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प्रार्थना और मेल-मिलाप
प्रार्थना का ऐसा सिद्धांत हैं जिसके बारे में आज हम बहुतसी चर्चा नही सुनते हैं – मेल-मिलाप. लेकिन फिर भी अगर हम प्रार्थना मे सामर्थ पाना चाहते हैं तो हमें इससे निपटना होगा. प्रार्थना केवल परमेश्वर के साथ सीधा संबंध नही है. इस मे मसीह में हमारे भाईयों और बहनों के साथ व्यवहारिक आड़ा संबंध भी है. जीवन के बेचिदा मामले और संबंध से बचने के लिए प्रार्थना बचाव का कोई मार्ग नही है. हमारे जीवन की उन मुश्किल समस्याओं का सामना करने और उनसे निपटने के लिए प्रार्थना हमें योग्य बनती है.
जब यीशु ने अपने चेलों को प्रार्थना करने के सिद्धांत सिखाए, उसने उन से कहा, “इसलिए यदि तू अपनी भेंट वेदी पर लाए, और वहाँ तू स्मरण करे की तेरे भाई के मन में तेरे लिए कुछ विरोध है, तो अपनी भेंट, वही वेदी के सामने छोड़ दें और जाकर पहले अपने भाई से मेल-मिलाप कर और तब आकर अपनी भेंट चढा” (मत्ती ५:२३-२४).
हम अकसर अपनी स्तुति और धन्यवाद के बलिदान लेकर परमेश्वर के सामने आते है, लेकिन हमारा दूसरों के साथ टूटा संबंध होता है. हमारे प्रार्थना के जीवन मे परमेश्वर की प्रकट होनेवाली उपस्थिति का अनुभव करने के लिए, हमें मसीह में हमारे भाइयों और बहनों से मेल-मिलाप करना चाहिए. अकसर, इसके लिए हमें मेल-मिलाप करना होगा. यदि हम ने किसी को धोका दिया है, तो हमें उस व्यक्ति को भुगतान देना चाहिए. यदि हमने उनके साथ गलत व्यवहार किया है, तो हमें उन के साथ सही व्यवहार करना चाहिए. अकसर कई बार, विश्वासी आत्मिक होने का नकाब पहनकर दिखावा करते हैं, लेकिन उन मे परमेश्वर के साथ सच्चे संबंध की कमी होती है,क्योंकि उन्होंने जिनके साथ गलत व्यवहार किया था उनके साथ कभी सही मेल-मिलाप नही किया हैं.
कई साल पहले, परमेश्वर ने उत्तर आयरलैंड मे डब्ल्यू. पी. निकोलसन नाम के प्रचारक का उपयोग किया. उन के प्रकार के दौरान बेलफास्ट के चर्च मे महान जागृती आई थी. बहुत से लोग मसीह को उद्धारकर्ता के रूप मे जान पाएं. वहाँ एक प्रेस्बिटेरियन चर्च है जिसके बारे मे कहा जाता है कि वहाँ इतने लोग इकट्ठा होते थे कि उन्हें चर्च की दीवारें फैलाकर बनानी पड़ी. लोग उस सुसमाचार प्रचारक को सुनने के लिए कई घंटो तक लाईन में खड़े रहते थे.
उन दिनों मे बेलफास्ट को संसार का सबसे दूर का कोना माना जाता था. निकोलसन दोपहर के भोजन के समय शिपयार्ड मे प्रचार करते, और बहुत से मजदूर मसीह के पास आते थे. लेकिन उस समय बहुत ही अद्भुत घटना हुई. बहुत से मजदूरों ने केवल परमेश्वर के साथ ही सबकुछ सही नही किया, लेकिन उन्होंने अपने सहकर्मी के साथ भी सही संबंध बनाया. उन मे से बहुत से लोग शिपयार्ड मे वो सारी चीज़े वापस लेकर आए जो उन्होंने चुराई थी. इतनी सारी चीज़े लौटाई गई कि चुराई गई उन चीजों को वापस रखने के लिए जगह काफी नही थी. चुराकर वापस की गई उन चीजों को रखने के लिए एक गोदाम किराए पर लेना पड़ा.
प्रार्थना और जागृती आकाश का कोई तारा नही है, या धार्मिक उंडेले जाने के समय महसूस किया जानेवाला अजीबसा महसूसीकरण नही है. प्रार्थना पवित्र आत्मा के साथ सच्ची मुलाक़ात है. ये हमें उसकी उपस्थिती मे लेकर आती है जो एक मात्र वास्तविक है. जब प्रार्थना मे हम उससे मुलाकात करते हैं, तब हम अपने जीवन की वास्तविक बातों से निपट पाएगे. वो हमें सबसे मुश्किल निर्णय लेंने के योग्य बनाएगा. वो निर्णय हमेशा सच्ची जागृती की और अगुवाई करेगे.
यदि आप अपने प्रार्थना के जीवन मे सच्ची सामर्थ का अनुभव करना चाहते हैं, तो हमें परमेश्वर के साथ सबकुछ और हरएक चीज़ सही करनी चाहिए. और मसीह मे हमारे भाइयों और बहनों के साथ हमारा संबंध सही करने के लिए हमें हर कोशीश करनी चाहिए. प्रार्थना और मेल-मिलाप – एक ऐसा जोड़ है जो अवश्य ही जागृती की ओर हमारी अगुवाई करेगा.
मत्ती 5 :21-26 21तुम सुन चुके हो, कि पूर्वकाल के लोगों से कहा गया था कि हत्या न करना, और जो कोई हत्या करेगा वह कचहरी में दण्ड के योग्य होगा। 22परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि जो कोई अपने भाई पर क्रोध करेगा, वह कचहरी में दण्ड के योग्य होगा: और जो कोई अपने भाई को निकम्मा कहेगा वह महासभा में दण्ड के योग्य होगा; और जो कोई कहे “अरे मूर्ख” वह नरक की आग के दण्ड के योग्य होगा। 23इसलिये यदि तू अपनी भेंट वेदी पर लाए, और वहां तू स्मरण करे, कि मेरे भाई के मन में मेरी ओर से कुछ विरोध है, तो अपनी भेंट वहीं वेदी के साम्हने छोड़ दे। 24और जाकर पहिले अपने भाई से मेल मिलाप कर; तब आकर अपनी भेंट चढ़ा। 25जब तक तू अपने मुद्दई के साथ मार्ग ही में हैं, उस से झटपट मेल मिलाप कर ले कहीं ऐसा न हो कि मुद्दई तुझे हाकिम को सौंपे, और हाकिम तुझे सिपाही को सौंप दे और तू बन्दीगृह में डाल दिया जाए। 26मैं तुम से सच कहता हूं कि जब तक तू कौड़ी कौड़ी भर न दे तब तक वहां से छूटने न पाएगा॥
Book of the Month
Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe. For all other books…
सेमी टिपित सेवकाई के विषय में
एसटीएम लगभग 50 वर्षों से दुनिया भर में प्रेरणा और सहायता प्रदान कर रहा है। सैमी टिपित इसके संस्थापक और अध्यक्ष है, वह एक विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता, शिक्षक और सुसमाचार के प्रचारक हैं जो 80 से अधिक देशों में लोगों की सेवा करने और उनकी सहायता करने का अनुभव रखते हैं। सैमी ऐसी सामग्री प्रदान करते है जो लोगों को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुद्दों से निपटने में मदद करती है। वह विशेष रूप से दुनिया भर के अन्य देशों के लिए सामग्री सुलभ बनाने के बारे में भावुक है। सैमी ने डेबरा “टेक्स” टिपित से शादी की है, और उनके दो बच्चे और पांच नाती पोते हैं। सैमी टिपित सेवकाई पंजीकृत 501c3 गैर-लाभकारी संगठन है।
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