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एक विजयी के समान दोड़ना

दौड़ जिस में हमें दौड़ना है, धीरज से दौड़ें।

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एक भूखे मन के साथ प्रार्थना करना 

मुझसे अक्सर पूछा जाता है कि जिन देशों में मैं यात्रा करता हूँ, वहाँ के लोगों के प्रार्थना जीवनों में और मेरे देश के लोगों के प्रार्थना जीवनों में क्या अन्तर है। एक सबसे बड़ा अन्तर जो मैं आसानी से देख पाता हूँ वह है जोश। दूसरे देशों में जब मैं परमेश्‍वर को सामर्थ्य के साथ कार्य करते देखता हूँ तो ऐसा इसलिए होता है क्योंकि वहाँ परमेश्‍वर के लोगों में परमेश्‍वर की धार्मिकता को प्राप्त करने के लिए भूख और प्यास प्रत्यक्ष दिखाई देती है। मुझे पता चला है कि अमरीका में एक बड़ा प्रार्थना आन्दोलन चलाया गया है परन्तु मुझे इसके प्रति जोश का अभाव दिखाई देता है। लगता है कि हम जागृति चाहते हैं परन्तु मैं लोगों में इस बात के लिए बहुत थोड़ी सी भूख और प्यास देखता हूँ कि परमेश्‍वर कोई बड़ा कार्य करे।

परमेश्‍वर के लिए हमारी भूख अक्सर आँसूओं के माध्यम से व्यक्त होती है। बाइबल कहती है, “जो आँसू बहाते हुए बोते हैं, वे जयजयकार करते हुए लवने पाएँगे। चाहे बोने वाला बीज ले कर रोता हुआ चला जाए, परन्तु वह फिर पूलियाँ लिए जयजयकार करता हुआ निश्चय लौट आएगा” (भजनसंहिता 126:5,6)। परमेश्‍वर अपने सन्तों के आसूँओं को अपने हृदय के करीब रखता है। हमारे आँसू परमेश्‍वर के हृदय की एक अभिव्यक्ति हैं। यह परमेश्‍वर के तरस को दिखाते हैं क्योंकि बहुत लोग खोए हुए हैं और मसीह को जाने बिना मर रहे हैं। हमारे आँसू परमेश्‍वर की पवित्रता को प्रकट करते हैं क्योंकि पृथ्वी पर धार्मिकता का अभाव है।

कुछ वर्ष पहले मैं पश्‍चिमी यूरोप में एक बहुत बड़ी सुस्माचार सभा में प्रचार कर रहा था। एक शाम को यह तय हुआ कि सभा के अगुवों को एक शाम प्रार्थना के लिए लिए एकत्र किया जाए। इसलिए, हम एक वीरवार की शाम को इक्ट्ठा हुए कि परमेश्‍वर दुनिया के इस भाग में अपनी बेदारी को भेजे। मुख्य अगुवों में से एक प्रार्थना करते हुए आत्माओं के लिए रोने लगा। वह अपने उन मित्रों के लिए रो रहा था जिन्होंने अभी तक मसीह को स्वीकार नहीं किया था। जब वह रो रहा था तो बाकी अगुवों में से कुछ ने एकदम प्रार्थना सभा को रोक दिया क्योंकि उन्हें लगा कि माहौल बहुत ही भावुक हो रहा था। वह प्रार्थना में रोने वाले व्यक्ति के लिए चिन्तित थे।

इसकी तुलना कुछ ही समय पहले मिस्र में हुए मेरे एक अनुभव के साथ कीजिए। जब मैं उस देश में पहुँचा तो मैंने पता लगाना चाहा कि इन होने वाली सभाओं के लिए किस प्रकार से प्रार्थना की जा रही थी। एक मुख्य पासबान ने मुझसे कहा, “सैमी, मुझे लगता है कि बहुत सारे लोगों को अपनी पतलूने गरीबों को देनी पड़ेंगी।”

“क्या मतलब?” मैंने पूछा।

उस ने कहा, “लोग इन सभाओं के लिए इतनी प्रार्थना और उपवास कर रहे हैं कि उनका वज़न कम हो गया है और वह पतले हो गए हैं। बहुत लोग अपने रिश्‍तेदारों और मित्रों के लिए रो रहे हैं और बहुत समय से उपवास रख रहे हैं।”

परमेश्‍वर ने उनकी प्रार्थनाओं का उत्तर दिया। सैंकड़ों, हज़ारों लोगो ने परमेश्‍वर के राज्य में जन्म ले लिया। यीशु ने कहा, “धन्य हैं वे जो धर्म के भूखे और प्यासे हैं, क्योंकि वे तृप्त किये जाएंगे” (मत्ती 5:6)। जब हम भी उसी प्रकार की भूख के साथ प्रार्थना करने लगते हैं जैसे मिस्रियों ने की तो हम परमेश्‍वर को सामर्थ्य के साथ कार्य करते देखेंगे। हम परमेश्‍वर की महिमा और शक्ति के भाव से भर जाएँगे। परमेश्‍वर ऐसे पुरुष और स्त्रियों को ढूँढ रहा है जो उसके हृदय को समझते हैं और उसके लोगों के मध्य में उसकी धार्मिकता को देखने की भूख रखते हैं। हमें प्रार्थना करने की आवश्‍यकता है। हमें प्रार्थना करना आवश्‍यक है। परन्तु हमें खोए हुओं के लिए अर्थात उनके लिए जिन्होंने कभी मसीह से भेंट नहीं की है, एक नए जोश के साथ प्रार्थना करना आवश्‍यक है। जब हम ऐसी भूख के साथ प्रार्थना करने लगते हैं तो हमारे हृदय तृप्त होंगे।

भजन 126: 1-6
1जब प्रभु सियोन को गुलामी से वापस ले आया तब हमें अपनी आंखों पर विश्‍वास नहीं हुआ; हमें प्रभु का यह कार्य स्‍वप्‍न लगा! 2हमारा मुंह हंसी से भरा था,हमारी जिह्‍वा जयजयकार कर रही थी। तब विजातीय राष्‍ट्रों ने कहा, ‘प्रभु ने इनके लिए महान कार्य किए हैं।’ 3प्रभु ने हमारे लिए महान कार्य किए हैं; हम सुखी हैं। 4जैसे सूखे क्षेत्र की नदियां बरसात में जल से भर जाती हैं, वैसे ही, हे प्रभु, हमारी समृद्धि पुन: हमें लौटा दे। 5जो बीज को आंसुओं के साथ बोते हैं, वे फसल को जयजयकार करते हुए काटेंगे। 6बोने के लिए बीज ले जानेवाला किसान यदि रोता हुआ जाएगा, तो भी वह अपने पूलों के साथ जयजयकार करता हुआ घर लौटेगा।

Book of the Month

Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe.  For all other books…

सेमी टिपित सेवकाई के विषय में

एसटीएम लगभग 50 वर्षों से दुनिया भर में प्रेरणा और सहायता प्रदान कर रहा है। सैमी टिपित  इसके संस्थापक और अध्यक्ष है, वह एक विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता, शिक्षक और सुसमाचार के प्रचारक हैं जो 80 से अधिक देशों में लोगों की सेवा करने और उनकी सहायता करने का अनुभव रखते हैं। सैमी ऐसी सामग्री प्रदान करते  है जो लोगों को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुद्दों से निपटने में मदद करती है। वह विशेष रूप से दुनिया भर के अन्य देशों के लिए सामग्री सुलभ बनाने के बारे में भावुक है। सैमी ने डेबरा “टेक्स” टिपित  से शादी की है, और उनके दो बच्चे और पांच नाती पोते हैं। सैमी टिपित सेवकाई पंजीकृत 501c3 गैर-लाभकारी संगठन है।

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