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एक ईमानदार हृदय के साथ प्रार्थना करना
जब मैं मसीह में आया तो मुझे कुछ पता नहीं था कि प्रार्थना क्या होती है। जब मैं चर्च जाने लगा तो मैं लोगों को बहुत सुन्दर-सुन्दर प्रार्थनाएँ करते सुनता था। शायद मैं भी बाकी नए मसीहियों के समान ही था। मैं समझता था कि प्रार्थना सार्वजनिक रूप से की जाती है। बहुत लोग ऐसी भाषा में प्रार्थना करते थे जो आम बोलचाल की भाषा से अलग थी। अंग्रेज़ी में प्रार्थना करते हुए परमेश्वर को सम्बोधित करने के लिए वह “दी” और “दाओ” जैसे शब्दों का उपयोग करते थे। इसलिए, मुझे एक डर सा रहता था।
फिर एक दिन मैं एक छोटे से बाइबल अध्ययन समूह में बैठा था कि मेरे एक मित्र ने प्रार्थना की। वह भी नया विश्वासी था। जब उसने प्रार्थना की तो मुझे वहाँ एक वास्तविकता जैसे महसूस हुई। विद्यार्थियों का वह छोटा सा झुण्ड परमेश्वर की उपस्थिति से भर गया। इससे पहले मैंने कभी इस प्रकार की प्रार्थना का अनुभव नहीं किया था। यह एक ताज़गी देने वाला एहसास था। यह सत्य था।
जब मैं नया-नया मसीही बना तो जिन लोगों को मैंने प्रार्थना करते सुना था उनकी और मेरे उस मित्र की प्रार्थना में क्या अन्तर था। अन्तर इतना सा था कि उसकी प्रार्थना वास्तविक थी और उसकी प्रार्थना में एक साधारण सी सच्चाई थी। वह अपनी आत्मिकता से किसी को प्रभावित करने का प्रयास नहीं कर रहा था। वह किसी भाषण की भूमिका नहीं बाँध रहा था। उसने अपनी ही भाषा में प्रार्थना की, न कि किसी ऐसी भाषा में जिसका उसे ज्ञान नहीं था।
प्रार्थना दो हृदयों की संगति है – परमेश्वर का हृदय और मनुष्य का हृदय। इसका अर्थ है सृष्टि के सृष्टिकर्ता के साथ गहनतम वार्तालाप। यह मनुष्य या परमेश्वर को प्रभावित करने का प्रयत्न नहीं है। इसका अर्थ है अपनी वास्तविकता में बने रहना। यदि प्रार्थना के विषय में कोई एक सत्य हमें जानने की आवश्यकता है तो वह है इसकी सच्चाई! हम बनावटी नहीं बन सकते। प्रार्थना के गुप्त स्थान में हम मुखौटा पहनकर नहीं जा सकते। हमारे लिए आवश्यक है कि हम ईमानदार हृदय के साथ परमेश्वर के समक्ष जाएँ।
यदि हम पीड़ा में हैं तो हमें इसके विषय में ईमानदार होना है। हमें इसे छिपाने का प्रयत्न करने की आवश्यकता नहीं है। यदि हम किसी विजय का अनुभव करते हैं और हम इससे बहुत खुश हैं तो हमें आनन्दित होने की आवश्यकता है और उस सब के लिए परमेश्वर का धन्यवाद और स्तुति करने की आवश्यकता है जो उसने किया है। यदि हम पराजित होते हैं तो हमें सहायता के लिए पुकारने की आवश्यकता है। यदि हम उदासीन हैं और हमें इसकी परवाह नहीं है तो हमें इसके बारे में ईमानदार होने और परमेश्वर से प्रार्थना करने की आवश्यकता है कि वह हमें बदलने का अनुग्रह दे।
सच्चाई के साथ प्रार्थना करने वाले हृदय का ईमानदार होना आवश्यक है, नहीं तो प्रार्थना मात्र एक धार्मिक कर्तव्य से बढ़कर कुछ नहीं है। जब बाइबल शक्तिशाली प्रार्थना की बात करती है तो इसका अर्थ है ईमानदारी के साथ प्रार्थना। याकूब की पुस्तक कहती है, “इसलिये तुम आपस में एक दूसरे के साम्हने अपने अपने पापों को मान लो; और एक दूसरे के लिये प्रार्थना करो, जिस से चंगे हो जाओ; धर्मी जन की प्रार्थना के प्रभाव से बहुत कुछ हो सकता है” (याकूब 5:16)। ईमानदार या सच्चा अंगीकार और परमेश्वर की चंगाई साथ-साथ चलते हैं।
यदि आप एक प्रार्थना योद्धा बनना चाहते हैं तो इसका आरम्भ ईमानदारी के साथ होता है। जो सब कुछ जानता है उसकी उपस्थिति में मुखौटा पहन कर जाना असम्भव है। आपकी मनोदशा को वह पहले से ही जानता है। हमारे ईमानदार बनने का लाभ उसे नहीं परन्तु हमें ही है। जब हम सच्चाई और ईमानदारी के साथ अपने हृदय को उसके सामने खोलते हैं तो वह आता और हमसे भेंट करता है। वह हमें उत्तर देता है और हाँ, वह टूटे हुए हृदय को चंगा करता है।
याकूब 5 :13-16
13यदि तुम में कोई दुखी हो तो वह प्रार्थना करे: यदि आनन्दित हो, तो वह स्तुति के भजन गाए। 14यदि तुम में कोई रोगी हो, तो कलीसिया के प्राचीनों को बुलाए, और वे प्रभु के नाम से उस पर तेल मल कर उसके लिये प्रार्थना करें। 15और विश्वास की प्रार्थना के द्वारा रोगी बच जाएगा और प्रभु उस को उठा कर खड़ा करेगा; और यदि उस ने पाप भी किए हों, तो उन की भी क्षमा हो जाएगी।
16इसलिये तुम आपस में एक दूसरे के साम्हने अपने अपने पापों को मान लो; और एक दूसरे के लिये प्रार्थना करो, जिस से चंगे हो जाओ; धर्मी जन की प्रार्थना के प्रभाव से बहुत कुछ हो सकता है।
Book of the Month
Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe. For all other books…
सेमी टिपित सेवकाई के विषय में
एसटीएम लगभग 50 वर्षों से दुनिया भर में प्रेरणा और सहायता प्रदान कर रहा है। सैमी टिपित इसके संस्थापक और अध्यक्ष है, वह एक विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता, शिक्षक और सुसमाचार के प्रचारक हैं जो 80 से अधिक देशों में लोगों की सेवा करने और उनकी सहायता करने का अनुभव रखते हैं। सैमी ऐसी सामग्री प्रदान करते है जो लोगों को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुद्दों से निपटने में मदद करती है। वह विशेष रूप से दुनिया भर के अन्य देशों के लिए सामग्री सुलभ बनाने के बारे में भावुक है। सैमी ने डेबरा “टेक्स” टिपित से शादी की है, और उनके दो बच्चे और पांच नाती पोते हैं। सैमी टिपित सेवकाई पंजीकृत 501c3 गैर-लाभकारी संगठन है।
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