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एक विजयी के समान दोड़ना

दौड़ जिस में हमें दौड़ना है, धीरज से दौड़ें।

शिष्यता का दैनिक वीडियो

पहले परमेश्वर को खोजना  

यह प्रातकाल का समय था। मैं और मेरे साथ कई पासबान परमेश्वर से प्रार्थना कर रहे थे। हमारी इच्छा परमेश्वर को लोगों के मध्य कार्य करते हुए देखने की थी और हम बेदारी के लिए प्रार्थना कर रहे थे। मैं यह मानता हूँ कि मुझे यह बात बताने में थोडी शर्म अवश्य महसूस हो रही है कि उस प्रातःकाल क्या हुआ था जब वे पासबान प्रार्थना कर रहे थे, मुझे नींद आ गई और जैसे ही मेरे खर्राटे शुरू हुए, अन्य पसबानों ने इस प्रकार प्रार्थना करना शुरू कर दिया, “हे प्रभु, हमें भी अपने भाई सैमी जैसी शान्ति प्रदान करें।”

मुझे बहुत ही शर्म महसूस हुई जब उन्होंने मुझे नींद से जगाया। वहाँ कुछ ऐसा हुआ था जिसे आपको समझने की आवश्यकता है। मुझे प्रातःकाल एक समस्या होती है, अस्थमा के कारण प्रातःकाल में मेरे रक्त प्रवाह में मुझे कठिनाई होती है। इसके कारण मुझे प्रार्थना में समय व्यतीत करना कठिन हो जाता है। अनेक लोग, जिनकी शारिरीक सीमितताएँ हैं वे इस प्रकार कहेंगे, “इसका अर्थ यह है कि हमें प्रातःकाल प्रार्थना करने की आवश्यकता नहीं है। दिन के अन्त में प्रार्थना करना अधिक उचित है।”

किन्तु मैं इससे असहमत हूँ यह अनिवार्य है कि हमारा पहला कार्य परमेश्वर से प्रार्थना ही हो। रात को प्रार्थना करना भी अच्छा है, किन्तु यदि हम रात को ही प्रार्थना करते है तो केवल हम यही प्रार्थना कर पाएँगे कि परमेश्वर हमें क्षमा कर दीजिए क्योंकि दिन भर हम आपके विरूद्ध चले हैं। जब हम प्रार्थना करते हैं तो हम परमेश्वर के समक्ष यह आग्रह करते हैं कि परमेश्वर हमें आपकी आवश्यकता है। हम अपनी ज़रूरतों को उनके सामने रखते हैं। इसीलिए हमें अपने दिन की शुरूआत उनकी खोज से करनी चाहिए।

यीशु ने अपने चेलों को इस प्रकार प्रार्थना करना सिखाया, “हमें हमारी प्रतिदिन की रोटी दे।” (मत्ती 6:11)। रोटी किसी व्यक्ति की पहली आवश्यकता है। हमें भोजन की आवश्यकता होती है। इसके बिना हम जी नहीं सकते। किन्तु आप 11 बजे परमेश्वर से तीन अच्छे खानों की प्रार्थना नहीं कर सकते। दिन के अन्त में यह प्रार्थना करना उचित नहीं है बल्कि दिन के आरम्भ में। यीशु का अपने चेलो को यह प्रार्थना सिखाने का तात्पर्य यह है कि प्रतिदिन उनका प्रथम कार्य प्रार्थना ही हो।

किन्तु आप को भी मेरी जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। तो आप पूछेंगे, “मैं अपनी प्रार्थना कैसे करता हूँ?”

साधारणत: मैं नहा धोकर अपना नाश्ता करने के पश्चात किसी एकान्त स्थान पर चला जाता हूँ। जहाँ मैं अकेला हो सकूँ। मैं प्रायः ऐसी जगह का चुनाव करता हूँ जहाँ मैं टहल सकूँ। मैं जानता हूँ कि घुटने टेक कर प्रार्थना करने से मेरे रक्त प्रवाह में कठिनाई हो सकती है और मुझे चक्कर आ सकता है इसलिए मैं टहल कर प्रार्थना करता हूँ। टहलता हूँ और सुनता हूँ, टहलता और परमेश्वर के सामने अपने ह्रदय को उण्डेलता हूँ।

मैं नहीं जानता कि परमेश्वर के साथ अपने दिन को प्रारम्भ करने के लिए आपको क्या करना चाहिए। किन्तु मैं आपको प्रोत्साहित करूँगा कि आप प्रातःकाल की प्रार्थना और अपने प्रतिदिन के क्रियाकलापों के लिए एक समय और स्थान निर्धारित करें। राजाओं के राजा और प्रभुओं के प्रभु को व्यक्तिगत रूप से सुनने की तैयारी में आपको जो करने की आवश्यकता है आपको वह सब करना है। इससे महत्वपूर्ण कार्य और कोई नहीं है जो आप पूरे दिनभर में करेंगे।

यदि आप परमेश्वर से आरम्भ करेंगे तो आपको यह ज्ञात हो जाएगा कि आपके पूरे दिन उसकी उपस्थिति आपके साथ–साथ रहेगी। उसके साथ दिन को आरम्भ करने से अधिक आनन्द और किसी कार्य में नहीं है। इससे अधिक हताशा और कुछ नहीं होगी कि आप अपने दिन का आरम्भ अपने मनुष्यत्व की सामर्थ्य में करें। इसलिए प्रातःकाल ही परमेश्वर की खोज करें, आपको इसका खेद कदापि न होगा।

मरकुस1 :35-39

35और भोर को दिन निकलने से बहुत पहिले, वह उठकर निकला, और एक जंगली स्थान में गया और वहां प्रार्थना करने लगा।

36तब शमौन और उसके साथी उस की खोज में गए।

37जब वह मिला, तो उस से कहा; कि सब लोग तुझे ढूंढ रहे हैं।38उस ने उन से कहा, आओ; हम और कहीं आस पास की बस्तियों में जाएं, कि मैं वहां भी प्रचार करूं, क्योंकि मैं इसी लिये निकला हूं।39सो वह सारे गलील में उन की सभाओं में जा जाकर प्रचार करता और दुष्टात्माओं को निकालता रहा॥

Book of the Month

Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe.  For all other books…

सेमी टिपित सेवकाई के विषय में

एसटीएम लगभग 50 वर्षों से दुनिया भर में प्रेरणा और सहायता प्रदान कर रहा है। सैमी टिपित  इसके संस्थापक और अध्यक्ष है, वह एक विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता, शिक्षक और सुसमाचार के प्रचारक हैं जो 80 से अधिक देशों में लोगों की सेवा करने और उनकी सहायता करने का अनुभव रखते हैं। सैमी ऐसी सामग्री प्रदान करते  है जो लोगों को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुद्दों से निपटने में मदद करती है। वह विशेष रूप से दुनिया भर के अन्य देशों के लिए सामग्री सुलभ बनाने के बारे में भावुक है। सैमी ने डेबरा “टेक्स” टिपित  से शादी की है, और उनके दो बच्चे और पांच नाती पोते हैं। सैमी टिपित सेवकाई पंजीकृत 501c3 गैर-लाभकारी संगठन है।

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