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आँसू जो परमेश्वर के हृदय को छूते हैं
यदि आप कलीसिया के इतिहास को देखें तो आप को आप को ज्ञात होगा कि जिन्हें परमेश्वर ने असाधारण रूप से इस्तेमाल किया है वे प्रार्थना करने वाले पुरुष और स्त्रियाँ रहे हैं। उन्होंने सीखा है कि प्रार्थना के गुप्त स्थान में परमेश्वर की प्रतीक्षा करें और परमेश्वर को अपना हृदय उनमें प्रकट करने दें। वे ऐसे लोग थे जो उन कार्यों के लिए उत्साहित थे जिनके लिए परमेश्वर उत्साहित हैं।
1899 के दशक के दौरान जॉर्ज मूलर ने अनाथ आश्रम शूरू किए। उसने अपनी हर एक ज़रुरत के लिए परमेश्वर पर विश्वास किया। उन्होंने कभी पैसे की माँग नहीं की, बल्कि हज़ारों बच्चों को रोटी कपड़ा और मकान उपलब्ध करवाया अपने अन्त समय के नज़दीक उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि जिन लोगों के लिए उन्होने प्रार्थना की है वे सब लोग परमेश्वर के पास आ जाएँ और मसीह यीशु को अपने उद्धारकर्ता ग्रहण कर लें। (मात्र दो लोगों को छोड़कर)। जब मूलर की मृत्यु हुई उन दोनों ने भी मसीह को अपना उद्धारकर्ता स्वीकार कर लिया।
डेविड बरनार्ड, जिन्होंने 1700 के दशक में अमरीका के पूर्वोत्तर क्षेत्र में सेवा की। उनके लिए ऐसा कहा जाता था कि वे इन्डियन लोगों के लिए इतनी प्रार्थना किया करते थे कि जहाँ वे बैठते थे वहाँ आसपास की बर्फ भी पिघल जाती थी। वह अनेक लोगो को परमेश्वर के समीप लाने के लिए परमेश्वर का एक जरिया थे।
जब हमारे हृदय परमेश्वर के हृदय के साथ मिलकर धड़कते हैं तो वह उन बातों को पूरा करने के लिए अद्भुत कार्य करता है जिनके लिए हम मध्यस्थता करते हैं। परमेश्वर का हृदय इस खोए और मरते हुए संसार के लिए दुखित है। जब हमारे हृदय भी उसी पीड़ा को महसूस करते हुए उसे पुकारेंगे तो वह हमारी सुनेगा। भजनकार कहता है, “जो आँसू बहाते हुए बोते हैं, वे जयजयकार करते हुए लवने पाएँगे। चाहे बोने वाला बीज ले कर रोता हुआ चला जाए, परन्तु वह फिर पूलियाँ लिए जयजयकार करता हुआ निश्चय लौट आएगा” (भजनसंहिता 126:5,6)।
जब एक माँ अपने बिगड़े हुए पुत्र के लिए रोती है तो उसका रोना परमेश्वर के हृदय को छूता है। जब एक पिता अपने बलवाकारी बच्चों के लिए परमेश्वर के सामने रोता है तो पृथ्वी और आकाश हिल जाते हैं। जब जवान लोग अपने मित्रों के उद्धार के लिए रोते हैं तो परमेश्वर स्वर्ग से अपने आत्मा को भेजता है कि वह आकर उन्हें मसीह के लिए जीत ले। परमेश्वर अपने बच्चों के आँसुओं को अपने हृदय में सम्भालता है।
बाइबल कहती है, “तू मेरे मारे मारे फिरने का हिसाब रखता है; तू मेरे आँसुओं को अपनी कुप्पी में रख ले! क्या उनकी चर्चा तेरी पुस्तक में नहीं है?” (भजनसंहिता 56:8)। परमेश्वर के पास एक कुप्पी है जिसमें वह हमारे आँसुओं को सम्भालता है; उसके पास एक पुस्तक है जिसमें वह हमारी हृदय पीड़ा का हिसाब रखता है। जब हम उनके लिए रोते हैं जो अभी मसीह से दूर हैं तो हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि परमेश्वर यह सब भूला नहीं है। एक दिन, परमेश्वर अपने समय में, स्वर्ग को खोलकर हम पर ऐसी आशीष को उण्डेलेगा जो कल्पना से भी परे है।
कुछ समय पहले एक पासबान ने मुझे बताया कि जब उसकी कलीसिया ने प्रार्थना कक्ष के लिए एक नया कालीन खरीदकर बिछाया तो उसने परमेश्वर के सामने एक विशेष प्रार्थना की। उसने कहा, “हे परमेश्वर, मेरी प्रार्थना है कि तेरे लोग जब इस कालीन पर बैठकर प्रार्थना करें तो यह कालीन तेरे लोगों के आँसुओं के द्वारा तुझे अर्पित हो।” अधिक समय नहीं बीता था कि उसकी प्रार्थना का उत्तर मिल गया। उस कलीसिया ने लाइफ ऐक्शन मिनीस्ट्रीज़ के साथ मिलकर “जागृति सभाओं” का आयोजन किया। उन्हीं दिनों में परमेश्वर ने कार्य किया और वह प्रार्थना कक्ष टूटे मन के साथ अपने पापों पर रोने और पश्चाताप करने वाले लोगों से भर गया।
आँसू परमेश्वर के हृदय को छूते हैं। वह मनुष्य के हृदय की पीड़ा को समझता है क्योंकि उसने अपने एकलौते पुत्र को उनके लिए बलिदान किया जो अपने पापों के द्वारा घायल किए हुए थे। शायद बाइबल में सबसे छोटा और सबसे शक्तिशाली वचन वह है जहाँ लिखा है, “यीशु रोया।” यदि मनुष्य के रूप में परमेश्वर रोया तो जब हम उसके हृदय को समझ जाते हैं तो हम भी रोएँगे। यदि आप स्वयं को आत्माओं के लिए रोते हुए पाएँ तो याद रखें कि परमेश्वर आपके आँसुओं को एक कुप्पी में सम्भाल रहा है और एक दिन जब वह उस कुप्पी को खोलेगा तो इसमें से “जीवन जल की नदियाँ” बह निकलेंगी।
1हे यहोवा मैं तुझे सराहूंगा, क्योंकि तू ने मुझे खींचकर निकाला है, और मेरे शत्रुओं को मुझ पर आनन्द करने नहीं दिया। 2हे मेरे परमेश्वर यहोवा, मैं ने तेरी दोहाई दी और तू ने मुझे चंगा किया है। 3हे यहोवा, तू ने मेरा प्राण अधोलोक में से निकाला है, तू ने मुझ को जीवित रखा और कब्र में पड़ने से बचाया है॥ 4हे यहोवा के भक्तों, उसका भजन गाओ, और जिस पवित्र नाम से उसका स्मरण होता है, उसका धन्यवाद करो।
5क्योंकि उसका क्रोध, तो क्षण भर का होता है, परन्तु उसकी प्रसन्नता जीवन भर की होती है। कदाचित् रात को रोना पड़े, परन्तु सबेरे आनन्द पहुंचेगा॥
Book of the Month
Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe. For all other books…
सेमी टिपित सेवकाई के विषय में
एसटीएम लगभग 50 वर्षों से दुनिया भर में प्रेरणा और सहायता प्रदान कर रहा है। सैमी टिपित इसके संस्थापक और अध्यक्ष है, वह एक विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता, शिक्षक और सुसमाचार के प्रचारक हैं जो 80 से अधिक देशों में लोगों की सेवा करने और उनकी सहायता करने का अनुभव रखते हैं। सैमी ऐसी सामग्री प्रदान करते है जो लोगों को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुद्दों से निपटने में मदद करती है। वह विशेष रूप से दुनिया भर के अन्य देशों के लिए सामग्री सुलभ बनाने के बारे में भावुक है। सैमी ने डेबरा “टेक्स” टिपित से शादी की है, और उनके दो बच्चे और पांच नाती पोते हैं। सैमी टिपित सेवकाई पंजीकृत 501c3 गैर-लाभकारी संगठन है।
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