शिष्यता का दैनिक वीडियो
चुप्पी की आवाजें
अक्सर यह भक्ति ही है जो परमेश्वर के पुरुष और स्त्री को बनाती है । लेकिन आज, मैं उस रास्ते को छोडकर कुछ बेहद महत्वपूर्ण सांझा करने जा रहा हूँ जो परमेश्वर ने मेरे जीवन में किया था। 11 नवंबर, 1999 को, मैंने एक चिकित्सा विशेषज्ञा के पास गया जोकि गले की आवाज सम्बन्धी विकारों का माहिर है | उसने जांच करके बताया कि मेरी आवाज वाली नली में कुछ समस्या है । उसने बताया कि मुझे दो सप्ताह कट चुप रहकर दवाई लेनी होगी ।
मेरी नियुक्ति वाली सवेर प्रभु ने मुझे जगाया। उन शुरुआती घंटों के दौरान, पवित्रशास्त्र के एक ने वचन ने मेरे मन और हृदय को भर दिया । भजन 46:10 कहता है, “दृढ रहो, और जान लो कि मैं ही परमेश्वर हूँ; मुझे राष्ट्रों में उठाया जाएगा, मुझे धरती पर उठाया जाएगा । ” मैंने महसूस किया कि परमेश्वर चाहता है कि मुझे मौन समय की आवश्यकता है। इसलिए जब डॉक्टर ने मुझे बताया कि मुझे मौन रहने के समय की शुरुआत करनी चाहिए तो मुझे समझ आया कि यह डाक्टर की सलाह से बढकर महत्वपूर्ण था । परमेश्वर मुझे बात कर रहा था ।
मेरी पत्नी, टेक्स, और मैंने कुछ समय निकालने और परमेश्वर के साथ अकेले रहने का फैसला किया। हम कहीं ऐसे स्थान पर जाना चाहते थे यहाँ मुझे कोई ना जानता हो और सिर्फ परमेश्वर से मिलना था । हमने ग्रैंड कैन्यन में कुछ समय बिताया। मुझे नहीं पता था कि मेरी आवाज वाली नली में क्या हो रहा था, लेकिन मुझे पता था कि परमेश्वर मेरे हृदय को परिवर्तित कर रहा था । यह एक और सप्ताह रहा होगा जब मुझे पता चला कि मेरी आवाज के साथ क्या हुआ था। लेकिन मेरे हृदय में जो हुआ उसका पूरा परिणाम जानने के लिए एक अनंत काल लग सकता है।
उस सप्ताह मैंने अराधना, प्रार्थना और वचन पढ़ने में ज़्यादा वक्त बिताया। मैंने पवित्रशास्त्र पर ध्यान डाला देखने के लिए कि परमेश्वर मुझसे क्या कह रहा है। लेकिन यह बाइबल के अध्यायों में नहीं था कि मैंने उसकी धीमी, और हल्की आवाज सुनी। एक वचन मेरे पास वापस आता रहा; मैं इससे दूर नहीं हो सका था । ग्रैंड कैन्यन से गुजरते ही इसने मेरा पीछा किया। यह मेरे साथ कार में सवार हुआ क्योंकि मैंने अपने होटल से घाटी तक आगे-पीछे सफर किया। यह मेरे साथ हवाई जहाज पर बैठ गया। इसने मुझे नहीं छोड़ा ।
यह वचन भजन 46:10 था, “शांत रहो और जान लो कि मैं ही यहोवा हूँ; मैं राष्ट्रों में उठाया जाऊंगा, मुझे धरती पर उंचा किया जाएगा। “परमेश्वर ने मेरे हृदय में तीन बातें कही:
- शांत रहो। इसका अर्थ है, उसके सामने चुप रहना । दुनिया भर में सेवकाई तन्त्र स्थापित करने का प्रयास रोक दो । शांत खड़े हो जाओ और परमेश्वर का हाथ देखो।
- और जान लो कि वह परमेश्वर है । उसको जान लो । उसके साथ समय बिताएं। उसे परमेश्वर : मेरे पिता, मेरे उद्धारकर्ता, मेरे चंगा करने वाले, मेरी मदद करने वाले, मेरे उपलब्ध करवाने वाले, मेरे जीवन, सर्वशक्तिमान; अनुग्रह और प्रेम के परमेश्वर; इस्राएल के पवित्र के रूप में जान लो । मेरी गहन इच्छा उसे जानने की होनी चाहिए।
- वह राष्ट्रों में ऊंचा उठाया जाएगा। अगर मैं शांत रहकर उसे जान लूं, तो मेरी सेवकाई के माध्यम से वह धरती के राष्ट्रों में ऊंचा हो जाएगा। यह “न शक्ति से ना बल से परन्तु उसकी आत्मा से होगा” कि हम राष्ट्रों तक पहुँचेंगे। मुझे विश्वास था कि आने वाले दिनों में मैं उन चीजों को देखूंगा जो मैंने पहले कभी सपने में भी नहीं सोची होंगी । और मैंने कुछ बड़े सपने देखे हैं।
मुझे बड़ा सपना देखना चाहिए क्योंकि वह एक बड़ा परमेश्वर है। फिर भी मुझे अपने जीवन को ऐसा बनाना चाहिए कि मैं “ शांत रहूँ और जान लूं कि वही परमेश्वर है ।” इसको कई तरीके से लागू किया जा सकता है । मुझे पवित्र आत्मा को कई व्यावहारिक स्थितियों में उन चीजों को काम करने की अनुमति देनी थी। मेरा मानना है कि इसका मतलब स्थिर खड़े होना है, लेकिन जो कार्य परमेश्वर करता है उसे साथ रखना ।उन दिनों के दौरान मुझे यह काम करना सीखना पड़ा कि वह मुझमें क्या कर रहा है। इस सप्ताह परमेश्वर आपको आशीष देंगे जब आप, “शांत रहकर जान लेंगे कि वही परमेश्वर है” |
मरकुस 6:45-51
45 तब उस ने तुरन्त अपने चेलों को बरबस नाव पर चढाया, कि वे उस से पहिले उस पार बैतसैदा को चले जांए, जब तक कि वह लोगों को विदा करे। 46 और उन्हें विदा करके पहाड़ पर प्रार्थना करने को गया। 47 और जब सांझ हुई, तो नाव झील के बीच में थी, और वह अकेला भूमि पर था। 48 और जब उस ने देखा, कि वे खेते खेते घबरा गए हैं, क्योंकि हवा उनके विरूद्ध थी, तो रात के चौथे पहर के निकट वह झील पर चलते हुए उन के पास आया; और उन से आगे निकल जाना चाहता था। 49 परन्तु उन्होंने उसे झील पर चलते देखकर समझा, कि भूत है, और चिल्ला उठे, क्योंकि सब उसे देखकर घबरा गए थे। 50 पर उस ने तुरन्त उन से बातें कीं और कहा; ढाढ़स बान्धो: मैं हूं; डरो मत। 51 तब वह उन के पास नाव पर आया, और हवा थम गई: और वे बहुत ही आश्चर्य करने लगे।
Book of the Month
Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe. For all other books…
सेमी टिपित सेवकाई के विषय में
एसटीएम लगभग 50 वर्षों से दुनिया भर में प्रेरणा और सहायता प्रदान कर रहा है। सैमी टिपित इसके संस्थापक और अध्यक्ष है, वह एक विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता, शिक्षक और सुसमाचार के प्रचारक हैं जो 80 से अधिक देशों में लोगों की सेवा करने और उनकी सहायता करने का अनुभव रखते हैं। सैमी ऐसी सामग्री प्रदान करते है जो लोगों को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुद्दों से निपटने में मदद करती है। वह विशेष रूप से दुनिया भर के अन्य देशों के लिए सामग्री सुलभ बनाने के बारे में भावुक है। सैमी ने डेबरा “टेक्स” टिपित से शादी की है, और उनके दो बच्चे और पांच नाती पोते हैं। सैमी टिपित सेवकाई पंजीकृत 501c3 गैर-लाभकारी संगठन है।
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