Enter your keyword

एक विजयी के समान दोड़ना

दौड़ जिस में हमें दौड़ना है, धीरज से दौड़ें।

शिष्यता का दैनिक वीडियो

प्रार्थना में यहोवा से मुलाकात करना

जब यीशु ने अपने चेलों को प्रार्थना करना सिखाया, उसने उन्हें सिखाया कि सबसे पहले वो परमेश्वर के चरित्र और स्वभाव गुण पर ध्यान लगाए – “हे हमारे पिता, तू जो स्वर्ग मे है, तेरा नाम पवित्र माना जाए…” उसने उनकी आखों को परमेश्वर लगाए रखने के द्वारा प्रार्थना का द्वार खोला. प्रार्थना सामान्य रूप मे, परमेश्वर के साथ नजदीकी है. यीशु चाहता था कि उसके अनुयायी इस बात को जान ले कि प्रार्थना कोई रहस्यमय सूत्र या धार्मिक विधि नही है, लेकिन इसके बजाए ये दो दिल की संगति है. इसलिए, उसने अपने चेलों को सिखाया कि परमेश्वर जो है उसके लिए उसकी स्तुति और आराधना करे और सच मे उसे जाने.

चेलों ने परमेश्वर के बारे मे स्पष्ट दृष्टिकोण पाने के बाद, जिससे वो जान पाए कि परमेश्वर के दिल मे क्या है. जब उन के दिलों ने परमेश्वर के दिल की बात देखी, तब ये स्वाभाविक था कि वो उसके दिल कि बातों के लिए प्रार्थना करना शुरू करें. वो संसार की जरूरतों को देखकर संसार मे परमेश्वर की इच्छा पूरी होने के बारे मे प्रार्थना करे, जैसे उसने प्रार्थना करना सिखाया, “तेरा राज्य आए, और जैसे स्वर्ग मे तेरी इच्छा पूरी होती है वैसे ही पृथ्वी पर पूरी हो.” वो प्रार्थना करते है कि उसका राज्य और अधिकार स्त्री और पुरुषों के दिल मे आएं.

चेलें जब पिता की आराधना कर लेते हैं, फिर वो उसके दिल की चीजों के लिए उसे पुकार उठते है. ये प्रार्थना की सामर्थ है. फिर जैसे यीशु ने अपने चेलों को प्रार्थना करना सिखाया, उसने बताया कि वो अपनी जरूरतें परमेश्वर के पास लाएं और प्रार्थना करे, “रोज की रोटी हमें दे.” उन्हें अपनी जरूरतों को प्रभु के सामने लाना था. रोटी, मनुष्य की बुनियादी जरूरतों के बारे मे बताती है. भोजन के बिना हम जी नही सकते हैं, इसलिए यीशु ने अपने चेलों को सिखाया कि अपने जीवन की हर जरूरत पूरी करने के लिए परमेश्वर की ओर देखें.

प्रार्थना के बारे में यीशु की शिक्षा के बारे मे एक दिलचस्प बात है. ध्यान दे कि उसने चेलों को प्रार्थना करने के लिए कैसा क्रम सिखाया. पहले, ध्यान परमेश्वर के वचन पर होना चाहिए, फिर संसार की जरूरतों पर, और अंत मे उनकी अपनी जरूरतों पर. हम मे से बहुत से लोग जैसी प्रार्थना करते है ये उसका बिलकुल विपरीत है. हम अकसर प्रार्थना करते हैं, “ओ प्रभु, मेरी मदत कर! मुझे इसकी जरूरत है, प्लीज़ मुझे ये दे.” अकसर हम प्रार्थना का द्वार खोलते हैं परमेश्वर पर ध्यान देने के बजाए, हमारे उपर ही ध्यान देने के द्वारा. सामर्थी प्रार्थना केवल निरंतर प्रार्थना करना नही है, लेकिन परमेश्वर के दिल के साथ प्रार्थना करना है. हम परमेश्वर के साथ शुरू करे और इसका ध्यान देना ही हमें आत्मिक रूप मे, दूसरों के लिए प्रार्थना करने के लिए आगे ले जाता है. उसका अंतिम परिणाम होता है कि वो हमारी जरूरतें पूरी करता हैं.वो यहोवा-यिरे है. वो हमारी चिंता करता है और हमारे दिल की हर जरूरत जानता है.

यदि हम पहले उस के राज्य की खोज करे, यीशु ने कहा कि वो हमारे जीवन की हर जरूरत पूरी करेगा. सच मे, अपने चेलों को कैसी प्रार्थना करना चाहिए ये सिखाने के तुरंत बाद, उसने उनसे कहा, “पहले परमेश्वर के राज्य और धर्म की खोज करो, तो ये सब तुम्हें दे दिया जाएगा” (मत्ती ६:३३). परमेश्वर अपनी संतानों के लिए विश्वासयोग्य है. जो प्रार्थना परमेश्वर के राज्य और धर्म को पहला स्थान देती है उसका परिणाम हमेशा प्रभु का प्रयोजन और स्रोत होगा.

स्तुति और धन्यवाद देने मे, हम परमेश्वर को उसकी महानता और भलाई में जानते है. मध्यस्थी में, हम परमेश्वर के दिल को जानते हैं. लेकिन निवेदन में, हम परमेश्वर से यहोवा-यिरे परमेश्वर, हमारे प्रयोजन करनेवाले के रूप में मिलते हैं.  क्यों न आज आप प्रार्थना मे कुछ समय बिताए. केवल परमेश्वर को जाने. उसे अपने पिता के रूप मे जाने, जो अपने सिंहासन पर विराजमान होता हैं – सर्व-सामर्थी परमेश्वर, पवित्र परमेश्वर जो संसार से गहरा प्यार करता है. जैसे आप उसे जानेगे, आप पाएगे कि वो आपकी हर जरूरत पूरी कर रहा है.

C15और हे फिलप्पियो, तुम आप भी जानते हो, कि सुसमाचार प्रचार के आरम्भ में जब मैं ने मकिदुनिया से कूच किया तब तुम्हें छोड़ और किसी मण्डली ने लेने देने के विषय में मेरी सहयता नहीं की।

ਗੱਲਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਦੱਸ ਰਿਹਾ ਹਾਂ ਪਰ ਇਹ ਇਸ ਲਈ ਨਹੀਂ ਕਿ ਮੈਨੂੰ ਕੋਈ ਚੀਜ਼ ਲੋੜੀਂਦੀ ਹੈ। ਮੈਂ ਕਿਸੇ ਵੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀਆਂ ਹਲਾਤਾਂ ਵਿੱਚ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚ ਮੈਂ ਜਿਉਂਦਾ ਹਾਂ, ਸੰਤੁਸ਼ਟ ਹੋਣਾ ਸਿੱਖ ਲਿਆ ਹੈ। 12 ਮੈਨੂੰ ਪਤਾ ਹੈ ਕਿ ਗਰੀਬੀ ਵਿੱਚ ਕਿਵੇਂ ਰਹਿਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਅਮੀਰੀ ਵਿੱਚ ਕਿਵੇਂ ਰਹਿਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ। ਮੈਂ ਹਰ ਸਮੇਂ ਅਤੇ ਹਰ ਹਾਲ ਵਿੱਚ ਭਾਵੇਂ ਰਜੇਵੇਂ ਵਿੱਚ ਰਹਿਣਾ ਪਵੇ ਅਤੇ ਭਾਵੇਂ ਭੁੱਖਮਰੀ ਵਿੱਚ, ਭਾਵੇਂ ਅਮੀਰੀ ਵਿੱਚ ਰਹਿਣਾ ਪਵੇ ਅਤੇ ਭਾਵੇਂ ਗਰੀਬੀ ਵਿੱਚ। ਖੁਸ਼ ਰਹਿਣ ਦਾ ਗੁਪਤ ਰਾਜ ਜਾਣ ਲਿਆ ਹੈ। 13 ਮੈਂ ਮਸੀਹ ਰਾਹੀਂ ਸਾਰੀਆਂ ਗਲਾਂ ਕਰ ਸੱਕਦਾ ਹਾਂ, ਜੋ ਮੈਨੂੰ ਬਲ ਬਖਸ਼ਦਾ ਹੈ। 14 ਪਰ ਇਹ ਚੰਗਾ ਸੀ ਕਿ ਮੁਸੀਬਤਾਂ ਵਿੱਚ ਤੁਸੀਂ ਮੇਰੀ ਮਦਦ ਕੀਤੀ।

Book of the Month

Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe.  For all other books…

सेमी टिपित सेवकाई के विषय में

एसटीएम लगभग 50 वर्षों से दुनिया भर में प्रेरणा और सहायता प्रदान कर रहा है। सैमी टिपित  इसके संस्थापक और अध्यक्ष है, वह एक विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता, शिक्षक और सुसमाचार के प्रचारक हैं जो 80 से अधिक देशों में लोगों की सेवा करने और उनकी सहायता करने का अनुभव रखते हैं। सैमी ऐसी सामग्री प्रदान करते  है जो लोगों को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुद्दों से निपटने में मदद करती है। वह विशेष रूप से दुनिया भर के अन्य देशों के लिए सामग्री सुलभ बनाने के बारे में भावुक है। सैमी ने डेबरा “टेक्स” टिपित  से शादी की है, और उनके दो बच्चे और पांच नाती पोते हैं। सैमी टिपित सेवकाई पंजीकृत 501c3 गैर-लाभकारी संगठन है।

सम्पर्क करें: info@sammytippit.org

सर्वाधिकार सुरक्षित