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एक विजयी के समान दोड़ना

दौड़ जिस में हमें दौड़ना है, धीरज से दौड़ें।

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प्रार्थना के द्वारा समर्पण

पूर्वी यूरोप में साम्यवाद के कठिन दिनों में मेरी मुलाकात कुछ ऐसे लोगों से हुई जो बहुत समर्पित मसीही थे। बहुत सारे लोगों ने अपने विश्‍वास के कारण दुख उठाया था। बहुत सारे लोगों को जेल भी जाना पड़ा। कुछ को अपने रोज़गारों से हाथ धोने पड़े। मसीह के अनुयायियों के लिए समय बहुत ही अन्धकारपूर्ण और कठिन था। परन्तु ऐसे में भी मैंने रोमानिया की कई कलीसियाओं में बेदारी के आत्मा को कार्य करते देखा।

उन दिनों के दौरान मैंने दक्षिण पूर्वी शहर गलाटी में सिलसिलेवार सुसमाचार प्रचार सभाओं में प्रचार किया। जिस कलीसिया में मैंने इन सभाओं के दौरान प्रचार किया वह हर शाम खचाखच भरी होती थी। बल्कि इन सभाओं के दौरान मसीहियों को मुख्य पवित्र स्थान में आने की मनाही थी। उन्हें केवल बालकनी में बैठने की अनुमति थी ताकि मुख्य हाल में अधिक से अधिक अविश्‍वासी बैठ सकें। जिन विश्‍वासियों को बालकनी में बैठने की जगह नहीं मिलती थी वह कड़ी ठण्ड में बाहर खड़े रहकर सन्देश को सुनते थे। परमेश्‍वर ने बड़ी सामर्थ्य के साथ कार्य किया और बहुत लोगों ने मसीह को स्वीकार कर लिया।

एक प्रिय रोमानी मित्र डॉक्टर टाइटस कोलटिया ने मेरे लिए ज़बरदस्त अनुवाद किया। हर दिन सभा के बाद शाम को हम नदी किनारे जाकर प्रार्थना में समय व्यतीत करते थे। ठण्ड इतनी अधिक थी कि पृथ्वी मानो जम गई हो। परन्तु एक रात टाइटस के द्वारा की गई प्रार्थना को मैं कभी नहीं भूल सकता। उसने कहा, “हे परमेश्‍वर, यदि मेरे लोगों के पश्‍चाताप के लिए शहीदों के खून की आवश्‍यकता है तो सबसे पहले मैं अपना खून बहाना चाहता हूँ।”

मैं और मेरे दो मित्र उसकी इस प्रार्थना से स्तब्द्ध रह गए। मैंने कभी किसी को अपने देशवासियों के लिए इतने जुनून के साथ प्रार्थना करते नहीं देखा था। यद्यपि, टाइटस को अपने लोगों को मसीह के पास आते देखने के लिए अपना खून तो नहीं बहाना पड़ा परन्तु कई औरों को बहाना पड़ा। परमेश्‍वर ने उस देश में बड़ी सामर्थ्य के साथ कार्य किया और एक महान आत्मिक जागृति को भेजा। रोमानिया में जो हुआ वह इस सदी के सबसे महान चमत्कारों में से एक है। मुझे पूरा विश्‍वास है कि वहाँ बेदारी इसलिए आई क्योंकि वहाँ ऐसे लोग थे जिन्होंने प्रार्थना में स्वयं को मसीह को अर्पण किया।

प्रार्थना परमेश्‍वर के साथ हमारी चाल में इसलिए अत्यावश्‍यक है क्योंकि यह वह व्यावहारिक साधन है जिसके द्वारा हम मसीह के समक्ष समर्पण करते हैं। पौलुस ने रोम के विश्‍वासियों को लिखा, “इसलिये हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्‍वर की दया स्मरण दिला कर विनती करता हूँ, कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्‍वर को भावता हुआ बलिदान करके चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है” (रोमियों 12:1)। “अपने शरीरों को भेंट के रूप में चढ़ाना” एक आराधना का भाव है जो प्रार्थना के गुप्त स्थान में व्यक्त किया जाता है।

हम मसीह को उस समय जान पाते हैं जब हम “प्रभु के नाम को पुकारते हैं” (रोमियों 10:13), और उसमें निरन्तर बढ़ते तब हैं जब हम प्रतिदिन प्रार्थना में उसके समक्ष समर्पण करते हैं। प्रार्थना एक विश्‍वासी की जीवन रेखा है। यह वह साधन है जिसके द्वारा हम परमेश्‍वर की आराधना करने के लिए उसकी उपस्थिति में प्रवेश करते हैं। यह परमेश्‍वर का हमें विश्‍वास में परिपक्व करने का तरीका है।

प्रार्थना में मसीह के समक्ष समर्पण मात्र परमेश्‍वर की भलाइयों के प्रति एक प्रतिउत्तर है। प्रार्थना दो हृदयों की संगति है – परमेश्‍वर का हृदय और मनुष्य का हृदय। उसकी दया और अनुग्रह के कारण ही हम उसकी उपस्थिति में आ सकते हैं। वह पूरी तरह से पवित्र है। उसकी दया के बिना उसके साथ घनिष्ठ संगति रख पाना असम्भव है। इसलिए, परमेश्‍वर के जिस पहले गुण का हम अनुभव करते हैं वह है दया। उसकी दया ही हमें अपने जीवनों को पूरी तरह से मसीह के समक्ष समर्पण करने के लिए प्रेरित करती है। प्रार्थना और समर्पित जीवन को अलग नहीं किया जा सकता। प्रार्थना हमारी भेंट समर्पित जीवन के साथ कराती है और समर्पित जीवन ही है जिसे परमेश्‍वर अपनी महिमा के लिए इस्तेमाल करता है। प्रार्थना करें। समर्पण करें। ऐसे जीवन को पवित्र आत्मा एक ज़बरदस्त शस्त्र के रूप में इस्तेमाल करता है।

रोमियो 12 :1-3

1इसलिये हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिला कर बिनती करता हूं, कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान करके चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है। 2और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो॥

3क्योंकि मैं उस अनुग्रह के कारण जो मुझ को मिला है, तुम में से हर एक से कहता हूं, कि जैसा समझना चाहिए, उस से बढ़कर कोई भी अपने आप को न समझे पर जैसा परमेश्वर ने हर एक को परिमाण के अनुसार बांट दिया है, वैसा ही सुबुद्धि के साथ अपने को समझे।

Book of the Month

Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe.  For all other books…

सेमी टिपित सेवकाई के विषय में

एसटीएम लगभग 50 वर्षों से दुनिया भर में प्रेरणा और सहायता प्रदान कर रहा है। सैमी टिपित  इसके संस्थापक और अध्यक्ष है, वह एक विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता, शिक्षक और सुसमाचार के प्रचारक हैं जो 80 से अधिक देशों में लोगों की सेवा करने और उनकी सहायता करने का अनुभव रखते हैं। सैमी ऐसी सामग्री प्रदान करते  है जो लोगों को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुद्दों से निपटने में मदद करती है। वह विशेष रूप से दुनिया भर के अन्य देशों के लिए सामग्री सुलभ बनाने के बारे में भावुक है। सैमी ने डेबरा “टेक्स” टिपित  से शादी की है, और उनके दो बच्चे और पांच नाती पोते हैं। सैमी टिपित सेवकाई पंजीकृत 501c3 गैर-लाभकारी संगठन है।

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