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एक विजयी के समान दोड़ना

दौड़ जिस में हमें दौड़ना है, धीरज से दौड़ें।

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यहोशू: दौड़ समाप्त

110 वर्ष की उम्र में, यहोशू ने अपनी आँखें बंद की और परमेश्वर की उपस्थिति में प्रवेश किया। वह लंबे समय से परमेश्वर के राज्य में एक वफादार सैनिक था। एक युवा के रूप में वह परमेश्वर के महान जन मूसा के समीप चला । उसने देखा। उसने सीखा । तो उसे नेतृत्व की बागडोर मिली और अपनी पीढ़ी के लिए परमेश्वर का जन बन गया ।

मरने से पहले, उसने अपने द्वारा अनुभव की गई कई विजयों की चाबी प्रदान की। उसने लोगों को परमेश्वर द्वारा की गई महान चीजों को स्मरण रखने के लिए प्रेरित किया। उसने कहा, “इसलिये बहुत हियाव बान्धकर, जो कुछ मूसा की व्यवस्था की पुस्तक में लिखा है उसके पूरा करने में चौकसी करना, उस से न तो दाहिने मुड़ना और न बाएं। ये जो जातियां तुम्हारे बीच रह गई हैं इनके बीच न जाना, और न इनके देवताओं के नामों की चर्चा करना, और न उनकी शपथ खिलाना, और न उनकी उपासना करना, और न उन को दण्डवत करना | सुनो, मैं तो अब सब संसारियों की गति पर जाने वाला हूं, और तुम सब अपने अपने हृदय और मन में जानते हो, कि जितनी भलाई की बातें हमारे परमेश्वर यहोवा ने हमारे विषय में कहीं उन में से एक भी बिना पूरी हुए नहीं रही; वे सब की सब तुम पर घट गई हैं, उन में से एक भी बिना पूरी हुए नहीं रही।”(यहोशू 23: 6,7,14)।

कुछ वर्ष पहले, मैंने अपने जीवन के सबसे बढ़े अवसर और संघर्ष का सामना किया । मैं रियो डी जनेरियो, ब्राजील में दुनिया के सबसे बड़े स्टेडियम में प्रचार करने की तैयारी कर रहा था। मुझे यह बहुत अपर्याप्त लगा। मैंने मित्रों से मेरे लिए प्रार्थना करने को कहा। मेरे एक मित्र ने मुझे एक ई-मेल भेजा जो बहुत उत्साहजनक था। उसने मुझे उन सभी बातों का स्मरण कराया जो परमेश्वर ने अतीत में की थी और वह कितना वफादार रहा हैं । इसके बाद उसने मुझे “पीछे मुड़कर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।” मेरे मित्र की सम्मति सीधे स्वर्ग से थी । यह वही था जो मुझे इस समय चाहिए था। रियो डि जेनेरो में परमेश्वर ने एक बार फिर स्वयं को वफादार साबित किया।

मेरे मित्र ने जो सम्मति दी, वह लगभग उसी के समान थी जो यहोशू ने मरने से पहले इस्राएल की संतान को दी थी । यहोशू ने उन्हें “पीछे मुड़कर आगे बढ़ने के लिए कहा।” उसने उन्हें परमेश्वर द्वारा की गई महान चीज़ों का स्मरण कराया । उसने उन्हें राज्य के प्रति उनकी जिम्मेदारियों का समरण कराया ।

यहोशू ने कई महत्वपूर्ण बिंदु बनाए। पहले उसने इस्राएल की संतान को साहसी बनने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा, “बहुत मजबूत हो।” यहोशू अपने जीवन में डर से निपटा था। वह जानता था कि परमेश्वर के राज्य में विजेता कायर नहीं थे, बल्कि सामान्य पुरुष और महिलाएं थे जो साहसी थे। उन्हें डर के बजाय विश्वास से जीने की आवश्यकता थी । विजेताओं के बिच कायरों के लिए कोई स्थान नहीं है।

दूसरा, उसने उन्हें सावधान रहने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा, ” कुछ मूसा की व्यवस्था की पुस्तक में लिखा है उसके पूरा करने में चौकसी करना,” परमेश्वर के वचन का पालन करना परमेश्वर के लोगों के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी। यह हमेशा रहा है, और हमेशा रहेगा। परमेश्यर विनम्र, पवित्र पुरुषों और महिलाओं की तलाश में हैं जिन्होंने परमेश्वर के वचन का पालन करने में अपना जीवन लगाया है। वे परमेश्वर के राज्य में सच्चे विजेता बन जाते हैं।

यहोशू द्वारा परमेश्वर के लोगों के लिए छोड़ा गया तीसरा शब्द वचनबद्ध रहना था  । सबसे बड़े खतरों में से एक समझौता था। शैतान की भाषा समझौता है, लेकिन सिय्योन की भाषा वायदा है। यहोशू ने उनसे कहा, “ये जो जातियां तुम्हारे बीच रह गई हैं इनके बीच न जाना, और न इनके देवताओं के नामों की चर्चा करना… ” परमेश्वर पुरुषों और महिलाओं का उपयोग करता है वह पूरी दिलोजान से उसका पालन करने के लिए भरोसा कर सकता है।

अंत में, यहोशू ने लोगों को परमेश्वर की वफादारी का स्मरण कराया । उसने उन्हें निश्चित होने के लिए प्रेरित किया। उसने कहा, “तो अब सब संसारियों की गति पर जाने वाला हूं, और तुम सब अपने अपने हृदय और मन में जानते हो, कि जितनी भलाई की बातें हमारे परमेश्वर यहोवा ने हमारे विषय में कहीं उन में से एक भी बिना पूरी हुए नहीं रही; उन में से एक भी बिना पूरी हुए नहीं रही।” यह अंतिम पंक्ति है | परमेश्वर की वफादारी महान है । हमारे लिए स्मरण रखने वाली सबसे बढ़ी बात है परमेश्वर की वफादारी । सच्चा विजेता उसकी वफादारी को जानता है।

यहोशू 23:9-14

9 यहोवा ने तुम्हारे साम्हने से बड़ी बड़ी और बलवन्त जतियां निकाली हैं; और तुम्हारे साम्हने आज के दिन तक कोई ठहर नहीं सका। 10 तुम में से एक मनुष्य हजार मनुष्यों को भगाएगा, क्योंकि तुम्हारा परमेश्वर यहोवा अपने वचन के अनुसार तुम्हारी ओर से लड़ता है। 11 इसलिये अपने परमेश्वर यहोवा से प्रेम रखने की पूरी चौकसी करना। 12 क्योंकि यदि तुम किसी रीति यहोवा से फिरकर इन जातियों के बाकी लोगों से मिलने लगो जो तुम्हारे बीच बचे हुए रहते हैं, और इन से ब्याह शादी करके इनके साथ समधियाना रिश्ता जोड़ो, 13 तो निश्चय जान लो कि आगे को तुम्हारा परमेश्वर यहोवा इन जातियों को तुम्हारे सामहने से नहीं निकालेगा; और ये तुम्हारे लिये जाल और फंदे, और तुम्हारे पांजरों के लिये कोड़े, और तुम्हारी आंखों में कांटे ठहरेगी, और अन्त में तुम इस अच्छी भूमि पर से जो तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने तुम्हें दी है नष्ट हो जाओगे। 14 सुनो, मैं तो अब सब संसारियों की गति पर जाने वाला हूं, और तुम सब अपने अपने हृदय और मन में जानते हो, कि जितनी भलाई की बातें हमारे परमेश्वर यहोवा ने हमारे विषय में कहीं उन में से एक भी बिना पूरी हुए नहीं रही; वे सब की सब तुम पर घट गई हैं, उन में से एक भी बिना पूरी हुए नहीं रही।

Book of the Month

Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe.  For all other books…

सेमी टिपित सेवकाई के विषय में

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