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एक विजयी के समान दोड़ना

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यीशु की मृत्यु

੧ थिस  ५:१७

सैमी टिप्त :  हम प्रार्थना के विषय में बात कर रहे  हैं और पहले सेसन में मैं डेव बटस  के साथ बातचीत कर रहा था,  जो कि मेरा बहुत ही प्यारा मित्र है।  और परमेश्वर ने उनके हृदय में कार्य किया है और उनके जीवन में भी कार्य किया है। हम प्रार्थना के विषय में हमने बात की है कि प्रार्थना क्या है.

डेव बटस: यह सही है।

सैमी: हमारे पिछले सेशन में हम बात कर रहे थे कि परमेश्वर प्रेम का परमेश्वर है।  जो कि हमारे साथ वार्तालाप करना चाहता है । वह चाहता है कि हम उसके साथ बातचीत करेंगे और यह एक प्रेम संबंध में ही प्रार्थना सबसे ज्यादा बढ़ती है।  और अब मैं इस विषय पर बात करना चाहता हूं कि इस प्रेम का स्रोत  क्या है?  मेरा अर्थ है जब आप  परमेश्वर के विषय में बात करते हैं, तो बहुत से लोग कहते हैं कि मैं परमेश्वर से  प्रेम करता हूं परंतु यह पहले हम परमेश्वर से प्रेम नहीं करते हैं,  पहले परमेश्वर हम से प्रेम करता है।  तो इसका स्रोत क्या है?

डेव: यह सही है।

सैमी: हम इस के विषय में बात करते हैं कि यह कैसे  है?  मैं जानता हूं कि डेव आप एक बहुत ही महान व्यक्ति हैं परंतु मैं आपको बताना चाहता हूं कि आप भी परमेश्वर के स्तर से नीचे हैं।  और फिर आप के जैसा एक व्यक्ति,  और मैं तो परमेश्वर के स्तर से बहुत ही नीचे हूं,  हम कैसे पवित्र परमेश्वर की उपस्थिति में आप आते हैं?  क्योंकि परमेश्वर प्रेम है परंतु वह  पवित्र भी है।

डेव: वास्तव में यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दा है।  मैं बहुत से लोगों को मिलता हूं,  मैं कलिसिया मैं लोगों को मिलता हूं जो प्रार्थना नहीं करते हैं,  परंतु वह महसूस करते हैं कि वहां पर कुछ है जो उन्हें  रोक रहा है,  कुछ है जो उनके रिश्ते में रुकावट बन रहा है।  उन्होंने नहीं समझा है कि वह एक ऐसे परमेश्वर की उपासना करते हैं जो कि प्रेम है और ना सिर्फ ऐसे परमेश्वर की के जो  हमें प्रेम करता है । परंतु वह खुद प्रेम है।

सैमी: हाँ

डेव: यह उसका चरित्र है यह उसका स्वभाव है।  परमेश्वर का प्रेम को ही दिमागी,  अथवा  भावनात्मक प्रेम नहीं है।  यह कोई भावना नहीं है।  यह एक प्रगटीकरण है कि वह कौन है और अंत में इसका सबसे बड़ा कार्य आज से 2000 वर्ष पहले जेरूसलम के बाहर एक क्रुस के  ऊपर हुआ , जहां परमेश्वर का पुत्र मेरे लिए मर गया।  आपके लिए मर गया और वह प्रतेक जन  के लिए जो इस ग्रह में रहता है,  उनके लिए मर गया और यीशु मसीह हमारा मुक्तिदाता है वह हमारे जीवन का प्रभु है।

क्या हुआ है परमेश्वर जो हम से प्रेम करता है,  उसने हमारी परिस्थिति को देखा जिसमें हम जी रहे थे।  उसने देखा कि उसके बिना हम बहुत ही निराश थे आज और फिर चाहे हम उसे जानते भी नहीं थे।  उसने अपने महान प्रेम को हमारे लिए भेजा जो कि सिर्फ वही ला सकता था।  और उसने हम में  से उस रुकावट को तोड़ दिया,  वह रुकावट जो पाप लेकर आता है और वह हमें अपने परिवार में ले आया और अब मैं उसे प्रेम करता हूं क्योंकि मैं परिवार को प्रेम करता हूं।

सैमी : हाँ ।

डेव: यीशु की मृत्यु है जो हमें परमेश्वर के प्रेम के पास ले आई है,  जो हमें से मुफ़्त में  दे दिया गया है।  आप जानते हैं सेमी,  मैं आपके पिता के बारे में कुछ नहीं जानता,  परंतु मुझे यह बहुत ही अजीब लगेगा , यदि मैं आपके डैडी के पास आता और उनसे कुछ मांगता।

सैमी: हाँ

डेव: क्योंकि मैं उन्हें  जानता नहीं था।  परंतु मेरे पिता,  मैं अपने पिता को अच्छी तरह से जानता हूं । और उनके पास जा सकता हूं। मैं अपने पिता के साथ कभी भी बात कर सकता हूं।  अब मुझे इसमें थोड़ा सा डर है। मैं समझता हूं कि मेरा पिता मुझे धकेलेगा नहीं और मैं जानता हूं कि वह मुझे कितना प्रेम करता है।  परंतु क्योंकि मैं उसका पुत्र हूं मैं उसके परिवार का हिस्सा हूं और इसलिए मेरे पास मुफ्त में एक पहुंच है कि मैं उसके पास जा सकता हूं। और मैं उससे मांग सकता हूं और उसके साथ समय व्यतीत कर सकता हूं।  आप जानते हैं?  इस से भी बढ़िया यह है,  कि वह चाहता है कि मैं कैसे करूं।

सैमी: वाओ …।

डेव:  जब हम इस बात को समझना शुरू कर देते हैं,  जो कि परमेश्वर हमें अद्भुत प्रेम करता है और वह इतना ज्यादा है कि उसने अपने इकलौते पुत्र प्रभु यीशु को इस संसार में मेरे लिए मरने के लिए भेज दिया।  ताकि वह मुझे अपने परिवार में ले ले।  और यह हमें परमेश्वर के सिहासन के सामने जाने के लिए मुफ्त में पहुंच देता है।  हम उसके पास आते हैं और उसकी गोद में बैठ सकते हैं यदि आप बैठना चाहे तो मैं नहीं सोचता कि ऐसा कहना ज्यादा होगा हम उसके पास आ सकते हैं और हम पिता की गोदी में बैठकर कह सकते हैं,  “अब्बा, पिता,  डैडी मेरे पास कुछ  है जिसके विषय में मैं आपसे बात करना चाहता हूं।”

सैमी: मैं चाहता हूं कि हम इस जगह पर थोड़ा समय और व्यतीत करें।  खास रीति से मैं उसी बात के ऊपर आना चाहता हूं,  कि प्रभु यीशु के साथ क्या हुआ है।

डेव: बिलकुल

सैमी: बहुत से लोग इस बात को समझते नहीं हैं कि प्रभु यीशु क्यों आए और वह किस बात के लिए मर गए? जो बात मन में हमेशा याद रखनी चाहिए वह  ये है कि परमेश्वर पवित्र है और पवित्रता अपने आप में एक कैटेगिरी है।  मेरा अर्थ है कि यह बिल्कुल पवित्र है।  कि डेव  अथवा सैमी  जैसा उस परमेश्वर की उपस्थिति में आ सकता है,  जो के बिल्कुल पवित्र है। इसीलिए प्रभु यीशु आए और उन्होंने मनुष्य रूप धारण कर दिया,  वह पूरी तरह से परमेश्वर और  पूरी तरह से मनुष्य था।  वह परमेश्वर का पुत्र था । और मनुष्य का पुत्र था।  वह एक महान शिक्षक ही नहीं था,  वह एक महान नबी  ही नहीं था परंतु वह परमेश्वर था जो  मनुष्य रूप  धारण करके संसार में आ गया।  और एक मनुष्य होने के नाते उसने मेरे पापों का दंड  अपने ऊपर ले लिया।  लेकिन आप जानते हैं कि जब हम इसके विषय में बात करते हैं,  तो मुझे कोई बात याद आ रही है जब यीशु यरुशलम में मरे तो उस वक्त मंदिर में क्या हुआ?

डेव: बिल्कुल सही बात है।

सैमी: मंदिर में एक स्थान था जिसे हम अति पवित्र स्थान कहते हैं।  जहां पर मात्र महान याजक  उस अति पवित्र स्थान में जा सकता था।  क्योंकि वह ऐसी जगह है जहां पर परमेश्वर की प्रकट  उपस्थिति थी और जब हम प्रार्थना के विषय में बात करते हैं हम बात करते हैं कि हम परमेश्वर की उपस्थिति में जा सकते हैं।  तो वह यही स्थान था वहां पर एक पर्दा था जो आप जैसे और मेरे जैसे आम लोगों को परमेश्वर की उपस्थिति से दूर करता था।  परंतु जब यीशु मरा,  तो डेव,   वहां पर कुछ चमत्कारी हुआ।

डेव: ऊपर से लेकर नीचे तक वह पर्दा दो हिस्सों में फट गया।  और आप परमेश्वर की प्रकट  उपस्थिति तक पहुंच गए।  प्रार्थना अचानक ही हमारे लिए एक अनोखा सोभाग्य बन  गया है मात्र एक बात की वजह से और वह है यीशु मसीह।

सैमी: हां आपको पता है जब मैं प्रार्थना करता हूं, तो मैं यीशु  के विषय में स्मरण करता हूं,  और सच्चाई यह है डेव,  आज हम जहां बात कर रहे हैं,  और यह बात यीशु की वजह से कर रहे हैं जो उसने किया है।

ਡੇਵ: ਬਿੱਲਕੁਲ।

सैमी: यह बात है जिसके विषय में मैं हमेशा कहता हूं, यह बहुत ही महत्वपूर्ण है। और हम इसके ऊपर वापस आए। ना सिर्फ उसने 2000 वर्ष पहले यह किया, कि उसने संसार के पापों को उठा लिया। आज भी वह यह कर रहा है सच्चाई यह है कि मैं परमेश्वर को ढूंढ़ नहीं रहा था, वास्तव में मैं मसीह के पास नहीं गया था, लोग मुझसे पूछते हैं, आपने मसीह को कैसे जाना?  मैं तो चर्च में एक लड़की से मिलने के लिए गया था मैं वहां परमेश्वर को नहीं ढूंढ रहा था।  मैं तो एक लड़की को ढूंढ रहा था परंतु आपको पता है परमेश्वर ने मुझे ढूंढ लिया वह मुझे ढूंढ रहा था और उसने सही समय पर और सही जगह पर मुझे लिया और  मैं यीशु के पास आया और आपको पता है क्या हुआ जब मैं यीशु के पास आया?  सबसे पहला काम जो वह चाहता था कि वह मेरे लिए करें, किसी ने  इसके विषय में नहीं सोचा सबसे पहला काम जो वह चाहता था वह यह था कि मैं उसकी उपस्थिति में आऊं और उससे मिलन करूँ।

डेव: बिलकुल सही बात है।

सैमी: मेरे तीन मित्र थे।  और हम एक छोटे से पहाड़ के ऊपर, जो लूजीआना राज्य की राजधानी की इमारत के पीछे है,  वहां हम मिलने लग गए।  और वहां हम परमेश्वर के साथ हर सुबह मिला करते थे और वहां परमेश्वर की एक अद्भुत उपस्थिति थी इसलिए मैं यह सोचता हूं कि सबसे पहला काम जिसके विषय में हम बात कर रहे हैं,   यह बहुत ही महत्वपूर्ण है।

ਡੇਵ: यदि हम यह ना करेंगे तो हम महसूस करेंगे कि हम किसी बात से पीछे रह गए हैं।  और यह सब कुछ हमारे ऊपर निर्भर कर रहा है।  परंतु जब हम उसके पास आ जाते हैं,  तो प्रार्थना परमेश्वर के साथ शुरू होती है या उसके प्रति प्रेम,  उसके प्रति पहल से शुरू होती है।  और यह वही है जो हमें पहले अपने पास आने देता है। वह जो द्वार को खोलता है। जो हमें आमंत्रित करता है, कि हम उसकी उपस्थिति में आकर उसका आनंद उठा सके। और हम किसी भी तरह से उसे क्रोधित नहीं करते हैं।  मैं लोगों को यह कहते हुए सुनता हूं, पुराने लोग कहते हैं कि मैं परमेश्वर को इस बात से परेशान नहीं करना चाहता हूं।  मैं कह रहा हूं आप इस बात को समझ पाते हैं? क्या आप समझ पा रहे हैं ? जहां पर एक पिता है जो हमें इतना प्रेम करता है कि उसने अपने प्रिय पुत्र यीशु को भेज दिया और अब आप उसे परेशान नहीं कर सकते हैं।  एक भी ऐसी बात नहीं है, जिसके द्वारा वह आप से परेशान हो सकता है। वह इस बात से खुश होता है कि हम उसके पास आएं,  हम अपना समय उसके साथ व्यतीत करें और अंततः वह हमें अपने वचन की ओर लेकर जाता है,  जहां पर वह कहता है बिना रुके हुए प्रार्थना करो।  और जहां पहुंचना कठिन कार्य है, परंतु यह  सब कुछ यीशु की वजह से होता है।

सैमी: हां मेरे सैन  एंटोनिया में मित्र हैं,  जो मसीही धर्म की पृष्ठभूमि से नहीं आए हैं।  वह किसी और धार्मिक झुंड के हैं।  और वह किसी और धार्मिक पृष्ठभूमि के हैं।  और उनमें से एक की साली ने उसके लिए प्रार्थना करनी शुरू की और कुछ होना शुरू हो गया।  और उस व्यक्ति को यीशु के विषय में सपना आया और यीशु उसके सपने में आए और वह यीशु को नहीं ढूंढ रहा था परंतु यीशु सपने में उसे ढूंढने के लिए आए।  और यीशु ने उस व्यक्ति के ऊपर अपने आप को प्रकट किया और उसका पुत्र आया और उसने कहा डैडी, मामा,  परमेश्वर हमारे ऊपर है परमेश्वर ने मुझे कहा है कि मैं आपको बताऊं कि यीशु वास्तव में परमेश्वर का पुत्र है।

डेव: वाओ ….

सैमी: और अचानक मैं अपने घुटनों बंद हो गए और उन्होंने यीशु के नाम को पुकारा और वह इस रिश्ते कानपुर कर पाए जिस रिश्ते का मैं और आप अनुभव करते हैं।

डेव: पूरा परिवार?

सैमी: हां पूरा परिवार यीशु मसीह को जानता है,  परमेश्वर उनके प्रति वास्तविक है और परमेश्वर होने के प्रति वास्तविक हुआ है और यह शुरू हुआ जब यीशु ने उनकी ओर देखा और उन्होंने अपना विश्वास यीशु के ऊपर किया।

इब्रानियों ९:१-११

1प्रथम विधान के भी अपने आराधना सम्‍बन्‍धी नियम थे और उसका अपना पार्थिव आराधना-स्‍थल था। 2एक शिविर खड़ा कर दिया गया। उसके अगले कक्ष में दीपाधार था, मेज थी और भेंट की रोटियाँ थीं। यह पवित्र-स्‍थान कहलाता था। 3दूसरे परदे के पीछे का कक्ष परमपवित्र-स्‍थान कहलाता था। 4वहाँ धूपदान की स्‍वर्णमय वेदी और विधान की स्‍वर्ण से मढ़ी हुई मंजूषा थी। मंजूषा में “मन्ना” से भरा हुआ स्‍वर्णमय पात्र था, हारून की छड़ी थी, जो पल्‍लवित हो उठी थी, और विधान की शिला-पट्टियां थीं 5और मंजूषा के ऊपर प्रायश्‍चित का स्‍थान आच्‍छादित करने वाले महिमामय “करूब” विराजमान थे। इन सब का विस्‍तृत विवरण यहाँ अपेिक्षत नहीं है।

6ऐसे ही आराधना-स्‍थल का प्रबन्‍ध किया गया था। आराधना की विधियाँ सम्‍पन्न करने के लिए पुरोहित हर समय इस शिविर के अगले कक्ष में जाया करते थे,7किन्‍तु केवल महापुरोहित, वर्ष में एक ही बार, पिछले कक्ष में वह रक्‍त लिये प्रवेश करता था, जिसे वह अपने और प्रजा के दोषों के लिए प्रायश्‍चित के रूप में चढ़ाता था। 8इस प्रकार पवित्र आत्‍मा यह दिखलाना चाहता है कि जब तक शिविर का अगला कक्ष खड़ा है, तब तक परमपवित्र-स्‍थान का मार्ग खुला नहीं है। 9वह वर्तमान समय का प्रतीक है। वहाँ जो भेंट और बलि चढ़ायी जाती है, वह उपासक के आभ्‍यन्‍तर को पूर्णता तक नहीं पहुँचा सकती। 10वे बाह्य नियम हैं जो खान-पान एवं नाना प्रकार की शुद्धीकरण-विधियों से सम्‍बन्‍ध रखते हैं और पुनर्निर्माण के युग के आगमन तक ही लागू हैं।

11किन्‍तु अब मसीह हमारे भावी कल्‍याण के महापुरोहित के रूप में आये हैं। उन्‍होंने एक ऐसे महान् और सिद्धतर शिविर को पार किया, जो मनुष्‍य के हाथ से नहीं बना और इस पृथ्‍वी का नहीं है।

Book of the Month

Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe.  For all other books…

सेमी टिपित सेवकाई के विषय में

एसटीएम लगभग 50 वर्षों से दुनिया भर में प्रेरणा और सहायता प्रदान कर रहा है। सैमी टिपित  इसके संस्थापक और अध्यक्ष है, वह एक विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता, शिक्षक और सुसमाचार के प्रचारक हैं जो 80 से अधिक देशों में लोगों की सेवा करने और उनकी सहायता करने का अनुभव रखते हैं। सैमी ऐसी सामग्री प्रदान करते  है जो लोगों को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुद्दों से निपटने में मदद करती है। वह विशेष रूप से दुनिया भर के अन्य देशों के लिए सामग्री सुलभ बनाने के बारे में भावुक है। सैमी ने डेबरा “टेक्स” टिपित  से शादी की है, और उनके दो बच्चे और पांच नाती पोते हैं। सैमी टिपित सेवकाई पंजीकृत 501c3 गैर-लाभकारी संगठन है।

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