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क्षमा करना
मती ६:१२, लुका २३:२४
सैमी : पिछले सेशन में हम बात कर रहे थे, क्षमा के विषय में और प्रार्थना की शक्ति के में। हम यीशु की प्रार्थना के तरीके के विषय में बात कर रहे थे। कि कैसे यीशु ने अपने चेलों को प्रार्थना करना सिखाया कहा कि “हमारे पाप हमें क्षमा कर” और उसने अपने चेलों को ऐसे ही प्रार्थना करना सिखाया ।
हमारे पाप हमे क्षमा कर जैसे हम अपने अपराधियों को क्षमा करते हैं, इसलिए सिर्फ हमें ही क्षमा की आवश्यकता नहीं, परंतु हमें दूसरों को भी क्षमा करने वाले होना चाहिए और यह बहुत ही आवश्यक है। क्योंकि मैं सोचता हूं कि दूसरे कार्यों की बजाय यह काम सबसे कठिन है क्योंकि कई बार हम इससे बहुत ज्यादा दुखी हुए हैं।
आमतौर पर हम उन लोगों से दुखी होते हैं जिनसे हम सबसे ज्यादा प्रेम करते हैं अथवा जिन की हम परवाह करते हैं। यह शक्ति हमें कहां से मिलती है? यीशु ने कहा दूसरों को क्षमा करो, परंतु क्षमा करने की शक्ति हमें कहां से मिलती है? हम कैसे क्षमा करते हैं, जिसने आपको दुखी किया, आपके थप्पड़ मारा, आप को शापित किया, आप को जेल में डाला, आपने कैसे क्षमा कर सकते हैं? आपने कैसे क्षमा करते हैं?
डेव बटस : यदि हम हम प्रार्थना वाले लोग बनना चाहते हैं, तो यह हमारे लिए बहुत ही कठिन काम होगा । यीशु मसीह इस बात को बहुत ही स्पष्ट रीति से बताते हैं, कि यदि हम किसी को क्षमा नहीं करेंगे तो हमारे पापा भी क्षमा नहीं किए जाएंगे। यह गंभीर बात है, और हमें उसी वक्त अपने पापों की ओर देखना चाहिए, क्योंकि हमने दूसरों के पाप के विषय में तो सोचा है, परंतु हमने अपने बारे में नहीं सोचा। और एक बार फिर से मैं यीशु की बात के साथ जोड़ना चाहता हूँ।
क्षमा करने की शक्ति उस व्यक्ति की ओर से आती है, जो क्रूस पर लटक रहा है। और उसने उन लोगों की ओर देखा, जिन्होंने उसे वहां लटकाया था। और उसने कहा, पिता इन्हें क्षमा करें । यह तो एक हैरान कर देने वाली बात है, बाहों को फैलाकर बड़ी पीड़ा के साथ उसने प्रार्थना की, पिता इन्हें क्षमा करें। अब वह आपके लिए और मेरे लिए हर उस व्यक्ति के लिए आ गया है, और उसके पास यह योग्यता है, वही कार्य करने की जो उसने 2000 वर्ष पहले किया था।
हम सभी इस बात का अंगीकार करेंगे, उसके साथ सहमत होंगे या नहीं होंगे। यीशु, जिस ने उन लोगों को क्षमा किया, जिन्होंने उसे क्रुस के ऊपर लटका दिया था। वह, आज भी वही काम करता है, और अंत में यह मेरे द्वारा यीशु के पास आने के ऊपर निर्भर करता है। और जब मैंने किसी को दुखी किया हो, और जब लोगों ने मेरे साथ यह सब किया हो, तो मुझे भी वही करना चाहिए। हम उसके लिए कोई बहाना नहीं बना रहे हैं। हम तो सिर्फ यही कह रहे हैं, यीशु, क्या मेरे भीतर भी वही काम करेंगे, जो आपने 2000 वर्ष पहले किया था? प्रभु, क्या मुझे भी दिखाएंगे क्षमा कैसे किया जाता है? प्रभु, मेरे द्वारा आप क्षमा करें और मुझे सिखाए, यह कैसे किया जाता है? और मैं विश्वास करता हूं, कि यह एक प्रक्रिया बन जाती है। और ऐसे बहुत ही कम विश्वासी हैं जो क्षमा करने को बहुत आसान समझते हैं।
ठीक है, कई बार हम कहते हैं, मैं क्षमा तो कर सकता हूं, परंतु मैं भूल नहीं सकता। और कुछ और ऐसी बातें जिनका यही अर्थ है। कि मैं उनको क्षमा नहीं करने वाला । मैं इस बात को बोलने नहीं वाला या तो यह मेरे जीवन में सबसे बड़ी रुकावट बनेगी। और अंत में यह बात यीशु के ऊपर आ जाती है। यह सबसे अच्छा बनने के विषय में नहीं है, यह सुभाविक रीति से क्षमा करने के विषय में है। यह ऐसी बात नहीं है, इस बार इस बात की ओर इशारा नहीं है, कि हम यीशु की और प्रार्थना में बढ़ रहे हैं। और किसी को क्षमा करना उसके लिए तो बहुत आसान है परंतु हमारे लिए मुश्किल कार्य है।
सैमी : ठीक
डेव: एक मनुष्य के लिए दूसरे मनुष्य को, जिसने उसे दुख पहुंचाया हो, क्षमा करना आसान नहीं है। परंतु यीशु मसीह के लिए यह आसान है।
सैमी : हां आपको पता है, जब हम इसके विषय में बात कर रहे हैं, तो ऐसे लगता है, जैसे हम प्रार्थना के द्वारा इस एक धागे में पिरो रहे हैं। और वह क्रुस है।
डेव : यह बिल्कुल ठीक है।
सैमी : हम सकी बात कर चुके हैं और इसकी शुरुआत क्रुस से की जाती है। इस रीति से हम परमेश्वर की उपस्थिति में आते हैं, परंतु यह क्रुस ही है जहां से परमेश्वर का प्रेम बहता है, उसका अनुग्रह बहता है, और जब हम यीशु को यह कह कहते हुए देखते हैं। कि पिता उन्हें क्षमा करो। तो हम जानते हैं, कि मैं भी उनमें से एक हूं। और डेव एक और बात, जिसने मेरी सहायता की है , और मैं इस बात को समझ गया हूं , कि जब यीशु ने यह प्रार्थना की, परंतु उस ने कोई गलत काम नहीं किया था।
डेव:यह बिल्कुल ठीक है
सैमी: मेरा अर्थ है, कि वह तो बिल्कुल सिद्द था, वह पवित्र था। उसने किसी मनुष्य के साथ बुरा नहीं किया था। परंतु फिर भी उसे मारा गया, पीटा गया, कुचला गया ।, उसके ऊपर थूका गया, उसका अपमान किया गया , और उसे क्रूस पर चढ़ाया गया । फिर भी उसने प्रेम किया, और जहां पर कुछ अंतर है, मैंने कुछ गलत किया है, मैं भटक गया था। और जैसे मेरा एक दोस्त कहता है कि जब कोई आप की आलोचना करता है, तो याद रखें कि यदि उसे सब कुछ पता होता, पूरी वास्तविकता का पता होता, तो आपकी आलोचना तो इस से भी कहीं भयंकर होती।
डेव: ठीक बिल्कुल ठीक है
सैमी: क्योंकि हम सब भटक गए थे। हम फेल हो गए थे।
डेव: हां
सैमी: और इसीलिए जब लोग हमें दुख देते हैं। तो हो सकता है वह पूर्ण रीति से गलत हों। परंतु फिर भी हमें अपनी ग़लतियों के ऊपर सोचना चाहिए जो हमारी कमजोरी हैं।
डेव: हम बिल्कुल ऐसा ही करते हैं
सैमी: परंतु यीशु ऐसा नहीं था। वह सिद्द था। इसीलिए उसका अनुग्रह पवित्र है। मैं जानता हूं कि यह उसका अनुग्रह ही है, जिसने मुझे इस लायक बनाया, कि मैं उन्हें क्षमा कर पाया , जिन्होंने मुझे दुखी किया था।
डेव: यह बिल्कुल ठीक है।
सैमी: अनुग्रह शब्द को बोल कर देखें। यह कैसे कार्य करता है। जिस क्षमा की बात हम पहले वाले सेसन में कर रहे थे, वह अनुग्रह ही है। इस सेक्शन में हम फिर से अनुग्रह की बात कर रहे हैं। दूसरों को क्षमा करने के लिए अनुग्रह की आवश्यकता है। परमेश्वर के अनुग्रह की आवश्यकता है।
डेव: आप इस मुद्दे के ऊपर सोचें। अनुग्रह का अनुवाद, एक वरदान है । परमेश्वर हमें कुछ ऐसा देता है, जिसे हमने कमाया नहीं है। ना हम उसके लायक थे। और शायद ऐसे ही उसने हमें दे दिया। और यदि मैं आपको कहूं, सैमी मेरे पास आपको देने के लिए कुछ है। और जब मैं आप दे देता हूं, तो मैं चाहता हूं कि आप दूसरों को भी यह दें। और आप कहते हैं, ठीक है। मुझे ऐसे करने में खुशी होगी। परंतु मैं आपको देता कुछ भी नहीं, तो आप कुछ भी नहीं दे सकते हैं।
सैमी: ठीक
डेव : क्योंकि मुझे आपसे यह मिला नहीं है, यदि मिला होता , तो मैं किसी और को भी जरूर देता। परंतु यदि मैंने आपको यह दे दिया है, तो यह आपके हाथ में है , और आप इसे किसी और को भी दे सकते हैं और यही अनुग्रह है।
सैमी: यह बहुत अच्छा है। बहुत अच्छा
डेव : अनुग्रह हमें दिया गया है, यह वरदान है। हम इसे कमाते नहीं है। इसीलिए इसके लिए हम काम नहीं कर सकते हैं। हम इसके लायक भी नहीं थे। और कुछ लोग वह पुराना सिद्धांतिक शब्द का इस्तेमाल करते हैं, कि परमेश्वर के द्वारा अयोगिता में योग्यता प्रदान करना। और वह हमें यह देता है, क्योंकि वह यह देना चाहता है।
सैमी : ठीक
डेव: हमें यीशु से आज्ञा मिली है, कि तुम बदल जाओ और मैं चाहता हूं जैसे मैंने तुम्हें दिया है ऐसे ही तुम दूसरों को भी दो। वह इस के योग्य नहीं है, वह आकर तुम्हें यह नहीं कहेंगे , मैं क्षमा चाहता हूं। नहीं, नहीं, नहीं। जैसे मैंने तुम्हें दिया है, ऐसे ही तुम भी आगे दो। और जब हम इस बात को समझ जाते हैं तो हम जान जाते हैं कि किसी को क्षमा करना एक भावनात्मक कदम नहीं है यह मेरी आज्ञाकारिता है। ठीक है प्रभु, मैं इसे ले लेता हूं । और आप उस वक्त क्षमा करते जाते हो, जब हम इसके लायक भी नहीं थे । और मैं भी ऐसे ही करूंगा, क्योंकि आपने पहले मुझे यह दे दिया है मैं इसे लेता हूं और आगे दे देता हूं।
सैमी : मैं आपको कल रात की कहानी सुनाना चाहता हूं। मैं रवांडा से आए हुए अपने एक मित्र के साथ था और वह नर संहार के समय पर वही था । और मैं नर संहार के तुरंत बाद वहां गया और मैंने लोगों के साथ जाकर मेल मिलाप का प्रचार किया । और संहार के पश्चात जब मैं रवांडा गया, तो मैं शहर के मेयर के साथ लंच करने के लिए गया। जब टुट्सी लोगों को मारने का हुक्म दिया गया था और वह भी एक टुट्सी था और उसके सात बच्चे थे ।
और इस व्यक्ति का एक नजदीकी मित्र और पड़ोसी उसके पास आया और उस से कहने लगा, आपके सात बच्चे हैं और इन्हें आपके लिए छिपाना आसान नहीं है। आधे बच्चे आप मुझे दे दीजिए, मैं चार बच्चों को ले जाता हूं और इन्हें छिपा देता हूं। और आप, अपनी पत्नी और तीन बच्चों के साथछिप जाइएगा। उसने कहा बहुत ध्न्य्वाद, बहुत बहुत ध्न्य्वाद। और वह उन्हें ले गया और उसने मिलिट्री को बुला कर उन्हें मरवा डाला। और जब उसने मुझे यह बताया तो मेरा मुंह खुला ही रह गया। तो मैंने कहा, फिर आपने क्या किया? उसने कहा मैंने उसे माफ कर दिया। मैंने कहा, एक मिनट रुको। आप यह कैसे कर सकते हैं? यह सुभाविक नहीं है। उसने उत्तर दिया यह स्वभाविक नहीं है, यह असुभाविक है। यह मात्र परमेश्वर का अनुग्रह ही है, जिसके द्वारा मैं यह कर पाया हूं। जिन्होंने मुझे दुख दिया था, उंहें मैं क्षमा कर पाया। मैं सोचता हूं, कई बार हम उन्ही लोगों से ज्यादा दुखी होते हैं जिन्हें हम सबसे ज्यादा प्रेम करते हैं।
डेव: यह बिल्कुल ठीक है
सैमी: इसीलिए हमें सबसे ज्यादा दुख होता है। परंतु परमेश्वर का अनुग्रह पर्याप्त है। आप अपने आप के द्वारा यह नहीं कर सकते। आप उस मनुष्य को क्षमा नहीं कर सकते, परंतु मैं आपको उत्साहित करना चाहता हूं, कि आप कुछ कर सकते हैं। जाएं और परमेश्वर के साथ एकांत जगह पर बैठे। और परमेश्वर के साथ अकेले हो जाए और उसके आमने सामने जाकर उसे बोले, परमेश्वर मुझे आपके अनुग्रह की आवश्यकता है। मुझे इस वक्त आप का अनुग्रह चाहिए और परमेश्वर आप अपने अनुग्रह को मेरे जीवन में आने दें। और उसके पश्चात आप कहें, कि मैं उस व्यक्ति को क्षमा करता हूं। परमेश्वर आपको जागृति लाने के लिए इस्तेमाल करेगा , क्योंकि यह यहीं से शुरु होता है । क्रुस से परमेश्वर के अनुग्रह के साथ, परमेश्वर आपको आशीष दे।
मत्ती 6 :12-15
12और जिस प्रकार हम ने अपने अपराधियों को क्षमा किया है, वैसे ही तू भी हमारे अपराधों को क्षमा कर।
13और हमें परीक्षा में न ला, परन्तु बुराई से बचा; क्योंकि राज्य और पराक्रम और महिमा सदा तेरे ही हैं।” आमीन।
14इसलिये यदि तुम मनुष्य के अपराध क्षमा करोगे, तो तुम्हारा स्वर्गीय पिता भी तुम्हें क्षमा करेगा।
15और यदि तुम मनुष्यों के अपराध क्षमा न करोगे, तो तुम्हारा पिता भी तुम्हारे अपराध क्षमा न करेगा॥
Book of the Month
Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe. For all other books…
सेमी टिपित सेवकाई के विषय में
एसटीएम लगभग 50 वर्षों से दुनिया भर में प्रेरणा और सहायता प्रदान कर रहा है। सैमी टिपित इसके संस्थापक और अध्यक्ष है, वह एक विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता, शिक्षक और सुसमाचार के प्रचारक हैं जो 80 से अधिक देशों में लोगों की सेवा करने और उनकी सहायता करने का अनुभव रखते हैं। सैमी ऐसी सामग्री प्रदान करते है जो लोगों को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुद्दों से निपटने में मदद करती है। वह विशेष रूप से दुनिया भर के अन्य देशों के लिए सामग्री सुलभ बनाने के बारे में भावुक है। सैमी ने डेबरा “टेक्स” टिपित से शादी की है, और उनके दो बच्चे और पांच नाती पोते हैं। सैमी टिपित सेवकाई पंजीकृत 501c3 गैर-लाभकारी संगठन है।
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