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एक विजयी के समान दोड़ना

दौड़ जिस में हमें दौड़ना है, धीरज से दौड़ें।

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हमारे भविष्य पर प्रभाव डालने वाली प्रार्थना

मैं उस रात को कभी नहीं भूल सकता। मैंने कुछ ही क्षण पहले मसीह को स्वीकार करने वाली प्रार्थना की थी। मैंने अपने जीवन में असली अर्थ और उद्देश्य को पा लिया था। उस समय मैं विश्वविद्यालय का विद्यार्थी था। मैं परमेश्वर की भलाई और अनुग्रह से अभिभूत था। मैं उस व्यक्ति के पास गया जो प्रचार कर रहा था और मैंने उससे कहा, “मुझे लगता है कि परमेश्वर मुझे सेवा में बुलाना चाहता है।”

उसके शब्द मेरे बाकी जीवन की दिशा निर्धारित करने जा रहे थे। उसने कहा, “तुम जानते हो कि तुम्हें उद्धार देने के लिए यीशु को क्या करना पड़ा? मैंने भोलेपन के साथ उत्तर दिया, “नहीं, मैं नहीं जानता।”

उसने कहा, “यीशु हमेशा से परमेश्वर था, है और हमेशा रहेगा। तौभी वह अपनी महिमा छोड़कर पृथ्वी पर आ गया। वह तुम्हारे पापों के लिए जान देने आया। वह त्यागा गया, उसे पीटा गया और अंततः एक क्रूर रोमी क्रूस पर चढ़ा दिया गया। उसने यह सब तुम्हारे लिए किया और हाँ याद रखना, यह सब उसने महिमा का राजा होते हुए किया। यदि उसने तुम्हारे लिए इतना किया तो तुम्हें भी उसके लिए कुछ भी करने के लिए तैयार रहना चाहिए।”

इन शब्दों ने मेरे हृदय को बेध दिया। उस रात मैंने यह प्रार्थना की, “हे परमेश्वर, मैं अपना जीवन आप को सौंपता हूँ, आप मेरे जीवन के साथ जो भी करना चाहते हैं, करें। आप जहाँ चाहें मैं जाऊँगा, आप जो चाहें मैं करूँगा और जो आप चाहें वह बनूँगा।” मुझे ज़रा भी पता नहीं था कि यह प्रार्थना मेरे भविष्य पर क्या प्रभाव डालने वाली थी।

मैं नहीं जानता था कि परमेश्वर मेरे जीवन को कैसे उपयोग करने जा रहा था परन्तु उस रात मैंने यह निर्णय किया कि मैं अपना पूरा भरोसा उस पर रखूँगा। उस रात मैंने एक सबक सीखा जो भविष्य में वर्षों तक मेरे साथ रहने वाला था और वह सबक था – जब मैं अपना जीवन और कार्य परमेश्वर के हाथ में सौंपूँगा तो वह उस सब को पूरा करेगा जो वह चाहता है कि मैं करूँ।

आमतौर पर क्या होता है कि हम पहले अपने जीवनों की योजनाएँ बनाते हैं और फिर इन योजनाओं के चारों ओर अपने कार्यों का निर्माण करते हैं। परन्तु परमेश्वर हमें इसके बिलकुल विपरीत करने के लिए कहता है। वह कहता है, “अपने कार्य यहोवा के हाथ में दो तो तुम्हारी योजनाएँ सफल होंगी” (नीतिवचन 16:3)। परमेश्वर चाहता है कि हमारे जीवन पूरी तरह से उसे समर्पित हों। जब हम स्वयं को उसके हाथ में सौंप देते हैं और दीनता के साथ उसके वचन की आज्ञाकारिता में चलते हैं तो वह हमारी योजनाओं को सफल करता है।

जब हम परमेश्वर को समर्पित होते हैं तो वह अपनी योजनाएँ हम पर प्रकट करता है और इस रीति से हमें उन योजनाओं को पूरा करने की शक्ति देता है। परमेश्वर के सम्मुख समर्पण की प्रार्थना हमारे जीवनों को पूरे सामर्थ्य के साथ जीने का सबसे बड़ा आश्वासन है। उसकी इच्छा के समक्ष हमारे पूर्ण त्याग की प्रार्थना के द्वारा हमारे भविष्य को अपनी सबसे उत्तम दिशा मिलेगी।

कोई ऐसा स्थान ढूँढें जहाँ आप परमेश्वर के साथ अकेले समय बिता सकें और आज के कार्यों को उसके हाथों में सौंप सकें। प्रतिदिन ऐसा करना सीखें और जब आप यह करेंगे तो आप देखेंगे कि परमेश्वर आपके जीवन के लिए अपनी योजनाओं को प्रकट करने लगेगा। हमारे भविष्य के लिए परमेश्वर की इच्छा ‘आज’ उसके सम्मुख हमारे समर्पण में है। कुछ लोग जीवन में भविष्य की दिशा समझने के लिए नाटकीय चिन्हों की तलाश में रहते हैं। परन्तु परमेश्वर हमें छोटी-छोटी बातों से आरम्भ करने के लिए कहता है, जैसे कि, आज के कार्यों को उसके हाथों में सौंपना। फिर हम देखेंगे कि हमारी योजनाएँ या फिर हम कहें कि उसकी योजनाएँ, हमारे जीवनों में स्थापित हो जाएँगी।

नीतिवचन 16 : 1-4

1मन की युक्ति मनुष्य के वश में रहती है, परन्तु मुंह से कहना यहोवा की ओर से होता है।2मनुष्य का सारा चाल चलन अपनी दृष्टि में पवित्र ठहरता है, परन्तु यहोवा मन को तौलता है।3अपने कामों को यहोवा पर डाल दे, इस से तेरी कल्पनाएं सिद्ध होंगी।

4यहोवा ने सब वस्तुएं विशेष उद्देश्य के लिये बनाईं हैं, वरन दुष्ट को भी विपत्ति भोगने के लिये बनाया है।

Book of the Month

Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe.  For all other books…

सेमी टिपित सेवकाई के विषय में

एसटीएम लगभग 50 वर्षों से दुनिया भर में प्रेरणा और सहायता प्रदान कर रहा है। सैमी टिपित  इसके संस्थापक और अध्यक्ष है, वह एक विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता, शिक्षक और सुसमाचार के प्रचारक हैं जो 80 से अधिक देशों में लोगों की सेवा करने और उनकी सहायता करने का अनुभव रखते हैं। सैमी ऐसी सामग्री प्रदान करते  है जो लोगों को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुद्दों से निपटने में मदद करती है। वह विशेष रूप से दुनिया भर के अन्य देशों के लिए सामग्री सुलभ बनाने के बारे में भावुक है। सैमी ने डेबरा “टेक्स” टिपित  से शादी की है, और उनके दो बच्चे और पांच नाती पोते हैं। सैमी टिपित सेवकाई पंजीकृत 501c3 गैर-लाभकारी संगठन है।

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