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अपने बच्चे परमेश्वर को देना
बाइबल में एक औरत की अद्भुत कहानी है, जो एक बच्चा चाहती थी,लेकिन यह असंभव लग रहा था। वह परमेश्वर के सामने फूट फूट कर रोती है, और एक बेटा देने के लिए याचना करती है।अंत में, उसने कहा, “और उसने यह मन्नत मानी, कि हे सेनाओं के यहोवा, यदि तू अपनी दासी के दु:ख पर सचमुच दृष्टि करे, और मेरी सुधि ले, और अपनी दासी को भूल न जाए, और अपनी दासी को पुत्र दे, तो मैं उसे उसके जीवन भर के लिये यहोवा को अर्पण करूंगी, और उसके सिर पर छुरा फिरने न पाएगा।”(1 शमूएल 1:11)।
परमेश्वर ने उसे एक बेटा दिया; और उसने अपनी परमेश्वर के प्रति अपनी प्रतिज्ञा पूरी करते हुए कहा, “” यह वही बालक है जिसके लिये मैं ने प्रार्थना की थी; और यहोवा ने मुझे मुंह मांगा वर दिया है। इसी लिये मैं भी उसे यहोवा को अर्पण कर देती हूं; कि यह अपने जीवन भर यहोवा ही का बना रहे। तब उसने वहीं यहोवा को दण्डवत किया॥”(1 शमूएल 1:27-28)।
हन्नाह ने जान लिया कि बच्चे परमेश्वर की ओर से उपहार हैं। जब परमेश्वर ने उसकी प्रार्थना का उत्तर देकर उसे एक बेटा दिया तो उसने वह बेटा परमेश्वर को वापिस लौटा दिया । वह इस बहुत ही सरल लेकिन महत्वपूर्ण सत्य को समझ गई । सारा जीवन परमेश्वर से आता है। वह जीवन देता है, जीवन को सम्भालता है, और जीवन ले लेता है। वह जीवन का एकमात्र सच्चा स्रोत है। यह पहला सत्य है जिसे हमें अपने बच्चों बारे में सीखना चाहिए । यह सच्चाई उनके और हमारे हृदयों में एक निश्चित सुरक्षा पैदा करती है। जब हन्ना इस सत्य को समझ गई तो उसने अपना पुत्र परमेश्वर को लौटा दिया ।
मैनें और मेरी पत्नी ने हमारे दोनों बच्चों के पैदा होने से पहले ही उन्हें प्रभु को दे दिया।जबकि वे अभी अपनी माँ के गर्भ में थे, हमने उन्हें परमेश्वर को समर्पित कर दिया। गर्भधारण से पहले ही हमने उनके लिए प्रार्थना की। जब मेरी और मेरी पत्नी शादी हुई, तो हम हमारे हनीमून के लिए अलबामा खाड़ी तटों पर गये । हमने एक-दूसरे को शादी के उपहार के रूप में बाइबल दी ।हमने अपने हनीमून पर उस बाइबिल को पढ़ा और प्रार्थना की। हमने अपना जीवन और विवाह परमेश्वर को समर्पित किया । हमने उन बच्चों को भी परमेश्वर को सौंप दिया जो परमेश्वर हमें देगा ।
जब हमें पता चला कि मेरी पत्नी टेक्स हमारे बेटे डेव के साथ गर्भवती थी, तो हमने उसके गर्भ पर हाथ रखकर, प्रार्थना की और उसे मसीह को समर्पित किया। हमने अपनी बेटी रेनी के जन्म लेने से पहले भी यही किया। परमेश्वर चाहते हैं कि हम इस ग्रह को उन बच्चों से भर दें जो परमेश्वर से प्रेम करें और उसकी सेवा करें।
शायद आप निराश महसूस करें क्योंकि आपने अपने बच्चों को उनके जन्म लेने से पहले उन्हें परमेश्वर को समर्पित नहीं किया । यह परमेश्वर की कृपा के बारे में अद्भुत बात है। आप इसे अभी कर सकते हो। अभी स्वीकार्य समय है। आज ही वह दिन है। अपने बच्चों को परमेश्वर के आगे समर्पित करने का यही उचित समय है ।
जब मैं अपने बच्चों को परमेश्वर के आगे समर्पित करने की बात करता हूँ तो मैं चर्च में किसी समारोह की बात नहीं करता । हालांकि आप इसे अपने प्रार्थना के गुप्त स्थान यां सभा में भी इसे कर सकते हैं । मैं आपको उत्साहित करता हूँ कि आप अपने बच्चों को परमेश्वर के आगे समर्पित करें वे भले कितने भी बड़े हों ।शायद आप उस समय परमेश्वर को नहीं जानते होंगे यां फिर उन्हें परमेश्वर को समर्पित करने का ज्ञान नहीं होगा । परमेश्वर इसे जानता और समझता है। स्मरण रखें परमेश्वर आपसे और आपके परिवार से प्रेम करता है ।
हमारे बच्चों को परमेश्वर का आगे समर्पित करने का अर्थ यह नहीं है कि वे कभी परमेश्वर से नहीं भटकेंगे । इसका मतलब है कि जब वे भटकेंगे तो वे परमेश्वर के हाथों में रहेंगे और वह उनके हृदयों में काम करेगा । यह बड़ी सुरक्षा होगी जब हम जानते हैं कि वे परमेश्वर के हाथों में हैं । अपने बच्चों को परमेश्वर के आगे समर्पित करें ।
1 शमूएल 1:21 – 28.
21 फिर एल्काना अपने पूरे घराने समेत यहोवा के साम्हने प्रति वर्ष की मेलबलि चढ़ाने और अपनी मन्नत पूरी करने के लिये गया। 22 परन्तु हन्ना अपने पति से यह कहकर घर में रह गई, कि जब बालक का दूध छूट जाएगा तब मैं उसको ले जाऊंगी, कि वह यहोवा को मुंह दिखाए, और वहां सदा बना रहे। 23 उसके पति एलकाना ने उस से कहा, जो तुझे भला लगे वही कर, जब तक तू उसका दूध न छुड़ाए तब तक यहीं ठहरी रह; केवल इतना हो कि यहोवा अपना वचन पूरा करे। इसलिये वह स्त्री वहीं घर पर रह गई और अपने पुत्र के दूध छुटने के समय तक उसको पिलाती रही। 24 जब उसने उसका दूध छुड़ाया तब वह उसको संग ले गई, और तीन बछड़े, और एपा भर आटा, और कुप्पी भर दाखमधु भी ले गई, और उस लड़के को शीलो में यहोवा के भवन में पहुंचा दिया; उस समय वह लड़का ही था। 25 और उन्होंने बछड़ा बलि करके बालक को एली के पास पहुंचा दिया। 26 तब हन्ना ने कहा, हे मेरे प्रभु, तेरे जीवन की शपथ, हे मेरे प्रभु, मैं वही स्त्री हूं जो तेरे पास यहीं खड़ी हो कर यहोवा से प्रार्थना करती थी। 27 यह वही बालक है जिसके लिये मैं ने प्रार्थना की थी; और यहोवा ने मुझे मुंह मांगा वर दिया है। 28 इसी लिये मैं भी उसे यहोवा को अर्पण कर देती हूं; कि यह अपने जीवन भर यहोवा ही का बना रहे। तब उसने वहीं यहोवा को दण्डवत किया॥
Book of the Month
Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe. For all other books…
सेमी टिपित सेवकाई के विषय में
एसटीएम लगभग 50 वर्षों से दुनिया भर में प्रेरणा और सहायता प्रदान कर रहा है। सैमी टिपित इसके संस्थापक और अध्यक्ष है, वह एक विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता, शिक्षक और सुसमाचार के प्रचारक हैं जो 80 से अधिक देशों में लोगों की सेवा करने और उनकी सहायता करने का अनुभव रखते हैं। सैमी ऐसी सामग्री प्रदान करते है जो लोगों को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुद्दों से निपटने में मदद करती है। वह विशेष रूप से दुनिया भर के अन्य देशों के लिए सामग्री सुलभ बनाने के बारे में भावुक है। सैमी ने डेबरा “टेक्स” टिपित से शादी की है, और उनके दो बच्चे और पांच नाती पोते हैं। सैमी टिपित सेवकाई पंजीकृत 501c3 गैर-लाभकारी संगठन है।
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