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एक विजयी के समान दोड़ना

दौड़ जिस में हमें दौड़ना है, धीरज से दौड़ें।

शिष्यता का दैनिक वीडियो

रुकावटें

लुका ११:१

सैमी: प्रार्थना के विषय में बात करके बहुत ही अच्छा लग रहा है । और परमेश्वर बहुत ही आशीष दे रहा है मैं आप के विषय में नहीं जानता, परंतु मैं बहुत ही उत्तेजित हूं।  और प्रार्थना एक बहुत ही उत्तेजना भरा कार्य है,  कि मैं सर्वशक्तिमान परमेश्वर की उपस्थिति में जा सकता हूं । परंतु आप जानते हैं कि कई बार यह सच्चाई नहीं है।  जहां हम हैं, कितनी बार हमने सोचा है काश मैं वहां होता! मैं वहां क्यों नहीं हूं?

और डेव  मैं बात करना चाहता हूं,  हमें वहां जाने से क्या रोकता है?  वह स्थान जहाँ हम  परमेश्वर के साथ घनिष्ठ संबंध बना सकते हैं,  और आप क्या सोचते हैं कि परमेश्वर के साथ चलने में क्या रूकावटें हैं?

शायद सबसे बड़ी रुकावट है व्यस्त होना मैं इतना व्यस्त हो जाता हूं।  कि मैं परमेश्वर के साथ समय व्यतीत नहीं कर पाता और शायद मैं यह कहता हूं कि मैं वहां इसकी वजह से परमेश्वर के साथ समय नहीं व्यतीत कर पाता। परंतु आपका विचार इसके विषय में क्या है?  क्योंकि आप पूरे संसार में लोगों को प्रार्थना के विषय में सिखाते हैं । वह रूकावटें कौन सी हैं?  और हम उनका सामना कैसे कर सकते हैं ? हम  पहले रुकावटों की बात करते हैं और उसके पश्चात् हम  उसका सामना करने की बात करेंगे।

डेव: वास्तव में मैं एक साथ इन दोनों के विषय में बात करूंगा इसका सबँध  है कि हम सहायता के लिए पुकारते नहीं है।  बहुत सी बातें हैं  जिनके बीच में मैं अच्छा नहीं हूं । यदि मेरी कार खराब हो जाए मैं चाहे कितनी भी कोशिश कर लो मैं उसे दोबारा नहीं चल आ पाऊंगा।

मेरे पास उसे ठीक करने की योग्यता नहीं है।  यदि मेरी कार खराब हो जाए तो मुझे सहायता की आवश्यकता है। इसका अर्थ है मुझे सहायता मांगनी  पड़ती है।  यदि मैं प्रार्थना का व्यक्ति बनना चाहता हूं,  तो मुझे सहायता की आवश्यकता है।  और मुझे सहायता मांगनी  पड़ेगी। मैं कायल हूं, जहां पर हम व्यवहारिक सहायता की ओर जा रहे हैं यदि आप प्रार्थना के व्यक्ति बनना चाहते हैं । और कोई इसे देख रहा है जो प्रार्थना का व्यक्ति बनना चाहता है,  तो आप सहायता के लिए पुकारे मैं यह कहता हूं आपको प्रार्थना के लिए प्रार्थना करनी पड़ती है।

यह ऐसे लगता है कि आप किसी चक्कर में घूम रहे हैं।  परंतु यह सच्चाई है प्रार्थना के लिए प्रार्थना करें । और हम इसीलिए इस बात पर आ जाते हैं कि हम इतने महान आदमी नहीं हैं, कि  हम अचानक इतने बहादुर आत्मिक वीर नहीं बन सकते हैं। जो आप प्रार्थना करते हैं,  वचन पढ़ते हैं और वह सब करते हैं जो उनको करना चाहिए।  मैंने देखा है मुझे सहायता की आवश्यकता है और प्रतिदिन मेरे जीवन में मेरी मदद कर प्रभु,  प्रभु मुझे प्रार्थना करना सिखा। प्रभु मुझे प्रार्थना का व्यक्ति बना।

प्रभु अचानक ही पकड़ कर मुझे प्रार्थना का व्यक्ति नहीं बना देता।  यह एक ही किर्या  है जो कई वर्षों से चल रही है।  जिसमें वह मेरी बिनती का उत्तर दे रहा है।  जिस रीति से मैं प्रार्थना करता हूं,  वह उस तरीके को बदलता है। वह मेरे हृदय की चाहत को बदलता है।  मैंने देखा है कि एक मुद्दा जिसे  बहुत से लोगों ने अभी तक देखा भी नहीं है।

उन्हें प्रार्थना में सहायता की आवश्यकता है।  उन्होंने प्रार्थना में सहायता को अभी तक मांगा ही नहीं है । हम सोचते हैं कि यह एक अनुशासन है कि मैं सुबह उठूंगा। प्रार्थना के लिए समय निकाल लूँगा । अथवा मैं यह कर लूँगा।  और वह करुंगा और यह हमारा आत्मिक  अनुशासन है इसकी बजाय हम प्रभु के पास आए और कहें,  प्रभु मुझे तेरी आवश्यकता है।  और यह मेरे लिए बड़ी बात है।  एक और बात जो रुकावट है,  जिसके विषय में जो इतनी मजेदार नहीं है वह है पाप।  बहुत से वचन बताते हैं कि मेरे जीवन में कोई बात है।  जिसका मैने सामना नहीं किया है।  और यह मेरे प्रार्थना के जीवन में रुकावट बन जाते हैं।  वचन बताता है कि आपके पाप परमेश्वर ने आपसे दूर कर दिए हैं।  वह आपके पाप को नहीं देख रहा।  और हमें यह पहचानना चाहिए,  कि मेरे जीवन में एक बात है,  मैं संघर्ष करता हूं।  मैं देखता हूं कि मेरे प्रार्थना का जीवन इतना अच्छा नहीं है।  वस्तुओं को निकालने के लिए मुझे पवित्र आत्मा की ज्योति को खोलना पड़ेगा।  और मेरे जीवन में प्रभु यदि कोई पाप है तो मुझे दिखा दीजिए।

सैमी: जैसे भजन लिखने वाले ने कहा कि मुझे खोज ले।

डेव: बिल्कुल ऐसे ही है।  और वह आपको दिखाएगा, यहां क्या बात है जिससे मैं पश्चाताप करूँ।  अथवा कैसे मेरी सीधी पहुंच उस तक हो सकती है। इसलिए मैं विश्वास करता हूं कि सबसे पहली बात  जिसकी हमें आवश्यकता है वह है सहायता। और दूसरी बात के लिए हम बहुत ही लंबे समय तक बात कर सकते हैं और वह है कहना कि हम ने पाप किया है। और हमें इसका सामना करने की आवश्यकता है।  और फिर तीसरी बात जो मैं सोचत हूँ,  जो की बहुत बड़ी रुकावट है जो पहली के साथ जुड़ी है,  यह मजाक लगता है परंतु फिर भी हमें नहीं पता कि यह कैसे हैं।

सैमी:  हा हा हा

डेव:  मैं कई सालों से यात्रा कर रहा हूं।  और जब आप  मसीही लोगों से बात करते हैं और वह सभी प्रार्थना करते हैं।  परंतु जब आप उनसे बात करने लगते हैं तो वह कहते हैं कि कैसे प्रार्थना करनी है।  मैं सच में विश्वास करता हूं कि एक कार्य जो हम व्यक्तिगत रीति से कर सकते हैं । चर्च के अगुवों  को यह सुनने की आवश्यकता है हमें लोगों को यह स्रोत देने की आवश्यकता है , उन्हें सिखाने की आवश्यकता है कि ना सिर्फ हमें प्रार्थना करनी चाहिए परंतु यह  प्रार्थना क्या है और कैसे करनी है।  हमें यीशु की शिक्षा के विषय में बात करते हैं।  जिसे हम प्रभु की प्रार्थना कहते हैं । जब यीशु  ने अपने शिष्यों को उत्तर दिया, उन्होंने कहा,  प्रभु हमें प्रार्थना करनी सिखा।  और उसने एक रूपरेखा दी। पहाड़ी उपदेश दिया और वहां प्रार्थना के ऊपर कोई संदेश नहीं है।  कोई लेक्चर नहीं है।  वहां इस ऐसे नहीं है कि इस रीति से प्रार्थना करो।  निश्चित करो कि यह बातें तुम्हारी प्रार्थना में हो।  मैं चाहता हूं कि सभी जन सुने, प्रार्थना करना सीखना एक अच्छा काम है और यह बाइबल के ऊपर आधारित है । इसीलिए यीशु ने अपने चेलों को सिखाया कि वह सच में यह कर सकते हैं।

सैमी: एक और बात जो मैं सोचता हूं जो हमारे बीच में चल रही है। खास रीति से आप जो ऐप इस्तेमाल करते हैं कि आप वापस जाएं और जो हमने सिखाया है कि जो यीशु के चेलों को शिक्षा दी,  उसे आप सुनें।

आपको याद होगा परमेश्वर ने मेरे जीवन में दिल की पुकार जागृति की कॉन्फ्रेंस में एक बड़ा कार्य किया था,  जो बिली ग्राहम ट्रेनिंग सेंटर में हुई थी।  और मैं कुछ कठिन समय में से निकल रहा था , और मैं बहुत ही थका हुआ महसूस कर रहा था।  प्रभु ने कहा,   तेरी समस्या यह है कि तू मेरा इंतजार नहीं कर रहा है।  और मैंने अपने आप को वह करने के लिए दिया परंतु उसने एक तरह से मुझे निर्देश दिया कि मुझे यह कैसे करना है।  उसने मेरे कैलेंडर को मुझे देखने के लिए कहा,  ठीक है यह जहां पर है।  तू कहता है तेरे पास समय नहीं है परंतु तू अपने कैलेंडर को देख।

डेव: यह ठीक है।

सैमी: मेरे कैलेंडर में बहुत कुछ था ऐसी कई बातें थी जो अच्छी थी।  वह बुरी नहीं थी। परंतु वह जरूरी बातें नहीं थी और ऐसी कुछ बातें थी,  जो प्रभु के साथ एकांत समय के साथ  बदली जा सकती थी।

डेव: यह ठीक है

सैमी: मैं सोचता हूं,  उद्देश्य  प्राथमिकता की भावना से निकलता है।  हमारे जीवन का उद्देश्य क्या है?  यीशु ने हमें कहा कि हम प्रभु से प्रेम करें अपने पूरे ह्रदय से प्रभु को प्रेम करें और लोगों को उसी तरह से प्रेम कर  जैसे तू अपने आपको प्रेम करता है।  यह हमारा उद्देश्य है।  और इसी के ऊपर आधारित हमारी प्राथमिकताएं हैं । मेरा अर्थ है कि आप के पास सबसे महत्वपूर्ण करने के लिए समय है।  मुझे क्या करना पड़ा ? मुझे जाना पड़ा।  मेरे जीवन में सबसे महत्वपूर्ण क्या है।  मेरा अर्थ है जीवन छोटा है और इसका अंत हो जाएगा।  और यह कैसा होगा मुझे मेरे जीवन की कुछ प्राथमिकताओं को फिर से निर्धारित करना पड़ेगा । मुझे समाचार देखने बहुत ही पसंद है।  और यह बहुत ही व्यवहारिक है।  जो मैंने पाया है कि बहुत से मसीही लोग प्रार्थना शुरु करते हैं परंतु बहुत कम लोग इसे समाप्त करते हैं।

डेव; हाँ

सैमी: वह शुरू करते हैं और वह ऐसी किसी बात को सुनेंगे,  और कहेंगे,  आओ हम यह करते हैं,  एक कारण है जिसकी वजह से हम याद कर रहे हैं,  मेरे पास पहले 30 मिनट थे।  देखे हर एक का शरीर अलग है।  और आपके शरीर को बहुत ज्यादा नींद की आवश्यकता है।  मेरा शरीर कहता है कि मुझे बहुत नींद की आवश्यकता है । यदि आप इसे पाने की कोशिश करते तो यह काम नहीं करने वाले थे।  बहुत जल्दी आप थक जाएंगे और आप छोड़ देंगे।  आपको क्या देखने की आवश्यकता है जो उन्होंने देखा है । ठीक है मैं 30 मिनट पहले सोने के लिए जाऊंगा। और मैं उसे हर बात को अपने जीवन से बाहर निकाल दूंगा । जिसे निकालने की आवश्यकता है।  ताकि मैं 30 मिनट पहले बेड पर जा सकूं।

डेव: ठीक

सैमी: ठीक है यह छोटी बातें हैं।  आइए मैं आपको उत्साहित करता हूं । आप प्रभु के सामने जाएं और देखें आपकी क्या रूकावट है?  मैं सोचता हूं सबसे अच्छी आत्मिक  प्रार्थना है,  एक शब्द की प्रार्थना,  सहायता।  और इसी लिए डेव  ने जैसे शुरू में कहा था,  परमेश्वर के पास जाएं और प्रभु को कहें सहायता कर और वह आपकी सहायता करेगा।

रोमियो 6 :17-23

6क्योंकि हम जानते हैं कि हमारा पुराना मनुष्यत्व उसके साथ क्रूस पर चढ़ाया गया, ताकि पाप का शरीर व्यर्थ हो जाए, ताकि हम आगे को पाप के दासत्व में न रहें।

7क्योंकि जो मर गया, वह पाप से छूटकर धर्मी ठहरा।

8सो यदि हम मसीह के साथ मर गए, तो हमारा विश्वास यह है, कि उसके साथ जीएंगे भी।

9क्योंकि यह जानते हैं, कि मसीह मरे हुओं में से जी उठकर फिर मरने का नहीं, उस पर फिर मृत्यु की प्रभुता नहीं होने की।

10क्योंकि वह जो मर गया तो पाप के लिये एक ही बार मर गया; परन्तु जो जीवित है, तो परमेश्वर के लिये जीवित है।

11ऐसे ही तुम भी अपने आप को पाप के लिये तो मरा, परन्तु परमेश्वर के लिये मसीह यीशु में जीवित समझो।

12इसलिये पाप तुम्हारे मरनहार शरीर में राज्य न करे, कि तुम उस की लालसाओं के आधीन रहो।

13और न अपने अंगो को अधर्म के हथियार होने के लिये पाप को सौंपो, पर अपने आप को मरे हुओं में से जी उठा हुआ जानकर परमेश्वर को सौंपो, और अपने अंगो को धर्म के हथियार होने के लिये परमेश्वर को सौंपो।

14और तुम पर पाप की प्रभुता न होगी, क्योंकि तुम व्यवस्था के आधीन नहीं वरन अनुग्रह के आधीन हो॥

15तो क्या हुआ क्या हम इसलिये पाप करें, कि हम व्यवस्था के आधीन नहीं वरन अनुग्रह के आधीन हैं? कदापि नहीं।

16क्या तुम नहीं जानते, कि जिस की आज्ञा मानने के लिये तुम अपने आप को दासों की नाईं सौंप देते हो, उसी के दास हो: और जिस की मानते हो, चाहे पाप के, जिस का अन्त मृत्यु है, चाहे आज्ञा मानने के, जिस का अन्त धामिर्कता है

17परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, कि तुम जो पाप के दास थे तौभी मन से उस उपदेश के मानने वाले हो गए, जिस के सांचे में ढाले गए थे।

18और पाप से छुड़ाए जाकर धर्म के दास हो गए।

19मैं तुम्हारी शारीरिक दुर्बलता के कारण मनुष्यों की रीति पर कहता हूं, जैसे तुम ने अपने अंगो को कुकर्म के लिये अशुद्धता और कुकर्म के दास करके सौंपा था, वैसे ही अब अपने अंगों को पवित्रता के लिये धर्म के दास करके सौंप दो।

20जब तुम पाप के दास थे, तो धर्म की ओर से स्वतंत्र थे।

21सो जिन बातों से अब तुम लज्ज़ित होते हो, उन से उस समय तुम क्या फल पाते थे?

22क्योंकि उन का अन्त तो मृत्यु है परन्तु अब पाप से स्वतंत्र होकर और परमेश्वर के दास बनकर तुम को फल मिला जिस से पवित्रता प्राप्त होती है, और उसका अन्त अनन्त जीवन है।

23क्योंकि पाप की मजदूरी तो मृत्यु है, परन्तु परमेश्वर का वरदान हमारे प्रभु मसीह यीशु में अनन्त जीवन है॥

Book of the Month

Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe.  For all other books…

सेमी टिपित सेवकाई के विषय में

एसटीएम लगभग 50 वर्षों से दुनिया भर में प्रेरणा और सहायता प्रदान कर रहा है। सैमी टिपित  इसके संस्थापक और अध्यक्ष है, वह एक विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता, शिक्षक और सुसमाचार के प्रचारक हैं जो 80 से अधिक देशों में लोगों की सेवा करने और उनकी सहायता करने का अनुभव रखते हैं। सैमी ऐसी सामग्री प्रदान करते  है जो लोगों को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुद्दों से निपटने में मदद करती है। वह विशेष रूप से दुनिया भर के अन्य देशों के लिए सामग्री सुलभ बनाने के बारे में भावुक है। सैमी ने डेबरा “टेक्स” टिपित  से शादी की है, और उनके दो बच्चे और पांच नाती पोते हैं। सैमी टिपित सेवकाई पंजीकृत 501c3 गैर-लाभकारी संगठन है।

सम्पर्क करें: info@sammytippit.org

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