शिष्यता का दैनिक वीडियो
परमेश्वर जो हमारे लिए प्रयोजन करता है
मती ६:११ ; भजन ३७:४; फ़िल ४:१९
सैमी टिप्त : मैं डेव बटस के साथ हूं और हम प्रार्थना के विषय में बात कर रहे थे। और डेव हमें बहुत सी बातें सिखा रहे थे, और उन्होंने सिखाया, कैसे प्रार्थना एक रिश्ते में से बाहर निकलती है। और यह उसके साथ वार्तालाप है। और डेव एक और बात, लोग शायद गलत समझेंगे। शायद हमें इसे स्पष्ट करना होगा कि यह मेरे विषय में नहीं है। हम कहते हैं कि यह परमेश्वर के ऊपर ध्यान केंद्रित करने के विषय में है। और कई लोग कहते हैं, कि परमेश्वर क्या सच में मेरी परवाह करता है? हां वह करता है। और यीशु ने पहले कहा, हम परमेश्वर के ऊपर ध्यान दें और उसके पश्चात् राज्य की प्रार्थना करें। और फिर उसने कहा, परमेश्वर से मांगे, कि वह आपको प्रतिदिन की रोटी दे। परमेश्वर हमारी आवश्यकता को पूरा करेगा। और फिर परमेश्वर पर कहां जा कर हम ध्यान केंद्रित करते हैं? और हम दूसरों के लिए प्रार्थना करते हैं, और कहां जाकर हम आप अपनी आवश्यकताओं के लिए प्रार्थना कर सकते हैं?
डेव बटस: हमारी आवश्यकता के लिए प्रार्थना करना जरूरी है। कृपया देखें यीशु ने इसे कहां पर रखा है। यह अंत में है। आराधना पर ध्यान केंद्रित करें, और एक और बात, जिसका मैं आपको आग्रह करता हूं, कि आप मुझे कहें कि आप की आवश्यकता है। परंतु यह है इसके उलट है। हम अपनी आवश्यकता के लिए प्रार्थना करते रहते हैं। परंतु यदि हम परमेश्वर को अपने जीवन में कार्य करते हुए देखना चाहते हैं, तो हमें यही यीशु की रीति को वापिस लाना होगा। हम प्रभु के ऊपर ध्यान केंद्रित करते हैं। और हम उसके राज्य के ऊपर ध्यान देते हैं। वह हमें बुलाता है शिकायत करते के लिए नहीं। उलाहना देने के लिए नहीं। ना ही यह सोचते हुए । नहीं नहीं, यह पिता ऐसा है जो हम से प्रेम करता है।
यह वही है जो हमें अपनी उपस्थिति में आने का निमंत्रण देता है। और वह कहता है मेरे बच्चे तुझे क्या चाहिए, तेरी क्या आवश्यकता है जिसे मैं पूरा कर सकता हूं। मैं बताना चाहता हूं कि मैं खुद विश्वास करता हूं। प्रभु ने मुझे सिखाया है कि वह चाहता है कि हम निर्भरता की शैली को सीखें। अपनी इच्छा नहीं, परंतु निर्भरता। हमारी योग्यता यह है, कि हम परिश्रम करेंगे और मैं वह करूंगा और मैं वह करूंगा, और मैं अपने परिवार के लिए परियोजन करूंगा। मैं यह काम करूंगा। आप जानते हैं कि मैं प्रार्थना भी करूंगा। और मैं ठीक ठाक कर ही लूंगा। चाहे प्रभु कुछ करे, चाहे ना और यह जीवन जीने के लिए बहुत ही खतरनाक परिस्थिति है।
हम अपने ऊपर भरोसा करना शुरु कर देते हैं । परंतु प्रभु ने हमारे लिए अद्भुत बातें रखी हुई हैं, जब हम निर्भरता का जीवन जीना सीख लेते हैं और निर्भरता से मांगना शुरु कर देते हैं। और इसीलिए यह सुनें, सबसे पहली बात यही कही है, जो उसकी और आता है। प्रतिदिन की रोटी, यह कुछ खाने के लिए है। और विशेष तौर पर 2000 वर्ष पहले रोटी प्रतिदिन की आवश्यकता थी। और जीवन जीने के लिए उसकी आवश्यकता थी। और जब हम प्रतिदिन की रोटी की बात करते हैं तो इसका अर्थ यह नहीं है कि आप उस से सिर्फ रोटी मांगते हैं यीशु जीवन की आवश्यकताओं की बात भी कर रहे हैं। एक बहुत ही ऐश आराम के जीवन के विषय में नहीं यह नहीं कह रहा, पिता मुझे एक बड़ा सा महल दे दे, प्रभु मुझे बहुत सारा धन दे। यह वह बातें नहीं है, परंतु मैं यह कहूंगा कि कई बार प्रभु ऐसे अनोखे कार्य भी करता है। और जो हम बात कर रहे हैं, वह यह है, मुझ पर निर्भर करो। जीवन की आवश्यकताओं के लिए मैं तुम्हारी देखभाल करूंगा।
सैमी : आइए मैं आप से एक प्रशन पूछता हूं, कि आप इसके विषय में क्या सोचते हैं यीशु ने हमें शिक्षा दी कि हमें आप प्रतिदिन की रोटी दे? और वह अब यह सिखा रहा था, कि तेरा राज्य आए और जब आप राज्य की प्रार्थना करते हैं, तो आप असंभव बातों के विषय में प्रार्थना करना शुरु कर देते हैं। जो आप नहीं कर सकते। आप दूसरे लोगों को मसीह में नहीं ला सकते हैं। अथवा जग्रती के लिए आप अपने से बड़ी बातों की प्रार्थना करते हैं। और वहां विश्वास के एक ऐसे क्षेत्र में चले जाते हैं और ऐसे प्रार्थना करते हैं, जो कि आपकी आवश्यकताओं से बड़ी बातें हैं, क्योंकि अब आप मात्र अपनी भी आवश्यकताओं के विषय में बात नहीं कर रहे हैं, जैसे मैं बात कर रहा था एक छोटी सी औरत के विषय में, वह प्रार्थना कर रही थी, प्रभु मेरी सारी आवश्यकताएं पूरा करें। परंतु अब उसकी आवश्यकताएं बाहर की हैं। वह अपने बच्चों के लिए राज्य की प्रार्थना कर रही है , और इसीलिए इस रिश्ते में आप अपनी बात बताएं, और फिर मैं दूसरी बात की और जाऊँगा, जो आप कह रहे थे।
डेव : बिल्कुल सही! पुरानी प्रार्थना जो कई वर्षों से पहले की जा रही थी। कई वर्ष पहले यह ज़बेज की प्रार्थना, प्रभु मेरे सीमाओं को बढ़ा देम मेरे तब्बू की रसिया को लंबा कर दे ने मेरे साथ बात की। विचार यह है कि प्रभु तू जो कर रहा है मुझे उसके लिए और स्थान चाहिए। मुझे यहां पर कुछ और करने की आवश्यकता है। पहले आपने मुझे ऐसे ही आशीष दे दी है। कि मैं राज्य की प्रार्थना कर रहा हूं। अब आपकी इच्छा पूरी हो जाए और प्रभु अब मेरी आवश्यकताएं वैसी नहीं हैं जैसी पहले थी। मैं सोचता हूं कि कई बार हम अपने आप को अपनी आवश्यकताओं से बाहर जाकर प्रार्थना करते हुए पाते हैं। क्योंकि हम पहले ही राज्य की प्रार्थना कर चुके हैं।
सैमी : ठीक है अब दूसरी बात जो मैं आप से पूछना चाहता हूं, कि हमारी आवश्यकता है यह जरूरी नहीं कि यह हमारी अभिलाषाएं हूं। फिर भी वचन कहता है, तू प्रभु के ऊपर भरोसा कर और वह तेरी अभिलाषा को पूरा करेगा।
डेव : यह ठीक है।
सैमी : तो क्या अंतर है, कि परमेश्वर आपकी आवश्यकताओं को पूरा करता है, परंतु आपकी अभिलाषाओं को नहीं। और जो अभिलाषाएं हमारे भीतर हैं, और वह ज़रूरतें और कैसे हम उन्हें पहचान सकते हैं और कैसे प्रार्थना कर सकते हैं?
डेव बटस : मैं व्यवहारिक रीति से कहता हूं कि हर कोई इस में भिन्न है। हम सभी सीख रहे हैं। इसमें हम एक यात्रा में है और इसका अर्थ यह नहीं कि हर कोई एक ही समय पर वहां पहुंच जाता है। प्रत्येक जन परमेश्वर से पाता है और यह कोई रीति नहीं है यह एक रिश्ता है। यह है कि आप पिता के ऊपर भरोसा करते हो, ना कि आप अपने पिता के ऊपर भरोसा करते हैं कि वह आपकी परवाह करे। वह इस रीति से आप की परवाह करता है, जिस तरह से आप किसी को अपने परिवार में देखते हैं जिसके पास आप से ज्यादा है और आपके पास वह सब कुछ नहीं है। क्या आप उसके ऊपर भरोसा करेंगे? और सब कुछ अंत में है यहीं पर आता है।
जब हम यह बात शुरू कर देते हैं कि हमारे पास कितना है, तो उस समय हम एक खतरे के स्थान पर पहुंच जाते हैं। क्योंकि अंत में यह इसके विषय में नहीं है कि मैं उससे कितना ले सकता हूं, अथवा मैंने क्या ले लिया है, आपको वचन बताता है और मैं सोचता यह बहुत ही अच्छा है, कि हम देखें कि परमेश्वर हमारे हृदय की चाहतों को पूरा कर सकता है।
आप राज्य की प्रार्थना करेंगे तो आप पाएंगे, जैसे दाऊद ने प्रार्थना की भजन २७:४ में, प्रभु मैं आपसे एक ही वस्तु मानता हूं और एक ही वस्तु को मैं ढूँढता हूं कि मैं अपने जीवन के पूरे दिन आपके घर में वास कर सकूं, और आपकी मनोहरता को देखता रहूं। आप को ढूंढ सकूं। और देखें यह प्रार्थना है कि मुझे पूरा भरोसा है। कि वह मुझे मेरी चाहत देगा। मेरी चाहत पवित्र शुद्ध और सबसे अच्छी वस्तु है जो तू मुझे दे सकता है और वह है तेरी उपस्थिति और प्रतिदिन तेरे साथ चलना। प्रभु तू पैसा रख ले, परंतु मुझे आप चाहिए।
सैमी : जब आप बता रहे थे, मुझे याद आया कि प्रेरित पौलुस कहता है कि मैं संतुष्ट हूं। चाहे मेरे पास बढ़ोतरी है, चाहे मेरे पास कमी है। और चाहे मैं घटी में हूं और चाहे मैं बढ़ोत्तरी में हूं। मैं जीवन जीना जानता हूं । और मैं सोचता हूं की हम सभी के पास एक योग्यता है कि हम तुलना करते हैं। आपने कहा था कि परमेश्वर अलग अलग समय पर लोगों से अलग अलग रीति से बात करता है। और हो सकता है जहां पर एक व्यक्ति है, जिसके पास अरबों की संपत्ति है। क्योंकि उसने कुछ ऐसे काम किए हैं जो दूसरे व्यक्ति नहीं कर सकते। और परमेश्वर ने उसे ऐसे काम करने के लिए बनाया है और वही पर एक दूसरा व्यक्ति है जो बहुत ही गरीब है।
परंतु यीशु को वह प्रेम करता है और देखे राज्य में यह दोनों व्यक्ति एक ही स्थान में है। और दोनों वही कर रहे हैं जो परमेश्वर ने उन्हें करने के लिए बुलाया है। चाहे आप गरीब हैं चाहे आप अमीर हैं। परमेश्वर ने उन दोनों को आशीष दी है, कि वह परमेश्वर के आत्मा के द्वारा लोगों को छू सकें।
और परमेश्वर इस रीति से कार्य करता है और हमें संतुष्ट होना चाहिए। परंतु बात यह है कि परमेश्वर आपकी प्रत्येक आवश्यकता को पूरा करेगा। क्योंकि परमेश्वर अपनी महिमा के धन के अनुसार मसीह यीशु में आपकी हर एक आवश्यकता को पूरा करेगा। इसलिए आप अपनी आवश्यकताएं प्रभु के सामने लेकर आएं और वह आप की आवश्यकता को पूरा करेगा।
15और हे फिलप्पियो, तुम आप भी जानते हो, कि सुसमाचार प्रचार के आरम्भ में जब मैं ने मकिदुनिया से कूच किया तब तुम्हें छोड़ और किसी मण्डली ने लेने देने के विषय में मेरी सहयता नहीं की।
16इसी प्रकार जब मैं थिस्सलुनीके में था; तब भी तुम ने मेरी घटी पूरी करने के लिये एक बार क्या वरन दो बार कुछ भेजा था।
17यह नहीं कि मैं दान चाहता हूं परन्तु मैं ऐसा फल चाहता हूं, जो तुम्हारे लाभ के लिये बढ़ता जाए।
18मेरे पास सब कुछ है, वरन बहुतायत से भी है: जो वस्तुएं तुम ने इपफ्रुदीतुस के हाथ से भेजी थीं उन्हें पाकर मैं तृप्त हो गया हूं, वह तो सुगन्ध और ग्रहण करने के योग्य बलिदान है, जो परमेश्वर को भाता है।
19और मेरा परमेश्वर भी अपने उस धन के अनुसार जो महिमा सहित मसीह यीशु में है तुम्हारी हर एक घटी को पूरी करेगा।
20हमारे परमेश्वर और पिता की महिमा युगानुयुग होती रहे। आमीन॥
Book of the Month
Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe. For all other books…
सेमी टिपित सेवकाई के विषय में
एसटीएम लगभग 50 वर्षों से दुनिया भर में प्रेरणा और सहायता प्रदान कर रहा है। सैमी टिपित इसके संस्थापक और अध्यक्ष है, वह एक विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता, शिक्षक और सुसमाचार के प्रचारक हैं जो 80 से अधिक देशों में लोगों की सेवा करने और उनकी सहायता करने का अनुभव रखते हैं। सैमी ऐसी सामग्री प्रदान करते है जो लोगों को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुद्दों से निपटने में मदद करती है। वह विशेष रूप से दुनिया भर के अन्य देशों के लिए सामग्री सुलभ बनाने के बारे में भावुक है। सैमी ने डेबरा “टेक्स” टिपित से शादी की है, और उनके दो बच्चे और पांच नाती पोते हैं। सैमी टिपित सेवकाई पंजीकृत 501c3 गैर-लाभकारी संगठन है।
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