शिष्यता का दैनिक वीडियो
प्रार्थना मे हमारा स्थान
जैसे मै विदेशों मे यात्रा करता हूँ, मैंने ये दृश्य कई बार देखा है. एक मंच के पास तंबू लगाया गया है, जहां मै प्रचार कर रहा हूँ. मंच के नीचे के जगह साफ की गई है. कईबार स्टेडियम मे या स्पोर्ट्स अरीना मे एक कमरा दिखता है. इन मे से हर एक जगह पर, दो चीज़े एक जैसी ही हैं. हालाँकि इन जगह पर अलग अलग देशों से, वंश से, पारंपरिक पृष्ठभूमि से लोग पाएं जाते हैं, उन सब मे दो समान चीज़े दिखती हैं – टूटे और नम्र दिल और जोशीली प्रार्थना.
अफ्रीका मे मंच के करीब तंबू का मिलना बहुत ही सामान्य बात है. ब्रज़ील मे, पास्टर्स मंच के पीछे इकट्ठे होते थे. पूर्व यूरोप मे, प्रार्थना के लिए इकट्ठे होनेवाले लोगों के लिए एक कमरा अलग दिया जाता है. मैंने देखा कि ये प्रिय स्त्री और पुरुष अपने संगी देशवासियों के लिए परमेश्वर के सामने पुकार रहें हैं. और मैंने प्रभु को उनकी प्रार्थनाओं का उत्तर देते हुए देखा है.
मैंने ये भी देखा है कि उत्तर अमेरिका और पश्चिमी यूरोप मे प्रार्थना मे दिलचस्पी बढ़ रही है. प्रार्थना के समूह हर जगह उभरकर आते हुए दिखाई दे रहें हैं. लेकिन मैंने उन्नतिशील देशों की प्रार्थनाओं मे और पश्चिमी देशों की प्रार्थनाओं मे बड़ा फर्क देखा है. वो फर्क है – तीव्रता. मुझे गलत न समझे. पश्चिम में प्रार्थना के लिए बढ़नेवाली नई दिलचस्पी के लिए मै आभारी हूँ. इसके लिए मै प्रभु की स्तुति करता हूँ. ये जागृती के मार्ग पर पहला कदम है.
लेकिन प्रार्थना का स्थर होता है जो स्वर्ग को भेदता है. ये परमेश्वर की सामर्थ और महिमा खोलता है. ये स्थर परमेश्वर के दिल को स्पर्श करता है और मनुष्य के दिल को पिघलता है. जब कि पृथ्वी पर आत्मिक सुखा होता है तब ये स्वर्ग से उत्तर की बारिश करता है. स्थर ये नही है कि क्या वो व्यक्ति खड़ा है या घुटनों पर है. ये नही कि उसके हाथ उपर उठाए हुए हैं या नीचे हैं. ये दिल की दशा है.
भजनकार ने कहा, “टूटा मन परमेश्वर के योग्य बलिदान है, हे परमेश्वर, तू टूटी और पिसी हुई आत्मा को तुच्छ नही जानता” (भजन ५१:१७). टूटी आत्मा ही वो है जिसे परमेश्वर की बहुत जरूरत होती है. पिसी हुई आत्मा ही कहती है, “मै नही कर सकता, लेकिन तू कर सकता है.” टूटा मन और पिसी हुई आत्मा, प्रार्थना जो है उसके मुख्य भाग में जाती है. ये एक जरूरतमंद बच्चा और एक अनुग्रहकारी और उदार पिता का एक साथ आना है.
मैंने पृथ्वी के हर महा-द्वीप मे प्रार्थना के बारे मे प्रचार किया, प्रोत्साहित किया और सिखाया है. लेकिन मै आपको सच्चाई बताऊ, उन्नतिशील देशों के प्रिय भाइयों और बहनों को जितना मैंने सिखाया उससे ज्यादा मैंने उन से सिखाहैं. उन्होंने मेरे अंदर जो एक महान पाठ उंडेला वो प्रार्थना का स्थर समझना था. परमेश्वर नम्र दिल की सुनता है. वो टूटे दिल को प्रतिउत्तर देता है. वो पिसे हुए दिल की पुकार का उत्तर देता है.
जब हम प्रार्थना करना शुरू करते है, तब हमें अपना स्थर जांचना होगा. क्या हम ऐसे दिल से प्रार्थना करते हैं जो अहंकार और घमंड से भर है? या हम ऐसे दिल से प्रार्थना कर रहें हैं जो झुका और टूटा हुआ है? २० वी शताब्दी के शुरवात मे आयी वेल्स की महान जागृती एक व्यक्ति की पुकार से शुरू हुई, “मुझे मोड दे, हे प्रभु, मुझे मोड दे.” क्या आज कोई है, जो सच्चाई मे ये पुकार उठेगा, “मुझे मोड, हे प्रभु, मुझे मोड.” जब प्रभु को ऐसी स्थिति का दिल मिल जाता है, तो सावधान रहें, शायद हम जागृती देखेंगे.
भजन ५१-१२-१७
12अपने उद्धार का हर्ष मुझे लौटा दे; उदार आत्मा से मुझे सहारा दे। 13तब मैं अपराधियों को तेरे मार्ग सिखाऊंगा, और पापी तेरी ओर लौटेंगे। 14हे परमेश्वर, मेरे उद्धार के परमेश्वर, मुझे रक्तपात के दोष से मुक्त कर, तब मैं अपने मुंह से तेरी धार्मिकता का जयजयकार करूंगा। 15हे स्वामी, मेरे ओंठों को खोल; तब मेरा मुंह तेरी स्तुति करेगा। 16तू बलि से प्रसन्न नहीं होता; अन्यथा मैं बलि चढ़ाता; तू अग्निबलि की इच्छा नहीं करता। 17विदीर्ण आत्मा की बलि परमेश्वर को प्रिय है, हे परमेश्वर, तू विदीर्ण और भग्न हृदय की उपेक्षा नहीं करता।
Book of the Month
Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe. For all other books…
सेमी टिपित सेवकाई के विषय में
एसटीएम लगभग 50 वर्षों से दुनिया भर में प्रेरणा और सहायता प्रदान कर रहा है। सैमी टिपित इसके संस्थापक और अध्यक्ष है, वह एक विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता, शिक्षक और सुसमाचार के प्रचारक हैं जो 80 से अधिक देशों में लोगों की सेवा करने और उनकी सहायता करने का अनुभव रखते हैं। सैमी ऐसी सामग्री प्रदान करते है जो लोगों को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुद्दों से निपटने में मदद करती है। वह विशेष रूप से दुनिया भर के अन्य देशों के लिए सामग्री सुलभ बनाने के बारे में भावुक है। सैमी ने डेबरा “टेक्स” टिपित से शादी की है, और उनके दो बच्चे और पांच नाती पोते हैं। सैमी टिपित सेवकाई पंजीकृत 501c3 गैर-लाभकारी संगठन है।
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