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एक विजयी के समान दोड़ना

दौड़ जिस में हमें दौड़ना है, धीरज से दौड़ें।

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प्रचारक  का तरीका:   दयालु प्रार्थना

मैं आपका स्वागत है छठे दिन के अध्यन  में करना चाहता हूं।  मैं आशा करता हूं कि इस समय के दौरान, जो परमेश्वर के हृदय के ऊपर है, आप उसे ले रहे हैं।  कि परमेश्वर आपके हृदय को नया कर रहा है वह आपके हृदय को बहाल कर रहा है और आपको नए  बना रहा है।  ताकि आपके पास एक ऐसा हृदय हो,  जो लोगों तक मसीह के लिए एक पहुंचना चाहता है।

हम प्रचारक के तरीके के विषय में बात करने जा रहे हैं।  बहुत से लोग मुझे पूछते हैं,  क्योंकि मैं एक वक्ता हूं,  तो आपका तरीका क्या है?  आप की योजना क्या है?  और मैं कहता हूं मेरी योजना  बहुत ही साधारण है।  प्रार्थना करें और लोगों तक मसीह के लिए पहुंचे। यह कठिन नहीं है।  यह  सुनने में बहुत ही साधारण लग सकता है।  परंतु क्या आपको पता है कि मुझे क्या मिला है।  मैंने बाइबिल में यह पाया है,  कि यीशु की भी यही योजना थी।लुका  24 अध्याय में हम यीशु को उसके शिष्यों  के साथ बात करके देखते हैं।  उसने उनसे यह  कहा,  कि जाओ और पूरे संसार में जाकर प्रचार करो।  ओर लोगों को सुसमाचार सुनाओ।  और फिर उसने कहा परंतु यरुश्लेम में  इंतजार करना।  जब तक तुम ऊपर से शक्ति प्राप्त ना करो।

उसके पश्चात हम देखते हैं कि कलिसिया ने क्या किया। प्रेरितों के काम के दूसरे अध्याय में पतरस प्रचार कर रहा है।  और हजारों लोग मसीह में आ जाते हैं।  प्रेरितों के कार्य  3 अध्याय में पतरस और यूहन्ना  मंदिर में प्रार्थना करने के लिए जा रहे हैं।  और वहां पर एक व्यक्ति को,  जो भिखारी है,  उसे भीख मांगते हुए देखते हैं और कहते हैं,  यीशु के नाम में उठ और चल फिर,  और वह लंगड़ा व्यक्ति चंगा हो जाता है।  चार अध्याय में वह प्रार्थना करते हैं और परमेश्वर के वचन को बहुत ही हयाव आपके साथ सुनाते हैं।  १३  अध्याय में हम देखते हैं,  कि वह एक प्रार्थना सभा में हैं।  वह अगुवे हैं और उस प्रार्थना सभा से एक बड़ी मिशनरी लहर शुरू हो जाती है।

और आप उसे योजना  को पाते हैं,  कि वह प्रार्थना करते हैं और प्रचार करते हैं।  और वह प्रार्थना करते हैं और प्रचार  करते हैं।  बहुत ही साधारण।   प्रार्थना योजना है?  यह क्या है?

हम समझते हैं कि प्रार्थना क्या है।  तो हम परमेश्वर  को ढूंढना  शुरु करते हैं और हम प्रार्थना करते हैं और प्रार्थना करते हैं जैसे यह यीशु  चाहता है कि हम प्रार्थना करें । और एक और बात जब हम प्रार्थना करते हैं तो हम इस रीति से प्रार्थना करते हैं,  हे प्रभु मेरी सहायता कर,  और मुझे यह दे।  और हमारी प्रार्थना का केंद्र यही  होता है।

परंतु जब आप उस रीति  से प्रार्थना करते हैं,  जैसे यीशु में कहा कि प्रार्थना करें तो हमारा ध्यान परमेश्वर के ऊपर सबसे पहले होना चाहिए।  हमारे पिता तू जो स्वर्ग में है,  तेरा नाम पवित्र माना जाए,  और फिर हमारा ध्यान दूसरों के ऊपर होना चाहिए।  कि तेरा राज्य आए, तेरी इच्छा जैसे स्वर्ग में पूरी होती है,  पृथ्वी पर भी हो।  और फिर हम दूसरों के लिए प्रार्थना करना शुरु करते हैं,  कि उसका राज्य उनके ह्रदय  में आ जाए।  और उसकी इच्छा उनके जीवन में पूरी हो जाए और इसलिए हम लोगों के लिए प्रार्थना करते हैं । दयालु प्रार्थना सुसमाचार का तरीका बन जाती है।

इसके पश्चात मैंने यह पाया है कि आप कभी भी उन लोगों तक नहीं पहुंच सकते,  जिनके लिए प्रार्थना नहीं करते हैं।  यदि वह आपके हृदय के ऊपर नहीं थे,  और आपने कभी यीशु के विषय में उनके साथ बात नहीं की।  तो आप क्यों यीशु के विषय में उनके साथ बात करेंगे । आप क्यों  उन तक पहुंच कर उनकी सहायता करेंगे?  और उनके साथ सेवकाई करेंगे ? आप देखें,  हमारे हृदय से यह  शुरू होता है,  जब हम लोगों के लिए प्रार्थना करते हैं।  मैंने अपनी सेव्काई की फिलॉसफी रोमानिया में पाई थी।  और वहां से मैंने अपनी सेवकाई को शुरू किया था।  और मैंने आपको वहां पर हुई एक जागृति के विषय में बताया था । जो वहां पर शुरू हुई थी।  यह रोमानिया के उत्तर पश्चिमी क्षेत्र में शुरू हुई थी।  जब एक पास्टर के पास यह  दर्शन था कि उसने अपने लोगों को प्रार्थना करना सिखाया। यह जाग्रति उत्तर पश्चिमी क्षेत्र में ही रह गई थी क्योंकि  उनके वहां पर एक पहाड़ों की श्रंखला थी,  जो रोमानिया को दूसरे हिस्से से अलग करती थी।  और इसलिए लोगों के पास आने जाने के साधन नहीं थे,  कि वह पहाड़ों की दूसरी ओर  जा सकें । और इसके परिणाम स्वरुप वह जागृति वहीं रह गई।

इसलिए मैंने उनसे पूछा और उन्होंने कहा,  सेमी क्या तुम्हारे पास अपनी गाड़ी है?  और क्या तुम पहाड़ों की दूसरी ओर  यह संदेश लेकर जाओगे?  क्या आप इस समाचार को पहाड़ों की दूसरी ओर  लेकर जाएंगे? और मैंने कहा ठीक है।

और  हम पहाड़ों की दूसरी ओर  गाड़ी पर गए।  और हम रोमानिया के एक  ऐसे क्षेत्र में गए,  जहां पर चर्च अकेली थी , बहुत ही छोटी थी,  वह कमजोर थी,  संघर्ष कर रही थी। और उस जगह पर परमेश्वर ने मेरे हृदय में डाला कि मैं सबसे पहले उन्हें प्रार्थना के लिए उत्साहित करूँ  और फिर वापिस आकर सुसमाचार का प्रचार करूं।

और इसलिए मैंने यही किया, पहली बार जब मैं उनकी चर्च में गया,  मैंने प्रार्थना के  विषय में शिक्षा दी और मैंने लोगों से कहा कि वह प्रार्थना करें और दूसरे वर्ष,  मैं  उनके पास गया और सुसमाचार का प्रचार किया और लोग इस समय के दौरान इन बातों को लागू करते रहे और वह प्रार्थना करने लगे।

और जब मैं वापस आता तो वहां मैं एक विचित्र कटनी देखता।  वास्तव में हमने कई लोगों को मसीह में आते हुए देखा। उतने ही लोगों को हमने मसीह में आते हुए देखा जितने हमने जागृति के दौरान देखे थे । क्यूँकि, क्या हुआ कि उन्होंने परमेश्वर की योजना को लेना शुरु कर दिया।  उन्होंने प्रार्थना की और उन्होंने प्रचार किया, यदि कोई भी जागृति किसी समाज को प्रभावित करने जा रही है ,तो लोग इसे प्रार्थना के साथ शुरू करें। और इसलिए आपके हृदय में कौन है ।आप किस के लिए प्रार्थना कर रहे हैं ,आप क्यों नहीं एक सूची बनाते हो।  और लगातार उन लोगों के लिए प्रार्थना करते जिनको आप जानते हैं ।और यदि आप प्रार्थना करेंगे तो कार्य होगा ।और बहुत से कार्य होंगे सबसे पहले यह आपको शक्ति प्रदान करेगी।  कि वह  आपको दिलेरी देगी और दूसरा यह कि क्या लोगों के हृदय को तैयार करेगी। और तीसरी बात यह परमेश्वर के आत्मा के काम को लोगों के जीवन में शुरू करेगी। प्रार्थना परमेश्वर की योजना है, लोगों के लिए प्रार्थना करें।

ਅਤੇ ਜਦ ਮੈਂ ਵਾਪਸ ਆਉਂਦਾ ਤਾਂ ਮੈਂ ਇਕ ਵਚਿੱਤਰ ਫਸ਼ਲ ਵੇਖਦਾ। ਅਸਲ ਵਿੱਚ ਅਸੀਂ ਕਈ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਮਸੀਹ ਵਿੱਚ ਆਉਂਦਾ ਵੇਖਦੇ ਉਨ੍ਹੇ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਜਿੰਨਾਂ ਨੂੰ ਅਸੀਂ ਬੇਦਾਰੀ ਦੇ ਤਜ਼ਰਬੇ ਦੇ ਦੌਰਾਨ ਵੇਖਿਆ ਸੀ। ਕਿਉਂਕਿ ਕੀ ਹੋਇਆ ਕਿ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਪਰਮੇਸ਼ਰ ਦੀ ਯੋਜਨਾਂ ਨੂੰ ਅਪਣਾਉਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੱਤਾ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਪ੍ਰਾਥਨਾ ਕੀਤੀ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਪਰਚਾਰ ਕੀਤਾ। ਜੇਕਰ ਕੋਈ ਵੀ ਬੇਦਾਰੀ ਕਿਸੇ ਸਮਾਜ਼ ਨੂੰ ਪ੍ਰਭਾਵਿਤ ਕਰਨ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ ਉਹ ਹੈ ਲੋਕ ਪ੍ਰਾਥਨਾ ਨਾਲ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨ।

ੀeਸ ਲਈ ਤੁਹਾਡੇ ਦਿਲ ਵਿੱਚ ਕੋਣ ਹੈ? ਤੁਸੀਂ ਕਿਸ ਲਈ ਪ੍ਰਾਥਨਾ ਕਰ ਰਹੇ ਹੋ?

ਤੁਸੀਂ ਕਿਉਂ ਨਹੀ ਇੱਕ ਸੂਚੀ ਬਣਾਉਂਦੇ ਅਤੇ ਲਗਾਤਾਰ ਉਨ੍ਹਾਂ ਲੋਕਾਂ ਲਈ ਪ੍ਰਾਥਨਾ ਕਰਦੇ ਜਿੰਨਾਂ ਨੂੰ ਤੁਸੀਂ ਜਾਣਦੇ ਹੋ। ਤੁਸੀਂ ਪ੍ਰਾਥਨਾ ਕਰੋ ਕਿ ਕੰਮ ਹੋਣ। ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਕੰਮ ਹੋਣਗੇ। ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਇਹ ਤੁਹਾਨੂੰ ਸ਼ਕਤੀ ਦੇਵੇਗੀ ਅਤੇ ਇਹ ਤੁਹਾਨੂੰ ਦਿਲੇਰੀ ਦੇਵੇਗੀ। ਦੂਸਰਾ ਇਹ ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਦਿਲਾਂ ਨੂੰ ਤਿਆਰ ਕਰੇਗੀ। ਅਤੇ ਤੀਸਰੀ ਗੱਲ ਇਹ ਪਰਮੇਸ਼ਰ ਦੇ ਆਤਮਾ ਦੇ ਕੰਮ ਨੂੰ ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਜੀਵਨਾਂ ਵਿੱਚ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੇਗੀ।

ਪ੍ਰਾਥਨਾ ਪਰਮੇਸ਼ਰ ਦੀ ਯੋਜਨਾਂ ਹੈ। ਲੋਕਾਂ ਲਈ ਪ੍ਰਾਥਨਾ ਕਰੋ।

मत्ती ९:३७-३८

 37येशु ने अपने शिष्‍यों से कहा, “फसल तो बहुत है, परन्‍तु मजदूर थोड़े हैं। 38इसलिए फसल के स्‍वामी से विनती करो कि वह अपनी फसल काटने के लिए मजदूरों को भेजे।”

Book of the Month

Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe.  For all other books…

सेमी टिपित सेवकाई के विषय में

एसटीएम लगभग 50 वर्षों से दुनिया भर में प्रेरणा और सहायता प्रदान कर रहा है। सैमी टिपित  इसके संस्थापक और अध्यक्ष है, वह एक विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता, शिक्षक और सुसमाचार के प्रचारक हैं जो 80 से अधिक देशों में लोगों की सेवा करने और उनकी सहायता करने का अनुभव रखते हैं। सैमी ऐसी सामग्री प्रदान करते  है जो लोगों को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुद्दों से निपटने में मदद करती है। वह विशेष रूप से दुनिया भर के अन्य देशों के लिए सामग्री सुलभ बनाने के बारे में भावुक है। सैमी ने डेबरा “टेक्स” टिपित  से शादी की है, और उनके दो बच्चे और पांच नाती पोते हैं। सैमी टिपित सेवकाई पंजीकृत 501c3 गैर-लाभकारी संगठन है।

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