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दाउद : लोगों को परमेश्वर की उपस्थिति में ले जाना
परमेश्वर ने 1998 में युद्धग्रस्त बुरुंडी में सुसमाचार प्रचार करने के लिए मेरे लिए दरवाजा खोला। उस देश में प्रवेश करना बेहद कठिन था। लेकिन बहुत प्रार्थना के बाद, परमेश्वर ने हस्तक्षेप किया और हम परमेश्वर के प्रेम के संदेश के साथ राष्ट्र में प्रवेश करने में सक्षम थे। सड़क से छह मील नीचे वे एक दूसरे को मार रहे थे, लेकिन युद्धरत गुट स्टेडियम में एक साथ आ गए।
सरकार बहुत प्रभावित हुई, शांति वार्ता के प्रभारी कैबिनेट मंत्री ने एक निजी बैठक के लिए कहा। उस मुलाकात के दौरान, उन्होंने अनुरोध किया कि हम राष्ट्र के प्रत्येक व्यक्ति के लिए सुसमाचार लेकर आएं । उन्होंने कहा, “शांति के लिए यही हमारी एकमात्र आशा है।” परमेश्वर ने उन दिनों में कार्य किया । लोगों में, मसीह के प्रति गहन आस्था और पाप के प्रति संज्ञान पैदा हुआ । हजारों लोग विश्वास में आए। एकमात्र स्पष्टीकरण यह था कि बुरुंडी के लोगों के पास अमेरिकी प्रचारक की यात्रा से कहीं अधिक था। उन्होंने परमेश्वर की आत्मा की दिव्य यात्रा का अनुभव किया।
परमेश्वर के काम के कुछ समय बाद, बारुन्डी में सभाओं का आयोजन करने वाले पास्टर की अगुवाई में रवांडा तक कुछ लोग मिलने के लिए आये ताकि चंगाई सुसमाचार की कुछ सभाओं का आयोजन हो सके । वे बुरुंडी में सभाएं करना चाहते थे, लेकिन उन्हें अनुमति नहीं मिली। इसलिए उन्होंने सलाह के लिए हमारे सहयोगी से संपर्क किया। “आपको इन सभाओं का आयोजन करने की अनुमति कैसे मिली?”
उन्होंने कहा, “हमने प्रार्थना की।”
उन्होंने कहा, “ओह, हाँ; वो तो हम भी करते हैं। लेकिन आप लोगों को सभाओं के लिए सहमति कैसे मिली ? ”
मेरे सहयोगी ने फिर से जवाब दिया, “हमने प्रार्थना की।”
उन्होंने सिर्फ अपना सिर हिलाया और हैरान रह गए।
हम नकल करने वाली पीढ़ी में रहते हैं। कोई व्यक्ति सफलता का अनुभव करता है, और हम उस व्यक्ति की हर बात की नकल करने का प्रयास करते हैं। हमें समझना चाहिए कि परमेश्वर की उपस्थिति की नकल नहीं की जा सकती। हम परमेश्वर में हेरफेर नहीं कर सकते। वह बिल्कुल पवित्र है। दाऊद को तीन बड़ी समस्याओं का पहली बार सामना करना पड़ा था जब वह आर्क ऑफ द टेस्टामेंट को वापस यरूशलेम ले जाना चाहता था।
पलिश्तियों ने सन्दूक को ले जाने के लिए एक नई गाड़ी का निर्माण किया था । शायद दाउद को पता होगा कि उन्होंने क्या किया | बाइबल कहती है, “उन्होंने परमेश्वर के सन्दूक को एक नई गाड़ी पर रखा और उसे अबीनादाब के घर से ले आये, जो पहाड़ी पर था” (2 शमूएल 6: 3)। लेकिन परमेश्वर के सन्दुक में उसकी उपस्थिति मौजूद थी। नकल करने वाले परमेश्वर की उपस्थिति को नहीं ले जा सकते थे | बेदारी नई गाड़ी, नए तरीके या नए विचार के पंख पर नहीं आती है। यह टूटकरकिए पश्चाताप, समर्पण और विश्वास के उन पुराने सिद्धांतों से आती है। यदि हम परमेश्वर की उपस्थिति में परमेश्वर के लोगों का नेतृत्व कर रहे हैं, तो हमें यह समझना चाहिए कि यह एक नई गाड़ी पर नहीं किया जाना चाहिए।
लेकिन दाउद को एक दूसरी समस्या का सामना करना पड़ा। धूम मचाने वाला संगीत और जश्न मनाना परमेश्वर की उपस्थिति को हमारे जीवन में नहीं लेकर आता । पवित्रशास्त्र में कहा गया है, “दाऊद और इस्राएल का पूरा घराना, यहोवा के सामने अपनी सारी शक्ति के साथ, गीतों के साथ और वीणाओं, लयारों, झंझरी और झांझियों के साथ जश्न मना रहा था” (2 शमूएल 6: 5)। आराधना में उनकी कोशिश कुछ निहारने की रही होगी। उन्होंने अपनी पूरी ताकत से परमेश्वर की स्तुति करने का प्रयास किया। लेकिन सच्ची आराधना हमारी मानसिक, भावनात्मक या शारीरिक क्षमताओं में नहीं पाई जाती है। यह एक पवित्र हृदय की सुंदरता में पायी जाती है। हमें अपने अंदर परमेश्वर की आराधना करनी चाहिए। लेकिन हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि यह परमेश्वर को चाहने वाले लोगों के उत्सव का विस्तृत विवरण नहीं है। वह तो विनम्र, पवित्र मन से अपनी आराधना चाहता है।
अंत में यही तो दाउद अपनी आत्मिक संवेदनाओं में लेकर आया । बाइबल कहती है, “जब वे नाकोन के खलिहान के पास आये, तो ऊजा ने आगे बढ़कर परमेश्वर के सन्दूक को पकड़ लिया, क्योंकि बैल ठोकर खा गये थे । उसके अनाधिकृत कार्य के कारण परमेश्वर का कोप उस पर भड़क गया; इसलिए परमेश्वर ने उसे मारा और वह सन्दूक के पास वहीं मर गया ”(2 शमूएल 6: 6, 7)।
यह दाउद के लिए एक कठिन सबक था। लेकिन हमें परमेश्वर के चरित्र में से उसके एक गुण को कभी नहीं भूलना चाहिए: वह पवित्र है। अगर हम उसके लोगों को बेदारी (परमेश्वर की उपस्थिति) में ले जा रहे हैं, तो यह केवल विनम्र, पवित्र हृदयों के द्वारा ही हो सकता है ।
2 शमूएल 6:1-15
1 ( पवित्र सन्दूक का यरूशलेम में पहुंचाया जाना ) फिर दाऊद ने एक और बार इस्राएल में से सब बड़े वीरों को, जो तीस हजार थे, इकट्ठा किया।2 तब दाऊद और जितने लोग उसके संग थे, वे सब उठ कर यहूदा के बाले नाम स्थान से चले, कि परमेश्वर का वह सन्दूक ले आएं, जो करूबों पर विराजने वाले सेनाओं के यहोवा का कहलाता है।3 तब उन्होंने परमेश्वर का सन्दूक एक नई गाड़ी पर चढ़ाकर टीले पर रहने वाले अबीनादाब के घर से निकाला; और अबीनादाब के उज्जा और अहह्मो नाम दो पुत्र उस नई गाड़ी को हांकने लगे।4 और उन्होंने उसको परमेश्वर के सन्दूक समेत टीले पर रहने वाले अबीनादाब के घर से बाहर निकाला; और अहह्मो सन्दूक के आगे आगे चला।5 और दाऊद और इस्राएल का समस्त घराना यहोवा के आगे सनौवर की लकड़ी के बने हुए सब प्रकार के बाजे और वीणा, सारंगियां, डफ, डमरू, झांझ बजाते रहे।6 जब वे नाकोन के खलिहान तक आए, तब उज्जा ने अपना हाथ परमेश्वर के सन्दूक की ओर बढ़ाकर उसे थाम लिया, क्योंकि बैलों ने ठोकर खाई।7 तब यहोवा का कोप उज्जा पर भड़क उठा; और परमेश्वर ने उसके दोष के कारण उसको वहां ऐसा मारा, कि वह वहां परमेश्वर के सन्दूक के पास मर गया।8 तब दाऊद अप्रसन्न हुआ, इसलिये कि यहोवा उज्जा पर टूट पड़ा था; और उसने उस स्थान का नाम पेरेसुज्जा रखा, यह नाम आज के दिन तक वर्तमान है। और उस दिन दाऊद यहोवा से डरकर कहने लगा, यहोवा का सन्दूक मेरे यहां क्योंकर आए?0 इसलिये दाऊद ने यहोवा के सन्दूक को अपने यहां दाऊदपुर में पहुंचाना न चाहा; परन्तु गतवासी ओबेदेदोम के यहां पहुंचाया।11 और यहोवा का सन्दूक गती ओबेदेदोम के घर में तीन महीने रहा; और यहोवा ने ओबेदेदोम और उसके समस्त घराने को आशिष दी।12 तब दाऊद राजा को यह बताया गया, कि यहोवा ने ओबेदेदोम के घराने पर, और जो कुछ उसका है, उस पर भी परमेश्वर के सन्दूक के कारण आशिष दी है। तब दाऊद ने जा कर परमेश्वर के सन्दूक को ओबेदेदोम के घर से दाऊदपुर में आनन्द के साथ पहूंचा दिया।13 जब यहोवा के सन्दूक के उठाने वाले छ: कदम चल चुके, तब दाऊद ने एक बैल और एक पाला पोसा हुआ बछड़ा बलि कराया।14 और दाऊद सनी का एपोद कमर में कसे हुए यहोवा के सम्मुख तन मन से नाचता रहा।15 यों दाऊद और इस्राएल का समस्त घराना यहोवा के सन्दूक को जयजयकार करते और नरसिंगा फूंकते हुए ले चला।
Book of the Month
Sammy Tippit told his fiancée, “I can’t promise we’ll be rich, but life won’t be boring.”
Sammy had no idea what an understatement that would become. Beginning in the bars of Baton Rouge and the nightclubs of Chicago, Tippit has shared the news of life-changing faith in Christ all over the world – including in the middle of a revolution in Romania, the aftermath of genocide in Rwanda, and war in Burundi and the Congo.
Sammy’s lifelong adventure has come at a great price. He’s been cursed, threatened, arrested, deported, and blacklisted. He’s also been personally broken, ravaged with illness, and devastated by grief.
Yet he continues to preach to in stadiums, in open fields, and via satellite technology to hundreds of thousands around the globe. For all other books…
सेमी टिपित सेवकाई के विषय में
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