग छोड़े जा कर रह गए। 10 दाऊद तो चार सौ पुरूषों समेत पीछा किए चला गया; परन्तु दौ सौ जो ऐसे थक गए थे, कि बसोर नाले के पार न जा सके वहीं रहे। 11 उन को एक मिस्री पुरूष मैदान में मिला, उन्होंने उसे दाऊद के पास ले जा कर रोटी दी; और उसने उसे खाया, तब उसे पानी पिलाया, 12 फिर उन्होंने उसको अंजीर की टिकिया का एक टुकड़ा और दो गुच्छे किशमिश दिए। और जब उसने खाया, तब उसके जी में जी आया; उसने तीन दिन और तीन रात से न तो रोटी खाई थी और न पानी पिया था। 13 तब दाऊद ने उस से पूछा, तू किस का जन है? और कहां का है? उसने कहा, मैं तो मिस्री जवान और एक अमालेकी मनुष्य का दास हूँ; और तीन दिन हुए कि मैं बीमार पड़ा, और मेरा स्वामी मुझे छोड़ गया। 14 हम लोगों ने करेतियों की दक्खिन दिशा में, और यहूदा के देश में, और कालेब की दक्खिन दिशा में चढाई की; और सिकलग को आग लगाकर फूंक दिया था। 15 दाऊद ने उस से पूछा, क्या तू मुझे उस दल के पास पहुंचा देगा? उसने कहा, मुझ से परमेश्वर की यह शपथ खा, कि मैं तुझे न तो प्राण से मारूंगा, और न तेरे स्वामी के हाथ कर दूंगा, तब मैं तुझे उस दल के पास पहुंचा दूंगा। 16 जब उसने उसे पहुंचाया, तब देखने में आया कि वे सब भूमि पर छिटके हुए खाते पीते, और उस बडी लूट के कारण, जो वे पलिश्तियों के देश और यहूदा देश से लाए थे, नाच रहे हैं। 17 इसलिये दाऊद उन्हें रात के पहिले पहर से ले कर दूसरे दिन की सांझ तक मारता रहा; यहां तक कि चार सौ जवान को छोड़, जो ऊंटों पर चढ़कर भाग गए, उन में से एक भी मनुष्य न बचा। 18 और जो कुछ अमालेकी ले गए थे वह सब दाऊद ने छुड़ाया; और दाऊद ने अपनी दोनों स्त्रियों को भी छुड़ा लिया। 19 वरन उनके क्या छोटे, क्या बड़े,क्या बेटे, क्या बेटियां, क्या लूट का माल, सब कुछ जो अमालेकी ले गए थे, उस में से कोई वस्तु न रही जो उन को न मिली हो; क्योंकि दाऊद सब का सब लौटा लाया।
Book of the Month
Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe. For all other books…
सेमी टिपित सेवकाई के विषय में
एसटीएम लगभग 50 वर्षों से दुनिया भर में प्रेरणा और सहायता प्रदान कर रहा है। सैमी टिपित इसके संस्थापक और अध्यक्ष है, वह एक विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता, शिक्षक और सुसमाचार के प्रचारक हैं जो 80 से अधिक देशों में लोगों की सेवा करने और उनकी सहायता करने का अनुभव रखते हैं। सैमी ऐसी सामग्री प्रदान करते है जो लोगों को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुद्दों से निपटने में मदद करती है। वह विशेष रूप से दुनिया भर के अन्य देशों के लिए सामग्री सुलभ बनाने के बारे में भावुक है। सैमी ने डेबरा “टेक्स” टिपित से शादी की है, और उनके दो बच्चे और पांच नाती पोते हैं। सैमी टिपित सेवकाई पंजीकृत 501c3 गैर-लाभकारी संगठन है।
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