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नागालैण्ड में बेदारी
यदि आज तुम सबसे ज्यादा सुसमाचार के मसीही लोंगो का क्षेत्र ढंूढ़ोगे तो तुम क्या चुनोगे ? तुम हैरान हो जाओगे कि यह भारत के ऊतर पूर्वी हिस्सा आधुनिक इतिहास में संसार का सबसे बड़ा मसीही लोंगो का गढ़ बन गया हैं। नागालैण्ड के लोग इतिहासिक तौर पर आत्माओं को मानने वाले और लोंगो का शिकार करके खाने वाले थे। नागालैण्ड के लोग मंगोलिया के वह लोग हैं जो कि भारत और ब्रम्हा की सीमा पर रहते हैं। 1953 में बेदारी आने से पहिले मसीह लोग कम संख्या में थे। उस समय राजनीतिक तौर पर बहुत ही परेशानी थी। बहुत सारे लोग अपनी जान बचाने के लिए जंगलों में दौड़ गए थे।
बेदारी उस समय शुरू हुई जब मसीह लांेगो ने परमेश्वर के चेहरे की खोज करनी शुरू की और अपने पापों से मन फिराव शुरू किया। बेदारी की आग जल्दी ही सुसमाचार की लपटें बनकर जलने लगी और बहुत से नागालैण्ड के लोग मसीह में आ गए। 1950 के दशक के अंत तक यह बेदारी बनी रही। फिर बेदारी के बहाव पर रोक लग गई थी। 1970 में एक बार फिर बेदारी की आग जलने लगी। यह अनुमान लगाया गया कि 1980 तक, 80 प्रतिशत लोग मसीही बन गए थे।
पूरे स्कूल मसीह में आ गए। रॉक संगीत का झुण्ड जिसका नाम था, “लहु और गर्जन“ और “लहु चुसने वाले“ मसीह में बदल गए। वह सुसमाचार के संगीत के झुण्ड बन गए व उनके नाम थे, “जीवित सुसमाचार“ और “यीशु मसीह का आंदोलन“ आदि। प्रार्थना ने इस बेदारी को लाने में अहम भूमिका निभाई। छोटी प्रार्थना की ईमारते बहुत सारे चर्चों के सामने बनाई गई। लोग उस स्थान पर आकर कई दिनों तक उपवास और प्रार्थना किया करते थे।
नागालैण्ड में मैंने एक जवान बैपटिस्ट लीडर से पूछा, कि वह मसीही लोंगो में आज सबसे बड़ी कौनसी जरूरत को देखते हैं। उसने ऊतर दिया, “हमें अभी और ज्यादा परमेश्वर पर निर्भर होने की जरूरत हैं। परमेश्वर हर बात में हमारे खड़े रहने का स्थान होना चाहिए। हमें उसे अनुमति देनी चाहिए कि वह अपना एजेंडा बनाए। प्रार्थना परमेश्वर के साथ और उसकी ईच्छा के साथ शुरू होती हैं।“
शायद आज तुम्हें और मुझे यही सीखने की जरूरत हैं। यदि बेदारी ने इस संसार में आना हैं, तो परमेश्वर हमारी शुरूआत का स्थान होना चाहिए। क्या तुम आज परमेश्वर का चेहरा ढूंढ़ने में अपना समय व्यतीत करोगे. यीशु ने कहा, “मांगो तो तुम्हें दिया जाएगा, ढूंढ़ोगे तो तुम पाओगे, खटखटाओं तो तुम्हारे लिए द्वार खोला जाएगा।“ तुम आज ही “मांगना, ढूंढ़ना और खटखटाना क्यों नहीं शुरू कर देते ?
भजन 24 :5-10
5वह यहोवा की ओर से आशीष पाएगा, और अपने उद्धार करने वाले परमेश्वर की ओर से धर्मी ठहरेगा। 6ऐसे ही लोग उसके खोजी हैं, वे तेरे दर्शन के खोजी याकूब वंशी हैं॥ 7हे फाटकों, अपने सिर ऊंचे करो। हे सनातन के द्वारों, ऊंचे हो जाओ। क्योंकि प्रतापी राजा प्रवेश करेगा। 8वह प्रतापी राजा कौन है? परमेश्वर जो सामर्थी और पराक्रमी है, परमेश्वर जो युद्ध में पराक्रमी है! 9हे फाटकों, अपने सिर ऊंचे करो हे सनातन के द्वारों तुम भी खुल जाओ! क्योंकि प्रतापी राजा प्रवेश करेगा! 10वह प्रतापी राजा कौन है? सेनाओं का यहोवा, वही प्रतापी राजा है॥
Book of the Month
Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe. For all other books…
सेमी टिपित सेवकाई के विषय में
एसटीएम लगभग 50 वर्षों से दुनिया भर में प्रेरणा और सहायता प्रदान कर रहा है। सैमी टिपित इसके संस्थापक और अध्यक्ष है, वह एक विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता, शिक्षक और सुसमाचार के प्रचारक हैं जो 80 से अधिक देशों में लोगों की सेवा करने और उनकी सहायता करने का अनुभव रखते हैं। सैमी ऐसी सामग्री प्रदान करते है जो लोगों को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुद्दों से निपटने में मदद करती है। वह विशेष रूप से दुनिया भर के अन्य देशों के लिए सामग्री सुलभ बनाने के बारे में भावुक है। सैमी ने डेबरा “टेक्स” टिपित से शादी की है, और उनके दो बच्चे और पांच नाती पोते हैं। सैमी टिपित सेवकाई पंजीकृत 501c3 गैर-लाभकारी संगठन है।
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